Breaking News

कोरिया/सूरजपुर@अंग्रेजों द्वारा निर्मित पुल,पुलिया एवं भवन आज तक स्थिर वहीं निर्वाचित देश की सरकारों द्वारा सरकारी तंत्र के नियंत्रण निगरानी में कराए जा रहे निर्माण अल्प अवधि में ही हो जा रहे ध्वस्त…क्यों?

Share


-रवि सिंह-
कोरिया/सूरजपुर,02 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। कोरिया सूरजपुर जिले के सरहद पर एनएच 43 से कई गांवों को जोड़ने वाला गोबरी नदी पर स्थित पुल 20 साल 2 महीने में ही ध्वस्त हो गया,आवागमन बाधित हो गया है और नेशनल हाईवे से जुड़ने वाले ग्रामों का संपर्क भी टूट गया है वही सूरजपुर प्रशासन ने उस पुल पर आवागमन को पूरी तरीके से रोक लगा दिया है और सेतु विभाग को इसके लिए अलर्ट कर दिया गया है,और तत्काल पुल को बनाने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है पर पुल को बनने में काफी समय लगने वाला है क्योंकि बरसात के बाद ही काम शुरू होगा ऐसी जानकारी आ रही है ऐसे में नेशनल हाईवे से जुड़ने वाले गांव को अब लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। वहीं इस पुल के टूटने की वजह से एक सवाल यह भी उत्पन्न हो गया है कि आखिर सरकारी तंत्र में होने वाले निर्माण कुछ सालों में ही क्यों खराब हो जाते हैं धराशाई हो जाते हैं वहीं अंग्रेजों के समय बने पुल आज भी मजबूती के साथ खड़े हैं जो आजादी के पूर्व बने हुए हैं।
सत्ता में रहकर भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि खुद को निर्वाचित करने वाले आम लोगों के हित मामले में समझौता क्यों होने देते हैं?
शासन और शासकीय विभागों द्वारा जो भी निर्माण कार्य कराया जाता है वह उस जनता के लिए होता है जो सरकार बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाती है,सरकार में बैठे सत्ताधारी निर्वाचित जनप्रतिनिधि जनता द्वारा ही निर्वाचित होते हैं जनता के लिए निर्वाचित होते हैं। जनता के द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि जनता के हित मामलों में क्यों समझौता होने देते हैं यह बड़ा सवाल है। जनता की सुविधाओं और उनकी जरूरतों का ध्यान निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को रखना चाहिए लेकिन ऐसा होता प्रतीत नहीं होता है और जनता से जुड़े ऐसे निर्माण कार्यों में जमकर भ्रष्टाचार देखने को मिलता है जो उन्हें सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से निर्मित किया जाता है।

अपने घरों को लंबी आयु प्रदान करने वाले ठेकेदार और निर्माण एजेंसियां भ्रष्टाचार के भरोसे सुरक्षित आशियाने में…आम जन नदी-नाला लांघकर जाने मजबूर
वैसे शासकीय निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी निभाने वाले ठेकेदार और निर्माण एजेंसियां अपने लिए लंबी आयु वाले आशियाने तैयार करती हैं करते हैं वहीं वह शासकीय निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार के दम पर ऐसा कर पाते हैं और खुद के लिए आलीशान महल तैयार कर लेते हैं और वहीं वह जो शासकीय निर्माण आम लोगों की सुविधा के लिए करते हैं उसका जिम्मा पाते हैं उसमें जमकर भ्रष्टाचार करते हैं और वह जल्द धराशाई हो जाता है और आम लोग नदी नाला लांघकर घर तक आना जाना करने मजबूर हो जाते हैं। ताजा उदाहरण ऐसा ही है,निश्चित ही इस पुल के निर्माता और इसके लिए जिम्मेदार रहे अधिकारियों का अपना आशियाना मजबूत होगा आज भी और आगे भी मजबूती से खड़ा रहेगा वहीं यह पुल धराशाई हो गया और लोग नदी लांघकर आना जाना करने मजबूर हैं।
20 वर्ष में ही पुल हुआ धराशाई… भाजपा शासनकाल में हुआ था पुल का निर्माण
राष्ट्रीय राज्यमार्ग 43 पर कोरिया जिले के ग्राम डुमरिया से लगा हुआ एक पुल जो राष्ट्रीय राज्य मार्ग से सुरजपुर जिले के ग्रामों को जोड़ते हुए कोरिया जिले के भी कुछ ग्रामों को जोड़ता है वह पुल धराशाई हो गया जिसपर आवागमन बंद करने का भी आदेश जिला प्रशासन सुरजपुर ने जारी कर दिया। उक्त पुल का निर्माण 20 वर्ष पहले तत्कालीन भाजपा सरकार द्वारा कराया गया था और इसे तब एक महत्वपूर्ण उपलब्ध बताकर प्रस्तुत किया गया था,उक्त पुल के धराशाई होने से पुल के कारण मुख्य मार्ग से जुड़ने वाले ग्राम अब सीधे तौर पर मुख्य मार्ग से कट गए और अब उन्हें लंबी दूरी तय करके मुख्य मार्ग तक पहुंचना होगा,पुल का निर्माण 20 वर्ष पूर्व हुआ था और यह आज धराशाई है,भ्रष्टाचार नहीं हुआ होता पुल धराशाई नहीं होता यह कहना गलत नहीं होगा।
हजारों लोगों का मुख्य सड़क से सीधा संपर्क टूटा,अब आपातकाल के समय भी ग्रामीणों को होगी परेशानी
उक्त पुल सुरजपुर जिले सहित कोरिया जिले के कई ग्रामों तक एक प्रमुख मार्ग का पुल था जो राष्ट्रीय राज्यमार्ग से सुरजपुर सहित कोरिया जिले के कई ग्रामों को सीधा जोड़ता था,उक्त पुल के धराशाई होने से अब हजारों लोगों का मुख्य मार्ग से सीधा संपर्क टूट गया है। अब आपातकाल की किसी स्थिति में जैसे स्वास्थ्य जैसे आपातकालीन मामलों में इस पुल से सीधे मुख्य सड़क तक पहुंचने वाले हजारों ग्रामीणों को कई किलोमीटर घूमकर मुख्य सड़क तक पहुंचना होगा। कुल मिलाकर अब इस पुल से लाभान्वित हजारों लोग लंबे समय तक कष्ट झेलेंगे और उन्हें कब मुख्य सड़क से जोड़ने वाला यह पुल बनकर वापस मिलेगा यह अभी बिलकुल स्पष्ट नहीं है।
क्या पुल की आयु 20 वर्ष ही तय थी निर्माण के समय,यदि यह सही है क्यों नहीं फिर पूर्व में ही नया पुल स्वीकृत कर बनाया गया?
सेतु निर्माण विभाग द्वारा क्या इस पुल की आयु 20 वर्ष निर्धारित थी? यह एक सवाल है जिसका जवाब सेतु निर्माण विभाग को देना चाहिए,वहीं यदि 20 वर्ष या उससे कम आयु निर्धारित थी पुल की सेतु विभाग ने क्यों नहीं अब तक नए पुल का निर्माण कर लिया था जिससे आज जैसी स्थिति निर्मित न होने पाए। मामला लापरवाही का भी है और मामला भ्रष्टाचार का भी है और अब इनमें से कौन सा मामला बिल्कुल सही है यह पुल की निर्माण के समय की आयु ज्ञात होने पर पता चल सकेगी। पुल का निर्माण जब हुआ ग्रामीण मुख्य सड़क से जुड़ सके थे वहीं जब यह पुल धराशाई हुआ अब कोई विकल्प सीधा नहीं है जिससे ग्रामीण मुख्य सड़क से जुड़ सकें और यह मामला गंभीर है और विभागीय उदासीनता जनसरोकार मामले से दर्शाता है।
शासकीय विभागों द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों की आयु आखिर क्यों लंबी नहीं होती,क्यों सरकारें इस ओर ध्यान नहीं देती?
शासकीय विभागों द्वारा कराए जा रहे और कराए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता उनकी आयु को कम कर देती है,यदि निर्माण के समय ही गुणवत्ता पर ध्यान शासकीय विभाग देने लगें निर्माण कार्यों की आयु लंबी होगी, अब क्यों शासकीय विभाग और उन विभागों के जिम्मेदार लोग निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देते यह बड़ा सवाल है। वैसे इसके पीछे की मुख्य वजह भ्रष्टाचार है और भ्रष्टाचार की वजह से ही आज निर्माण कार्यों की आयु घटती जा रही है,वैसे वर्तमान में जारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता तो और भी खराब सामने आ रही है और आने वाले समय में निर्माण कार्यों की आयु केवल कुछ वर्ष मात्र होगी ऐसा देखने को मिलना आम होगा।


Share

Check Also

अम्बिकापुर@यूजीसी नियमों के खिलाफ स्वर्ण समाज का ऐलान,1 फरवरी को अंबिकापुर बंद

Share अम्बिकापुर,29 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। यूजीसी के नए नियमों के विरोध में प्रस्तावित 1 फरवरी …

Leave a Reply