- ऐसा ही कुछ नगर निगम चिरमिरी का हुआ है हाल,महापौर एहसान तले दबकर मौन हैं,भ्रष्टाचार चरम पर है…
- क्या चिरमिरी नगर निगम की नई सरकार बनने के 3 महीना के अंदर ही हुआ 32 करोड़ का घोटाला?
- क्या की गई अनावश्यक खरीदी और निगम पर बढ़ाया गया बोझ?
- एहसान मेरे दिल पे तुम्हारा है दोस्तों,अब इसके आगे मेरा मुंह बंद है,एहसान के बदले मनमानी की आजादी है दोस्तों…
- सरकार हमारी है इसलिए बताने में भी शर्म आ रही है:चंदन गुप्ता
- चिरमिरी नगर निगम में एहसान बताने और चुकाने के बीच भ्रष्टाचार चरम पर?
- निगम में महापौर और पार्षदों से ऊपर हैं ठेकेदार,निर्णय लेने का अधिकार ठेकेदारों के पासःसूत्र
- ठेकेदारों की मंजूरी के बिना अपनी निधि भी नहीं खर्च कर सकते पार्षद,निधि खर्च करने का अधिकार भी ठेकेदारों के पासःसूत्र
- 32 करोड़ रुपए का हुआ बंदरबाट,ठेकेदार मस्त निगम के जनप्रतिनिधि और निगम वासियों का हाल बेहाल


-रवि सिंह-
एमसीबी/चिरमिरी,26 जून 2025 (घटती-घटना)। एमसीबी जिले का एकमात्र नगर निगम अब भ्रष्टाचार के लिए प्रसिद्ध नगर निगम साबित होता जा रहा है, पूर्व के बीते पंचवर्षीय कार्यकाल की बात की जाए या वर्तमान में चल रहे नव निर्वाचित नगर निगम जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल की बात की जाए भ्रष्टाचार की बात और उसी की चर्चा सबसे ज्यादा है और इस समय भ्रष्टाचार को लेकर सत्ताधारी दल के लोग ही मुखर हैं जो निगम के निर्वाचित सत्ता दल के ही लोग हैं, बताया जा रहा है कि नगर निगम चिरमिरी में सबकुछ अच्छा नहीं चल रहा है, नगर निगम चिरमिरी में सत्ताधारी दल के ही लोग अब भ्रष्टाचार की बातें उजागर करने लगे हैं और उन्हीं के साथ नगर निगम क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ता भी अब निगम में जारी भ्रष्टाचार की पोल खोलते सुने जा रहे हैं जो काफी चौंकाने वाला मामला है जो यदि सही है तो यह माना जाएगा कि निगम में विकास और जनसरोकार की बात विगत कई वर्षों से जो बंद है वह अब आगे भी बंद रहने वाली है और इसका खामियाजा निगम के रहवासी उठाने मजबूर होंगे जो नई सरकार निगम की चुनकर मान बैठे थे कि पूर्व की भ्रष्ट निगम सरकार से यह सरकार बेहतर होगी जो उनकी सुनेगी और उनके बेहतरी के लिए बेहतर कुछ करेगी। निगम के अंदर जारी चर्चा के अनुसार जो जानकारी सामने आई है उसमें बताया जा रहा है कि केवल 6 माह के ही कार्यकाल में नई निगम सरकार के कार्यकाल में लगभग 32 करोड़ की स्वीकृति नगरीय प्रशासन विभाग से निगम को प्राप्त हुई जिसका निगम के हित में निगम क्षेत्र के रहवासियों के हित में खर्च न करते हुए बंदरबाट कर लिया गया। सूत्रों और निगम के अंदर के लोगों