- आम आदमी को कानून का पाठ सिखाने वाली पुलिस दंड देनी वाली पुलिस नेताओं के मामले मौन क्यों?
- क्या कोरिया जिले की पुलिस हुटरबाज नेताओं पर करेगी कार्यवाही,क्या नेताओं की गाडि़यों से उतरेगा हूटर,लगेगा जुर्माना?
- त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों की गाडि़यों में हूटर लगाया जाना और बेवजह बजाया जाना आम,पुलिस कार्यवाही का भी नहीं खौफ?
- पुलिस भी नेताओं के मामले में मौन,आम गरीब इंसान की छोटी सी भी यातायात गलती पर हजारों जुर्माना लगाने केवल तत्पर
- क्या कोरिया जिले के उन नेताओं की गाडि़यों पर पुलिस करेगी चालानी कार्यवाही जिनमें लगा है अवैध रूप से हूटर?
- हूटर लगाने का अधिकार केवल इमरजेंसी सेवाओ में एम्बुलेंस,फायरब्रिगेड,पुलिस को,अन्य को हूटर बेचने वाले दुकानों पर फिर क्यों नहीं होती कार्यवाही?
- क्या नेता खुद उतारेंगे अपनी गाडि़यों से हूटर या पुलिस करेगी चालानी कार्यवाही या फिर हूटरों वाले वाहनों की संख्या और बढ़ेगी?
- जिला पंचायत अध्यक्ष,जनपद अध्यक्ष,उपाध्यक्ष, जनपद सदस्य सभी की गाडि़यों में लगे हैं हूटर,पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
-रवि सिंह-
कोरिया,01 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। क्या नेताओं ने खुद को कानून से ऊपर मान लिया है, क्या कानून की धज्जियां उड़ाना अपने रुतबे के लिए धज्जियां उड़ाना उनके लिए आम बात है और यह उनकी आदत बन चुकी है? यह सवाल इसलिए खड़ा हो रहा है क्योंकि आजकल कोरिया जिले के निर्वाचित वर्तमान जनप्रतिनिधि और पूर्व में निर्वाचित रह चुके जनप्रतिनिधि अपने रुतबे के लिए उसके प्रदर्शन के लिए कानून तोड़ते नजर आ रहे हैं और वह कानून से खुद को ऊपर मानने लगे हैं। कोरिया जिले में कानून से खुद को ऊपर मानने का जनप्रतिनिधियों का प्रदर्शन गाडि़यों के हूटर मामले में सामने नजर आ रहा है और लगातार देखने को मिल रहा है कि पूर्व में निर्वाचित रह चुके नेता हों या वर्तमान में निर्वाचित जनप्रतिनिधि सभी अपनी गाडि़यों में हूटर लगाकर चल रहे हैं और केवल वह लगाकर ही हूटर गाडि़यों में नहीं चल रहे हैं वह हूटर बजाकर अपने रुतबे का प्रदर्शन भी कर रहे हैं। हूटर लगाने का कानूनी रूप से अधिकार केवल पुलिस, एंबुलेंस और फायरब्रिगेड सेवाओं के लिए है, आम व्यक्ति या अन्य को गाडि़यों में हूटर लगाने की अनुमति नहीं है कानूनन और ऐसा करने पर दंड का भी आर्थिक प्रावधान है,लेकिन कोरिया जिले के नेताओं ने जैसे कानून तोड़ने की और खुद को कानून से ऊपर मानने की ठान ली है और वह हूटर लगाकर ही चल रहे हैं जिसे वह बजा भी रहे हैं।
वैसे नेताओं के मामले में कानून का राज स्थापित करने की जिम्मेदारी निभाने वाली जिले की पुलिस मौन है और उन्हें मनमानी करने की और उन्हें कानून की धज्जियां उड़ाने की आजादी दे रखी है पुलिस ने। जिले की जो पुलिस सुबह से शाम तक जिले के आम लोगों को कानून का पाठ पढ़ा रही है आम लोगों को यातायात का पाठ भी पढ़ा रही है लगातार यातायात मामले में आम लोगों पर चालानी कार्यवाही कर रही है वह नेताओं के मामले में मौन है और उन्हें कानून तोड़ने की छूट दे रही है। आज जिले के जिला पंचायत अध्यक्ष,उपाध्यक्ष,जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष,जनपद सदस्य, यहां तक कि पूर्व विधायक की गाडि़यों में हूटर नजर आ रहा है जो बजाया भी जा रहा है लगातार। क्या जिले की पुलिस आम लोगों को ही लेकर कानून का राज स्थापित कर लेगी या फिर उसे नेताओं को भी कानून का पाठ पढ़ाना होगा?
पुलिस भी नेताओं के मामले में मौन,आम लोगों के लिए पुलिस नियम मामले में प्रतिबद्ध
पुलिस भी नेताओं को मामले में मौन धारण कर लेती है,आम लोगों को दिनभर जो यातायात पुलिस सुबह से लेकर शाम तक यातायात का पाठ पढ़ाती है कानून का पाठ पढ़ाती है,यातायात नियम तोड़ने पर अर्थ दंड से दंडित करती है वह पुलिस नेताओं के द्वारा कानून तोड़ने पर यातायात नियम तोड़ने पर मौन रहती है। पुलिस नेताओं और आम लोगों को लेकर अलग-अलग व्यवहार करती नजर आती है,आम लोगों के लिए यातायात का अलग नियम जहां दंड का आर्थिक वह प्रावधान करती है वही नेताओं के मामले में वह मौन हो जाती है। यदि पुलिस नियम कायदों के प्रति सजग है और कानून का राज स्थापित करना उसकी प्रतिबद्धता है तो उसे नेताओं के मामले में भी नियम तोड़ने पर कार्यवाही का प्रावधान करना चाहिए भले ही वह नेता कितना भी बड़ा क्यों न हो।
क्या नेताओं की गाडि़यों से निकाले जाएंगे हूटर,या नेताओं को गैर कानूनी तरीके से हूटर लगाने की रहेगी आजादी?
सवाल यह है कि क्या नेताओं की गाडि़यों में लगे हूटर हटाए जाएंगे, क्या उन्हें आर्थिक दंड की भरपाई करनी होगी या वह अब भी हूटर वाले मामले में आजाद होंगे और हूटर लगाकर चलेंगे और बजाएंगे भी? वैसे कोरिया पुलिस का खबर प्रकाशन उपरांत क्या निर्णय होता है क्या वह इस मामले में पूरी संज्ञानता दिखाते हुए गंभीरता दिखाते हुए हूटर हटवाने की कार्यवाही करती है या फिर मामले में मौन रह जाती है यह देखने वाली बात होगी। नेताओं की गाडि़यों से हूटर निकालने की क्या कार्यवाही खुद जाकर की जाती है उनकी गाडि़यों को लेकर चालानी कार्यवाही की जाती है या उन्हें सूचित कर हूटर निकलवाया जाता है यह भी देखने वाली बात होगी। वैसे इस मामले में आने वाले दिनों में यह पता चल सकेगा कि कोरिया पुलिस कानून मामले में कितना निष्पक्ष है और वह आम और नेताओं के लिए अलग अलग भाव नहीं रखती यह भी समझ में आएगा यदि हूटर मामले में कार्यवाही होती है।
समाज सेवा सेवा करना है या फिर क्षेत्र में भोकाल बनाना है?
नेताओं को जनता से सेवा के लिए अपने चुना है और नेता हैं कि अपना भौकाल बनाने में लगे हैं। निर्वाचित होते ही नई महंगी गाड़ी और उसके बाद उसमें सायरन हूटर लगाना एक परम्परा बन गई है। नेताओं की भौकाल देखकर जनता भी आश्चर्य में है कि पैदल चलकर वोट मांगने आने वाला बड़े बड़े वादे करके हर दुख समस्या का हरण करने की कसमें खाने वाला कुर्सी पाते ही खुद के शानो शौकत में ही लीन हो गया। गाडि़यों का शौक और हूटर सायरन की उसकी चाहत जनता से बड़ी हो गई और वह जनता से खुद को ऊपर मान बैठा।
हूटर बेचने वालों पर आखिर क्यों नहीं होती कार्यवाही?
वैसे गाडि़यों में हूटर नेताओं के द्वारा दुकानों से लगवाया जाता है वह भी उन दुकानों से जिन्हें वाहनों के साज सज्जा के लिए जाना जाता है। दुकानों के संचालकों को भी मालूम है कि हूटर का उपयोग करना हर किसी के लिए जायज नहीं यह कानून तोड़ने का कारण बनने वाला विषय बन सकता है ऐसे में वह अपने दुकानों में हूटर क्यों रखते हैं क्यों नेताओं को बेचते हैं यह भी एक सवाल है। क्या इन दुकानदारों पर कार्यवाही होगी जो हूटर लाकर जिले के लोगों को उसके प्रति आकर्षित कर रहे हैं। पुलिस को भी दुकानों को निर्देशित करना चाहिए कि वह हूटर मामले में ध्यान दें कि केवल इसका उपयोग आवश्यक सेवाओं के लिए हो रुतबा बघारने के लिए नहीं।
सायरन बजाकर रोड पर नियम विरुद्ध क्या जनप्रतिनिधियों को गाड़ी दौड़ना शोभा देता है…
सायरन का उपयोग वैसे तो अनिवार्य सेवाओं और मामले में किए जाने का नियम है और इसके अंतर्गत पुलिस,फायरब्रिगेड,एंबुलेंस शामिल हैं जिन्हें इसकी आजादी है क्योंकि यह सेवाएं अनिवार्य हैं और कई बार इन सेवाओं में सायरन का उपयोग इसलिए आवश्यक हो जाता है क्योंकि सायरन से आम लोग समझ सकें कि इन सेवाओं से जुड़े वाहन रास्ते से गुजर रहे हैं और उन्हें रास्ता देना खाली करना रास्ता आवश्यक है जिससे किसी की या अनगिनत जान बच सके या कहीं की कानून व्यवस्था की बिगड़ी स्थिति तत्काल स्थिर की जा सके। नेताओं का अपने गाडि़यों में हूटर लगाना सायरन बजाना अनिवार्य सेवा मामले से जोड़ना अनुचित है, नेताओं की गाडि़यों में हूटर इसलिए भी सही नहीं माना जाता क्योंकि वह जनता के लिए जनता द्वारा चुने लोग हैं और उनके बीच खास बनकर जाना या उन्हें रास्ता खाली करने मजबूर करना सर्वथा अनुचित माना जाएगा। नेताओं को तो आम लोगों के लिए रास्ता खाली करवाने और उन्हें सुविधा दिलाने जिम्मेदारी मिली हुई है वही यदि सायरन बजाते लोगों को रास्ते से किनारे करते निकल जायेंगे फिर आम लोगों की सुनवाई कौन करेगा।
पूर्व कांग्रेस विधायक की गाड़ी का हूटर भी अभी तक नहीं उतरा
बैकुंठपुर की पूर्व विधायक के गाड़ी का भी हूटर गाड़ी में लगा नजर आता है। पद गया चुनाव हार गईं लेकिन लोगों के बीच खास बनने और अपना रुतबा दिखाने का उनका शौक खत्म होता नजर नहीं आता। जनता ने पहले अर्श पर पहुंचाया तब भी हूटर नजर आया गाड़ी में और अब जब जनता ने फर्श पर ला पटका तब भी हूटर गाड़ी का नहीं उतरा,कुल मिलाकर सत्तापक्ष विपक्ष सभी दलों में हूटर प्रेमी नेताओं की भरमार है जो आम लोगों के बीच उनसे समर्थन प्राप्त कर उनकी सेवा के नाम पर निर्वाचित होते हैं और जैसे ही निर्वाचित हुए वह खुद को खास बना लेते हैं और आम लोगों को रास्ते से हटाने वह हूटर लगाकर गाड़ी में चलने लगते हैं।
क्या आज के समय के नेताओं में कानून पालन करने की जिम्मेदारी का आभाव है,नियम तोड़ना ही नेता की पहचान है?
वैसे नेताओं का आजकल व्यवहार और उनकी कार्यप्रणाली ऐसी नजर आती है जिसमें कानून पालन करने वाली जिम्मेदारी का आभाव नजर आता है,नियम तोड़ना कानून के विरुद्ध कार्य करना आदत सी नेताओं की बनती जा रही है वहीं नेताओं के मामले में कानून पालन के लिए लोगों को सजग करने वाली पुलिस भी मौन हो जाती है, कुल मिलाकर नेताओं के मामले में ऐसे उदाहरण सामने आ रहे हैं कि वह कानून को लेकर निडर हो चुके हैं और वह लगातार नियम तोड़ते नजर आते हैं। हूटर सायरन का मामला भी ऐसा ही है।
पूर्व विधायक की गाड़ी का नेमप्लेट भी अजीब, पूर्व शब्द इतना छोटा की जल्द नजर न आए…
पूर्व विधायक बैकुंठपुर की गाड़ी में हूटर तो लगा ही है वहीं उनकी गाड़ी का नेमप्लेट भी चर्चा का विषय बना हुआ है,नेमप्लेट में विधायक शद बड़े अक्षरों में लिखा हुआ है वहीं पूर्व शद का आकार इतना छोटा है कि वह जल्द नजर नहीं आता, पद जाने के बाद भी पदमोह का यह उदाहरण पूर्व विधायक की पद लालसा साबित करता नजर आता है।
गाडि़यों में हूटर नेताओं के लिए रुतबे का सवाल
नेताओं की गाडि़यों में हूटर इसलिए लगाया जाता है उनके द्वारा क्योंकि वह इसे अपने रुतबे से जोड़कर देखते हैं। निर्वाचित होने के उपरांत अपना रुतबा जगह जगह आम लोगों के बीच जताने के लिए नेता अपने गाडि़यों को आम लोगों की गाडि़यों से अलग दिखाने की चाहत रखते हैं और वह हूटर लगाकर चलने को रुतबेदार काम मानते हैं। खैर जनता ने इन नेताओं को अपने हक अधिकार को आसानी से सुलभ उपलब्धता कराने के लिए निर्वाचित किया हैं वहीं यह नेता उन्हीं जिन्होंने इन्हें निर्वाचित किया है उस जनता के सामने अपना रुतबा बघारने हूटर लगाकर चलते हैं और खुद को बेहद खास साबित करने का प्रयास करते हैं। नेताओं का हूटर जनता को दिखाने जताने के लिए केवल होता है जो समझ में आता है क्योंकि इसका उपयोग दिखावे के अलावा कुछ भी नहीं।
हूटर बेचने वालों पर आखिर क्यों नहीं होती कार्यवाही?
वैसे गाडि़यों में हूटर नेताओं के द्वारा दुकानों से लगवाया जाता है वह भी उन दुकानों से जिन्हें वाहनों के साज सज्जा के लिए जाना जाता है। दुकानों के संचालकों को भी मालूम है कि हूटर का उपयोग करना हर किसी के लिए जायज नहीं यह कानून तोड़ने का कारण बनने वाला विषय बन सकता है ऐसे में वह अपने दुकानों में हूटर क्यों रखते हैं क्यों नेताओं को बेचते हैं यह भी एक सवाल है। क्या इन दुकानदारों पर कार्यवाही होगी जो हूटर लाकर जिले के लोगों को उसके प्रति आकर्षित कर रहे हैं। पुलिस को भी दुकानों को निर्देशित करना चाहिए कि वह हूटर मामले में ध्यान दें कि केवल इसका उपयोग आवश्यक सेवाओं के लिए हो रुतबा बघारने के लिए नहीं।
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