जनपद पंचायत में नवपदस्थ अधिकारियों के पदस्थापना के बाद से भ्रष्टाचार को मिला है बढ़वा आखिर क्यों नहीं होती कार्यवाही ?
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,03 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। ग्राम पंचायत सिंघत एवं दुग्गी में रोजगार गारंटी योजना के कार्यों में हुए भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए खड़गवां जनपद पंचायत से टीम गठित कर जांच की गई थी। जांच हुए लगभग दस से बारह दिन हो गए जांच रिपोर्ट अभी तक ठंडे बस्ते में ही पडी है। जबकि इन दोनों ग्राम पंचायतों की शिकायत भी कई बार ग्रामीणों के द्वारा किया गया है। मगर जांच तो की जाती है और उसके बाद जांच में लीपापोती कर जांच में किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की जाती है।
इस तरह का खेल खड़गवां जनपद पंचायत में बड़े जोरों से चल रहा है। रोजगार गारंटी योजना के तहत हुए निर्माण कार्यों में फजऱ्ी हाजरी भरने की लिखित शिकायत भी जनपद पंचायत के सीईओ से की गई थी की ग्राम पंचायत सिंघत एवं दुग्गी में हो रहे निर्माण कार्यों में फजऱ्ी हाजरी का खेल बड़े जोरों पर पिछले कई वर्षों से किया जा रहा है जो व्यक्ति गांव में नहीं रह रहा है उसकी फर्जी हाजरी भरी जाती है और जो रसूखदार है उनकी हाजरी बिना काम किए हाजरी लगाई जाती है। जिसकी जांच खड़गवां जनपद पंचायत के अधिकारियों ने किया है। ग्रामीणों से जानकारी मिल रही है कि इस संबंध में जनपद पंचायत के अधिकारियों से सांठगांठ करने के कुछ सबूत भी उपलध हुए हैं जिसमें पैसे के लेन-देन की बात कि जा रही है। इससे ऐसा लगता है कि जनपद पंचायत खड़गवां में शिकायत तो होती है मगर जांच सिर्फ नाम के लिए किया जाता है। स्थानीय सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि जिन परिवारों का डिमांड किया जाता है जैसे कि एक परिवार के दो सदस्यों का डिमांड होता है तो एक ही सदस्य काम करने जाता है और दूसरे सदस्य की हाजरी लगाई जाती है। जो कार्य स्थल पर कार्य भी नहीं करने जाते हैं उनकी भी फर्जी हाजरी लगाई जाती है। इन ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्य में काफी दिनों से भ्रष्टाचार किया जा रहा है। इन ग्राम पंचायतों में मनरेगा एवं अन्य निर्माण कार्यों में कई तरह के भ्रष्टाचार पूर्व में भी हुए हैं और वर्तमान में भी किए जा रहे हैं। रोजगार गारंटी योजना के निर्माण कार्यों में मेट और रोजगार सहायक की मनमानी धड़ल्ले से चल रही है। जिसकी चर्चा गांव में सुनी जा सकती है। मनरेगा के निर्माण कार्यों की देखरेख ज्यादातर मेटो एवं रोजगार सहायक के द्वारा किया जाता है।जो अपनी मनमानी करते हुए निर्माण कार्य को अंजाम देते हैं। जिससे फर्जीवाड़े का खेल शुरू होता है। इन ग्राम पंचायतों में सचिव तो एक मूकदर्शक के रूप में विराजमान हैं? अब सवाल उठता है की जांच के उपरांत कार्यवाही कि जाएगी ये सांठगांठ कर जांच को निपटा दिया जाएगा जैसे पूर्व की शिकायतों में होते आ रहा है इस जनपद पंचायत खड़गवां में शिकायत जांच के मामले में एक बड़ा सिंडेकेट कार्य कर रहा है जो जांच के पहले ही जिसकी जांच होनी है उससे संपर्क कर सारा खेल होता है ? और जांच के नाम पर खानापूर्ति किया जाता है ?
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