द्वारा प्रदान की गई जानकारी के अनुसार 32 करोड़ में से 15 करोड़ की राशि बंदरबाट कर ली गई, यह राशि कैसे बंदरबाट की गई यह भी चर्चा जारी है और चर्चा अनुसार जो राशि निगम क्षेत्र के विकास या अन्य निगम के आवश्यक ज़रूरतों के लिए जिसमे निगम के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का वेतन भुगतान शामिल है के लिए खर्च करते हुए एक बेहतर मिशाल निगम की नई सरकार साबित कर सकती थी उस राशि के अधिकांश भाग से बेवजह की खरीदी कर ली गई और खरीदी भी केवल कमीशन के लिए की गई, घटिया और अनावश्यक खरीदी हुई वहीं पूरी राशि खर्च कर अब नए आबंटन शासन से जारी होने की बाट जोह रहे हैं जिम्मेदार।
70 लाख से अधिक मूल्य के कई नए ट्रैक्टरों की खरीदी में ठेकेदारों का अहम किरदार,ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने मात्र हुई खरीदी
निगम के लिए 70 लाख मूल्य के 5 ट्रैक्टरों की खरीदी हुई है,वैसे यह मूल्य बाजार मूल्य से अधिक होगी और सभी का कमीशन ठेकेदार का लाभ इसमें शामिल होगा यह कहना गलत नहीं होगा,वैसे केवल ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए ट्रैक्टरों की खरीदी हुई है,ट्रैक्टरों की आवश्यकता भी नहीं बताई जा रही है वहीं यदि वर्तमान कर्मचारियों को ही वेतन नहीं दे पा रहा है निगम तो नए ट्रैक्टरों के लिए जो चालक रखे जायेंगे उन्हें वेतन कहां से मिलेगा इस हिसाब से भी ट्रैक्टरों की खरीदी जरूरत नहीं भ्रष्टाचार के लिए मानी जा रही है। वैसे बताया जा रहा है कि ट्रैक्टर खरीरी में ठेकेदार और मंत्री जी का अहम किरदार था और निगम के निर्वाचित पार्षदों से इसके लिए राय मशवरा भी नहीं किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री का नाम हो रहा बदनाम,स्वास्थ्य मंत्री को सामने आकर देना चाहिए खंडन स्वरूप बयान
चिरमिरी नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार और ठेकेदारों के हाथों निगम की कमान मामले में स्वास्थ्य मंत्री का नाम बदनाम हो रहा है,सूत्रों का कहना है कि ठेकेदार सीधे सीधे यह कहते सुने जा रहे हैं कि महापौर और पार्षदों का टिकट से लेकर उनकी जीत तक का जिम्मा मंत्री जी का था इसलिए निगम के संबंध में कोई भी निर्णय वही लेंगे यह मंत्री जी का निर्देश है,अब यदि यह ठेकेदारों का बयान सही है तो कोई बात नहीं लेकिन यदि गलत है तो मंत्री जी को सामने आकर इसका खंडन करना चाहिए और ठेकेदारों का निगम प्रवेश बन्द करना चाहिए, ठेकेदारों के कारण भाजपा पार्षद शोषण का शिकार हो रहे हैं और वह अपने निर्वाचन को ही अब बेमाने बता रहे हैं।
भाजपा में आखिर क्या हो रहा है,सुशासन के नाम पर भ्रष्टाचार क्या नया सुशासन तरीका?
