Breaking News

कोरिया@शासकीय स्कूल का प्राचार्य क्या अपने निजी स्कूल के लिए भी खुलेआम समय देने मुक्त है?

Share

कोरिया,24 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। किसी व्यक्ति के पास एक ही जिम्मेदारी रहे तो वह बेहतर कार्य कर सकेगा और वह अपना अधिकतम उस कार्य के प्रति समर्पण दे सकेगा ऐसा कई मामलों में खासकर कामकाज क्षेत्र में माना जाता है और निजी क्षेत्रों में निजी उपक्रम इसका बेहतर पालन भी करते हैं लेकिन शासकीय क्षेत्रों में ऐसा देखने को मिल रहा है कि एक व्यक्ति एकसाथ दो जिम्मेदारी निभा रहा है जिसमें एक वह घर के एक संस्थान की जिम्मेदारी निभा रहा है दूसरी तरह वह उसी तरह की जिम्मेदारी शासकीय रूप से शासकीय विभाग में निभा रहा है। मामला कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम रनई से जुड़ा हुआ है जहां स्थित एक उच्चतर माध्यमिक स्कूल के प्राचार्य एक तरफ शासकीय स्कूल के लिए काम कर रहे हैं प्रभारी प्राचार्य बनकर और दूसरी तरफ वह निजी अपने ही घर के स्कूल के संचालन के लिए भी समय निकाल रहे हैं और वह कितने तनाव में रहते होंगे इस दोहरी जिम्मेदारी के बीच समझा जा सकता है,वह कहीं न कहीं एक निजी और एक शासकीय स्कूल की जिम्मेदारी निभाते हुए थकान महसूस करते होंगे यह समझा जा सकता है क्योंकि मामला मानसिक और शारीरिक श्रम से जुड़ा हुआ है। आज जब सरकार शासकीय शिक्षा व्यवस्था की बेहतरी की बात करने निकली और वह ऐसा बता रही है कि ऐसा हो रहा है ऐसे में एक प्रभारी प्राचार्य का निजी शिक्षण संस्थान के लिए समय देना संचालन करना कितना सही है यह समझा जा सकता है।वैसे प्रभारी प्राचार्य उच्चतर माध्यमिक स्कूल रनई घर के निजी स्कूल के लिए जब पुस्तकों का उठाव करने संभाग के कार्यालय पहुंचे तब किसी ने उनकी तस्वीर खींच ली और उसे दैनिक घटती घटना को भेजकर यह प्रश्न किया कि एक प्रभारी शासकीय स्कूल का प्राचार्य किस तरह अपने घर के निजी स्कूल के लिए समय निकाल पा रहा है और वह कितना मानसिक रूप से परेशान हो रहा है जिस परेशानी से उसे निजात दिलाए जाने की जरूरत है।
प्रभारी प्राचार्य पद से हटाए जाने के बाद ही निजी स्कूल संचालन के लिए नहीं मिलेगा समय ऐसा कहना है लोगों का
बताया जाता है कि रनई उच्चतर माध्यमिक स्कूल के प्रभारी प्राचार्य को प्राचार्य प्रभार से हटाए जाने के बाद ही उनके घर के निजी स्कूल संचालन के लिए उनके पास समय का आभाव हो सकेगा और वह पूरा समय शासकीय स्कूल में दे सकेंगे,लोगों का कहना है कि प्रभारी प्राचार्य होने का रौब और विभिन्न कार्यों के बहाने उनको स्कूल से कभी भी जाने की आजादी ही उनकी मनमानी का कारण है और वह एकसाथ दो काम कर रहे हैं,किसी अन्य के प्राचार्य बनाए जाने पर उनका स्कूल समय शासकीय स्कूल के लिए पूरा मिल सकेगा उनके ऊपर एक नियंत्रण होगा ऐसा लोगों का कहना है।


Share

Check Also

कोरिया@ अगर जुलूस ही न्याय है तो अदालतों की जरूरत क्या?

Share जब भीड़ ताली बजाए और पुलिस जुलूस निकाले — तब संविधान चुप क्यों हो …

Leave a Reply