कोरिया जिले के स्वास्थ्य विभाग का हाल क्या विदेश से पढ़कर लौटे जूनियर डॉक्टरों के कारण चौपट होती चली जा रही है?
वरिष्ठ और अनुभवी डॉक्टरों को विदेशी डिग्री वाले डॉक्टरों के अधीन करना पड़ रहा है काम,योग्य कुशल डॉक्टरों में निराशा का माहौल:सूत्र
जिले में सीएमएचओ,सिविल सर्जन सहित बीएमओ पद पर विदेशी डिग्री वाले जूनियर डॉक्टरों का कब्जा
जूनियर वह भी विदेशी डिग्री वाले डॉक्टरों के अधीन काम करने से मनोबल की कमी महसूस कर पा रहे हैं योग्य अनुभवी डॉक्टर:सूत्र
स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ मुख्यालय में भी नहीं करते निवास,अन्य जिले से आकर करते हैं कायर्:सूत्र
वरिष्ठ अधिकारी ही विभाग का मुख्यालय से रहेगा बाहर कैसे अन्य कर्मचारी करेंगे नियमों का पालन?
क्या स्वास्थ्य मंत्री को भी जूनियरों से बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की उम्मीद है या फिर सीनियर एक क्लास का डॉक्टर जिले में किसी काम के नहीं है?
आखिर क्या वजह है कि पूरे छत्तीसगढ़ में परमानेंट सीएमएचओ नहीं है क्या आईएएस लाबी भी नहीं चाहता कि परमानेंट सीएमएचओ का पड़ रहे प्रभारी के भरोसे पूरा प्रदेश चल रहा है?
–रवि सिंह-
कोरिया,11 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। काबिलियत के दम पर स्वास्थ्य विभाग को चलाने वाले नहीं चुने जा रहे हैं क्या पैसे के दम पर ही चुनकर मुख्य अधिकारियों को बढ़ाया जा रहा है यह सवाल इसलिए हो रहा है क्योंकि जूनियरों पर स्वास्थ्य विभाग की बड़ी जिम्मेदारी सौप दी गई है या थोपी गई है यह बड़ा सवाल है? कोरिया जिले में जिला चिकित्सालय प्रबंधन की जिम्मेदारी हो जिला के स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी निभाने वाले कितने अनुभवी व सीनियर है यह किसी से छुपा नहीं है स्थिति यह है कि बने तो सीएमएचओ है पर जिले के स्वास्थ्य व्यवस्था को चला रहे हैं खुद को बीएमओ समझकर,स्थिति यह है कि अनुभवी सीनियर डॉक्टरों से यह बोल नहीं पाते और बीएमओ के अधीनस्थ के कर्मचारी को फोन लगाकर अपना काम करवाते हैं बीएमओ तक को फोन करने से कतराते हैं वहीं अनुभवी व सीनियर डॉक्टरों से तो यह बात भी करना जरूरी नहीं समझते हैं जैसा सूत्रों का कहना है,जिस वजह से कोरिया जिले के स्वास्थ्य विभाग में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है,अनुभव की कमी साफ झलक रही है फिर भी ऐसे कंधों पर जिले के स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी का बोझ कितना सही है यह तो स्वास्थ्य मंत्री व सरकार को सोचना चाहिए। जिले के सीएमएचओ जिन्हें जिला मुख्यालय में निवास करना चाहिए वह दूसरे जिले में रहकर आना जाना करकर जिले के स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी निभा रहे हैं वहीं सवाल यह है कि जब मुखिया ही मुख्यालय में नहीं रहेगा वह अन्य कर्मचारियों पर कैसे जिला मुख्यालय में निवास करने का दबाव डालेगा सोचा जा सकता है। कोरिया जिले के स्वास्थ्य विभाग की स्थिति किसी से छिपी नहीं है,जिले के स्वास्थ्य विभाग में बड़े पदों पर जूनियर साथ ही विदेशी डिग्री वाले डॉक्टरों का कजा हो चुका है जो इलाज की बजाए व्यवस्था संचालन का जिम्मा सम्हाल रहे हैं और इस बीच उनके व अन्य योग्य एवं अनुभवी डॉक्टरों के बीच संवाद हीनता की स्थिति है। अनुभवी एवं योग्य डॉक्टर भी जहां जूनियर विदेशी डिग्री धारी डॉक्टरों से एक दूरी कायम कर रहे हैं वहीं जिम्मेदारी सम्हालने वाले जूनियर भी योग्य और अनुभवी के मामले में खुद में झिझक महसूस कर रहे हैं जैसा सूत्रों का कहना है।
क्या बीएमओ खुद को समझकर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था का संचालन कर रहे हैं सीएमएचओ?
