
श्रावण मास में आज से शिवालयों में होगा जलाभिषेक
आज से एक माह तक शिवालयों बोलबम एवं हर-हर महादेव के जयकारों की होगी गूंज
हसदेवेश्वर मंदिर मेंड्रा समेत प्राचीनतम धाम जटाशंकर,नीलकंठ,शिवगूफा, शिवघाट देवगढ़,सिद्ध बाबा बसंत झरिया में रहेगी श्रद्धालुओं की भीड़
सभी धामों का अपना है विशेष महत्व, कांवर में जल उठा कर भक्त करेंगे भोलेबाबा का अभिषेक
-राजन पाण्डेय-
कोरिया,10 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। आज से सावन का महीना शुरू हो रहा है सावन के शुरू होते ही शिवालयों में जलाभिषेक शुरू होगा, दुर्गम क्षेत्रों के प्रतिष्ठत देव स्थानों में लोग जलाभिषेक पहुचने लगगे। विकासखंड सोनहत से लगी एक ऐसी जगह है जहां प्राकृतिक रूप से गुफा के अंदर भगवान शिव की मुर्ति स्थापित है। यहां शिवरात्री के अवसर पर दूर-दूर से सैकडों की संख्या में श्रद्वालु भगवान शिव की पूजा करने पहुचते है। दुर्गम वन क्षेत्र में स्थित इस प्राकृतिक शिव मुर्ति को लेकर कई तरह की किवदंतियां जुडी हुई है। यही वजह है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढती जा रही है। सोनहत विकासखंड अंर्तगत स्थित इस धाम का नाम सीतामढी है इस धाम में पहुंचना आसान नहीं है। कोरिया रियासत के समय इस जगह खोज की गई थी। यहां एक गुफा में काफी अंदर प्राकृतिक रूप से शिविलिंग स्थित हैं। घने जंगल में स्थित गुफा के अंदर घुटनों के बल जाना पड़ता हैं। यहां छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश के कई जिलों से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। मान्यता है कि यहां आने से मनोकमना पूरी होती है।
केदारनाथ का स्वरूप सिद्ध बाबा में…

राष्ट्रीय राजमार्ग 43 से लगभग 1 किलोमीटर अंदर स्थित सिद्ध बाबा पहाड़ श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। इस पहाड़ पर केदारनाथ की तर्ज पर एक भव्य शिव मंदिर बनाया जा रहा है, जो आने वाले समय में इस क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक केंद्र बन सकता है। यहां शिवलिंग की स्थापना एक प्राचीन परंपरा के तहत की गई है और महाशिवरात्रि के दिन यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। सावन में यहां पर महादेव का जला अभिषेक रोजाना चलेगा इसके साथ ही भरतपुर लॉक मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित घघरा गांव का शिव मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मान्यता है । लोग बताते है कि यहां पर भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान इस शिवलिंग की स्थापना की थी। इस कारण यह स्थान रामायणकालीन महत्व रखता है।
पैदल चल पहुचेंगे शिव के धाम जटाशंकर

सोनहत क्षेत्र में एक और बहुत सुंदर धाम स्थित है जिसे जटाशंकर के नाम से जाना जाता है। यहां भी एक लंबी गुफा है और गुफा के अंदर शिव लिंग स्थापित है। यहां सावन में दूर-दूर से सैकडों की संख्या में श्रद्वालु भगवान शिव की पूजा करने पहुचते है। घने जंगल में स्थित गुफा के अंदर घुटनों के बल जाना पड़ता हैं। उल्लेखनीय है की जटाशंकर धाम के आसपास कोई गांव नही है कुछ दूर पैदल चल कर इस धाम में पहुचा जात है । इस धाम में रामेश्वर प्रसाद दास नामक बाबा कई सालों से अकेले ही रहकर भोलेनाथ की सेवा कर रहे हैं यहां प्राकृतिक रूप से गुफा के अंदर स्थित शिवलिंग के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को सकरी गुफा से 21 हाथ अंदर घुटनों के बल जाना होता है। शिवरात्री में यहां श्रद्धालुओं का भींड़ लगी रहती है लोग यहां पर अपनी अस्था के बूते अपनी मनोकामना पूर्ति करने आते है।
विहंगम नजारों पर विराजे नीलकंठ
विकासखंड सोनहत मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में स्थित नीलकंठ नामक स्थान जो चारों ओर से पहाडि़यों की बच बसा है यहां की ऊंची ऊंची पहाडि़यां अपने आप में देखने लायक है और उसी पहाड़ की चोटी पर शिवलिंग स्थापित है जिसे नील कंठ के नाम से जाना जाता है। यहां सावन माह में दूर – दूर से श्रद्वालु भगवान शिव की पूजा करने पहुचते है। इस जगह पर पहुंचना आसान नहीं है क्योकी उक्त स्थान पर पहुचने के लिए भीषण पहाड़ पर चढना पड़ता है जिसके लिए उपयुक्त मार्ग नही है कोरिया रियासत के समय इस जगह की खोज की गई थी। यहां छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश के कई जिलों से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। मान्यता है कि यहां आने से मनोकमना पूरी होती है। यहां पर स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा सावन के आयोजन की तैयारीयां पूर्व से ही शुरू करा दी गई है।

