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बैकुंठपुर@अग्रणी महाविद्यालय बैकुंठपुर के सेवानिवृत्ति प्रभारी प्राचार्य ने क्यों नहीं दिया वर्तमान प्राचार्य को 6 महीने बाद भी पूरा प्रभार और सेवानिवृत होने के बाद क्यों जलाया दस्तावेज?

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-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,25 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के अग्रणी महाविद्यालय शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय इस समय सुर्खियों में है और वह सुर्खी इसलिए है क्योंकि वहां के प्रभारी प्राचार्य जो लगभग 30 साल से अधिक वहां पर सेवा दिए होंगे और सेवानिवृत होने के बाद उन्होंने 6 महीने तक प्रभार नहीं दिया, ऊपर से महाविद्यालय के दो कक्ष में उन्होंने कब्जा करके बैठ रहे और प्रयास करते रहे की उसे महाविद्यालय का प्रभारी प्राचार्य उनकी पत्नी बन जाए पर ऐसा हुआ नहीं और 6 महीने के लिए जिन्हें प्राचार्य बनाया गया था उन्हें उन्होंने प्रभार दिया नहीं, 6 महीने के बाद वहां के प्रभारी प्राचार्य बदल दिए गए फिर भी अभी तक प्रभार महाविद्यालय का मिला नहीं और इस बीच प्रभारी प्राचार्य जोशी राम कवर ने दो बार पत्र लिखा और प्रभार देने की मांग की उसके बाद भी सेवानिवृत्ति प्राचार्य ने प्रभार नहीं दिया, यहां तक की आयुक्त उच्च शिक्षा संचनालय से भी पत्र आया और तीन दिवस के भीतर प्रभार देने की बात कही गई उसका भी सेवानिवृत्ति प्राचार्य ने आदेश का उल्लंघन किया और 6 महीने तक उन्होंने प्रभाव नहीं दिया और उसके बाद जो दो कमरे इन्होंने अपने पास रखे थे एक कमरे का ताला खोला और उसके दस्तावेज उन्होंने जाकर जला दिए, इसके बाद से उनके भ्रष्टाचार को लेकर आरोप लगने लगे और यह भी कहा जा रहा है कि इन्होंने कानून का उल्लंघन किया है और अपराधिकृत किया है सेवानिवृत होने के बाद जहां कोई भी प्राचार्य अपने कामों से पृथक हो जाता है और उसका उस विद्यालय या महाविद्यालय में प्रवेश वर्जित हो जाता है और दस्तावेजों के साथ उनका कोई मतलब नहीं रहता है ऐसे में 6 महीने के बाद उनका दस्तावेजों को आकर महाविद्यालय में अनधिकृत तरीके से जालना कहीं ना कहीं अपराध की श्रेणी में माना जा रहा है पर क्या इस मामले में जांच करके उनके ऊपर अपराध दर्ज किया जाएगा वैसे इस मामले में अपराध दर्ज करने की मांग भी अब उठने लगी है।
आखिर महाविद्यालय के दो कमरे में ऐसा क्या था जिसका प्रभार देना नहीं चाह रहे,6 महीने तक इंतजार कर रहे थे?
