
पिछले 1 महीने में दर्जनों लोग बंदरों के हमले से हुए घायल, एक की हुई मौत।
चलती गाड़ी पर भी कूद रहे हैं बंदर और मोटरसाइकिल वाले हो रहे हैं दुर्घटना का शिकार।
कटकोना क्षेत्र में बंदरों की संख्या इंसानों की संख्या से हुई पार…प्रवासियों की संख्या से दुगने हो गए हैं बंदरों की संख्या
पिछले 1 महीने में दर्जनों लोग बंदरों के हमले से हुए घायल, एक की हुई मौत
चलती गाड़ी पर भी कूद रहे हैं बंदर और मोटरसाइकिल वाले हो रहे हैं दुर्घटना का शिकार
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर/पटना,05 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम कटकोना में बंदरों का आतंक अब ग्रामवासियों को भयभीत कर रहा है और प्रतिदिन रहवासी बंदरों के हमले के शिकार हो रहे हैं और कई मामलों में बुरी तरह घायल हो रहे हैं और एक मामले में एक व्यक्ति की मृत्यु भी हो चुकी है जैसी सूचना मिल रही है।
बता दें कि कटकोना ग्राम एसईसीएल के कर्मचारियों का भी रहवासी क्षेत्र है,इस ग्राम में ही एसईसीएल (कोयला खदान) के अधिकारियों कर्मचारियों की कालोनियां हैं,इन कालोनियों में हजारों लोग अधिकारी कर्मचारी निवास करते हैं और आज इन हजारों कालोनी निवासियों सहित ग्राम के अन्य निवासियों का जीना दूभर हो चुका है और वह बंदरों के आतंक से लगातार डरे सहमे हैं,बंदरों की संख्या आज ग्राम के लोगों से अधिक हो चुकी है और बंदरों द्वारा लगातार ग्राम के लोगों को अपने आतंक का शिकार बनाया जा रहा है,कालोनी सहित ग्राम के लोग दो पहिया वाहन में हों या पैदल या अन्य साधनों से बंदरों के द्वारा उन्हें लगातार घायल करने का काम किया जा रहा है और कई बार दोपहिया वाहन चालक इसी वजह से दुर्घटना का भी शिकार हो जा रहे है हैं। एक व्यक्ति मृत्यु भी इस हमले में हुई है। ग्रामीणों सहित कालोनी निवासियों का कहना है कि उनकी इस बंदर वाली समस्या का हल कोई नहीं कर रहा है और वह आतंक के साए में जीने मजबूर हैं। ग्राम के लोगों के अनुसार पहले बंदर खाने पीने की चीजों पर धावा बोलते थे अब बंदर लोगों पर सीधे आ्रक्रमण कर रहे हैं उन्हें नुकसान शारीरिक पंहुचा रहे हैं,ग्राम के लोगों का कहना है कि पहले खाने पीने की चीजें लोग बचाते थे बंदरों से अब वह जान बचाने मजबूर हैं। बंदरों के मामले में उनके आतंक के मामले में कोई ग्राम के लोगों की ओर ध्यान नहीं दे रहा है और इनसे छुटकारा कैसे मिले यह कोई नहीं चाहता ऐसा ग्राम के लोगों का कहना है।
बंदरों की बढ़ती जनसंख्या बनी परेशानी
कटकोना में बंदरों की संख्या काफी अधिक हो चुकी है,पहले यह संख्या कम थी तब समस्या कुछ कम थी उनका आतंक भी कम था अब लेकिन संख्या लोगों से ग्रामवासियों से अधिक हो चुकी है,ग्रामवासियों के अनुसार बंदरों की संख्या की मुख्य वजह खाने पीने की चीजों की कमी है जो जंगलों में कम हुई इसलिए वह कालोनियों की तरफ पलायन कर रहे हैं।
दो प्रजातियों के बंदर…दोनों बने हैं समस्या
कटकोना में दो प्रजाति के बंदर हैं,एक लाल मुंह वाले एक काले मुंह वाले,पहले केवल लाल मुंह वाले आ्रक्रामक हुआ करते थे अब बताया जा रहा है कि काले मुंह वाले भी आ्रक्रामक हो चुके हैं। बंदरों का आ्रक्रामक होना ग्राम वासियों के लिए घातक हो चुका है और अब लोग जान बचाने भागते फिर रहे हैं।
राह पर बाइक से चलने वालों पर भी करते हैं हमला दुर्घटना का भी खतरा ऐसे में ही जा चुकी है एक महिला की जान
राह पर बाइक से चलने वाले लोग भी बंदरों के आतंक से उनके हमले से शिकार हो रहे हैं,चलती बाइक पर भी वह इंसानों पर हमला कर दे रहे हैं। एक महिला की जान इसी वजह से जा चुकी है।
वन विभाग कटकोना क्षेत्र के बंदरों को लेकर गंभीर नहीं
वन विभाग पूरे मामले में मौन है,वह बंदरों को लेकर अनभिज्ञ बना हुआ है और बंदरों का आतंक बढ़ा हुआ है,वन विभाग एक तरह से केवल निर्माण एजेंसी मात्र बनकर ही निश्चिंत है वह वन प्राणियों के विषय में ध्यान देने फुर्सत का भी वक्त नहीं निकाल पा रहा है।
बंदर के हमले से हुए घायलों को नहीं मिलता मुआवजा
बंदरों के हमले से घायल लोगों को मुआवजा भी नहीं मिलता,ग्राम जन खुद से इलाज कराने मजबूर हैं,ऊपर से क्षेत्र में रेबीज के इंजेक्शन भी नहीं मिलते हैं मार्केट से खरीद कर अधिकतम दाम पर लोगों को बंदर काटने के बाद यह इंजेक्शन लेना पड़ता है।
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