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सरगुजा/कोरिया@ सरगुजा संभाग को शिक्षा विभाग के तानाशाह संयुक्त संचालक से मिली मुक्ति?

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  • सरगुजा संभाग के संयुक्त संचालक व सरगुजा के जिला शिक्षा अधिकारी की जय वीरू की जोड़ी हुई खत्म।
  • संयुक्त संचालक व जिला शिक्षा अधिकारी की जुगलबंदी से पूरा शिक्षा विभाग था परेशान…शिक्षकों में था अंदरूनी आक्रोश…
  • शिक्षा विभाग के तबादला सूची में लगभग 18३ के करीब हुए तबादले सूची को देख बेहतर व्यवस्था की उम्मीद…
  • शिक्षा विभाग के तबादला सूची में दिखी पारदर्शिता
  • ऐसा मानना है शिक्षा विभाग के विशेषज्ञों का
  • तबादला सूची किसी भ्रष्टाचार पर सर्जिकल स्ट्राइक जैसी मानी जा रही है…

-न्यूज डेस्क-
सरगुजा/कोरिया,12 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। शासन के द्वारा तबादले पर लगी रोक हटाने के बाद लगातार विभिन्न विभागों की तबादला सूची जारी हो रही है और पहले यह सूची जिले स्तर पर जारी हो रही थी जो जिला स्तरीय तबादला था जिसकी समयावधि 30 जून 2025 तक निर्धारित थी जिसके बाद अब राज्य स्तरीय तबादला सूची जारी होने का क्रम जारी है जिसके तहत स्कूल शिक्षा विभाग की एक तबादला सूची राज्यस्तरीय सामने आई है जिसमें कई बड़े अधिकारियों सहित अन्य कर्मचारियों के तबादले राज्य स्तर पर किए गए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी तबादला आदेश में कुछ अंगद जैसे पांव जमाकर वर्षों से एक ही जगह बैठे उन अधिकरियों का भी तबादला हुआ है जो तानाशाह थे और जिनके ऊपर भ्रष्टाचार का भी आरोप लगा था जो शिक्षकों से उगाही का आरोप था,इसी क्रम में सरगुजा संभाग के संयुक्त संचालक का भी तबादला शिक्षा विभाग द्वारा किया गया है जो सरगुजा की कुर्सी छोड़ने को कभी तैयार नहीं थे और जहां उनके ऊपर भ्रष्टाचार का आरोप लगा था जहां से हटाया गया था वहीं वह पुनः आकर बैठ गए थे और वहां की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने ताल ठोक रहे थे,सरगुजा से हटाए गए संयुक्त संचालक का व्यवहार तानाशाह का माना जाता था और वह भ्रष्टाचार में लिप्त थे यह एक समय का मुख्य समाचार हुआ करता था, शिक्षकों से पदस्थापना के नाम पर लंबी उगाही का आरोप लगने के बाद भी इस आरोप के बाद हटाए जाने के बाद भी संयुक्त संचालक किसी तरह पुनः सरगुजा आ पहुंचे थे और पुनः वापसी के बाद से ही सरगुजा की शिक्षा व्यवस्था कहीं न कहीं बेपटरी हो रही थी, सरगुजा के संयुक्त संचालक शिक्षा श्री हेमंत उपाध्याय और जिला शिक्षा अधिकारी सरगुजा श्री अशोक कुमार सिन्हा की कार्यप्रणालियों से सरगुजा जहां शिक्षा व्यवस्था मामले में पिछड़ रहा था वहीं पूरे संभाग के शिक्षकों के अंदर अंदरूनी आक्रोश पनप रहा था जो कभी भी विस्फोटक हो सकता था जिसके कारण इन्हें हटाया गया ऐसी जानकारी सामने आ रही है। सरगुजा संयुक्त संचालक और सरगुजा जिला शिक्षा अधिकारी की जोड़ी टूट जाए और सरगुजा को एक बेहतर नेतृत्व शिक्षा विभाग में मिले यह वहां के शिक्षकों की सोच थी जिसे ही समझकर स्कूल शिक्षा विभाग ने यह निर्णय लिया और हटाया इन्हें ऐसा माना जा रहा है। 189 लोगों के लगभग हुए तबादले में कुछ के तबादले स्वैच्छिक हुए लेकिन जिनका भी प्रशासनिक तबादला हुआ और जो बड़े अधिकारी थे इसके पीछे की वजह उनका कार्य व्यवहार था जो समझा जा सकता है।