अखिलेश चंद्र गुप्ता ने सेवानिवृत होने उपरांत महाविद्यालय के दो कक्षों को सील कर दिया था और उसका प्रभार वह देने से बचते रहे,उन्होंने खुद की सेवानिवृत्ति उपरांत जिन्हें प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी मिली उन्हें उनके सेवानिवृत्ति तक प्रभार नहीं दिया ऐसा कई शासकीय पत्रों से ज्ञात होता है जिसमें उन्हें प्रभार देने आदेशित किया गया था और पेंशन प्रकरण उनका रोकने की चेतावनी भी दी गई थी, उन्होंने तब भी प्रभार नहीं दिया और 6 माह के भीतर प्रभारी प्राचार्य डॉक्टर जोशी राम कंवर भी सेवानिवृत्त हो गए,उन्होंने तब दस्तावेज जलाने की कोशिश भी नहीं की,उन्होंने ऐसा तब किया जब प्रभार उनके साथ लंबा कार्यकाल बिताए व्यक्ति को मिला और उनके प्रभार में आते ही उन्होंने दस्तावेजों को अनाधिकृत रूप से महाविद्यालय में प्रवेश कर जला दिया। वैसे सवाल इस मामले में दो हैं,ऐसा क्या था दस्तावेजों में जिनका वह प्रभार नहीं देना चाहते थे वहीं उन्होंने तब क्यों दस्तावेज जलाया या 6 माह क्यों इंतजार किया जिससे उनके अभिन्न साथी को प्रभार मिलते ही दस्तावेज जला डाला,जांच होनी चाहिए कार्यवाही तय होनी चाहिए,सभी की भूमिका की जांच होनी चाहिए वर्तमान पूर्व सभी प्रभारी प्राचार्यों की यह लोगों की मांग है।
जहां-जहां भी इनके पास प्रभारी प्राचार्य का पद रहा वहां-वहां इन्होंने खरीदी करके भ्रष्टाचार किया जो जांच का विषय है…
अखिलेश चंद्र गुप्ता जो प्रभारी प्राचार्य पद पर रहते हुए सेवा निवृत्त हुए अग्रणी महाविद्यालय बैकुंठपुर से का सेवाकाल काफी रोचक और काफी सुर्खियों वाला रहा है,सेवाकाल के आरंभ से ही वह प्रभारी प्राचार्य के पद पर बने रहते आए और कम समय ही उन्हें सहायक प्राध्यापक बतौर काम करने का मौका मिला,इन्हें पूर्व में कई महाविद्यालयों के प्रभारी प्राचार्य का दायित्व भी मिला जब जब नए महाविद्यालय स्थापित हुए,बताया जा रहा है कि जहां जहां इन्हें जिम्मेदारी मिली वहां वहां इन्होंने भ्रष्टाचार करने में जरा भी विलंब नहीं किया।।सूत्रों का दावा है कि इनके पूर्व के पूरे कार्यकाल की यदि जांच की जाए तो बड़े भ्रष्टाचार का उजागर होना तय है और यह जांच की जाए यह मांग भी है लोगों की,प्रभारी प्राचार्य पद के साथ के इनके भ्रष्टाचार के पीछे इनका स्थानीय होना सहायक बना क्योंकि स्थानीय लोगों को यह आभास ही नहीं था कि स्थानीय व्यक्ति उच्च शिक्षा संस्थान जो क्षेत्र के बच्चों के भविष्य का आधार है में बैठकर भ्रष्टाचार करेगा और स्थानीय होकर भी स्थानीय संस्था से अपना ही घर भरेगा।
क्या सेवानिवृत होने के बाद प्रभारी प्राचार्य अनाधिकृत व्यक्ति नहीं हुए,क्या महाविद्यालय में इसके बाद जाकर दस्तावेज जलाना जुर्म नहीं?
अग्रणी महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य पद से सेवानिवृत हुए अखिलेश चंद्र गुप्ता सेवानिवृत होने उपरांत वह भी 6 माह उपरांत महाविद्यालय जाते हैं वह भी तब जाते हैं जब तक वहां दूसरे प्रभारी प्राचार्य को जिम्मेदारी मिल चुकी होती है और इन 6 माह के बीच एक अन्य प्रभारी प्राचार्य सेवानिवृत हो चुके थे,वह महाविद्यालय जाते हैं दो कक्षों का ताला खोलते हैं और कुछ दस्तावेजों को आग के हवाले करते हैं,क्या यह जायज है,क्या यह जुर्म नहीं, सेवानिवृत्त होने उपरांत 6 माह उपरांत ऐसा करना क्या सही, वहीं क्या उनका इस तरह महाविद्यालय जाना अनाधिकृत प्रवेश का मामला नहीं,यदि ऐसा नहीं है तो फिर अखिलेश चंद्र गुप्ता निर्दोष हैं और उन्हें माफ किया जाना उचित होगा,पूरा मामला केवल अनाधिकृत प्रवेश और दस्तावेजों को तब जलाना जब कोई 6 माह पूर्व सेवानिवृत्त हो चुका है यह अपराध और जुर्म है यह आम लोगों की धारणा है जिसे गलत ठहराने के लिए अखिलेश चंद्र गुप्ता के कृत्य को सही बतलाना होगा।
