- अंदरखाने की खबर कुछ ऐसी ही,कई शासकीय भूमि पर बने सार्वजनिक निर्माण को सीएमओ सिकंदर सिदार अब नगर पंचायत की संपत्ति बनाने की जुगत में…
- क्या वह अब पटना स्थित शासकीय भवनों पर नगर पंचायत का कब्जा स्थापित करने के प्रयास में हैं?
- क्या चुनाव के दौरान का प्रत्याशियों का मुद्दा सीएमओ के लिए प्रेरणा बन रहा है?
- क्या गायत्री मंदिर और दुर्गा पूजा पंडाल अब नगर पंचायत के अधीन होने के क्रम में है?

-रवि सिंह-
बैकुंठपुर/पटना, 04 जून 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के नव गठित नगर पंचायत पटना के सीएमओ को लेकर प्रतिदिन नई नई जानकारी सामने आती रहती है और जिसमे उनके ऊपर कभी मनमानी का आरोप लगता है, कभी उनके ऊपर यह आरोप लगाता है कि वह सवालों का भी जवाब नहीं देना चाहते लोगों को और वह तानाशाही की तरह ही नगर पंचायत की सरकार को चलाना चाहते हैं, अब नई एक जानकारी यह भी सूत्रों से मिल रही है कि सीएमओ नगर पंचायत पटना जिनका नाम सिकंदर है वह सिकंदर महान की तर्ज पर काम करने की तैयारी में हैं और वह पटना नगर में स्थित कई सार्वजनिक भवनों को अब नगर पंचायत के अधीन करने की तैयारी कर रहे हैं और वह जल्द ही ऐसा कोई निर्णय सामने लाकर लोगों को नगर के चौंकाने वाले हैं, वैसे यह सूत्रों द्वारा जानकारी प्रदान की गई है और इस जानकारी का कोई सबूत अभी सामने नहीं आया है न ही अभी तक इसको लेकर कोई पुष्टि ही सामने है न प्रयास ही सामने है लेकिन ऐसा बताया जा रहा है कि सीएमओ अब चुनाव के समय के उन घोषणाओं को लेकर काम कर रहे हैं जो उन प्रत्याशियों ने किए थे जिनकी चुनाव में वैसे तो हार हुई लेकिन उन्होंने मुद्दों को नगर की जनता से जुड़ा हुआ बताया था और कहीं न कहीं उन मुद्दों का चुनाव परिणाम पर असर भी पड़ा था लेकिन मुद्दों को उठाने वाले अंततः चुनाव हार गए थे वहीं माना जा रहा है कि वही मुद्दे अब सीएमओ सिकंदर सिदार के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

गायत्री मंदिर और दुर्गा पूजा पंडाल की संपत्ति को दो परिवारों के नियंत्रण से बाहर करने की तैयारी?
अब सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार यदि मिली जानकारी सही है तो सवाल उठ रहा है कि क्या सच में नगर पंचायत पटना सीएमओ सिकंदर सिदार अब खुद को महान बनाने के लिए नगर की जनता को अपनी महानता जताने के लिए नगर के उन सार्वजनिक संपत्तियों भवनों को नगर पंचायत के अधीन करने की जुगत में हैं? जो अभी समितियों और स्व घोषित ट्रस्टों के हाथों में हैं। ऐसी संपत्तियों में नगर की दो संपत्तियां प्रमुख हैं जिनमें एक है गायत्री मंदिर की संपत्ति और एक दुर्गा पूजा पंडाल की संपत्ती जिनका सम्पूर्ण निर्माण शासकीय अनुदानों से हुआ है और जिसे लेकर कई बार यह आरोप भी लगा है कि इनका नियंत्रण एक दो परिवारों के हाथों में हैं जो इससे आर्थिक लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं वहीं यह मुद्दा इस चुनाव में प्रमुख मुद्दा भी था। वैसे सवाल यह भी है कि क्या सीएमओ का जारी अभियान जो सूत्रों अनुसार गति पकड़ चुका है संभावना वह तलाश रहे हैं चुनावी मुद्दों की वजह से उनका अभियान बना है और वह इस अभियान से नगर पंचायत की आमदनी भी बढ़ाने की फिराक में हैं। जानकारों की माने तो इस विषय में सीएमओ का प्रयास सार्थक भी साबित हो सकता है और ऐसी संपत्तियों को नगर पंचायत के अधीन कर भी सकते हैं जो शासकीय अनुदानों से शासकीय भूमि पर ही निर्मित हैं और जिनसे प्रतिमाह एक निश्चित आय मिलने की उम्मीद है। अब सीएमओ कितना आगे बढ़ चुके हैं इस मामले में यह तो सूत्र नहीं बतला पा रहे हैं लेकिन जितनी जानकारी सूत्रों से मिल पा रही है उसके अनुसार सीएमओ इस विषय में काफी गंभीर हैं। वैसे यह पुनः बताना उचित होगा कि खबर की पुष्टि दैनिक घटती घटना नहीं करता यह सूत्र जनित एक समाचार है जिसकी सच्चाई को लेकर कोई भी जानकारी तथ्यात्मक केवल सीएमओ नगर पंचायत पटना ही दे सकते हैं।
शादी घर सहित व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स को निजी हाथों से नगर पंचायत को सौंपने की मांग को लेकर शहर के लोग कलेक्टर कोरिया से कर सकते है मुलाकात
पटना नगर पंचायत हाल ही में ग्राम पंचायत से नगर पंचायत बना है और पूर्व से निर्मित कम से कम दो सार्वजनिक भवन जिनमें या जिस परिसर में कई भवन, शादीघर और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स संचालित हैं से प्रतिमाह लाखों की आमदनी प्राप्त हो रही है जो निजी हाथों में जा रही है जो नगर पंचायत के गठन उपरांत अब नगर पंचायत को मिलनी चाहिए ऐसा जानकारों का कहना है,जानकारों के अनुसार इन संपत्तियों को किसी रजिस्टर्ड ट्रस्ट से भी जोड़ना बेमतलब है या नियम अनुसार सही नहीं है क्यों यदि शासकीय भूमि का लीज नहीं बना है अभी तक ऐसे में वह संपत्ती नगर पंचायत को ही हस्तांतरित की जानी होगी। वैसे पूरे मामले में सूत्रों के हवाले से एक खबर यह भी निकलकर सामने आ रही है कि कुछ नगर पंचायत के ही लोग इस विषय में कलेक्टर कोरिया से भी मिलने वाले हैं जो कम से कम दो सार्वजनिक भवनों,शादी घर सहित व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स को निजी हाथों से नगर पंचायत को सौंपने की मांग करेंगे। अब ऐसा कब होता है यह देखने वाली बात होगी।
क्या पटना नगर के गायत्री मंदिर एवम दुर्गा पूजा पंडाल के मामले को जो बोतल में बंद जिन्न जैसा मामला है को सीएमओ सिकंदर बाहर निकालने की तैयारी में हैं?
पटना नगर के गायत्री मंदिर का मामला और दुर्गा पूजा पंडाल का मामला कई बार पटना में उठाया जा चुका है जो चुनावी मुद्दा भी था जिसका चुनाव में असर भी देखने को मिला था,दोनों मामले सार्वजनिक संपत्ति पर व्यक्तिगत अधिकार जताने से जुड़ा हुआ है वहीं इसको लेकर यह आरोप लगता रहा है कि जब शासकीय भूमि पर शासकीय अनुदान से कोई निर्माण हुआ है और उसका व्यावसायिक उपयोग हो रहा है तो क्यों उसपर व्यक्तिगत मात्र कुछ लोगों का ही अधिकार है उसका आय व्यय या अन्य उसकी जानकारियों के विषय में अन्य को नहीं बताया जाता,यह विषय चुनाव के बाद बोतल के जिन्न की तरह बोतल में बंद हो चुका था जिसको लेकर यह बताया जा रहा है सूत्रों द्वारा की सीएमओ सिकंदर इसको लेकर कुछ न कुछ तैयारी कर रहे हैं, अब सवाल यह उठता है कि क्या सीएमओ सिकंदर बोतल में बंद जिन्न को बाहर निकालने की तैयारी कर चुके हैं।
यदि सीएमओ सिकंदर सफल हुए पटना नगर पंचायत की आय में बड़ी वृद्धि नजर आने लगेगी
वैसे बताया जाता है कि यदि सीएमओ सिकंदर पूरे मामले में सफल होते हैं और वह गायत्री मंदिर और दुर्गा पूजा पंडाल को निजी हाथों से मुक्त कराकर नगर पंचायत की संपत्ती बना ले जाते हैं तो नगर पंचायत पटना की मासिक और वार्षिक आय में बड़ी वृद्धि नजर आने लगेगी और यह नगर विकास के लिए बड़ा कदम साबित होगा। वैसे सबकुछ सीएमओ सिकंदर की फुर्ती और तत्परता पर निर्भर है वह जितनी जल्दी इसे मूर्त रुप दे पाएंगे उतनी जल्दी नगर पंचायत पटना की आय में वृद्धि दर्ज होने लगेगी क्योंकि दोनों भवनों से मासिक रूप से भी नदी आय प्राप्त होती है जो वार्षिक आय का बड़ा जरिया है।
नगर पंचायत अध्यक्ष की भूमिका क्या मामले में बाधा उत्पन्न करने वाली जिसकी वजह से सीएमओ सिकंदर मामले में सफलता से दूर हो रहे हैं?
सीएमओ सिकंदर जैसा सूत्रों का कहना है कि नगर में स्थित दो सार्वजनिक भवनों को जो कहीं न कहीं शासकीय भूमि पर शासकीय अनुदान से निर्मित हैं को लेकर योजना बना रहे हैं उसके अधिग्रहण के लिए प्रयास कर रहे हैं वहीं इस मामले में नगर पंचायत की अध्यक्ष का क्या रुख है यह समझ से परे है,क्या वह बाधा उत्पन्न करने की कोशिश में हैं और इसको लेकर उनकी सहमति प्राप्त नहीं हो रही है इसलिए सीएमओ सिकंदर असफल हो रहे हैं यह भी एक सवाल खड़ा हो रहा है, वैसे इस मामले में सीएमओ और अध्यक्ष का पक्ष नहीं लिया गया है खबर सूत्रों से प्राप्त जानकारी से प्रेरित है।
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