भाजपा अनुशासित और संगठित पार्टी मानी जाती है,वहीं चिरमिरी नगर निगम में ऐसा बिल्कुल नजर नहीं आ रहा है,सुशासन की जगह निगम में भ्रष्टाचार मचा है और ठेकेदारों का राज मंत्री जी की तरफ से स्थापित है निगम में ऐसा खुद ठेकेदार कहते सुने जा रहे हैं, क्या सुशासन वाली प्रदेश सरकार का यह नया सुशासन तरीका है यह भी एक सवाल खड़ा हो रहा है।
डीआई की जगह जीआई पाइप से होगी पानी सप्लाई,इसमें भी हुआ भ्रष्टाचार
निगम में 25 लाख की राशि खर्च कर जल सप्लाई की व्यवस्था किए जाने की तैयारी है,बताया जा रहा है कि इसमें भी जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है,डी आई पाइप की जगह जीआई पाइप लगाया जा रहा है,जानकारों के अनुसार पाइप के निश्चित ब्रांड में बदलाव ही भ्रष्टाचार है और इससे लाखों रुपए जेब में ठेकेदार के जा सकेगा और ठेकेदार के माध्यम से अन्य को कमीशन मिल सकेगा। कुल मिलाकर निगम के लोगों को पीने का पानी भी भ्रष्टाचार किए जाने के बाद मिलेगा और पीने का पानी पहुंचाना जितना महत्वपूर्ण नहीं उतना उसके नाम पर अपनी जेबें गर्म करना उद्देश्य है।
स्ट्रीट लाइट मामले में भी हुआ है भ्रष्टाचार
बताया जा रहा है कि स्ट्रीट लाइट खरीदी में भी भ्रष्टाचार हुआ है और सबकुछ पहले की ही निगम सरकार की तर्ज पर चल रहा है जहां वैश्विक महामारी के दौरान सेनिटाइजर घोटाला किया गया था,स्ट्रीट लाइट जिस कंपनी का लगाया जाना था उसकी जगह सस्ते दर पर मिलने वाली स्ट्रीट लाइट लगाई जा रही है और अंतर की राशि आपस में बांट ली जा रही है,कुल मिलाकर केवल बंदरबाट की ही बातें सामने आ रही हैं।
क्या ट्रिपल इंजन सरकार तीन माह में ही असफल हो गई ?
चिरमिरी को स्थायित्व मिलेगा,चिरमिरी को पलायन का दंश नहीं झेलना होगा, चहुमुंखी विकास होगा और चिरमिरी पुनः पूर्व की तरह सुसज्जित होगी भ्रष्टाचार मुक्त होगी इसलिए चिरमिरी निगम में भाजपा की सरकार लाओ और ट्रिपल इंजन के साथ विकास की गति बढ़ाओ के नारे के साथ चिरमिरी का निगम चुनाव सम्पन्न हुआ था,वैसे चुनाव के बाद के तीन महीने जो बीते हैं वह कुछ और कहानी बयान करते हैं,तीन महीनों में चिरमिरी का हाल बेहाल है निगम में ठेकदारों का राज है महापौर पार्षद गुलामों की तरह ठेकेदारों पर आश्रित हैं यहां तक कि लेटरहेड हस्ताक्षरित उन्हें ठेकेदारों को सौंपना पड़ रहा है और ठेकेदार जो मंत्री जी का खुद को खास बताते हैं उन्हें चेक भी सौंपना पड़ रहा है,निगम के उन वार्डो की हालत खस्ता है जहां भाजपा के पार्षद हैं क्योंकि पार्षद निर्णय लेने स्वतन्त्र नहीं उन्हें ठेकेदार से पहले निवेदन करना है, कुल मिलाकर निर्वाचित जनप्रतिनिधि रबर स्टाम्प बना दिए गए हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या इस तरह तीन माह में ही ट्रिपल इंजन सरकार असफल हो गई,ठेकेदारों के हाथों उसने चिरमिरी का अगला पांच साल का भविष्य छोड़ दिया। लगता ऐसा ही है क्योंकि हाल बेहाल है कमीशन से निगम में भ्रष्टाचार का हाहाकार है।
क्या एहसान तले दबकर महापौर हुए मौन,अब वह पुनः अपनी वकालत करने निकलेंगे निगम से बाहर?
