- छत्तीसगढ़ में भीषण बारिश अपने चरम पर,जर्जर भवनों की स्थिति नाजुक
- शासकीय भवनों में नहीं होती छत की सफाई,इसलिए छत होते हैं जर्जर
- आंगनवाड़ी,स्कूल समेत कई शासकीय भवनों की छतों में सीपेज और दरारें
- भीषण बारिश के मद्देनजर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता
- राजस्थान के झालावाड़ में दर्दनाक हादसा, स्कूल की छत ढहने से चार छात्रों की मौत,कई घायल
-रवि सिंह-
कोरिया,26 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। राजस्थान के झालावाड़ जिले के एक विद्यालय से बेहद दुखद खबर सामने आ रही है, जहां एक विद्यालय की छत भरभराकर गिर गई, जब विद्यालय संचालित हो रहा था। अनेकों छात्र इसके चपेट में आ गए,जानकारी प्राप्त होने तक चार छात्रों की मौके पर ही दर्दनाक मृत्यु हो गई और अनेक छात्र गंभीर रूप से घायल हैं। वहीं कई शिक्षकों को भी गंभीर चोटें आईं। प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि विद्यालय का भवन जर्जर हो चुका था और छत में सीलन और दरारें पड़ चुकी थी। इस वर्ष भीषण मानसूनी बारिश ने छत को और कमजोर कर दिया, जिससे वह भरभराकर गिर गया और यह दुखद हादसा घटित हो गया। इस वर्ष वर्षा ऋतु के प्रारंभ से ही पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में भी भारी बारिश लगातार हो रही है, और प्रशासन द्वारा समय-समय पर चेतावनी भी जारी की जाती रही है। पूरे प्रदेश में सभी नदी नाले अपने उफान पर हैं, और रोजाना कई घटनाएं सामने आ रहे हैं। जिस प्रकार से बारिश के कारण जर्जर छत गिरने की घटना से कई छात्र और शिक्षक हताहत हुए, इसी तरह छत्तीसगढ़ की स्कूलों में और शासकीय भवनों में ऐसी दुर्घटना ना हो जाए,इसलिए अभी से ही तत्परता के साथ ध्यान देना होगा। क्योंकि अधिकांश शासकीय भवनों की स्थिति जर्जर से अति जर्जर है और इनमें समस्त क्रियाकलाप संचालित हो रहे हैं। प्रशासन को इस ओर विशेष ध्यान देना अति आवश्यक है, की लापरवाही के कारण कोई ऐसी दुर्घटना ना हो जिससे जान माल का नुकसान हो जाए।
कोरिया जिले में जर्जर भवनों को लेकर सत्र आरंभ के पूर्व ही जारी किया जा चुका है आदेश,परिपालन आज तक नहीं…
कोरिया जिले के जिला परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा बैकुंठपुर में विकासखंड शिक्षा अधिकारी,विकासखंड स्त्रोत समन्वयक,समस्त प्रधान पाठक और प्राचार्य के लिए जर्जर भवनों में कक्षा संचालित न करने संबंधी आदेश सत्र आरंभ होने के पूर्व ही जारी कर दिया है। और यह भी स्पष्ट किया है कि बरसात में क्षतिग्रस्त और जर्जर भवनों में किसी भी सूरत में किसी प्रकार का कार्य संपादित ना किया जाए। तथा समस्त विद्यालय भवन के उचित रखरखाव सुनिश्चित किया जावे। परंतु इस आदेश का परिपालन जमीन स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा है,क्योंकि अभी भी कई सारे विद्यालय और कक्षाएं ऐसी भवनों में और ऐसे कमरों में संचालित हैं,जो सीलन युक्त हैं या जिनके दीवारों में दरारें हैं,अन्यथा जिनकी छतों से जल का रिसाव हो रहा है। प्रशासनिक स्तर पर इस आदेश का परिपालन कराना अत्यंत आवश्यक है।
शासकीय भवनों में नहीं होती छत की सफाई,इसलिए छत होते हैं जर्जर
प्रदेश में शासकीय भवनों के तथा आंगनबाड़ी और विद्यालय भवनों के निर्माण के बाद सबसे ज्यादा आशंका दीवारों के बजाय छतों के क्षतिग्रस्त होने की होती है। इसका प्रमुख कारण यह है कि जिस प्रकार हम स्वनिर्मित मकान में प्रतिवर्ष छत की सफाई करते हैं,ताकि कचरा और जल का जमाव छत पर न होने पाए और छत पर काई का निर्माण ना हो, इस प्रकार की सफाई आंगनबाड़ी और स्कूल भवनों के छतों की कभी नहीं होती। ना इस और किसी का ध्यान जाता है, और यही कारण है कि शासकीय भवनों की छतों पर धीरे-धीरे कचरा एकत्रित हो जाता है, और बरसात के मौसम में जल जमाव होने के कारण छतें क्षतिग्रस्त होने लगते हैं। छतों में जल जमाव के कारण बनने वाली काई भी सीमेंट को एक तरह से नष्ट करने का कार्य करती है,और छतें कमजोर पड़ने लगते हैं। अनवरत यही स्थिति रहने पर ऐसी छतें कभी भी भरभराकर गिर जाती हैं, और हादसे की परिणति के रूप में सामने आता है। इससे बचने के लिए एकमात्र उपाय है छतों का रखरखाव, किसी भी प्रकार से जल का जमाव और काई का निर्माण छतों पर न होने पाए। इसके लिए प्रशासन को विशेष ध्यान देने की और आवश्यक दिशा निर्देश जारी करने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी कर दुर्घटना के कारित होने के पूर्व उसे रोकने के पुख्ता इंतजाम किए जा सके।
आंगनवाड़ी,स्कूल समेत कई शासकीय भवनों की छतों में सीपेज और दरारें,कई स्थानों पर छतों में उग आए हैं पेड़ और झाडि़यां
बात छत्तीसगढ़ की और स्थानीय स्तर की जाए तो प्रायः यह देखा गया है कि कई सारे शासकीय भवनों के छतों और दीवारों पर सीपेज और दरार स्पष्ट दिखाई देते हैं। आलम तो यह है कि कई स्थानों पर आपको छतों में और दीवार की दरारों में वृक्ष और झाडि़यां भी उगी हुई दिखाई दे जाएंगी, जबकि वह भवन जिस कार्य के लिए निर्मित हुआ है, वह कार्य भी अनवरत रूप से वहां संचालित है। बावजूद इसके इन झाडि़यां और उगे हुए वृक्षों की सफाई और छतों से सीलन को दूर करने के कोई उपाय स्थानीय संचालन कर्ता द्वारा नहीं किए जा रहे हैं, जो की भीषण दुर्घटना को आमंत्रण दे रहे हैं। यदि समय रहते इस ओर समुचित ध्यान नहीं दिया गया, तो कभी भी आसपास ही राजस्थान के झालावाड़ की तरह हादसा अपने आसपास ही घटित होते हुए दिख जाएगा। इसके लिए जरूरी है कि ऐसे हादसों से सबक लेकर तत्काल उचित कार्यवाही करते हुए ऐसे स्थान और भवनों से व्यक्तियों और छात्रों को सुरक्षित किया जाए।
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