- महाविद्यालय के अपने कार्यकाल के भ्रष्टाचार के दस्तावेज जलाने के आरोपों से घिरे सेवानिवृत्त प्राचार्य ने पुलिस विभाग में पदस्थ रिश्तेदार को किया आगे?
- पुलिस विभाग में पदस्थ सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य के रिश्तेदार ने दैनिक घटती-घटना के पत्रकार की पुलिस अधीक्षक से की शिकायत
- पत्रकार को भयभीत कर सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य खुद के कारनामों की खबर प्रकाशित होने से चाहते हैं रुकवाना?

-रवि सिंह-
कोरिया,29 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। अग्रणी महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य सेवानिवृत होने के बाद महाविद्यालय में जाकर बिना किसी को जानकारी दिए दस्तावेजों को आग के हवाले किए थे,जिस मामले को लेकर लगातार खबर प्रकाशित हो रही है और कार्यवाही हो इस बात को लेकर शिकायत भी की जा रही है,इसी क्रम में महाविद्यालय के स्टाफ कोरिया पुलिस अधीक्षक के पास शिकायत करने गए हुए थे पर वहां पर किसी गुप्ता जी कर्मचारी द्वारा यह कहकर उन्हें वापस कर दिया गया था कि एसपी साहब नहीं है बिना पेश हुए शिकायत आवक जावक में नहीं ली जाएगी, जिस खबर को दैनिक घटती-घटना ने महाविद्यालय के स्टाफ के बताए अनुसार 28 जुलाई 2025 को प्रकाशित किया था,पर किस कर्मचारी के द्वारा उन्हें मना किया गया था यह नाम स्पष्ट न होने के कारण नाम स्पष्ट रूप से प्रकाशित नहीं किया गया था,क्योंकि महाविद्यालय के स्टाफ भी उसका अच्छे तरीके से नाम नहीं जानते थे और बता नहीं पाए लेकिन सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य द्वारा महाविद्यालय में यह बताया गया था कि कोई उनके रिश्तेदार उस कार्यालय में पदस्थ हैं और इसी आधार पर महाविद्यालय के शिकायत करने पहुंचे कर्मचारियों ने गुप्ता जी बताया और वह प्रकाशित हुआ और जिसमें नाम स्पष्ट फिर भी नहीं लिखा गया था, अखबार में नाम स्पष्ट न होने की वजह से नाम प्रकाशित नहीं किया गया था पर खबर प्रकाशित होने के बाद कार्यालय के एक कर्मचारी राजीव कुमार गुप्ता यह मान बैठे कि यह खबर उनके लिए प्रकाशित हुई थी और उन्होंने इस बात पर मोहर भी लगा दी कि कहीं ना कहीं उन्होंने ही कर्मचारियों को वापस किया था,जब अखबार ने नाम प्रकाशित नहीं किया तो फिर राजीव कुमार गुप्ता उस खबर को खुद से संबंधित समझकर पुलिस अधीक्षक से शिकायत करके क्या साबित करना चाह रहे हैं? क्या वह यही साबित करना चाह रहे हैं कि वह प्रभारी प्राचार्य के रिश्तेदार हैं? और उन्होंने ही शिकायत करने पहुंचे महाविद्यालय के स्टाफ को शिकायत करने से यह कहकर रोका था कि शिकायत आवक-जावक में नहीं ली जाएगी बयान होगा और जो सामने होगा एसपी साहब के…? वैसे कार्यालय में पदस्थ राजीव गुप्ता की कार्यप्रणाली कितनी अच्छी है यह किसी से छुपा नहीं है,यदि गोपनीय तरीके से आईजी साहब भी सभी पुलिसकर्मियों से उनकी जानकारी ले लेंगे तो शायद यह स्पष्ट हो जाएगा की उनकी कार्यप्रणाली कैसी है ? ०2 फरवरी 2024 को उनके ऊपर एक व्यक्ति के द्वारा काफी गंभीर आरोप लगाए गए थे, क्योंकि इनके द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वह कार्य किया गया था,जिसकी जांच आज तक नहीं हो पाई है। वैसे अखबार ने नाम नहीं प्रकाशित किया फिर क्या स्वयं प्रार्थी बनकर पत्रकार को अपनी रिश्तेदारी की खबर प्रकाशित करने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं राजीव गुप्ता? मामले में यह कहना गलत नहीं होगा कि यह पत्रकार को पुलिस का भय दिखाने के उद्देश्य से की गई शिकायत है,और यह शिकायत बैकुंठपुर के शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य के उस मामले से ध्यान भटकाने और पत्रकार को मामले से अलग जाने के लिए भयभीत करने खबर प्रकाशित करने के उद्देश्य से की गई शिकायत है,जिसमें दैनिक घटती-घटना के पत्रकार द्वारा लगातार आवाज बुलंद की जा रही है और जो सेवानिवृत्त होने के छः माह पश्चात महाविद्यालय में बिना अनुमति प्रवेश कर शासकीय दस्तावेजों को जलाने के मामले से जुड़ा मामला है। यह कहना भी शायद गलत नहीं होगा कि अब अपनी गलतियों पर अपने शासकीय दस्तावेज जलाने के किए गए अपराध पर पर्दा डालने के लिए सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य पुलिस विभाग में पदस्थ अपने रिश्तेदार का सहारा ले रहे हैं? उसके माध्यम से वह पत्रकार को एक तरह से धमकाने का प्रयास कर रहे और अपने उस अपराध जो उन्होंने दस्तावेज जलाकर शायद किया है से बचना चाह रहे हैं।
