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बिलासपुर@ अब छत्तीसगढ़ में भी सुनाई देगी सफेद बाघ की दहाड़

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ग्वालियर से आएगा जोड़ा,यहां प्रजनन के बाद संख्या में होगी बढ़ोतरी
बिलासपुर,23 जून 2025 (ए)।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित राजीव गांधी प्राणी उद्यान से एक दुर्लभ सफेद बाघ को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित कानन पेंडारी जियोलॉजिकल पार्क भेजा जायेगा। इसके बदले ग्वालियर चिडि़याघर में देसी भालू, मादा लोमडियाँ और चौसिंघा हिरण लिए जाएंगे। यह अदान-प्रदान एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत किया जा रहा है। जिसका उद्देश्य विलुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण और प्रजनन को बढ़ावा देना है।
भारत के चिडि़याघरों में यह एक विशेष व्यवस्था है,जिसके तहत अलग-अलग चिडियाघरों के बीच जानवरों का आदान-प्रदान किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रजातियों की आनुवंशिक विविधता बनाये रखना और उनकी संख्या बढ़ाना है। जिस चिडि़याघर में किसी जानवर की संख्या अधिक होती है,उसे दूसरे चिडि़याघर में भेजा जाता है।
एक्सचेंज की क्या है व्यवस्था
राजीव गांधी प्राणी उद्यान के क्यूरेटर डॉ. गौरव परिहार के अनुसार,ग्वालियर चिडि़याघर में बाघों की संख्या अधिक है। साल 2011 से 2022 तक यहां 22 बाघों का जन्म हुआ, जिन्हें देशभर के विभिन्न चिडि़याघरों में भेजा गया। अभी भी यहां बाघों की संख्या संतुलन से अधिक है, इसलिए एक दो साल के सफेद बाघ के शावक को छत्तीसगढ़ भेजा जा रहा है।
सफेद बाघ देने के बदले में ग्वालियर को मिलेगा देसी भालू, मादा लोमडि़याँ (ग्वालियर में पहले से नर लोमड़ी मौजूद हैं, इसलिए प्रजनन के लिये मादायें लाई जा रही हैं) चौसिंघा हिरण (यह बारहसिंघा की एक प्रजाति है।
दोनों जगह होगा फायदा
सफेद बाघ दुर्लभ और आकर्षक प्रजाति मानी जाती है,जो पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होती है। ग्वालियर चिडि़याघर का यह सफेद बाघ लंबे समय से यहाँ की शान रहा है, लेकिन अब इसे छत्तीसगढ़ भेजकर नये मेहमानों के लिये जगह बनाई जा रही है। इस एक्सचेंज प्रोग्राम से दोनों चिडि़याघरों को फायदा होगा और जानवरों की प्रजातियों का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।


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