-संवावदाता-
सोनहत 11 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। भाजपा प्रदेश नेतृत्व व जिला संगठन के निर्देश पर सोनहत भाजपा मंडल द्वारा सामुदायिक भवन सोनहत मे गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर शिक्षक सम्मान समारोह कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।जिसमे क्षेत्र के वरिष्ठ जनो सहित शिक्षको व सेवानिवृत्त शिक्षको को सम्मानित किया गया।कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य शिवकुमारी सोनपाकर भाजपा जिला मंत्री ईश्वर राजवाड़े मंडल अध्यक्ष राजाराम राजवाड़े जनपद अध्यक्ष आशा सोनपाकर विशिष्ट अतिथि जनपद सदस्य सोनिया सुमित राजवाडे आलेश्वरी गौतम राजकुमारी राजवाड़े उपस्थित रहे। तथा सेवानिवृत्त शिक्षको मे आनंद पाण्डेय रामेश्वर साहू महादेव साहू सत्यनारायण साहू उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मंडल महामंत्री मनोज साहू ने किया। तथा आभार व्यक्त सुरेश राजवाड़े ने किया। मंडल अध्यक्ष राजाराम राजवाड़े ने गुरु पूर्णिमा के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष पर प्रकाश डाला तथा भारतीय सनातन संस्कृति में आदर्श गुरु-शिष्य परम्परा के महत्त्व को बताया। कार्यक्रम मे मुख्य रूप से शिक्षक संजय सोनवानी बलदाऊ भारती जगदीश प्रसाद सुषमा सिंह कौशलेंद्र गुप्ता सत्येंद्र शर्मा अयोध्या दुबे सुषमा तिवारी तथा अन्य शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान भाजपा पदाधिकारी सहादुर सोंनपाकर राजेश साहू दीपक जायसवाल रमेश तिवारी लक्ष्मी राजवाड़े भूपेंद्र राजवाड़े चिराग तिवारी सुशीला राजवाड़े अरविंद दिलीप अनुज देवेंद्र केपी सिंह रज्जू गुप्ता निलेश सोनी अनिल गौतम राकेश मुकेश नीरज पटेल टिकेश्वर संभू दयाल गोरे ठाकुर गुलशन बुधराम लीलावती सहित सामाजिक कार्यकर्ता धर्मसाय रूद्र पटेल फुनेन सिंह जानसाय सोनपाकर राम श्रवण दुर्गा गुप्ता कमल सिंह मदनलाल बादशाह ओमप्रकाश रामलगन सहित अन्य भाजपाई व ग्रामीण जन भारी संख्या मे उपस्थित रहे।

संस्कृति में गुरू को सर्वोच्च स्थान है
इस दौरान कार्यक्रम की मुख्य अतिथि व जिला पंचायत सदस्य शिवकुमारी सोनपाकर ने कहा कि संस्कृति में गुरू को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। आषाढ़ पूर्णिमा के दिन देश भर में गुरु पूर्णिमा मनाने की परम्परा रही है। इस दिन गुरुओं के अमूल्य ज्ञान और मार्गदर्शन के प्रति सम्मान और आभार प्रकट किया जाता है। गुरु जीवन में अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान की रोशनी लेकर आते हैं।
ज्ञान का दान सर्वोच्च होता है, इसीलिए गुरु श्रेष्ठ है
ईश्वर राजवाड़े ने कहा कि ज्ञान का दान सर्वोच्च होता है, इसीलिए गुरु श्रेष्ठ होते हैं। अच्छा गुरु शिष्यों के दोषों, उनकी कमजोरियों का निवारण करने हेतु निरंतर प्रयत्नशील होता है। जीवन में सम्मान एवं सफलता प्राप्त करने हेतु ज्ञान की साधना करें तथा उसे व्यवहार में अपनाना, साथ ही निरंतर परिश्रम करते रहना आवश्यक होता है।
गुरु जीवन को सफल जीने की कला सिखाते हैं
सेवानिवृत्त शिक्षक आनंद पाण्डेय ने गुरु महिमा पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा की गुरु को भगवान के तुल्य बताया तथा कहा कि वे अपने अनुभवों से हमें जीवन में निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर होने हेतु प्रेरित करते हैं तथा सफल जीने की कला सिखाते हैं। हमें अपने गुरुओं के प्रति हमेशा सम्मान का भाव रखना चाहिए।
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