हसदो उदगम के हसदेश्वर महादेव में होगा जलाभिषेक
सोनहत विकासखंड के ग्राम में मेंड्रा स्थित हसदो नदी के उदगम स्थल पर शिवरात्री के दिन सबसे बड़ा मेला लगता है साथ ही सावन माह में जलाभिषेक भी होता है। यहां पर पुर्व सांसद एवं केन्द्रीय राज्य मंत्री डा चरण दास महंत ने भव्य शिव मंदिर का निर्माण कराया था । हसदो उद्गम के ठीक सामने होने के कारण यह मंदिर काफी सिद्ध एवं प्रतिष्ठित माना जाता है। सावन में यहां पर जलाभिषेक भक्तों के द्वारा किया जाएगा।
शिवगुफ़ा एवं शिवघाट में होगा जलाभिषेक
सोनहत विकासखण्ड के प्रसिद्ध स्थलों में एक शिवगुफ़ा भी है जो कछार पँचायत में है यहां सावन में विशेष आयोजन हॉगा हसदो नदी के पवित्र जल से महादेव का अभिषेक किया जाएगा,यहां पर प्राकृतिक रूप से बनी गुफा में भोलेनाथ विराजमान हैं यहां जल चढ़ाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं लोग अपनी मनोकामना लेकर यहां आते रहते हैं
देवगढ़ धाम चामट पहाड़ में भी पहुचेंगे कांवरिये
कोरिया जिले के पटना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत करहिया खांड देवगढ़ के चामट पहाड़ के नीचे 2 दशक पहले वन विभाग को खुदाई के दौरान प्राचीन मूर्तियां, मंदिर के गुम्बद व अवशेष मिले थे। इसके बाद ग्रामीण कुटिया बनाकर चामट पहाड़ के आराध्य देव बाबा चौरसिया के नाम से मूर्तियों की स्थापना कर इसे देवगढ़ स्थल के रूप में पूजन करने लगे। आज कुटिया की जगह मंदिर बन चुका है और छोटे बड़े धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए सामुदायिक भवन प्रशासनिक सहयोग से बन कर तैयार हो गया है। महाशिव रात्रि पर मेले में सैकड़ों लोग आते हैं सावन में भी यहां विशेष पूजा होती है ग्रामीणों की माने तो चामट पहाड़ की चोटी पर बाबा चौरसिया का सैकड़ों वर्ष पहले से वास है। सफेद घोड़े पर सवार सफेद झंडे के साथ उनका दर्शन कई लोग कर चुके हैं, वे क्षेत्र के आराध्य देव हैं। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना होती है। मेला का आयोजन किया जाता है। मंदिर ग्रामीणों के आस्था का बड़ा केंद्र है।
चिरमिरी का जगरनाथ मंदिर भी धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण


चिरमिरी का जगरनाथ मंदिर भी धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। यह मंदिर भगवान शिव और विष्णु दोनों की उपासना का केंद्र है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां शिवलिंग पर जलाभिषेक और विशेष आरती का आयोजन किया जाता है। सिद्ध बाबा मंदिर एक सिद्ध स्थान माना जाता है, जहां शिवभक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित है और महाशिवरात्रि पर यहां विशेष पूजा और भंडारे का आयोजन किया जाता है। भरतपुर क्षेत्र भी अपनी धार्मिक विरासत के लिए जाना जाता है। यहां का शिव मंदिर शिव भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है। सावन में यहां हजारों श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा करने के लिए उमड़ते हैं। इस दिन विशेष रूप से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है और मंदिर प्रांगण में भंडारे का आयोजन होता है। सावन केवल आध्यात्मिक साधना का पर्व नही है, बल्कि यह समाज में भाईचारे और एकता का संदेश भी देता है। इस दिन विभिन्न स्थानों पर भजन-कीर्तन, धार्मिक प्रवचन और भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें सभी लोग एक साथ बैठकर भगवान शिव की महिमा का गुणगान करते हैं। यह पर्व हमें सादगी, त्याग और समर्पण की भावना सिखाता है।भगवान शिव केवल एक देवता नहीं, बल्कि एक आदर्श, एक दर्शन और एक तत्त्व हैं। वे सृष्टि के संहारक होते हुए भी कल्याणकारी हैं। उनका त्रिशूल हमारे भीतर मौजूद तमोगुण,रजोगुण और सतोगुण के संतुलन का प्रतीक है। उनका डमरू जीवन में ऊर्जा और उत्साह का प्रतीक है, जबकि नंदी उनके धैर्य और भक्ति का प्रतीक है। सावन में हमें यह संदेश देती है कि हम अपने भीतर की नकारात्मकता को दूर कर शिव की भांति स्थिर और शांत रहें। सावन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं,बल्कि जीवन को नई दिशा देने वाला पर्व है। यह आत्मचिंतन, भक्ति और साधना का अवसर है,जो हमें शिव के आदर्शों को अपनाने और अपने जीवन को सत्य, सादगी और सद्भाव से बढ़ने की प्रेरणा देता है।
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