पोड़ी बचरा में जमकर हुई खरीदी बैकुंठपुर भी नहीं रहा पीछे…
अग्रणी महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य कार्यकाल के दौरान अखिलेश चंद्र गुप्ता ने जहां अग्रणी महाविद्यालय में जमकर खरीदी की और भ्रष्टाचार मचाया वहीं उन्होंने जिले के पोड़ी बचरा महाविद्यालय में भी जमकर खरीदी की और कहीं न कहीं वहां भी भ्रष्टाचार किया यह तय है, सूत्रों के अनुसार पोड़ी बचरा महाविद्यालय में अखिलेश चंद्र गुप्ता ने अपनी पत्नी को प्रभारी प्राचार्य नियुक्त इसीलिए किया जिससे जमकर वह खरीदी कर सकें और भ्रष्टाचार मचा सकें।
आय से अधिक अर्जित की है संपत्ति,होनी चाहिए जांच
अखिलेश चंद्र गुप्ता ने अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है, दैनिक घटती घटना को इनकी संपत्तियों की जो सूची प्राप्त हुई है वह देखकर यह कहना गलत नहीं होगा की इन्होंने भ्रष्टाचार के बल पर बड़ी इमारत संपत्तियों की खड़ी की है, स्वयं,पत्नी सहित बच्चे के नाम पर जहां अचल संपत्ति इन्होंने अर्जित की है वहीं इन्होंने बैंक खाते में भी अपार धन संचित किया है, इन्होंने संपत्ति अर्जित करने के दौरान क्या अनुमति विभागीय प्राप्त की है, क्या इन्होंने सूचना विभाग को दी है और क्या क्रय की गई संपत्ति आय के दायरे में है यह जांच का विषय है जिसकी जांच होनी चाहिए और इस मामले में ईओडलू से जांच कराई जानी चाहिए।
सेवानिवृत्त होने से पहले जमकर की खरीदी क्या यह रिटायरमेंट प्लान था?
शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव महाविद्यालय बैकुंठपुर के प्रभारी प्राचार्य रहे अखिलेश चंद्र गुप्ता ने सेवानिवृत्ति से पूर्व महाविद्यालय में जमकर खरीदी की थी,उन्होंने जहां अग्रणी महाविद्यालय के नाते बैकुंठपुर के महाविद्यालय में खरीदी की वहीं उन्होंने अपनी पत्नी को जिले के पोड़ी बचरा का प्रभारी प्राचार्य बनवाया और वहां भी जमकर खरीदी की, सेवानिवृत्ति से पूर्व की लंबी खरीदी क्या उनका रिटायरमेंट प्लान था यह भी सवाल खड़ा हो रहा है,वैसे लोगों का मानना है कि अग्रणी महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य ने सेवानिवृत्ति से पूर्व अपना रिटायरमेंट प्लान करने के हिसाब से जमकर खरीदी की है और उन्होंने इस कड़ी में अपनी पत्नी के उस महाविद्यालय में भी खरीदी की है जिसमें उन्हें उन्हें प्रभारी प्राचार्य बनाए रखा है।
क्या लंबा कार्यकाल होने की वजह से इन्होंने महाविद्यालय में बेहतर शिक्षा देने की आड़ में अकूत संपत्ति अर्जित की?
बैकुंठपुर के अग्रणी महाविद्यालय रामानुज प्रताप सिंहदेव महाविद्यालय में प्राचार्य पद की जिम्मेदारी सबसे ज्यादा समय तक बैकुंठपुर के ही निवासी और महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक रहे अखिलेश चंद्र गुप्ता ने निभाया था,उनका प्रभारी प्राचार्य बतौर कार्यकाल सबसे लंबा था यह कहें कि अधिकाशं समय अपने कार्यकाल के अखिलेश चंद्र गुप्ता ही प्रभारी प्राचार्य बने रहे तो अतिशयोक्ति नहीं होगी,वैसे क्या उनका लंबा कार्यकाल ही उनके लिए अकूत संपत्ति अर्जित करने का माध्यम बनी और उन्होंने बेहतर उच्च शिक्षा देने के नाम पर जमकर भ्रष्टाचार किया और संपत्ति अपने लिए अर्जित की। दैनिक घटती-घटना को जो जानकारी दस्तावेज स्वरूप अखिलेश चंद्र गुप्ता उनकी पत्नी और बच्चे के संपत्ति मामले की मिले हैं वह यह बतलाने काफी हैं कि संपत्ति मामले में किस तरह अखिलेश चंद्र गुप्ता की संपत्ति लगातार बढ़ती रही और महाविद्यालय की सुविधाएं छात्र सुविधाएं घटती रहीं।
खरीदे गए सामान 1 साल में ही खराब हो गए और स्क्रैप यानी कि कबाड़ में गिनती हुई…ऐसी कौन सी गुणवत्ता विहीन खरीदी की थी कि 1 साल में ही सामान खराब हो गए?