खबर से बौखलाए स.उ.नि. राजीव गुप्ता ने शिकायत पत्र में खुद के लिए समर्थन जुटाने का भी किया प्रयास
खबर से बौखलाए राजीव गुप्ता ने शिकायत पत्र के माध्यम से खुद के लिए समर्थन जुटाने का भी प्रयास किया,राजीव गुप्ता ने शिकायत में लिखा है कि पत्रकार अनन्य लोगों की छवि बिगाड़ने का काम कर रहा है जो कि एक उसका असत्य कथन है, ऐसा कोई भी विषय अब तक नहीं आया जब खबर को लेकर यह साबित हो सका हो कि वह छवि धूमिल करने के उद्देश्य से प्रकाशित खबर है,शिकायतें हुईं लेकिन खबरों के विषय में केवल यही सत्य है कि खबर प्रकाशन के दौरान विषय वही बनते हैं जिनके पास जनता से जुड़ी जिम्मेदारी है या उनका हित उनके हाथों में है,राजीव गुप्ता अपनी शिकायत में अन्य का उल्लेख कर अपनी गलतियों से बचना चाहते हैं और वह एक ऐसा असफल प्रयास कर रहे हैं जिसके अनुसार वह चाहते हैं कि पत्रकार को षड्यंत्रकारी बताया जा सके। वैसे इस विषय में वह स्वयं जानते हैं कि दैनिक घटती-घटना सत्य से परे कुछ प्रकाशित नहीं करता वहीं वह इस विषय में अपनी ख्याति बेहतर रखता है,षड्यंत्र समझौते का इतिहास उसका नहीं रहा जो भी मामला संज्ञान में आया वह प्रकाशित हुआ छिपाया नहीं गया। वैसे पुलिस कार्यवाही का भय दिखाने की कोशिश करने वाले स.उ.नि राजीव गुप्ता शायद नहीं जानते कि खबर लिखना सूत्रों से प्राप्त सूचना के आधार पर खबर लिखना षड्यंत्र नहीं होता षड्यंत्र खबर को रोकना होता है जो दैनिक घटती-घटना नहीं करता।
अपने रुतबे का दुरुपयोग करते हुए एक आदमी को उसकी बच्ची व उसकी पत्नी के सामने किया था बेइज्जत,लेकिन आज तक नहीं हुई कार्यवाही
पुलिस अधीक्षक कार्यालय में कार्य कर रहे स.उ.नि. राजीव कुमार गुप्ता पर एक बार एक व्यक्ति द्वारा यह आरोप लगाया गया था जो लिखित शिकायत स्वरूप में था कि राजीव कुमार गुप्ता द्वारा शासकीय एक आयोजन के दौरान उनका उनके परिवार के सामने छोटे बच्चों सहित पत्नी के सामने सार्वजनिक रूप से राजीव गुप्ता ने पुलिसिया रौब जताते हुए अपमान किया था एक तरह से बेइज्जत किया गया था,तब लिखित शिकायत सौंपकर उक्त व्यक्ति ने राजीव गुप्ता पर कार्यवाही की मांग की थी,बता दें कि आज भी बताया जा रहा है कि मामले में कार्यवाही नहीं हुई है जबकि बयान दर्ज हुआ है। वैसे पुलिस अधीक्षक कार्यालय में कार्यरत राजीव गुप्ता की उक्त शिकायत की कार्यवाही यदि हुई है तो वह सार्वजनिक की जानी चाहिए,मामला वर्ष 2024 का है।
नाम के प्रकाशन बिना सउनि ने कैसे माना की यह उनके लिए है खबर…क्या उन्होंने ही रोका था कॉलेज के कर्मचारियों को शिकायत करने से?
दैनिक घटती-घटना की खबर में कहीं भी नाम का उल्लेख नहीं है,केवल सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य के रिश्तेदार गुप्ता जी नाम का उल्लेख है,केवल गुप्ता जी लिखना वह भी प्राप्त सूचना पर लिखना कहां से अपराध हुआ? यह सोचने वाली बात है,वैसे क्या स.उ.नि. अ राजीव गुप्ता ने ही शिकायत करने पहुंचे कॉलेज के कर्मचारियों को रोकने का प्रयास किया था? उन्हें आवक-जावक शाखा में शिकायत देने से रोका था जिसकी स्वीकारोक्ति वह कर रहे हैं पत्रकार की शिकायत के दौरान। केवल गुप्ता जी लिखना ही किसी के लिए इतनी बड़ी मानसिक प्रताड़ना की वजह बन गई कि वह पत्रकार की जांच करवाने निकल पड़े। वैसे क्या यह एक खीज एक गुस्सा नहीं है राजीव गुप्ता का जो वह केवल इसलिए निकाल रहे हैं क्योंकि उनकी पोल खुल गई है और उनका वह कारनामा उजागर हुआ है जिसमें वह शिकायत करने वालों को कार्यालय में रहने का फायदा उठाकर दिग्भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस मामले में यह भी विचारणीय है कि खबर के अनुसार गुप्ता जी गोपनीय शाखा,क्या इसकी भी राजीव गुप्ता स्वीकारोक्ति प्रदान कर रहे हैं कि वह गोपनीय शाखा में ही काम कर रहे हैं?