चिरमिरी निगम के महापौर अपने निर्वाचन मामले में एहसान तले दबे हुए हैं और यह एहसान टिकट प्राप्ति से लेकर चुनाव जीतने तक का एहसान है ऐसा वह मानते हैं और इसका वह सम्मान कर रहे है हैं ऐसी बातें सामने आ रही हैं,एहसान के कारण वह किसी भी मामले में निगम के मौन हैं वहीं वह एमआईसी की बैठक के लिए भी निर्णय लेने की अपने क्षमता अधिकार से वंचित हैं ऐसी भी जानकारी सामने आ रही है,अब सवाल यह है कि क्या एहसान मात्र का बदला पूरा करने वह पूरे पांच साल रबर स्टाम्प बनकर काम करेंगे,क्या वह अब निगम से दूर होकर पुनः अपनी वकालत करेंगे और उनका काम ठेकेदार संभालेंगे जो खुद को मंत्री जी की तरफ से निगम के लिए अधिकृत अधिकारी बताते फिर रहे हैं सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का लेटरहेड चेकबुक जत कर बैठे हैं,यह सवाल चिरमिरी के भविष्य से जुड़ा सवाल है और क्या चिरमिरी जिसके स्थायित्व और जिसके पलायन को रोकने की बात करके नई सरकार बनी थी वह ठेकेदारों के लिए समर्पित सरकार बन गई यह जवाब देना होगा।
निगम में भाजपा पार्षदों के नियंत्रण का जिम्मा भी ठेकेदारों के पास,स्व विवेक की बजाए ठेकेदारों के भरोसे होंगे पार्षद
निगम के भाजपा पार्षदों की स्थिति विपक्षी पार्षदों की अपेक्षा कम प्रभावशील है ऐसा भी बताया जा रहा है,निगम के भाजपा पार्षद ठेकेदारों के नियंत्रण में होंगे यह ऊपर से निर्देश है ऐसा बताया जा रहा जिसमें मंत्री जी का ही नाम आ रहा है वहीं ठेकेदार ही भाजपा के निगम पार्षदों की निधि भी खर्च करेंगे, पार्षद निधि का चेक ठेकदारों ने खुद रख लिया है जिसमे पार्षदों का हस्ताक्षर भी लिया जा चुका है ऐसा भी बताया जा रहा है,अब पार्षद जो निर्वाचित हैं जनता के द्वारा उनकी स्थिति समझी जा सकती है,निर्वाचित पर नियंत्रण ठेकेदार का जो वार्ड विकास का भी जिम्मा संभालेगा,वैसे यदि भाजपा को चिरमिरी में ठेकेदारों को ही सभी काम का जिम्मा देना था वह क्यों वहां चुनाव करवाई यह भी लोग कहते सुने जा रहे हैं। वैसे पार्षद भी मायूस हैं और अपनी मायूसी किसी से बयान नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि एक तरफ उनकी मंत्री आदेश पर मजबूरी है ठेकेदार के सामने नतमस्तक होने के लिए वहीं दूसरी तरफ ठेकेदारों से मिलने वाले कमीशन बतौर चिल्हर को वह छोड़ना शायद ही चाहेंगे। वैसे निगम चिरमिरी का हाल जो सामने है जो बताया जा रहा है वह ऐसा है जैसे इसी कार्यकाल में निगम को लूट डालना है। बताया यह भी जा रहा है कि पार्षदों का लेटरहेड भी ठेकेदारों ने हस्ताक्षर करवाकर अपने पास रख लिया है, जहां जहां लेटरहेड की जरूरत पड़ेगी वहां ठेकेदार ही लेटरहेड का उपयोग करेंगे पार्षदों को अपने ही लेटरहेड का उपयोग प्रतिबंधित है ऐसा सूत्रों का दावा है।
बेवजह की खरीदी…
मिल रही जानकारी के अनुसार निगम के द्वारा 5 नग नए ट्रेक्टर की खरीदी की गई,एक नई मशीन जेसीबी की तरह जेसीबी कंपनी से इतर कंपनी की खरीदी की गई जो केवल कमीशन के उद्देश्य से खरीदी गई जो इतनी आवश्यक नहीं थी कि उसके बिना काम रुक जाता और व्यय राशि से अन्य जरूरत पूरी की जा सकती थी,5 नग ट्रेक्टर की भी जरूरत नहीं थी क्योंकि निगम के पास पर्याप्त ट्रेक्टर है वहीं नए ट्रैक्टरों की संख्या बढ़ने से ड्राइवरों की संख्या भी बढ़ानी पड़ेगी जिससे निगम का आर्थिक बोझ बढ़ेगा,जानकारी देने वाले ने बताया कि निगम के पास पहले से ही जेसीबी मशीन है और जो मरम्मत के आभाव में पड़ा है और यदि केवल उन जेसीबी मशीनों की मरम्मत मात्र करा दी जाती निगम को नए मशीन की जरूरत नहीं पड़ती वहीं नई मशीन पर खर्च की गई राशि निगम के अन्य आवश्यक कार्यों के लिए सुरक्षित रह जाती।
32 करोड़ का मामला मंत्री जी के संज्ञान में?
