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एमसीबी@ठेकेदार की अवैध सुख-सुविधाओं के गुलाम हुए महापौर व कमिश्नर ?

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-रवि सिंह-
एमसीबी,04 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। प्रतिस्पर्धा हर जगह पर है और प्रतिस्पर्धा होनी भी चाहिए,प्रतिस्पर्धा लेकिन अच्छे कामों की हो तो समझ में आता है पर यदि बुरे कामों की हो तो फिर सभी का बेड़ा गर्ग करने वाली ही स्थिति पैदा करती है,पूरे प्रदेश में निर्माण कार्यों की प्रतिस्पर्धा चल रही है, निर्माण कार्य कैसे मिले इसके लिए ठेकेदार तरह-तरह के पैंतरे आजमा रहे हैं लागत से कम में भी ठेकेदार काम ले रहे हैं और कार्य मिल जाए इसके लिए वह सारे पैतरे आजमा कर कम दामों में टेंडर लेने वाली प्रक्रिया अब धीरे-धीरे खत्म होने लगी है? चिरिमिरी में एक ठेकेदार ने इसका एक नया ही तरकीब निकाल लिया है काम पाने के लिए वह सिर्फ अधिकारियों सहित जनप्रतिनिधियों को कुछ सुख सुविधा मुहैया कराकर काम का रहा है, वह भी तय दर से अधिक पर जहां बाकी ठेकेदार लागत से कम पर काम पाते हैं, वहीं यह ठेकेदार अधिक दर पर काम प्राप्त कर रहा है, जनप्रतिनिधियों सहित अधिकारियों को ऐसी ऐसी सुख सुविधा मुहैया कराता है कि वह भी लगता है कि उसके गुलाम हो गए हैं? वह भी उसके द्वारा दी जाने वाली सुख सुविधाओं की वजह से अपनी जमीर को बेच दिए है? ऐसी बातें इस समय इसलिए हो रही है क्योंकि नगर निगम में एक ठेकेदार पर ही पूरा दारोमदार है काम उसी को मिलता है,स्थिति तो यह है कि कार्य जहां 50 प्रतिशत होता है वहां उसे 70 प्रतिशत पैसा आहरण करने को मिल जाता है, जबकि काम का 30 प्रतिशत पैसा हमेशा रोका जाता है, अभी पाइपलाइन का काम लगभग एक करोड़ से अधिक लागत में 15 वें वित्त से हो रहा है कार्य में भी काफी सारी अनियमिताएं हैं पर जांच करेगा कौन? साथ ही जितना काम हुआ नहीं है उससे अधिक मात्रा में पैसा निकल गया है ऐसा सूत्रों का कहना है जो जांच का विषय है पर जांच करने की जहमत उठाएगा कौन? हमेशा कोई भी निर्माण कार्य एसओआर रेट से कम में मिलता है पर इस ठेकेदार के लिए एसओआर रेट से अधिक दर पर काम देना है अधिकारियों के लिए मुसीबत बनी हुई है बाकी ठेकेदार इसके विरोध में भी हैं।
एसईसीएल के सामान्य जनरल मजदूर के क्वार्र्टर में रहकर अपना जीवन यापन करने वाला ठेकेदार इतने कम समय में कई करोड़ का आसामी कैसे बन गया?
