- पैरावट के नीचे छुपा कर रखा गया था खंभा पुलिस व वन विभाग की टीम ने किया बरामद…मामले में एफआईआर अभी तक नहीं हुई दर्ज
- भाजपा नेता ने खरीदी का फर्जी बनवाया बिल,लेकिन यदि खरीद कर लाया था तो पैरावट के नीचे छुपाया क्यों?
- एफआईआर दर्ज ना हो इसके लिए चल रही है जद्दोजहद : सूत्र
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर/पटना,14 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के बैकुंठपुर वन मंडल अंतर्गत आने वाले कटकोना वन क्षेत्र से लगे जंगलों में फेंसिंग कार्य के लिए वन विभाग ने ढेर सारे सीमेंट खंभे गिरवाए थे जिन्हें जंगलों की सुरक्षा के हिसाब से जंगलों में लगाया जाना था और जंगलों के पेड़ो की सुरक्षा इसका उद्देश्य था। इस बीच जंगलों की सुरक्षा के लिए वन विभाग द्वारा गिराया गया खंभा गायब हो गया था और वन विभाग उसकी खोजबीन कर रहा था जो खोजबीन तब सफल हुई जब ग्राम पुटा के एक भाजपा नेता सहित कुछ अन्य उनके सहयोगियों के यहां से खंभा बरामद हो गया।
सूत्रों के अनुसार घर के आंगन के पैरावट में यह खंबे ढक कर छिपाकर रखे गए थे जिन्हें वन विभाग की टीम ने गुप्तचरों की सूचना पर बरामद किया। खंभे चूंकि भाजपा नेता और उसके सहयोगियों के घर से बरामद हुए इसलिए मामले में नाम लेने से हर कोई बचता नजर आया और इस चोरी की घटना को जाहिर होने से वह रोकता नजर आया यह रविवार से सोमवार तक जारी रहा लेकिन आम लोगों और सूत्रों की माने तो वन विभाग इस बात से आश्वस्त हो चुका था कि वह खंभा उसी का है और इन्हीं ने जिनमें भाजपा नेता और उसके सहयोगी शामिल हैं ने चुराया और अपने घर के पैरवाट में लाकर गाड़ दिया। वैसे सूत्रों के अनुसार मामले में भाजपा नेता का नाम सामने आते ही हड़कंप मच गया और उसका नाम जाहिर होने से रोकने पूरा प्रयास किया जा रहा है। भाजपा नेता को फर्जी खरीदी बिल भी बनवाने का मौका दिया गया और उसने प्रस्तुत भी किया ऐसा सूत्रों का दावा है। वैसे लोगों का कहना है कि जब भाजपा नेता ने खंभा खरीदा ही था तो उसे घर के पैरवाट में क्यों छुपाया और क्यों ढक कर रखा वहीं फिर वन विभाग का खंभा कहां गया। भाजपा नेता के नाम सामने आने के बाद सत्ताधारी दल के नेताओं का सक्रिय होना और बदनामी से भाजपा नेता और पार्टी को बचाने चोरी करने वाले को बिल वह भी फर्जी बिल प्रस्तुत करने का मौका देना यह प्रक्रिया एक सोची समझी रणनीति है ऐसा आसपास के निवासी कहते सुने जा रहे हैं। वैसे वन विभाग ने अपनी छापामार कार्यवाही के दौरान सीमेंट खंभा बरामद किया और जल्द चोरों के नाम उजागर करने की बात उन्होंने रविवार को की जो सोमवार तक उजागर न किया गया जो कई सवाल खड़े करने वाला मामला है।
प्राथमिकी दर्ज होने से पहले ही शुरू हुई दबाव की राजनीति,भाजपा नेता को बचाने नाम उजागर
करने से बचते नजर आए वन विभाग के अधिकारी
