
- ऑक्सीजन प्लांट बंद…बायोलॉजी लैब बंद…फिर स्वास्थ्य विभाग कोरोना के तीसरी लहर के लिए कैसे हैं तैयार?
- बायोलॉजी लैब हो गया बंद,कर्मचारी हटा दिया अब कैसे कोविड संक्रमितों का होगा प्रशिक्षण
- क्या सरकारी पैसा है जैसा चाहो वैसा करो… एक को बर्बाद करो और दूसरे को सवारों?
- कोरोना काल में करोड़ों की लागत से तैयार हुआ दोनों ऑक्सीजन प्लांट लंबे समय से बंद,इधर कोविड के पुनःवापसी की बन रही संभावना
- स्वास्थ्य मंत्री के क्षेत्र का ये हाल तो प्रदेश के अन्य जिलों का लगाया जा सकता है अंदाजा
- क्या स्वास्थ्य विभाग के पूर्व विभाग प्रमुखों ने ऑक्सीजन प्लांट की आड़ में जमकर किया था भ्रष्टाचार?
- क्या दो-दो ऑक्सीजन प्लांट होने के बावजूद सूरजपुर से हो रही ऑक्सीजन सिलेंडर की होगी भरपाई?
कोरिया,16 जून 2025 (घटती-घटना)। एक बार फिर कोविड की तीसरी लहर का दस्तक देश में हो रहा है पर क्या इसे लेकर छत्तीसगढ़ के सभी जिले तैयार हैं? यह सवाल बहुत बड़ा है पर यदि इस सवाल का जवाब आज की स्थिति में जानना चाहते हैं तो जाकर जिला चिकित्सालय व कॉविड अस्पताल के पास लगे ऑक्सीजन प्लांट की जानकारी ले लीजिए,क्योंकि यह बंद पड़े हुए हैं और ऐसे में आप इस संक्रमण से कैसे लड़ेंगे यह आपको समझ में आ जाएगा या फिर कहा जाए तो स्वास्थ्य विभाग बिल्कुल भी इसे लेकर तैयार नहीं है यही आपको लगेगा? और है भी कुछ ऐसा ही स्वास्थ्य विभाग कोरिया यह मान चुका है कि अब कोरोना दोबारा कोरिया जिले में दस्तक नहीं देगा? इसीलिए हुए बेफिक्र है या कहें तो बेपरवाह? यही कारण है कि अब वह ऑक्सीजन प्लांट को चालू करने की बजाय उसे पूरी तरीके से हटाने की तैयारी में लगा हुआ है, कोविड अस्पताल के पास के एक भवन में जिसे जीएनएम कॉलेज खोलने की सहमति मिली है उसे भवन में कोविड के समय ऑक्सीजन के पाइपलाइन व कई उपकरण लगाए गए थे ताकि कोविड के संक्रमण बढ़ने पर मरीज को इससे बचाया जा सके, अब उसमें लाखों खर्च होने के बाद अब उसे हटाकर वहां पर जीएनएम कॉलेज खोले जाने की सहमति शासन ने दे दी अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर जो पैसे चार साल पहले वहां खर्च हुए थे क्या वह बर्बाद हो गए? कोरोना की तीसरी लहर के दौरान कोरिया जिले में बना ऑक्सीजन प्लांट विगत कई वर्षों से बन्द है, सही समय पर और सही तरीके से मेंटेनेंस नहीं होने के कारण इस प्लांट की हालत खस्ता हो चुकी है,लोगो की जान बचाने के लिए लाखों रुपये की लागत से बनाया गया ऑक्सीजन प्लांट शायद खुद मेंटेनेंस रूपी ऑक्सीजन का मोहताज होने के कारण दम तोडने की कगार पर जा पहुचा है। इस सम्बंध में मिली जानकारी अनुसार छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के कंचनपुर कोविड हॉस्पिटल में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट, जिसे कोविड की तीसरी लहर के दौरान स्थानीय मरीजों को ऑक्सीजन सप्लाई करने के लिए लाखों रुपये खर्च कर तैयार किया गया था,अब पूरी तरह बंद है। इस प्लांट के लगने से क्षेत्र के लोगो को ऑक्सीजन की कमी से कभी जूझना नही पड़ता लेकिन शायद अधिकारियों की उदासीनता और लापरवाही ने इस प्लांट का दम निकाल दिया,वर्तमान में कोविड हॉस्पिटल के इस प्लांट की स्थिति तो दयनीय है ही अस्पताल की स्थिति और ज्यादा खराब दिखाई देने लगी है,अस्पताल में बड़ी बड़ी झाडि़यां उग आई हैं चारो तरफ कबाड़ गाडि़यां खड़ी कर दी गई हैं, और वही यह प्लांट भी फिलहाल अपना दम तोड़ रहा है, सूत्र बताते हैं कि कंचनपुर कोविड हॉस्पिटल में स्थित ऑक्सीजन प्लांट के बंद होने का सबसे बड़ा कारण है प्लांट की देखरेख और मेंटेनेंस का ना होना, इस प्लांट की तीन साल की वारंटी अवधि समाप्त हो चुकी है और अब इसे सुधारने या रखरखाव के लिए स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी. जिसमे फिर से काफी राशि लगने की संभावना से इनकार नही किया जा सकता हालांकि, जिला अस्पताल में एक 1000 एलपीएम क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट के काम करने की भी बात कही जा रही थी लेकिन हकीकत यह भी है कि कंचनपुर कोविड हॉस्पिटल का प्लांट की तरह जिला अस्पताल का भी ऑक्सीजन प्लांट पिछले 6 माह से पूरी तरह से निष्कि्रय होकर बन्द है, वर्तमान में कोरिया जिले में ऑक्सीजन सिलेण्डरों की भरपाई सूरजपुर जिले से हो रही है समय समय पर कोरिया के अस्पतालों के ऑक्सीजन सिलेंडरों की रिफिलिंग सूरजपुर लेजाकर कराई जा रही है।
स्वास्थ्य मंत्री के क्षेत्र में दिया तले अंधेरा की स्थिति है?
कोरिया जिला स्वास्थ्य मंत्री का क्षेत्र माना जाता है अविभाजित कोरिया में स्वास्थ्य मंत्री विधायक रह चुके हैं और कोरिया से टूट कर एमसीबी नया जिला बना तो उसे कोरिया का अंग ही माना जायेगा। लेकिन क्या मंत्री के क्षेत्र में दिया तले अंधेरा की स्थिति बनी हुई है? एक तरफ मंत्री जी कोरोना से लड़ने प्रदेश को तैयार बता रहे हैं दूसरी तरफ उन्ही के क्षेत्र में जिले के ऑक्सीजन प्लांट बन्द पड़े हैं तो दूसरे जिलों का आंकलन इसी से किया जा सकता है, कोरोना वापसी की सम्भवना व्यक्त की जा रही है वही दूसरी तरफ यदि कोरिया जिले की स्थिति ठीक नही हुई तो यहां का क्या होगा,पिछली लहर का भयावह दृश्य सबने देखा है लेकिन कोविड से लड़ने में कंचनपुर कोविड हॉस्पिटल की भूमिका बहुत अहम रही, लेकिन वर्तमान में कोविड हॉस्पिटल की बदहाल स्थिति जमे हुए कचरे और झाडि़यों के साथ ऑक्सीजन प्लांट के बन्द होने के बाद यदि कोविड के मामले आने लगे तो इस स्थिति में कैसे नियंत्रण किया जाएगा यह बड़ा सवाल है, कोरिया जिले कंचनपुर कोविड हॉस्पिटल का ऑक्सीजन प्लांट बन्द हुए लगभग 3 साल हो गए वही जिला अस्पताल का प्लांट भी लगभग 6 माह से बन्द है बावजूद इसके ऑक्सीजन प्लांट हैण्डलरो को डीएमएफ से बराबर वेतन दिया जा रहा है जबकि वे स्थायी कर्मचारी नही है, इसे बिना काम के वेतन देना ही कहा जा सकता है।
पूर्व अधिकारियों ने जमकर किया शासकीय राशि का दुरूपयोग
स्वस्थ्य विभाग के पूर्व मठाधीशों ने कोरोना काल के दौरान व्यवस्था बनाये जाने के नाम पर स्वास्थ्य विभाग के राशि का जमकर दुरूपयोग किया, अनाप शनाप दर पर कई सामग्रियों की खरीदी कर ली गई जिसमें गुणवत्ता का ख्याल नही रखा गया, यदि पूर्व सी एम एच ओ कार्यकालों की जांच कराई जाए तो कई बड़े मामले सामने आ सकते हैं , पूर्व अधिकारियों की कई शिकायतें भी हुई थी लेकिन उन्हें दबा दिया गया कइयों का भुगतान अभी तक नही कराए गए हैं, नए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारि को बहुत सी चीजों को समझना होगा और कड़े निर्णय लेने होंगे तभी विभाग में सक्रियता आने की संभावना बनी रहेगी।
लगभग 40 बेड पर एक साथ ऑक्सीजन सप्लाई की थी क्षमता
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय मे कोविड हॉस्पिटल परिसर में चार साल पहले इस 500 एमपीएम क्षमता वाले ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना की गई थी, यह प्लांट 40 बेड पर एक साथ ऑक्सीजन सप्लाई करने की क्षमता रखता था, अस्पताल के आईसीयू में इसके लिए पाइपलाइन कनेक्ट की गई थी,कोविड काल तक यह व्यस्था चली लेकिन अंत तक यह व्यवस्था बंद हो गई, अब प्लांट में ताला लटका हुआ है आस पास झाडि़यां उग आई है और इसके पूरी तरह खराब होने की आशंका भी जताई जा रही है।
क्या जीएनएम कालेज हेतु फिर खाली कराया जाएगा प्लांट ?
कंचनपुर कोविड हॉस्पिटल के बगल में पुनः जीएनएम कालेज खोले जाने की सहमति शासन ने दी है बजट में इसका प्रावधान भी किया गया है, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पुनः प्लांट और अन्य आवश्यक उपकरण की स्थापना जो ऑक्सीजन प्लांट के लिए की गई थी उनको हटाया जाएगा, यदि हटाया जाएगा तो हटाने और पुनः अन्यत्र जगह शिफ्टिंग में भारी भरकम खर्च किया जाएगा। सूत्रों की माने तो जीएनएम कालेज पुर्व से स्वीकृत था उसे तोड़ फोड़ कर आवश्यक परिवर्तन कर कोविड हॉस्पिटल बनाया गया, अब पुनः जीएनएम कालेज की स्वीकृति मिली तो क्या पुनः कोविड हॉस्पिटल में परिवर्तन किया जाएगा यह बड़ा सवाल है।
कोविड की रोकथाम के लिए पुनः हुई मॉक डील:सूत्र
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार कोविड के पुनः पैर पसारने की सूचना मिलने के बाद राज्य शासन एलर्ट मोड में आई और स्वस्थ्य मंत्री ने कहा कि हम तैयार है और इसी तैयारी के तहत राज्य शासन के निर्देश पर मार्क डील भी हुई, लेकिन बगैर ऑक्सीजन प्लांट के यह कैसी मार्क डील थी यह समझ से परे है। कोविड हॉस्पिटल के काफी समय से बन्द होने के कारण वहां के काफी कुछ उपकरण खराब हो चुके हैं सूत्र बताते हैं काफी समान पूर्व मुख्य चिकित्सा एवं स्वस्थ्य अधिकारी के कार्यकाल में ही अन्य हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिए गए और कुछ वहां खराब हो गए, सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई के लिए कॉपर पाइप की वायरिंग कराई गई जिसके 2 साल पहले ही खराब होने की जानकारी सूत्रों से मिल रही है इसके अलावा मुख्य बातों पर गौर करें तो वायरोलॉजी लैब भी बन्द है, ऐसे में कोविड की जांच कैसे होगी जांच के उपकरण सही स्थिति में हैं या नही, सभी कोविड टेक्नीशियन और स्टाफ जो कोविड के तहत काम पर रखे गए थे राज्य शासन ने उन्हें हटा दिया है, ऐसे में यदि कोविड पुनः पैर पसारा तो कोरिया में क्या स्थिति बनेगी इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
किराए से लिया गोदाम 8 किलोमीटर दूर
जीएनएम कालेज में ही गोदाम बनाया गया था जहां आवश्यक दवाइयां फ्रीजर इत्यादि और अन्य आवश्यक उपकरण रखे गए थे जो कि जरूरत पड़ने पर तत्काल हॉस्पिटल तक पहुच जाते थे लेकिन स्वस्थ्य विभाग द्वारा उसे हटा कर किराए का गोदाम लिया गया जो कि सुविधा विहीन है और जिला अस्पताल से लगभग 8 किलोमीटर दूर है जहां आपात स्थिति में आने जाने में कठिनाई होती है और समय भी ज्यादा लगता है, किराए के गोदाम में उतनी सुविधा भी उपलध नही बावजूद इसके स्वस्थ्य विभाग द्वारा किराए का गोदाम लेकर पिछले तीन चार सालों से भारी भरकम राशी किराए पर दी जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या शासन के पास कोई भी ऐसा अतिरिक्त भवन नही था जिसे गोदाम बनाया जा सकता था। एक तरफ भारी भरकम भवन बिना उपयोग खंडहर हो रहे हैं दूसरी तरफ प्रशासन को किराए के भवन से काम चलाना पड़ रहा है यह सोच का विषय है । सूत्र बताते हैं की स्थानीय पत्रकार को फायदा पहुचाने के उद्देश्य से उक्त गोदाम किराए पर लिया गया है ताकि विभाग की कमियां भी उजागर न हो और सबंधित को फायदा मिलता रहे, कुछ सूत्रों का तो यह भी कहना है कि, जिस दिन विभाग अपना सामान शासकीय भवन में शिफ्ट करेगा उसके बाद से विभाग की कमियां नजर आने लगेगी।
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