अब सरगुजा से जय-वीरु की जोड़ी टूटी है वहां एक एक योग्य अधिकारी को जिम्मेदारी मिली है जो शिक्षा व्यवस्था के बेहतरी के लिए काम करेंगे ऐसा माना जा रहा है। सरगुजा संभाग के नए संयुक्त संचालक अब संजय गुप्ता होंगे जो कई जिले के जिला शिक्षा अधिकारी रह चुके हैं वहीं वह दो-दो बार संयुक्त संचालक सरगुजा की कुर्सी तक पहुंच भी गए थे लेकिन वर्तमान में हटाए गए संयुक्त संचालक की कुर्सी हथियाने के प्रयासों के मामले में वह उनसे पिछड़ जाते थे और वह फि़लहाल राज्य कार्यालय में सेवा प्रदान कर रहे थे। नए पदस्थ किए गए संयुक्त संचालक शिक्षा संजय गुप्ता के सरगुजा आगमन को लेकर शिक्षका भी उत्साहित हैं और उन्हें यह विश्वास है कि अब संभाग की शिक्षा व्यवस्था एक निर्विवादित व्यक्ति के हांथ में होगी जो शिक्षा व्यवस्था के बेहतरी के लिए काम करेंगे।
सरगुजा संयुक्त संचालक शिक्षा एवम जिला शिक्षा अधिकारी सरगुजा की जय-वीरु वाली जोड़ी टूटी
सरगुजा संयुक्त संचालक शिक्षा एवम जिला शिक्षा अधिकारी सरगुजा की जोड़ी जय-वीरु की जोड़ी मानी जाती थी जिससे शिक्षक परेशान थे और कहीं न कहीं हताश हो रहे थे,यह जोड़ी अब स्कूल शिक्षा विभाग के तबादला आदेश जारी होने पश्चात टूटती हुई नजर आ रही है और अब इनमें से एक रायपुर में राज्य कार्यालय में अपनी सेवा देंगे,और एक संयुक्त संचालक कार्यालय अंबिकापुर में ही शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कार्य देखेंगे। जय-वीरु की जोड़ी टूट जाए और सरगुजा में एक बेहतर अधिकारी की नियुक्ति की जाए यह संयुक्त संचालक सरगुजा और जिला शिक्षा अधिकारी सरगुजा के मामले में आम शिक्षकों की वह मंशा थी जिसे वह पूरा होता देखना चाहते थे।
संयुक्त संचालक शिक्षा सरगुजा पर भ्रष्टाचार का लगा था बड़ा आरोप, एक बार हटाए जाने के बाद भी पुनः की थी जिद में वापसी,फिर हटाए गए
संयुक्त संचालक शिक्षा सरगुजा के ऊपर भ्रष्टाचार का एक बड़ा आरोप लगा था जिसके बाद इन्हें हटाया भी गया था लेकिन इन्होंने जिद में पुनः वापसी की थी और तभी से यह पुनः सरगुजा में पदस्थ थे, संयुक्त संचालक सरगुजा के ऊपर पदोन्नति के दौरान शिक्षकों से मनचाही पदस्थापना के लिए पैसे उगाही का आरोप लगा था और यह लगभग साबित भी हुआ था कि कई शिक्षकों को इनके द्वारा लाभान्वित किया गया था पदस्थापना मामले में और जिसके लिए कहीं न कहीं आर्थिक लाभ स्वीकार किया गया था,यह आरोप पदोन्नति के समय लगा था और जिसके बाद जांच भी जारी थी लेकिन इन्होंने किसी तरह अपनी पुनः पदस्थापना के लिए प्रयास किया और सरगुजा आकर मामले को रफा दफा करने पूरा जोर लगाया। बताया जाता है कि इन्होंने पूरे मामले को रफा दफा कर भी दिया।
तबादला सूची को संजीवनी माना जा रहा है शिक्षा विभाग के लिए
वर्षों से अंगद के पैर की तरह जमे शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इधर से उधर किया गया,इस तरह शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की मंशा शिक्षा विभाग की सामने नजर आई,तबादला आदेश को इस नजरिए से संजीवनी माना जा रहा है शिक्षा विभाग और शिक्षा व्यवस्था के मामले में। अधिकारियों ने वर्षों से एक ही जगह खुद को स्थापित कर भ्रष्टाचार मचाया हुआ था जिसका उन्मूलन हुआ ऐसा माना जा रहा है।
शिक्षा विभाग की अब तक की सबसे बड़ी तबादला सूची में से एक है यह सूची
शिक्षा विभाग शिक्षकों के तबादले मामले में जंबो सूची पूर्व में जारी करता रहा है लेकिन इस बार विभाग के अधिकारियों पर शिक्षा विभाग की नजर टेढ़ी हुई है वहीं कुछ मामलों में स्वैच्छिक भी तबादले हुए हैं,यह सूची शिक्षकों को छोड़ते हुए यदि देखा जाए और अधिकारियों कर्मचारियों के मामले में देखा जाए तो अब तक कि तबादला सूचियों में से सबसे बड़ी सूची है जिसमें 18३ से अधिक लोग इधर से उधर किए गए हैं।शिक्षकों के मामले में राज्य सरकार और शिक्षा विभाग का रुख इस कार्यकाल में काफी रूखा है उन्हें स्वैक्षिक तबादले का अधिकार नहीं दिया है विभाग ने और उनसे एक तरह से सौतेला व्यवहार किया गया है दंडित करने का प्रयास किया गया है यह साफ समझ में आया है।
