@ रैलियां निकाल कर किया गया प्रदर्शन
रायपुर,03 जुलाई 2025 (ए)। वन विभाग के एक आदेश का जमकर विरोध हो रहा है। छत्तीसगढ़ में वनाधिकार कानून और ग्राम सभा के संवैधानिक अधिकारों को कथित तौर पर कमजोर करने के प्रयासों के खिलाफ लगातार दो दिनों तक राज्यभर में विरोध प्रदर्शन कर शासन को ज्ञापन सौपा गया। यह आंदोलन प्रदेश के अनेक जिलों नगरी (धमतरी),नारायणपुर, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, अम्बिकापुर,नारायणपुर,कांकेर, गरियाबंद,पिथौरा (महासमुंद), बालोद और बस्तर में स्थानीय ग्राम सभाओं,आदिवासी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से आयोजित किया गया।
कौन सा आदेश जारी किया है वन विभाग ने…?
वनाधिकार और आदिवासी अधिकारों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बताया कि 15 मई 2025 को छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा जारी पत्र के माध्यम से वन विभाग ने स्वयं को वन अधिकार कानून का नोडल विभाग घोषित करने का प्रयास किया, जो कि पूर्णतः अवैध एवं आदिवासी विकास विभाग के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है। इससे भी आगे जाकर, विभाग ने अपने राष्ट्रीय वर्किंग प्लान संहिता 2023 के जरिये जंगलों के वैज्ञानिक प्रबंधन की दुहाई देकर,ग्रामसभाओं और अन्य विभागों के द्वारा समर्थित सामुदायिक वन संसाधन को रोकने की धमकी दी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विभाग के इस प्रयास से प्रदेश के करीब 20 हजार वर्ग किमी के जंगलों पर समुदाय का नियंत्रण एवं प्रबंधन खतरे में पड़ गया है। इसके खिलाफ पिछले दो दिनों में प्रदेश के विभिन्न जिलों एवं आदिवासी अंचलों में हजारों लोगों ने स्वस्फूर्त रैलियाँ निकालीं और जिलाधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम ज्ञापन सौंपा।
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