सूत्रों की माने तो चोरी गया सीमेंट खंभा वन विभाग ने तलाशी अभियान चलाकर ढूंढ निकाला और वह चोरों पर कार्यवाही के लिए भी आगे बढ़ी लेकिन तभी दबाव की राजनीति शुरू हुई और कार्यवाही से पीछे हटने मजबूर हुआ वन विभाग,प्राथमिक दर्ज किए जाने की प्रारम्भिक प्रक्रिया पूर्ण कर जब वन विभाग प्राथमिकी के लिए आगे बढ़ी कई तरह के दबाव से वह मजबूर हुई और उन्हें नाम तक चोरों के उजागर करने से रुकना पड़ा। बताया जा रहा है कि भाजपा नेता का नाम सामने आते ही चोरी में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को जिले के मामला संज्ञान में लेना पड़ा और कार्यवाही को शून्य करने या भाजपा नेता को मामले से बरी कराने कई तरह के दबाव सामने रखे गए।
वन विभाग का चोरी हुआ सीमेंट खंभा भाजपा नेता सहित 2 सहयोगियों के घर बरामद हुआ : सूत्र
वन विभाग द्वारा जंगलों की फेंसिंग उद्देश्य से गिराया गया खंभा कटकोना क्षेत्र से गायब हुआ,जिसे चोरी मानते हुए वन विभाग ने तलाशी अभियान चलाया और तब जाकर यह खंभा ग्राम पुटा के एक भाजपा नेता और 2 अन्य सहयोगियों के घर से बरामद हुआ जो उनके घर के पैरवाट में ढक कर छिपाकर रखा गया था। भाजपा नेता और अन्य के घरों से पैरावट से बरामद सीमेंट खंभा वन विभाग का चोरी गया खंभा ही है यह रविवार का बड़ा समाचार भी बना,वहीं चोरों के नाम उजागर नहीं किए गए क्योंकि मामला भाजपा नेता से जुड़ा था और यह कार्यवाही आगे बढ़ते ही रुकी नजर आई।
यदि खंभा खरीदी का तो क्यों पैरवाट में छिपाकर रखा गया?
वैसे सवाल यह है कि यदि भाजपा नेता और उसके सहयोगियों ने सीमेंट खंभा खरीदा था तो क्यों नहीं उन्होंने उसे खुले में रखा,क्यों उन खंभों को उन्होंने घर के पैरावट में गाड़ कर रखा था,वहीं सवाल यह है कि जिस क्षेत्र से वन विभाग का खंभा गायब हुआ और जहां वन विभाग ने शक के आधार पर तलाशी अभियान चलाया वहीं से खंभा क्यों बरामद हुआ। मामला चोरी का है और चोर भाजपा नेताओं का ही एक समूह है जिसमें एक प्रमुख है अन्य सहयोगी हैं यह पूरा क्षेत्र आसपास का कह रहा है लेकिन बस वह भी सामने आकर नहीं कह रहा है क्योंकि कोई भाजपा नेता का विरोध खुलकर नहीं करना चाहता यह सूत्रों का कहना है। वैसे सीमेंट खंभा भाजपा नेता ने गांव में लाया इसका भी कोई सबूत वह नहीं दे सकते केवल वह फर्जी बिल भर लगाकर बचने के प्रयास में हैं।
राजनीतिक दबाव इतना की वन विभाग खंभा उसका है यह पहचान बता पाने में हिचकिचा रहा है…
सूत्रों ने यह भी बताया कि केवल चोरों का भाजपा से संबंध होना ही इतना बड़ा दबाव हो गया वन विभाग के लिए की वह चोरों का नाम लेने से भी कतरा रहा है। बताया जा रहा है कि जिन वन विभाग के लोगों ने चोरी गए खंभे के लिए तलाशी अभियान चलाया और जिन्होंने खंभा खोज निकाला वह अब यह कहता सुना जा रहा है कि खंभा वन विभाग का ही है यह वह स्पष्ट रूप से नहीं कह सकते। कुल मिलाकर इतना राजनीतिक दबाव है कि चोर को चोर बोलने में जिले के वन विभाग के अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। अपनी चीज अपनी है कि नहीं यह जिले के जिम्मेदार अधिकारी नहीं कह पा रहे हैं क्योंकि उन्हें कुर्सी से प्यार है वह जिस जिम्मेदारी के लिए पदस्थ हैं उसका उन्हें बिल्कुल ध्यान नहीं है।
यदि खंभा वन विभाग का नहीं है तो क्यों फिर तलाशी अभियान उन घरों तक पहुंचा जहां से खंभा बरामद हुआ?
