रेस्क्यू करके वन विभाग ने 3 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बंदर को पकड़ने में पाई सफलता
एक बंदर ने किया है 30 लोगों को घायल…बंदर को पकड़ने के बाद वन विभाग उसे रामगढ़ के जंगलों में छोड़ेगा
जिस बंदर को पकड़ा गया है उसे बताया जा रहा है पागल



बैकुंठपुर/पटना,06 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। दैनिक घटती-घटना की खबर से तत्काल संज्ञान लेते हुए कोरिया जिला वन विभाग ने एक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और कोरिया जिले के कटकोना कॉलरी कॉलोनी से उस बंदर को पकड़कर पिंजड़े में बंद कर लिया जिसने 30 लोगों पर हमला करके उन्हें घायल कर दिया था।
बताया जा रहा है कि वह बंदर जिसे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर वन विभाग ने पकड़ा वह पागल हो गया था और वह लगातार कालोनी वासियों को घायल कर रहा था उनके ऊपर हमला कर रहा था। हमला करने वाला बंदर वन विभाग द्वारा पकड़कर रामगढ़ के जंगलों में छोड़ा जाएगा ऐसा बताया जा रहा है वहीं अब कॉलोनी वासियों ने राहत की सांस ली है और उन्होंने यह उम्मीद जाहिर की है कि वन विभाग लगातार इसी तरह बंदरों के मामले में तत्काल संज्ञान लेगा और उन्हें रहवासी क्षेत्र से दूर करने का कार्य करेगा,बता दें कि कटकोना कॉलरी क्षेत्र में बंदरों का आतंक मामले पर दिनांक 06 जुलाई को ही खबर दैनिक घटती-घटना ने प्रकाशित की थी और उसके कुछ घंटे बाद ही वन विभाग एक्शन मोड में नजर आया और उसने कम से कम उस बंदर का रेस्क्यू किया जो बताया जा रहा है कि पागल हो चुका था और जो रहवासियों पर लगातार हमला कर रहा था उन्हें बुरी तरह घायल कर रहा था। बंदरों के मामले में कटकोना कॉलरी कॉलोनी की स्थिति अब ऐसी बताई जा रही है कि वहां इंसानों से ज्यादा बंदरो की संख्या हो चुकी है वहीं वह लगातार इंसानों पर हमला कर रहे हैं और लोग डर के साए में जी रहे हैं। पूरे मामले में लोग अपनी जान से ज्यादा अपने बच्चों के लिए भी चिंतित हैं क्योंकि बंदर छोटे बड़े हर इंसान पर हमला करने से बाज नहीं आ रहे हैं। खाने पीने के सामनों की तलाश करते बंदर अब संख्या में इतने हो चुके हैं कि वह इंसानों पर हमला कर रहे हैं क्योंकि उन्हें उनकी भूख ऐसा करने मजबूर कर रही है। बताया जा रहा है कि हाल ही में एक महिला की इसी कारण मौत हो गई जब एक बंदर महिला जिस बाइक पर बैठकर कहीं जा रही थी जिसके ऊपर बंदर ने हमला किया और बाइक से गिरकर महिला की मौत हो गई।
यह था पूरा मामला
बता दें कि कटकोना ग्राम एसईसीएल के कर्मचारियों का भी रहवासी क्षेत्र है,इस ग्राम में ही एसईसीएल (कोयला खदान) के अधिकारियों कर्मचारियों की कालोनियां हैं,इन कालोनियों में हजारों लोग अधिकारी कर्मचारी निवास करते हैं और आज इन हजारों कालोनी निवासियों सहित ग्राम के अन्य निवासियों का जीना दूभर हो चुका है और वह बंदरों के आतंक से लगातार डरे सहमे हैं, बंदरों की संख्या आज ग्राम के लोगों से अधिक हो चुकी है और बंदरों द्वारा लगातार ग्राम के लोगों को अपने आतंक का शिकार बनाया जा रहा है,कालोनी सहित ग्राम के लोग दो पहिया वाहन में हों या पैदल या अन्य साधनों से बंदरों के द्वारा उन्हें लगातार घायल करने का काम किया जा