कोरिया जिले के सीएमएचओ जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था सम्हाल पाने में असमर्थ नजर आ रहे हैं,जिले में वह स्वास्थ्य सुविधाओं को पटरी पर ला पाने में भी असमर्थ नजर आ रहे हैं, बताया जा रहा है कि खंड चिकित्सालयों से भी किसी जानकारी के लिए वह बीएमओ से बात करने की बजाए खुद ही किसी अधीनस्थ से बात करके जानकारी मंगा रहे हैं, सवाल यह उठ रहा है कि क्या वह खुद को बीएमओ ही समझकर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था का संचालन कर रहे हैं। पहले सूरजपुर में यह बीएमओ थे लगता है इसी वजह से इन्हें वह आदत नहीं गई है और आज भी यह बीएमओ समझ कर ही जिला चला रहे हैं।
जिला मुख्यालय में नहीं रहते सीएमएचओ,अन्य जिले से करते हैं जिले में आना-जाना
सीएमएचओ जिले में नहीं निवास करते हैं,सीएमएचओ अन्य जिले से आना-जाना करके जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था का संचालन कर रहे हैं, नियमानुसार किसी भी जिले के अधिकारी या कर्मचारी का मुख्यालय में निवास करना अनिवार्य है,अब यदि खुद जिला अधिकारी ही मुख्यालय में निवास मामले में नियमों का पालन नहीं करेंगे कैसे जिले के स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मचारी नियम से चलेंगे यह बड़ा सवाल है। सीएमएचओ की गाड़ी प्रतिदिन अन्य जिले से कोरिया जिले आती और शाम को वापस जाती जरूर नजर आती है।
विदेशी डिग्री वाले जूनियर डॉक्टर बने अधिकारी,योग्य अनुभवी वरिष्ठ डॉक्टर उनके अधीनस्थ कर्मचारी,कैसे सुदृढ़ होगी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था?
कोरिया जिले में स्वास्थ्य विभाग में जितने भी महत्वपूर्ण पद हैं जो अधिकारी संवर्ग के पद हैं उनपर जूनियर अधिकांश मामले में डॉक्टर बैठे हैं,वहीं वरिष्ठ अनुभवी और योग्य डॉक्टर उनके अधीन एक कर्मचारी हैं,अब जब जूनियर और कम योग्यताधारी अधिकतम योग्यताधारी पर आदेश का दबाव डालेगा वह पूरा होगा यह सम्भव नहीं नजर आता,ऐसे में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था कैसे सुदृढ़ होगी यह बड़ा सवाल है।
जिला अस्पताल व जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों ही विदेशी डिग्री वाले जूनियर डॉक्टरों के भरोसे है?
जिले के स्वास्थ्य विभाग की कमान की बात हो या जिला चिकित्सालय या अन्य खंड स्तरीय व्यवस्था की बात हो सभी जगह मुख्य पदों पर विदेशी डिग्री धारी जूनियर डॉक्टरों का राज है,अनुभवी और योग्य वरिष्ठ डॉक्टर उनके अधीनस्थ कार्य करने मजबूर हैं। बताया जाता है कि इस व्यवस्था का अंदरखाने काफी विरोध है लेकिन वरिष्ठ अनुभवी डॉक्टर इसलिए मौन हैं क्योंकि मामला ऊपर स्तर का है।
जिनके पास जिला अस्पताल व जिले के स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करने की जिम्मेदारी है दोनों में एक विषय समान है दोनों का राजस्व विभाग से जुड़ाव
जिला स्वास्थ्य विभाग की कमान की बात हो या जिले के जिला चिकित्सालय के कमान की बात हो दोनों ही कमान जिन जिन लोगों के पास है उनका राजस्व विभाग से जुड़ाव सामने है,अब क्या राजस्व विभाग के प्रभाव के कारण इन्हें जिम्मेदारी मिल सकी है जिस कारण वरिष्ठ की जगह यह कमान सम्हाल रहे हैं। वैसे राजस्व विभाग से जुड़ाव का वह दंभ भी रखते हैं जो सामने व्यवहार में देखने में नजर भी आता है।
आखिर स्थाई सीएमएचओ छत्तीसगढ़ में क्यों नहीं आ रहे?
स्वास्थ्य व्यवस्था और विभाग की बात की जाए तो लगातार देखने में आ रहा है कि जुगाड से जूनियर सीनियर पर हावी है जूनियर सीनियर का अधिकारी है वहीं जिन्हें इलाज के लिए लोगों के नौकरी मिली है वह जुगाड से साहब बन गए हैं और व्यवस्था संचालन के नाम से वह ऐशोआराम जिंदगी काट रहे हैं।प्रदेश में अधिकांश जगह डॉक्टर ही सीएमएचओ की जिम्मेदारी निभा रहे हैं अब स्थाई या नियमित सीएमएचओ क्यों नहीं आ रहे हैं विभाग में यह बड़ा प्रश्न है।
क्या नियमित सीएमएचओ शासन व आईएएस लॉबी व नेता नहीं बनने देना चाहते?
वैसे सवाल यह है कि पहले की व्यवस्था में जहां सीएमएचओ का पद अलग से होता था नियमित पद होता था वह अब प्रभारी वाला पद कैसे हो गया,क्या ऐसा इसलिए है कि शासन,आईएएस सहित नेता नहीं चाहते कि नियमित सीएमएचओ स्वास्थ्य विभाग को मिल सके जो पूर्णकालिक स्वरूप में जिलों की स्वास्थ्य संबधी व्यवस्था का सुचारु संचालन कर सके। आज डॉक्टर ही सीएमएचओ बने हुए हैं और अधिकांश जगह जूनियर का सीनियर पर राज है जो अंदरूनी रूप से विभाग के कार्यक्षमता पर प्रभाव डाल रहा है।
प्रभारी के भरोसे कितनी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा चलेगी?
सीएमएचओ का पद ऐसे व्यक्ति के पास होना चाहिए जो प्रबंधन मामले में जानकार हो योग्य हो निर्णय क्षमता का धनी हो जबकि आज की व्यवस्था में जूनियर जुगाड से सीएमएचओ बने बैठे हैं। अब जूनियर और प्रबंध मामले में अनुभवहीन कैसे जिलों की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर कर पाएंगे यह सवाल है।
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