आज निष्पक्ष जांच यदि संस्थित की जाए पदोन्नति पदस्थापना मामले में बड़े भ्रष्टाचार का पर्दाफाश होना तय
बताया जाता है और शिक्षकों के पदोन्नति के समय यह आरोप भी लगे थे कि संयुक्त संचालक सरगुजा ने पदोन्नति के समय कुछ शिक्षकों को मनचाही पदस्थापना करने संशोधन का खेल खेला था और जिससे कई शिक्षकों को गलत तरीके से लाभ पहुंचाया गया था। सरगुजा संभाग में सैकड़ों की संख्या में संशोधन किए गए थे,संयुक्त संचालक ने इसकी जांच निष्पक्ष न होने पाए इसलिए ही हटाए जाने के बाद भी सरगुजा में ही अपनी पुनः पदस्थापना करवा ली थी और मामले को निपटाने पूरा जोर लगाया था जो तब दब भी गया था, बताया जा रहा है कि आज भी यदि उक्त पदस्थापना संशोधन मामले की जांच कर दी जाए एक बड़े भ्रष्टाचार की पोल खुल जाएगी और यह सामने आ जाएगा कि कैसे कनिष्ठ को वरिष्ठ बनाने फर्जी मेडिकल प्रमाण-पत्रों का सहारा लिया गया था कैसे पदस्थापना आदेश जारी होने उपरांत भी संशोधन का खेल खेलते हुए कुछ शिक्षकों को मनचाही जगह पहुंचाया गया था। यह करोड़ों का खेल खेलने वाले कुर्सी पकड़कर बैठे थे इसलिए निष्पक्ष न तो जांच हुई के कार्यवाही हुई वहीं आज जांच हुआ मामला सामने होगा बड़े भ्रष्टाचार का यह आज भी माना जाता है।
जिला शिक्षा अधिकारी सरगुजा की मनमानियां बनी उनके लिए घातक,किनारे किए गए कुर्सी से…
बताया जा रहा है कि सरगुजा के जिला शिक्षा अधिकारी की मनमानियां इतनी बढ़ गई थीं कि वह सत्ताधारी दल के नेताओं की भी नहीं सुनते थे वहीं शिक्षक भी उनसे जिले के त्रस्त थे,शिक्षकों के सामने संवेदनहीनता की स्थिति थी जिला शिक्षा अधिकारी मामले में और वह खुलकर अपनी बात उनके सामने नहीं रख पाते थे,अब यही मुख्य वजह रही कि उन्हें कुर्सी से किनारे किया गया ऐसा माना जा रहा है।
बड़े-बड़े रसूखदारों का भी सूची में नाम है जिनकी कार्यप्रणाली हमेशा ही बेहतर शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ रही…तबादला सूची में बड़े बड़े रसूखदार भी शामिल हैं,यह शिक्षा व्यवस्था के चौपटीकरण के लिए विख्यात हैं और इसलिए भी इन्हें हटाया गया है, इनमें सरगुजा संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारी का नाम प्रमुख है।
युक्तियुक्तकरण में भारी अनियमितता और नियमो को ताक पर रख कर पदस्थापना की जा रही थी…
पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने कहा की युक्तियुक्त करण में भारी अनियमितता बरती गई थी नियमो को ताक पर रख कर पदस्थापना की जा रही थी जिस पर मेरे द्वारा लगातार विरोध किया गया राज्य स्तर पर शिकायत की गई जिसके बाद शासन ने डीईओ को हटा दिया है। अन्याय के विरूद्ध मेरी लड़ाई जारी रहेगी। जहां तक स्थानांतरण की बात है तो प्रदेश स्तर पर कई स्थानांतरण नियम विरुद्ध हुए हैं, ऐसा अधिकारी कर्मचारी जो जनता का काम न करें उनका स्थानांतरण होना ही चाहिए।

सेटिंग बाज अधिकारी का तबादला स्वस्थ शिक्षा अभियान की पहली जीत
विकास पाण्डेय आम आदमी पार्टी के कोरबा लोकसभा उपध्यक्ष मनेन्द्रगढ़ विधानसभा प्रभारी ने कहा की एमसीबी जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा को विगत दिनों में किया गया अम्बिकापुर अटैच ये सेटिंग बाज अधिकारी का तबादला स्वस्थ शिक्षा अभियान की पहली जीत, अभी लड़ाई यहीं नहीं रुकी है, अभी बहुत से मुद्दे हैं जो पूरे होने हैं आज नहीं तो कल, बीते 48 दिन से एक-एक घर जाकर आम आदमी पार्टी द्वारा चलाये जा रहे अभियान से निश्चित ही जिले में शिक्षा में क्रांति आयेगी क्योंकि,शिक्षा शेरनी का दूध है।


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