अखिलेश चंद्र गुप्ता के कार्यकाल की महाविद्यालय की खरीदियां जांच का विषय हैं, सूत्रों के अनुसार खरीदी गई सामग्रियां जो महाविद्यालय के लिए और छात्रों के लिए उपयोगी सामग्रियां होनी चाहिए थीं वह एक वर्ष में ही खराब हो गईं और उन्हें स्क्रैप या राइट ऑफ किया गया कबाड़ में डाला गया,सवाल अब यह उठता है कि ऐसी कैसी खरीदी हुई थी जो लंबे समय तक उपयोगी नहीं रहीं और उन्हें राइट ऑफ करना पड़ा,क्या गुणवत्ता विहीन सामग्री खरीदने के कारण ऐसा हुआ क्या ऐसा केवल अपनी जेब भरने के लिए किया गया। कुल मिलाकर जांच से पूरे मामले की पोल खुल सकेगी ऐसा माना जा रहा है और जांच की मांग हो रही है और उच्च शिक्षा संस्थान के इस भ्रष्टाचार को किसी भी हाल में उजागर कर दोषी पर कार्यवाही की मांग हो रही है।
क्या खरीदी आगे भी जारी रहे इसलिए अपनी पत्नी को अग्रणी महाविद्यालय का प्रभारी प्राचार्य बनाना चाह रहे थे?
बताया जा रहा है कि प्रभारी प्राचार्य पद से सेवानिवृत्ति से पूर्व और बाद में अखिलेश चंद्र गुप्ता इस फिराक और प्रायस में थे कि किसी तरह अग्रणी महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य का दायित्व उनकी पत्नी जो सहायक प्राध्यापक हैं और पोड़ी बचरा में प्रभारी प्राचार्य हैं को मिल सके,ऐसा उनका प्रयास इसलिए था जो बताया जा रहा है जिससे एक तरफ उन्हें उनके कार्यकाल के भ्रष्टाचार को मिटाने अवसर मिल सके और आगे भी उनकी पत्नी के कार्यकाल तक उन्हें और भी भ्रष्टाचार का मौका मिल सके। अपने प्रयासों में जब वह असफल हुए तब उन्होंने वर्तमान प्रभारी प्राचार्य के कार्यकाल को उत्तम माना और उन्होंने दस्तावेजों को आग के हवाले किया जिसके पीछे उनके वर्तमान प्रभारी प्राचार्य से लंबे व्यक्तिगत संबंध वजह हैं ऐसा माना जा रहा है,क्योंकि पूर्व प्रभारी प्राचार्य डॉक्टर जोशी राम कंवर के कार्यकाल में वह ऐसी जुर्रत नहीं कर सके।
डॉक्टर जोशी राम कंवर सेवानिवृत हो गए पर अपने 6 महीना के कार्यकाल में पूर्व प्रभारी प्राचार्य अखिलेश चंद्र गुप्ता से प्रभार नहीं ले पाये
बता दे कि उच्च शिक्षा संस्थानों में भ्रष्टाचार का मामला कम देखने को मिलता है वहीं माना जाता है कि अध्ययनरत छात्र छात्राओं का ज्ञान संबंध का दबाव इसके पीछे होता है उनका संगठित व्यक्तित्व इसके पीछे का कारण होता है जिसके कारण उच्च शिक्षा संस्थानों में भ्रष्टाचार के मामले कम देखने को मिलते हैं क्योंकि छात्रों का एक तरह से इस मामले में निगरानी होता है,वहीं जन भागीदारी समितियां भी इनकी निगरानी करती हैं और कुल मिलाकर भ्रष्टाचार का यहां मौका कम मिल पाता है ऐसा माना जाता है,लेकिन इसके उलट कोरिया जिले के उच्च शिक्षा संस्थान जिले के अग्रणी महाविद्यालय की बात यदि की जाए तो हाल फिलहाल में यह बातें यह ख़बरें सामने आ रही हैं कि कई दशकों तक जिले के अग्रणी महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य रहे अखिलेश चंद्र गुप्ता ने अग्रणी महाविद्यालय सहित कई महाविद्यालयों में जमकर भ्रष्टाचार किया है और वह सेवानिवृत्त होने के बाद भी नहीं रुके और अपनी पत्नी जो कि प्रभारी प्राचार्य हैं एक महाविद्यालय की वहां भी उनके माध्यम से भ्रष्टाचार का खेल खेला गया है और वहां भी सुविधाओं के नाम पर दोनों ने अपनी जेब भरने का काम किया है। कोरिया जिले का रामानुज प्रताप सिंहदेव शासकीय महाविद्यालय इस समय सुर्खियों में है, महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य रहे और सेवानिवृत्त हो चुके अखिलेश चंद्र गुप्ता इन सुर्खियों की वजह हैं जिन्होंने सेवानिवृत्त होने के कई महीने बाद महाविद्यालय पहुंचकर महाविद्यालय के दस्तावेज कक्ष का जहां ताला खोला और उसके बाद उनके द्वारा दस्तावेजों को आग के हवाले किया गया। यह सबकुछ उनके द्वारा तब किया गया जब वह सेवानिवृत्त हो चुके थे और जब महाविद्यालय के प्राचार्य पद पर अन्य को प्रभार मिल चुका था। जो दस्तावेज जलाए गए वह सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य अखिलेश चंद्र गुप्ता के कार्यकाल की पोल पट्टी उनके भ्रष्टाचार को उजागर करने में कारगर साबित हो सकते थे इसलिए उनके द्वारा उसे जलाया गया ऐसा माना जा रहा है, वैसे दैनिक घटती घटना को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जो की पुख्ता जानकारी मिली है उसके अनुसार अखिलेश चंद्र गुप्ता जो आरंभ से ही महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य रहते चले आए हैं जब जनवरी 2025 में सेवानिवृत्त हुए तब महाविद्यालय के ही सहायक प्राध्यापक डॉक्टर जोशी राम कंवर को महाविद्यालय का प्रभार वरिष्ठता के आधार पर प्राप्त हुआ वहीं जनवरी 2025 से ही डॉक्टर जोशी राम कंवर महाविद्यालय के प्रभार के लिए सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य अखिलेश चंद्र गुप्ता से प्रभार लेने प्रयास करते रहे जो उन्हें जब मिलता नहीं समझ आया, तब उन्होंने उच्च कार्यालय को इस विषय से अवगत कराया जिसके बाद उच्च कार्यालय के द्वारा दो बार प्रभार दिए जाने संबंधी पत्र अखिलेश चंद्र गुप्ता को प्रेषित किया गया जिसमें एक पत्र में 7 दिवस की मोहलत प्रदान की गई और बाद में जब फिर भी अखिलेश चंद्र गुप्ता ने प्रभार नहीं सौंपा पुनः जो पत्र आया उसमें पेंशन प्रकरण में रोक लगाने की चेतावनी देकर तीन दिवस में प्रभार प्रदान करने की बात कही गई। जनवरी माह से माह जून तक प्रभारी प्राचार्य का दायित्व निभा रहे डॉक्टर जोशी राम कंवर सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य अखिलेश चंद्र गुप्ता से संपूर्ण प्रभार नहीं प्राप्त कर सके और वह जून 2025 में सेवानिवृत्त हो गए वहीं इस दौरान संभागीय कार्यालय से भी अधिकारी आए और उन्हें भी प्रभार दिलाने में सफलता नहीं मिल सकी और सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य अखिलेश चंद्र गुप्ता जिन्होंने दो कक्षों में ताला मार रखा के द्वारा नए प्रभारी प्राचार्य बनाए गए एम सी हिमधर के कार्यकाल में महाविद्यालय पहुंचकर दो बंद कक्षों का ताला खोला गया और उनमें रखे दस्तावेजों को उनके द्वारा आग के हवाले किया गया। कुल मिलाकर यह कहना कि सेवानिवृत्त होने उपरांत सहायक प्राध्यापक से प्रभारी प्राचार्य बनाए गए डॉक्टर जोशी राम कंवर के लगभग 6 माह के कार्यकाल में सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य अखिलेश चंद्र गुप्ता अपने कार्यालय के भ्रष्टाचार को मिटा पाने में असफल रहे और उन्हें मौका नहीं मिला इसलिए उन्होंने 6 माह तक प्रभार प्रदान नहीं किया वहीं जब डॉक्टर जोशी राम कंवर सेवानिवृत्त हुए उन्हें मौका मिला और नए प्रभारी प्राचार्य के कार्यकाल में उन्होंने अपना भ्रष्टाचार मिटाना सुनिश्चित किया और दस्तावेजों को आग के हवाले कर दिया।


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