क्या रिश्तेदार सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य की कारगुज़ारियों से लोगो का ध्यान भटकाने सउनि राजीव गुप्ता अब पत्रकार को झूठे मामले में उलझाने की फिराक में हैं?
पुलिस अधीक्षक कार्यालय कोरिया में पदस्थ राजीव गुप्ता जो सउनि के द्वारा एक शिकायत पत्र पुलिस अधीक्षक कोरिया को सौंपा गया है जिसमें उन्होंने दैनिक घटती-घटना की खबर का उल्लेख कर पत्रकार की जांच करवाने की मांग की है,मानसिक परेशानी और कई तरह की बात छवि धूमिल होने की बात उन्होंने शिकायत में लिखी है,क्या यह शिकायत सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य महाविद्यालय बैकुंठपुर के द्वारा एक षड्यंत्र के तहत कराई जा रही है जिससे लोगों का ध्यान महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य रहे और फिलहाल सेवानिवृत्त हो चुके प्रभारी प्राचार्य की कारगुज़ारियों से हट सके। राजीव गुप्ता का गुस्सा और खीज साफ नजर आती है शिकायत में और यह एक भय उत्पन्न करने का भी विषय बन रहा है जिसके माध्यम से वह पत्रकार को पुलिस का भय दिखाना चाहते हैं जिससे पत्रकार उनके रिश्तेदार प्रभारी सेवानिवृत हो चुके महाविद्यालय के प्राचार्य की कारगुज़ारियों के प्रकाशन से दूर हट जाए और वह उच्च शिक्षा संस्थान में भ्रष्टाचार के बड़े मामले को दबा सकें।
पत्रकार की क्या करेंगे जांच,क्या प्रकाशित खबरें भी साबित की जाएंगी षड्यंत्र?
दैनिक घटती-घटना की ख्याति केवल यही है कि वह खबरों से समझौता नहीं करता और यही उसकी लोकप्रियता का कारण है,लाभ लोभ प्रलोभन से दूर सत्य आधारित खबर का प्रकाशन ही दैनिक घटती-घटना का प्रयास रहा है और खबरों के लिए उसके असंख्य सूत्र माध्यम बनते हैं,स.उ.नि. राजीव गुप्ता पुलिस अधीक्षक को सौंपे शिकायत में लिखते हैं कि पत्रकार के षड्यंत्र की जांच होनी चाहिए,अब क्या प्रकाशित खबरें भी षड्यंत्र साबित होंगी,दैनिक घटती-घटना ने खबर का प्रकाशन किया है और आगे भी सत्य आधारित खबर का प्रकाशित करता रहेगा,षड्यंत्र का विषय तब कोई विषय पत्रकारिता क्षेत्र में होता है जब कोई समझौता किसी खबर पर करना होता है, दैनिक घटती-घटना समझौते से दूरी बनाकर चलने वाला समाचार-पत्र है इसलिए षडयंत्र शब्द से इसका कोई नाता नहीं यह शायद ऐसी शिकायत करने वाले को विदित नहीं। दैनिक घटती-घटना का एकमात्र उद्देश्य सत्य का प्रकाशन है और इस दौरान वह खबरों से समझौता नहीं करता इसलिए आरोप लगते रहते हैं।
राजीव कुमार गुप्ता के शिकायत से जुड़े सवाल
सवाल: कैसे पता चला कि खबर उनके लिए है?
सवाल: क्या वह सही महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य के रिश्तेदार हैं?
सवाल: क्या वह शिकायत करके यह स्पष्ट करना चाह रहे हैं कि वह ही हैं जिन्होंने महाविद्यालय के स्टाफ को आवक-जावक में शिकायत करने से रोका था?
सवाल: क्या वह पुलिस विभाग में पदस्थ होकर शिकायत के माध्यम से पत्रकार को दबाने का प्रयास कर रहे हैं?
सवाल: क्या शिकायत करके अपने अधिकारी के कार्यालय में बुलाकर पत्रकार को डराने की उनकी मनसा है?
सवाल: जब समाचार में नाम ही नहीं है तो फिर उनकी मानहानि व उनकी छवि कैसे धूमिल हुई?
सवाल: क्या उनके द्वारा की गई शिकायत सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य को बचाने के लिए किया गया आवेदन है जो समाचारों से फंसते नजर आ रहे हैं उन्हें
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