वैसे सवाल यह है कि जब खंभा वन विभाग अपना नहीं बता पा रहा है तो वह किस आधार पर तलाशी अभियान चला रहा था,वैसे जिन घरों तक तलाशी अभियान चलाया गया क्यों फिर ऐसा कोई अभियान चलाया गया जब पहचान का आधार ही कुछ नहीं था वन विभाग के पास चोरी गए खंभे का। वैसे वन विभाग कोरिया की कहानी ऐसी ही है,कोरिया जिले के वन विभाग में भ्रष्टाचार का मामला पुराना ही है और कैसे यहां अधिकारी धन्ना सेठ बन बैठे हैं यह बात किसी से छिपी नहीं है।
फर्जी बिल प्रस्तुत कर खंभा चोरों को बचाने किया जा रहा प्रयास
सूत्रों के द्वारा बताया जा रहा है कि खंभा चोरों को बचाने फर्जी बिल प्रस्तुत करने का भी समय चोरों को प्रदान किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि फर्जी बिल खंभा खरीदी का बनवाकर लाया भी जा चुका है जो भाजपा नेता और उसके सहयोगियों को इस घृणित कार्य के बदले मिलने वाले किसी दंड से बचायेगा। बताया जा रहा है कि खंभा चोरी का मामला ठंडा हो जाए और किसी तरह तलाशी अभियान भी बंद हो जाए इसका भरपूर प्रयास भाजपा नेता ने किया लेकिन जब वह अपनी चोरी नहीं छिपा सके और चोरी पकड़ी गई फर्जी बिल लगाकर वह बचने की जुगत में हैं।
वन विभाग के अधिकारियों को अपनी कुर्सी जाने और अपनी ही जांच होने का खतरा : सूत्र
बताया जा रहा है कि पूरे मामले में जिले के वन विभाग के अधिकारी इस कदर दबाव में हैं कि वह अपनी कुर्सी जाने के भय में हैं, बताया जा रहा है कि सत्ताधारी दल के नेता का नाम चोरी मामले में सामने आने के बाद अधिकारियों को यह भय सता रहा है कि यदि भाजपा नेता का नाम सामने आया तो उनकी कुर्सी जानी तय है, अधिकारियों की लंबी जांच हो सकती है और उनका भी भ्रष्टाचार बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है यह उन्हें भय है। अधिकारी काफी सोच विचार कर रहे हैं और वह शायद ही मामले में आगे की कार्यवाही करने वाले हैं ऐसा अनुमान है।
क्या सत्ताधारी दल से होना अपराध करने की खुली छूट का विषय होता है, ऐसा अधिकार ऐसा जुड़ाव देता है?
वैसे पूरे मामले में प्राथमिकी का दर्ज अभी तक नहीं किया जाना और मामले में सत्ताधारी दल के नेता का नाम सामने आते ही उसे बिल फर्जी बिल प्रस्तुत करने का अधिकार देना यह साबित करता है कि मामले में सत्ता से जुड़ा दबाव अवश्य काम कर रहा है। वैसे क्या सत्ताधारी दल का होना और सत्ता से जुड़े रहने के कारण अपराध करने की आजादी मिलती है क्या अपराध मामले में क्षमा मिलती है,वैसे यह ऐसा उदाहरण बनने वाला विषय हो जाएगा यदि कार्यवाही नहीं हुई तो की आगे फिर कोई भी व्यक्ति जो सत्ता से जुड़ाव रखता है वह कही से भी कुछ भी चुरा लेगा और बाद में वह फर्जी बिल लगाकर बच निकलेगा,मामले में कार्यवाही करना चाहिए दंड चोरों को मिलना चाहिए भले वह सत्ता से जुड़े ही लोग क्यों न हों यह आम लोगों का कहना है और उनका मानना है कि इससे अराजक स्थितियां जन्म लेंगी और चोरी की घटनाओं पर आगे कार्यवाही नहीं होगी।
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