रहा है और कई बार दोपहिया वाहन चालक इसी वजह से दुर्घटना का भी शिकार हो जा रहे है हैं। एक व्यक्ति मृत्यु भी इस हमले में हुई है। ग्रामीणों सहित कालोनी निवासियों का कहना है कि उनकी इस बंदर वाली समस्या का हल कोई नहीं कर रहा है और वह आतंक के साए में जीने मजबूर हैं। ग्राम के लोगों के अनुसार पहले बंदर खाने पीने की चीजों पर धावा बोलते थे अब बंदर लोगों पर सीधे आक्रमण कर रहे हैं उन्हें नुकसान शारीरिक पंहुचा रहे हैं,ग्राम के लोगों का कहना है कि पहले खाने पीने की चीजें लोग बचाते थे बंदरों से अब वह जान बचाने मजबूर हैं। बंदरों के मामले में उनके आतंक के मामले में कोई ग्राम के लोगों की ओर ध्यान नहीं दे रहा है और इनसे छुटकारा कैसे मिले यह कोई नहीं चाहता ऐसा ग्राम के लोगों का कहना है। कटकोना में बंदरों की संख्या काफी अधिक हो चुकी है,पहले यह संख्या कम थी तब समस्या कुछ कम थी उनका आतंक भी कम था अब लेकिन संख्या लोगों से ग्रामवासियों से अधिक हो चुकी है,ग्रामवासियों के अनुसार बंदरों की संख्या की मुख्य वजह खाने पीने की चीजों की कमी है जो जंगलों में कम हुई इसलिए वह कालोनियों की तरफ पलायन कर रहे हैं।
बंदर को पकड़ने में 3 घंटे की हुई मशक्कत
बंदर को पकड़ने में 3 घंटे की मशक्कत लगने की बात सामने आई है,बंदर बड़ी मुश्किल से 3 घंटे के प्रयासों उपरांत वन विभाग के पिंजड़े में कैद हो सका है,बताया जा रहा है पहले चिन्हांकित किया गया की बंदर जिसे पकड़ना है वह कौन सा है और उसके बाद वन विभाग के द्वारा प्रयास जारी किया गया,इधर उधर भागते छिपते बंदर पकड़ में आया और पिंजड़े में कैद हुआ।
आदमखोर हो चुका था बंदर,30 लोग को बना चूका था अपना शिकार
पकड़ा गया बंदर आदमखोर हो चुका था,वह लगातार इंसानों पर हमलवार था,30 से अधिक लोगों को अपने हमले से घायल कर चुका था कई गंभीर रूप से भी घायल हुए थे, गाडि़यों तक पर वह हमला करके लोगों को घायल करता था, बंदर के पकड़े जाने से फिलहाल रहवासी चैन की सांस ले रहे हैं और उनका कहना है कि वह आगे भी वन विभाग की इस तरह की रेस्क्यू कार्यवाही चाहते हैं जिससे वह निश्चिंत रह सकें।
बंदर पकड़ा नहीं जाता तो कई और हो सकते थे उसके शिकार,घर से बाहर निकलना हो चुका था लोगों का मुश्किल
काटकोना में वैसे तो सैकड़ों बंदर अब डेरा डाल चुके हैं और वह आए दिन लोगों के लिए समस्या बन रहे हैं उनके और उनके परिवार के लिए घातक साबित हो रहे हैं लेकिन हाल फिलहाल में एक बंदर जो पागल हुआ था और जो लगातार इंसानों पर जानलेवा हमला कर रहा था उसे वन विभाग की टीम ने पकड़ लिया है और उसे जानकारी मिलने तक पिंजड़े में बंद कर लिया गया है।बंदर नहीं पकड़ा गया होता तो कई अन्य लोग उसके हमले के शिकार बनते और चोटिल होते,लोगों का घर से निकलना बंद हो चुका था जो अब उसके पकड़े जाने के बाद पुनः जारी होगा ऐसा बताते हैं वहां के लोग।
रामगढ़ के जंगल में छोड़ा जाएगा मानसिक विक्षिप्त बंदर
रामगढ़ के जंगलों में अब वह बंदर छोड़ा जाएगा ऐसा बताया जा रहा है। वन विभाग की टीम बंदर को मानसिक बीमार बंदर को लेकर जा चुकी है और वह अब उसका नया ठिकाना तय करेगी जो रामगढ़ का जंगल होगा ऐसा बताया जा रहा है।
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