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मनेंद्रगढ़ @ अंततः भूपेंद्र क्लब की ज़मीन से 23 अवैध दुकानें हुई जमींदोज

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मनेंद्रगढ़,08 जून 2025 (घटती-घटना)। वर्षों से विवादों में घिरी भूपेंद्र क्लब की शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ आखिरकार प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया। रविवार को भगत सिंह तिराहा स्थित भूपेंद्र क्लब परिसर में राजस्व विभाग, नगरीय प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने 23 अवैध दुकानों पर बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान पांच जेसीबी मशीनें लगाई गईं और सुरक्षा के लिहाज़ से फायर ब्रिगेड की टीम भी तैनात रही।सुबह 11 बजे शुरू हुआ ऑपरेशनदिन रविवार सुबह करीब 11 बजे से प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचा। कार्रवाई पूर्व निर्धारित थी और कजाधारियों को पूर्व में नोटिस देकर अपनी दुकानों को स्वयं हटाने का निर्देश दिया गया था। कई व्यापारियों ने प्रशासन के आदेश का पालन करते हुए अपनी दुकानें खुद ही खाली कर दी थीं, जबकि शेष अतिक्रमण को बलपूर्वक हटाया गया। गरीब व्यापारियों की पीड़ा अब बच्चों का पेट कैसे भरेंगे? कुछ छोटे व्यापारियों ने मीडिया से बात करते हुए कहा,हमने प्रशासन के नोटिस के बाद खुद ही दुकानें खाली कर दीं। लेकिन अब हम रोज़ी-रोटी कैसे कमाएंगे? यदि भविष्य में यहां व्यवसायिक निर्माण होता है तो हम गरीबों को प्राथमिकता दी जाए, यही हमारी गुहार है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अतिक्रमण हटाया जा रहा है, तो फिर भगत सिंह तिराहा से श्री जैन मंदिर रोड तक किए गए प्रभावशाली लोगों के अतिक्रमण पर चुप्पी क्यों?
क्या वहां भी प्रशासन का बुलडोजर चलेगा?

यह सवाल अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।मनेंद्रगढ़ अब जिला मुख्यालय बन चुका है, ऐसे में शहरवासियों ने प्रशासन से अपील की कि यातायात, स्वच्छता और सार्वजनिक स्थलों की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कठोर कदम उठाए जाएं। एक ओर जहां अतिक्रमण हटाना जरूरी है, वहीं गरीब दुकानदारों के पुनर्वास की दिशा में भी ठोस नीति अपनाई जानी चाहिए।
प्रशासन का पक्ष…

इस कार्रवाई को लेकर एसडीएम लिंगराज सिदार ने कहा…मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर नया जिला है और मनेंद्रगढ़ उसका मुख्यालय है। यह एक तेजी से बढ़ता व्यापारिक शहर है, जहां शासकीय भूमि की भारी कमी है। भूपेंद्र क्लब की भूमि पर वर्षों से अतिक्रमण था, जिसे न्यायालय के आदेश और वैधानिक प्रक्रिया के तहत हटाया गया। कब्जा धारियों को कई बार मौका दिया गया और अधिकतर ने सहयोग किया। शेष अतिक्रमण बलपूर्वक हटाया गया। पुनर्वास को लेकर अंतिम निर्णय कलेक्टर स्तर पर लिया जाएगा।


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