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कोरिया/अम्बिकापुर/एमसीबी/ सूरजपुर@अतिक्रमण करवा कर बसाया भी और अतिक्रमण हटाकर उजाड़ा भी…?

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-न्यूज डेस्क-
कोरिया/अम्बिकापुर/एमसीबी/ सूरजपुर,20 जून 2025 (घटती-घटना)।
इस समय वर्तमान सरकार में अतिक्रमण पर बुलडोजर कार्यवाही जारी है पर अतिक्रमण का असली दोषी कौन है? क्या इस बात पर चर्चा नहीं होनी चाहिए? अतिक्रमण कहां हुआ किस जगह पर हुआ? क्या जिस जगह पर अतिक्रमण हो रहा था उस समय उसे रोकने के लिए शासन के पास विभाग व कर्मचारी नहीं थे या फिर उसे रोकने वाला कोई नहीं था? या जिन्हें रखा गया था वह रोकने की जगह अतिक्रमण कर रहे थे? और विभाग के जिम्मेदार के रहते हुए जब अतिक्रमण भूमिहीन कर रहे थे तो फिर वह भी तो उतने ही गुनहगार हुए? जिन्हें शासन की जमीन बचाने का जिम्मा था उन्होंने शासन की जमीन पर लोगों को कब्जा करने दिया, अब जब कब्जा हो गया है तो अब उसे लोग उजाड़ रहे हैं,तोड़ रहे हैं और कार्यवाही करके अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, पर कार्यवाही तो उन पर भी होना चाहिए जिनके शासनकाल में या फिर जिनके कार्यकाल में जमीन पर कब्जा हुआ था, आखिर वह क्या कर रहे थे जिन्हें देखरेख का जिम्मा सौंपा हुआ था,अतिक्रमण दो तरह के लोग करते हैं एक तो जिनके पास कुछ नहीं है,रहने के लिए एक छोटा सा घर बना लेते हैं और एक वह है जो रसूखदार है और जमीनों पर कब्जा करें बैठे हैं,ऐसे लोगों में बड़े-बड़े नेता से लेकर मंत्री विधायक से लेकर प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारी भी शामिल है, बस फर्क इतना है की कार्यवाही करने की हिम्मत नहीं है,पर कार्यवाही वही होती है जहां लोग कमजोर व निरही होते है। शासकीय जमीन पर कब्जा नहीं होना चाहिए पर लोगों की गरीबी व मजबूरी व रहने की जगह पाने की चाह अतिक्रमण का रूप ले लेता है। अभी भाजपा सरकार में बुलडोजर की रफ्तार अतिक्रमण पर बहुत तेज है, ठीक है कार्यवाही हो रही है लोग परेशान हो रहे हैं, पर वह भी परेशान हों जिनके कार्यकाल में शासन की जमीन बची नहीं और उस पर लोगों ने अतिक्रमण कर लिया,सिर्फ दोषी अतिक्रमण करने वाला ही नहीं है अतिक्रमण करवाने वाला वह विभाग भी है जिनकी मौजूदगी में अतिक्रमण हुआ फिर कार्यवाही एक तरफ ही क्यों? जहां पर भी अतिक्रमण हटाए जा रहे हैं यह अतिक्रमण कोई आज के नहीं है कई सालों पुराने हैं जो भाजपा की पूर्व सरकार में भी हुए थे कांग्रेस के सरकार में भी हुए थे, और अतिक्रमण कर जमीन पर जहां रह रहे हैं वहां पर सरकार ने सुविधाएं भी दी थीं,उन लोगों से इसके बदले में वोट भी लिए थे,जब सारी चीज अवैध थी तो फिर वहां पर सुविधा क्यों दी जा रही थी? और आज जहां पर सुविधा सरकार ने दिया आज वही जगह अतिक्रमण का रूप ले लिया, क्या अब वोट बैंक की राजनीति नहीं हो रही या फिर अतिक्रमण करवाना वोट बैंक की राजनीति थी अब हटाना राजनीति से परे हो गया?
ज्ञात हो की कई जिलों अतिक्रमण तो हट गया,वर्षों तक नजरअंदाज करने वाले अफसर-कर्मचारियों पर जिम्मेदारी तय नहीं हुई और होगी भी कैसे? सरगुजा कोरिया, एमसीबी,सूरजपुर,बलरामपुर,इन सभी जिलों में अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई की गई लोगों को बेघर किया गया है, संरक्षित वनभूमि पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर भले ही वन विभाग ने अपनी जिम्मेदारी निभा ली हो,राजस्व विभाग, नजूल विभाग,लोक निर्माण विभाग सभी ने जहां जैसी जमीन थी वैसी अतिक्रमण की कार्यवाही, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बसाहट में सड़क, पानी, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं कैसे पहुंच गई? किसने यह सुविधाएं बहाल की। पहचान से जुड़े दस्तावेजों के अलावा शासकीय योजनाओं का लाभ मिलना कैसे शुरू हो गया? यह अतिक्रमण धीरे-धीरे और सुनियोजित तरीके से हुआ, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि वन विभाग, राजस्व विभाग,नगर निगम और बिजली कंपनी सहित तमाम शासकीय अमले ने वर्षों तक इसे नजरअंदाज किया। यह कैसे संभव हुआ कि वन,राजस्व,नजूल व शहर अधिकारी के बंगले बस्ती बसती रही और किसी ने ध्यान ही नहीं दिया? क्या यह सिर्फ अनदेखी थी या फिर इसमें कुछ कर्मचारियों को मौन सहमति भी शामिल थी? इस पूरे प्रकरण ने वन विभाग और अन्य संबंधित विभागों की कार्यशैली और निगरानी तंत्र की कमजोरी को उजागर कर दिया है। यदि समय रहते जिम्मेदार कर्मचारी सतर्क होते तो शायद अतिक्रमण इस स्तर तक नहीं बढ़ता। प्रशासन को चाहिए कि जिस तरह अतिक्रमण हटाने की तेजी दिखाई गई,उसी तरह निगरानी में चूक करने वाले कर्मचारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाए। अधिकारी भी यह मान रहे हैं कि यह चूक है यदि पहले ही निर्माण रोक दिया जाता तो अतिक्रमण हटाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
सरगुजा के अंबिकापुर में भी हुई कई अतिक्रमणों पर कार्रवाई…जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए सवाल
सरगुजा जिले के अंबिकापुर में भी अतिक्रमण को लेकर कार्यवाही की गई,कई जगह अतिक्रमण हटाए गए और कार्यवाही को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल भी उठे,जिन्हें कब्जे के आधार पर सभी सुविधाएं प्रदान की गईं उन कब्जेधारियों के कब्जे को ही प्रशासन ने हटा दिया,प्रशासन ने कई जगह कब्जा हटाया कई जगह नहीं भी हटाया कुल मिलाकर अवैध कब्जे को लेकर की गई कार्यवाही प्रशासन के लिए एक सवालिया निशान छोड़ गई। बताया जाता है कि यहां भी कई रसूखदार बच गए और छोटे लोग इस कार्यवाही की जद में आ गए।

सूरजपुर बलरामपुर में भी कई जगहों पर अतिक्रमण पर कार्रवाई होने की जानकारी सामने आई
सुरजपुर बलरामपुर जिले के भी कई जगहों से कब्जा हटाए जाने को लेकर सूचनाएं सामने आईं। सभी जगह वर्षों से रहने वाले या कब्जा करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही की गई। सभी को पहले सुविधाएं प्रदान की गईं और फिर उनका आशियाना ढहा दिया गया। जितने भी अतिक्रमण पर कार्यवाही हुई उसमें एक चीज सामान्य थी सभी जगह पर अतिक्रमण होने दिया गया और सुविधाएं भी पहुंचाई गई…अब कार्यवाही कर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं या सरकार की फजीहत कर रहे हैं अधिकारी?
जहां जहां अवैध कब्जे को लेकर कार्यवाही की गई सभी जगह एक बात एक जैसी रही,सभी जगह पहले कब्जा होने दिया गया फिर उन्हें सुविधाएं प्रदान की गईं और उसके बाद उन्हें वर्षों बाद हटा दिया गया। वर्षों से जो लोग कब्जा कर रोजीरोटी चला रहे थे अपने घर का वह अब सड़कों पर आ गए हैं और अब उनके पास आजीविका की समस्या खड़ी हो गई है।
कब्जाधारी को कांग्रेस शासन की तरह पैसे लेकर उन्हें पट्टा सरकार को दे देना चाहिए था इससे राजस्व भी आता और सरकार की फजीहत भी नहीं होती…
सभी कब्जाधारियों को वर्तमान सरकार के द्वारा कांग्रेस शासनकाल की तरह कब्जे के आधार पर जमीन प्रदान कर देना था जो फ्री होल्ड नियम के तहत किया जाना था जिससे शासन को राजस्व भी प्राप्त होता और कब्जा धारी भी निश्चित राशि देकर निश्चिंत होकर अपना व्यवसाय चला पाते। शासन को सहानुभूति पूर्वक ऐसा निर्णय लेकर लोगों को राहत प्रदान करना था।
जिम्मेदार कौन?
वन विभाग के अधिकारी,कर्मचारी,पंचायत प्रतिनिधि पंचायत और नगर निगम के मैदानी कर्मचारी,राजस्व अमला,इन सभी की आंखों के सामने यह बस्ती आकार लेती रही। कौन था जिसने सड़क का निर्माण कराया? किसने बिजली के कनेक्शन स्वीकृत किए? किसकी सहमति से पानी की व्यवस्था पहुंची? यहां के रहवासियों का राशन कार्ड, आधार कार्ड किसने बनवाया? अवैध अतिक्रमण था तो रात को एक फोन पर बिजली कंपनी के लोग सुधार के लिए क्यों जाते थे? इन सभी सवालों के जवाब अब अतिक्रमणकारी भी जानना चाहते है। अतिक्रमण गलत है, लेकिन इस गलत को पनपने देने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? प्रकरण में रेजर निखिल पैकरा का दावा है कि जिम्मेदारी तय की जाएगी।
कोरिया जिले के जिला मुख्यालय में ही रसूखदारों ने नहर तक की जमीन कब्जा कर ली,आज भी कार्यवाही को लेकर स्पष्ट स्थिति नहीं
कोरिया जिले के जिला मुख्यालय में अतिक्रमण का हाल यह है कि जल संसाधन विभाग के नहरों तक पर अतिक्रमण हो चुका है,आम लोगों सहित रसूखदारों ने यह अतिक्रमण किया है लेकिन इसको लेकर प्रशासन की कार्यवाही अभी स्पष्ट नहीं है,कुछ लोगों का कहना है कि यह मामला चूंकि रसूखदारों से भी जुड़ा है इसलिए प्रशासन मौन है,प्रशासन का यह मौन रसूखदारों के मामले में क्यों है यह बड़ा सवाल है। बताया जाता है कि कई जगह शहर में शासकीय जमीन पर रसूखदारों के द्वारा कजा है जो कभी हटाया जाएगा यह लगता नहीं है।
प्रेमाबाग शासकीय आवास कॉलोनी में भी अवैध कब्जे के हैं कई मामले
बताया जाता है कि प्रेमाबाग शासकीय आवास कॉलोनी में भी कई शासकीय भूमि पर कब्जा किया गया है,बताया जाता है कि शासकीय आवास कालोनी में कर्मचारियों के द्वारा ही अलग से निर्माण कर कब्जा किया गया है जो शासकीय आवास से अलग कब्जा है, इस मामले में पुष्टि की बात अलग विषय हो सकती है लेकिन विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि यदि प्रेमाबाग कॉलोनी के ही कब्जा की ही यदि जानकारी जुटाई जाए एक बड़ा भूभाग कब्जे में पाया जाएगा।
राष्ट्रीय राज्यमार्ग 43 के अवैध कब्जाधारियों के निर्माण पर चला बुलडोजर
बैकुंठपुर से गुजरने वाले राष्ट्रीय राज्यमार्ग 43 पर अवैध कब्जा को लेकर जिला प्रशासन ने कार्यवाही की है,इसी तरह जिला अस्पताल के सामने से भी अतिक्रमण हटाया गया है,अब लोगों की मांग है कि अन्य अतिक्रमण भी जिला मुख्यालय के हटाए जाएं,जिनका आशियाना तोड़ा गया है उनका कहना है कि रसूखदारों के ऊपर भी बुलडोजर कार्यवाही की जाए। बुलडोजर कार्यवाही के लिए अब प्रशासन को जिला मुख्यालय के उन अतिक्रमण मामले की जानकारी जुटानी होगी जो रसूखदारों के जिला मुख्यालय में किए गए अतिक्रमण हैं।


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