निगम में जारी अनियमितताओं और निगम के अंदर की कारगुज़ारियों को लेकर सूचना देने वाले ने नाम न छापने के शर्त पर यह भी बताया कि कमीशन का खेल एक मंत्री के लिए खेला गया और खेल खेलने वाले भी उनसे जुड़े हुए लोग हैं। वहीं बताया जा रहा है कि निगम के महापौर और सभापति ने निगम के लिए नए आबंटन का भी प्रयास किया और नगरीय प्रशासन मंत्री से उनकी भेंट हुई लेकिन मंत्री ने उन्हें यह कहकर विदा किया कि जो राशि 32 करोड़ दी गई वह काफी थी और फिलहाल नए आबंटन की उम्मीद बेकार है। बताया जा रहा है कि मंत्री से मिलकर खाली हांथ लौटे महापौर और सभापति अब मंत्री के पास दोबारा जाने से भी करताने लगे हैं क्योंकि उन्हें भी आभास हो गया है कि 32 करोड़ का मामला मंत्री जी के संज्ञान में है। चिरमिरी नगर निगम जिसे लेकर जिसको लेकर नई सरकार बनने से पहले चुनाव के समय सत्ताधारी दल का वादा था कि चिरमिरी के स्थायित्व के लिए उसके विकास और जारी पलायन को रोकने के लिए नई सरकार बनने पर प्रयास किया जाएगा और ऐसा संभव कर दिखाया जायेगा वह मामला पुनः खटाई में पड़ चुका है नई निगम सरकार उसे भूल चुकी है वहीं पूर्व की तरह ही नई सरकार में भी भ्रष्टाचार मचा है शासकीय राशि का बंदरबाट जारी है।
सरकार हमारी है इसलिए बताने में भी शर्म आ रही है: चंदन गुप्ता

भाजपा के सच्चे समर्थक व कार्यकर्ता चंदन गुप्ता सोशल मीडिया पर पोस्ट करके चिरमिरी की यथा स्थिति की व्याख्या कर दी,उन्होंने लिखा कि सरकार हमारी है इसलिए बताने में भी शर्म आ रही है लेकिन जिम्मेदार नागरिक होने के नाते बताना भी जरूरी है, चिरमिरी नगर पालिक निगम में कुछ ठेकेदार ने अपने पद और रुतबे का इस्तेमाल कर भाजपा के नवनिर्वाचित 16 पार्षदों का सादे लेटर हैड में साइन करा कर ले लिया और उनके मद का इस्तेमाल अपने फायदे अनुसार कर रहा है, वहीं अनुभवी और जानकार पार्षदों ने लेटर हैड में साइन करके देने से किया इनकार,सूत्रों के अनुसार इस बात की जानकारी महापौर जी को भी नहीं है, अगर महापौर जी को इस बात की जानकारी है और उन्होंने अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं किया तो यह चिरमिरी के लिए दुर्भाग्य जनक है।
क्या चिरमिरी नगर निगम में माफियाओं ठेकेदार का राज है…क्या उनसे महापौर भी डरते हैं?