कल तक एसईसीएल के सामान्य जनरल मजदूर के मर्टर में रहकर अपना जीवन यापन करने वाला यह ठेकेदार इतने कम समय में कई करोड़ का आसामी कैसे बन गया? इसने जब से ठेकेदारी शुरू की सभी काम इसने निर्धारित दर से 30-40 परसेंट बिलो में ही लिया अब सवाल यह उत्पन्न होता है निर्धारित दर से जब यह कम दर पे काम ले रहा है तो इसे घाटा लगना चाहिए, जबकि इसके साथ उल्टा हुआ यह कई करोड़ रुपए का आसामि बन गया, इससे यह स्पष्ट होता है कि इसने निर्माण कार्य किया ही नहीं सिर्फ फर्जी बिल बनाकर अधिकारियों कर्मचारियों को जैसा जिसे जिस चीज की जरूरत थी उपलध कराकर इसने सिर्फ सरकारी धन पर डाका डाला है, कहते हैं कई अधिकारियों की कमजोर नस इसके पास मौजूद है यह जिस इंजीनियर को चाहता है उसका ट्रांसफर करवा देता है और जिसे चाहता है यही से रिटायर भी हो जाता है एमएल साहू नामक इंजीनियर चिरमिरी में लगभग 15-20 साल से पदस्थ है सोनकर इंजीनियर भी अपनी आधी से अधिक नौकरी चिरमिरी निगम में ही काट दी इन दोनों इंजिनियरों ने इस चर्चित ठेकेदार के जितने भी बिल बनाए सभी बिल फर्जी बताए जाते हैं और यदि कुछ सही भी होंगे तो उसमें सेटिंग जबरदस्त ढंग से किया गया है जिसकी छत्तीसगढ़ सरकार से ईडी से जांच कराए जाने की जरूरत है। अभी इस ठेकेदार ने नई तरकीब निकाल ली है जिस तरकीब में वह जनप्रतिनिधियों अधिकारियों को एक बेहतर सुख सुविधा उपलध कराता है और इसके बदले में जैसा चाहता है वैसा काम निगम से वह पा जाता है पहले जहां सभी कार्यों को वह लागत दर से कम में पाता था अब वह लागत दर से ऊपर में सिर्फ अधिकारियों को सुख सुविधा देकर क्या काम पा रहा है?
क्या टेंडर फिक्सिंग चल रहा है नगर निगम में?
नगर निगम में सेटिंग बाज ठेकेदार का वर्चस्व कम होता दिख नहीं रहा है,निगम कमिश्नर की लचर कार्य प्रणाली के कारण तिकड़मी ठेकेदार फर्जी कार्य कर लगातार भुगतान ले रहा है मिली जानकारी के अनुसार जोन के दो टेंडर जिनकी लागत लगभग 50-50 लाख रुपए है इसके लिए पूरा फिक्स कर दिया गया है बताया जाता है कि पिछले 5 वर्षों से उन पूरे कामों को यही चहेता ठेकेदार करता है इसमें फर्जी बिल के आधार पर लगभग एक करोड रुपए की निकासी प्रतिवर्ष की जाती है जिसमें आधा निगम के ईमानदार अधिकारी और आधा ठेकेदार मिलकर जनता के टैक्स के पैसे की लूटमार लगातार करते आ रहे हैं यही वजह है कि इस काम में बराबर के बंटवारा के कारण कोई भी कमिश्नर आता है वह इस ठेकेदार के तलवे चाटना प्रारंभ कर देता है,सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार इस जोन वाले कार्य फिर से इसबार भी इसे ही देने का मन बना लिया गया है औपचारिकता स्वरूप मात्र पेपरों में अमली जामा पहनाया जाना शेष है…ऐसी खबर निगम दफ्तर से निकाल कर के आ रही है।
क्या भाजपा शासन काल में वर्तमान महापौर इस ठेकेदार के कार्यों की जांच करा पाएंगे?
सूत्रों की माने तो चिरमिरी नगर निगम में बैठे अधिकारियों के लचर कार्य प्रणाली के कारण षड्यंत्रकारी ठेकेदार जो किसी भी कार्य को 30,40,50 प्रतिशत बिलो डालकर ले लेता है और फिर उस काम में भी वह 30 से 40 प्रतिशत कमा लेता है,आखिर निगम में इस भ्रष्ट ठेकेदार की कौन सी जादुई छड़ी कार्य करती है? जिसे छूकर अधिकारी इसके आगे नतमस्तक हो जाते हैं…निगम में लगभग तीन दर्जन ठेकेदार कार्य करते थे लगभग सारे ठेकेदार बैक टू पवेलियन हो गए हैं केवल इसी ठग का वर्चस्व चलता है, इसके पिछले 10 वर्षों के कार्य की यदि बारीकी से महापौर साहब जांच करवा दे तो कई अधिकारी और यह ठेकेदार सलाखों के पीछे होंगे और कई करोड़ रुपए की राशि की वसूली इससे की जा सकेगी।
स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर अब निष्पक्ष तरीके से खुलेगा जोनल टेंडर:सूत्र
जोनल टेंडर में चहेते ठेकेदार को 50 लाख का काम मिलने की पूरी सेटिंग हो गई थी पर यह बात स्वास्थ्य मंत्री के कानों तक पहुंची जिसके बाद स्वास्थ्य मंत्री ने महापौर को साफ निर्देशित किया कि जोनल टेंडर निष्पक्ष तरीके से खुलेगा और यह काम 18 भागों में बांटे जाएंगे जो जो इसमें पार्टिसिपेट करेगा और सही तरीके से टेंडर प्रक्रिया होगी और उसमें जो काम पाएगा वही गुणवत्तापूर्ण कार्य करेगा, चिरमिरी शहर में ट्रिपल इंजन कि सरकार में सिर्फ गुणवत्ता वाले कार्य होंगे किसी भी ठेकेदार की मनमानी नहीं चलेगी अधिकारियों को भी इस बात को समझ लेना चाहिए, जिले में लगभग नगर पालिका और नगर निगम में इसी प्रकार के कई ठेकेदार उत्पन्न हो गए हैं जो एक-एक पालिका को अपना एक अधिकार समझने लगे हैं सरकार को समय रहते ऐसे ठेकेदारों को चयन कर उन पर अंकुश लगाया जाना चाहिए वरना ट्रिपल इंजन की सरकार शीज़ होने में समय नहीं लगेगा।
क्या आय से ज्यादा इन्होंने संपत्ति अर्जित कर ली है?
पूरे चिरमिरी एरिया में लगभग 30 से 40 हजार घर होंगे लेकिन इसका घर इसके अल्प समय के भ्रष्ट क्रियाकलाप के कारण लगभग चार करोड रुपए लागत से बनाया गया है या दर्जनों गाडि़यां मशीन जेसीबी एजेक्स एवं ईट फैक्ट्री बड़े शहरों में कई प्लाट मैं कई करोड़ रुपए लगाए गए हैं वह पैसा क्या 50 प्रतिशत बिलों काम करके आ गया…ठेकेदारों ने जानकारी देते हुए बताया कि एसओआर काफी पुराना है जिस साल का एसओआर है उस साल का जो गिट्टी रेत सीमेंट लोहा मजदूरी का जो रेट रहा होगा उस हिसाब से एस ओ आर बनाया गया है, महंगाई बहुत बढ़ गई है उसके बाद भी साल में 5 करोड़ का काम 30 से 40 प्रतिशत बिलो करके यह व्यक्ति कैसे करोड़ों रूपयो का गोलमाल किया जो गंभीर जांच का विषय है? जो ठेकेदार पिछले 15 वर्षों से निगम में काम करते थे वह काम में पैसा नहीं बच रहा है करके सभी या तो ठेकेदारी छोड़ दिए या फिर अन्य जगहों में जाकर अपना ठेकेदारी कार्य कर रहे हैं यह ठेकेदार निर्धारित दर से अधिक दर पर कार्य लेकर पैसे नहीं बचा पाए थे वही यह षड्यंत्रकारी मुजरा कराने अधिकारियों की दावत करने वाला शौकीन ठेकेदार निर्धारित दर से 30-40 प्रतिशत कम में काम लेकर कैसे कई करोड़ रुपए का आसामी बन गया है।


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