चंदन गुप्ता ने चिरमिरी की जनता के तरफ से एक बड़ा सवाल उठाकर वर्तमान भाजपा सरकार व ट्रिपल इंजन कि सरकार पर सवालिया निशान लगा दिया है उन्होंने जो सवाल किए हैं वह कहीं ना कहीं काफी महत्वपूर्ण है, उनका सवाल है कि क्या माफिया ठेकेदारों के हाथ में चिरमिरी की विकास? उनको जानकारी मिली है कि महापौर ने चिरिमिरी नगर निगम के 40 वार्डो को 13 जोन में बांटने की योजना बनाई थी,ताकि तेरह जरूरतमंद लोगों या कार्यकर्ताओं को काम मिल सके,पर दबंग ठेकेदारों ने ऐसा होने नहीं दिया। अभी जबकि वहां के इंश्योरेंस के नाम पर हुए घोटाले की जांच चल रही है, ऐसी स्थिति में निगम में इस तरह का कृत्य होना भ्रष्टाचार को और बढ़ावा दे रहा है। जिन पार्षदों ने लैक लेटर पैड पर साइन करके दिया है उन्हें भी विचार करना चाहिए कि वह जनता के प्रति जवाब दे हैं या किसी पावरफुल ठेकेदार के प्रति,हम सब जानते है कि क्षेत्र के विधायक और हमारे स्वास्थ मंत्री माननीय श्याम बिहारी जायसवाल जी एक साफ सुथरी छवि के नेता है और हमेशा अपने क्षेत्र एवं क्षेत्रवासियों के लिए चिंतित रहते है,स्वास्थ्य मंत्री जी से निवेदन है कि वे चिरमिरी नगर निगम को बचाने के लिए आगे आएं और जिन 16 पार्षदों के लैंक लेटर पैड साइन किया हुआ ठेकेदारों के पास है,उसे वापस निगम को दिलाए ताकि एक और बड़े भ्रष्टाचार को रोका जा सके और छत्तीसगढ़ सरकार एवं मंत्री जी के साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर लोगों का विश्वास बढ़ सके।
11 कचरा गाडि़यों को हरी झंडी का इंतेज़ार
निगम के अंदर की बात बताते हुए एक व्यक्ति ने बताया कि निगम में 11 कचरा गाडि़यों की खरीदी हुई थी,यह शायद पूर्व निगम सरकार के कार्यकाल की खरीदी थी वहीं इन गाडि़यों को हरी झंडी का इंतेज़ार है जो इसलिए नहीं दिखाई जा रही है क्योंकि गाडि़यों का परिवहन विभाग में पंजीयन नहीं है,ऐसा क्यों है यह विचारणीय है,वैसे इसके पीछे की वजह भी कमीशन खोरी है वहीं यदि गाडि़यां खरीदी हुई हैं भले ही पूर्व के कार्यकाल में खरीदी हुई है क्यों नहीं पंजीयन कराकर गाडि़यों का उपयोग किया जा रहा है यह एक गंभीर विषय है जो भ्रष्टाचार से जुड़ा है। वैसे बताने वाले ने बताया कि नई निगम सरकार चाहती वह वर्तमान में प्राप्त बजट से पंजीयन कराकर वाहनों का उपयोग करना शुरू करती लेकिन वर्तमान बजट का बंदरबाट करना ही मुख्य उद्देश्य था इसलिए कचरा गाडि़यों को लेकर कोई निर्णय सामने नहीं आया,कुल मिलाकर निगम में वही काम हो रहे हैं जो कमीशन वाले हैं अन्य काम जो जन सरोकार सुविधाओं से जुड़े हैं वह प्रतिबंधित हैं।
पार्षदों को स्पष्ट निर्देश,किसी भी वार्ड समस्या के लिए ठेकेदार से संपर्क कर करवाएं निराकरण
नगर निगम चिरमिरी को लेकर नई नई जानकारी सामने आ रही है बताया जा रहा है कि वार्ड पार्षदों को वार्ड के विकास और वार्ड की समस्याओं के लिए ठेकेदारों के अधीन रहना है उनपर निर्भर रहना है,कोई वार्ड पार्षद व्यक्तिगत कोई निर्णय या कोई मांग नहीं वार्ड के लिए कर सकता इसके लिए ठेकेदारों की सहमति की जरूरत है यह बताया जा रहा है। ठेकेदारों में बबलू शर्मा और राजू नायर मुख्य हैं जिन्हें पार्षदों के लिए प्रभारी नियुक्त किया गया है। पार्षद अपने वार्ड की समस्या निगम में बताने की बजाए ठेकेदारों को बताएंगे यह नई व्यवस्था निगम के लिए लागू है और यह मंत्री जी का निर्देश है यह भी बताया जा रहा है।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur