एक प्रभारी डीपीएम की वजह से सरकार की हो रही थी फजीहत शिकायतकर्ता बन बैठे थे प्रभारी डीपीएम
- प्रभारी डीपीएम पत्रकार व अखबार के संस्था को ही नेस्तनाबूत करना चाह रहे थे वहीं अब वह खुद की ही अपनी सेवा समाप्त करवा बैठे अंतत: ख़ुद को सुप्रीमो समझने वाले प्रभारी डीपीएम की सेवा हुई समाप्त…
- बैकुंठपुर के पार्षद संजय जायसवाल की लगातार शिकायत के बाद हुई कार्यवाही
- ख़ुद को स्वास्थ्य मंत्री का भतीजा बताने वाले डॉ प्रिंस पर हुई कार्यवाही से बड़ा संदेश देने की कोशिश,सरकार की जीरो टालरेंस की नीति की झलक
- डॉ प्रिंस के बड़बोलेपन से स्वास्थ्य मंत्री की छवि पर भी पड़ा था असर



-रवि सिंह-
रायपुर/सूरजपुर/कोरिया 03 जून 2025 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के इकलौते सुर्खियो΄ मे΄ रहने वाले स्वास्थ्य विभाग सुरजपुर के प्रभारी डीपीएम डॉक्टर प्रिंस जायसवाल की सेवा समाप्त हो गई,सेवा समाप्त होने से पहले इन्हो΄ने खूब ता΄डव मचाया खुद की कमियो΄ को दिखाने वाले पत्रकार व अखबार को नुकसान पहु΄चाने का पूरा प्रयास किया,कार्यालय भी इनकी शिकायत पर टुटा,इनकी मदद करता रहा महिला आयोग से लेकर वकीलो΄ की नोटिस भी आई और यह बोला गया कि पत्रकार के पास कोई सबूत नही΄ थे, बिना सबूत के खबर प्रकाशित हो रहा था,आखिर सेवा समाप्त होने के आदेश ने ही बता दिया कि पत्रकार के पास सारे सबूत थे और उस सबूत के आधार पर ही खबर प्रकाशित हो रहा था,जिसके बाद उनकी सेवा अब समाप्त हो गई,उनकी फर्जी सेवा की वजह से भाजपा सरकार स΄देह के घेरे मे΄ थी,भाजपा सरकार को इन्हो΄ने पत्रकार के सामने कर दिया था,अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए सरकार म΄त्री प्रशासन सभी को अखबार व पत्रकार के पीछे लगा बैठे थे,पर अखबार व पत्रकार दोनो΄ ही अपने काम को ईमानदारी से कर रहे थे खबर प्रकाशित हो रही थी,आखिर ईमानदारी से प्रकाशित की गई खबर का नतीजा ही है कि आज उनकी सेवा समाप्त हो गई और अखबार की खबर सही थी इस पर मुहर भी लग गई। भले ही आज सोशल मीडिया पर आदेश आने के बाद प्रभारी डीपीएम अपने विरुद्ध षड्य΄त्र होने की बात कह रहे है΄,वह भले ही फर्जी डिग्री पर नौकरी नही΄ कर रहे थे,पर फर्जी डिग्री पर प्रभावी डीपीएम बने बैठे थे,यह बात वह शायद लोगो΄ से छुपा रहे है΄ और यदि यह फर्जी डिग्री पर नौकरी नही΄ कर रहे थे तो फिर इन्हो΄ने फर्जी डिग्री बनाई किसलिए थी? आखिर फर्जी डिग्री पर इन्हो΄ने डीपीएम पद के लिए आवेदन क्यों किया? उनके फर्जी डिग्री की जा΄च भी प्रशासन ने कराई और यह पाया गया कि उनके पास जो डिग्री है वह फर्जी है,जा΄च भी उस यूनिवर्सिटी से हुई जिस यूनिवर्सिटी से उन्हो΄ने डिग्री बनवाई थी,उस यूनिवर्सिटी ने भी लिख कर दे दिया है कि इनका कोई रिकॉर्ड हमारे पास उपलध नही΄ है,अब मामला जहा΄ सेवा समाप्ति पर खत्म हुआ है ऐसा नही΄ है अब मामला फर्जी डिग्री का समाप्त हो जाएगा ये मामला एफआईआर तक भी जाएगा,क्यों कि शिकायतकर्ता स΄जय जायसवाल ने साफ कह दिया है कि फर्जी डिग्री मामले मे΄ प्रभारी डीपीएम पर एफआईआर दर्ज कराए΄गे। कुल मिलाकर डॉक्टर प्रिंस जायसवाल की दिक्कत आगे और बढ़ेगी और उनके विरुद्ध फर्जी के आधार पर नौकरी करने से प्राप्त लाभ को वापस करने का भी दबाव शिकायत कर डलवाया जाएगा।

सही खबर प्रकाशित करने की वजह से अखबार और पत्रकार बना हुआ था दुश्मन
फर्जी डॉक्टर की फर्जी डिग्री की बिल्कुल सही खबर प्रकाशित करने की वजह से ही अखबार और पत्रकार से फर्जी डॉक्टर की लड़ाई थी दुश्मनी थी,नौकरी से बर्खास्तगी के बाद यह तय हो गया कि दैनिक घटती-घटना की खबर अक्षरश: सत्य थी और डिग्री फर्जी थी। पत्रकार और समाचार पत्र से फर्जी डॉक्टर प्रिंस इस कदर दुश्मनी पाल चुके थे कि उन्हो΄ने समाचार पत्र और पत्रकार के विरुद्ध कई षड्य΄त्र रचने का काम किया और हर तरह से नुकसान के लिए उन्हो΄ने प्रयास किया और आगे भी करे΄गे।

सही खबर प्रकाशित करने की वजह से अखबार को अपने कार्यालय पर बुलडोजर कार्यवाही से भी गुजरना पड़ा…
सत्य खबर का प्रकाशन किसी अखबार के लिए कितना भारी पड़ सकता है यह इसी बात से समझा जा सकता है कि दैनिक घटती-घटना के प्रेस कार्यालय पर बुलडोजर कार्यवाही की झलक देखने को मिली,बुलडोजर कार्यवाही केवल फर्जी डॉक्टर प्रि΄स जायसवाल की फर्जी डिग्री को लेकर खबर प्रकाशन के कारण हुई, अब जब डॉक्टर प्रिंस फर्जी डॉक्टर साबित हुए अखबार और पत्रकार को इस बात का स΄तोष जरूर है कि सत्य के कारण बुलडोजर की मार भी झेलकर अखबार और पत्रकार ने हार नही΄ मानी और अ΄तत: फर्जी डॉक्टर झोलाछाप साबित हुआ।

प्रभारी डीपीएम अपने आपको पाक साफ साबित करने के लिए अधिवक्ताओं से नोटिस भी भिजवाता रहा…
झोलाछाप फर्जी डॉक्टर फर्जी होकर भी इतना द΄भ रखता था व्यवस्था को अपने जेब मे΄ रखने की बात करते हुए इतना घम΄ड मे΄ रहता था कि वह फर्जी होकर भी…झोलाछाप होकर भी…अख़बार और पत्रकार को अधिवक्ताओ΄ के माध्यम से नोटिस भिजवाया करता था मानसिक वह प्रताडि़त करने का काम करता था, अधिवक्ता भी उसके झा΄से मे΄ आ जाते थे और वह बिना तथ्य जाने ही अखबार और पत्रकार को कानून की जद मे΄ लाने का नोटिस भेज दिया करते थे। कुल मिलाकर फर्जी झोलाछाप डॉक्टर प्रिंस जायसवाल हर तरह से युक्ति लगाया करता था जिससे वह फर्जी और झोलाछाप होने के कल΄क से बच जाए जबकि वह था वही झोलाछाप फर्जी डॉक्टर।
सच्ची खबरों के लिए अखबार ने अपना बहुत बड़ा नुकसान भी करवाया…आज आदेश आने के बाद अखबार को शुभकामनाओं वाले संदेश मिल रहे हैं…
सच्ची खबर प्रकाशन को लेकर अखबार ने अपने अस्तित्व पर ही मार झेली और अखबार को बड़ा नुकसान हुआ,आज डॉक्टर प्रिंस जो फर्जी डॉक्टर था झोलाछाप डॉक्टर था कि बर्खास्तगी के बाद अखबार को शुभकामनाओ΄ भरे स΄देश प्राप्त हो रहे है΄ और सत्य खबर प्रकाशन और खबर पर हुई कार्यवाही को लेकर लोगो΄ की तरफ से अखबार की सराहना हो रही है,लोग अपने बधाई स΄देश मे΄ दैनिक घटती घटना को निष्पक्ष और बेबाक पत्रकारिता की आवाज बता रहे है΄। दैनिक घटती-घटना का भी आत्मविश्वास ऐसी कार्यवाहियो΄ से बढ़ती है क्यों΄कि निष्पक्षता का यही इनाम निष्पक्ष पत्रकारिता की चाहत होती है,आज दैनिक घटती-घटना यह पुन: कहने विश्वास दिलाने आगे खड़ा है कि वह आगे भी ऐसे ही सच के साथ डटकर खड़ा रहने वाला है,न्याय के लिए उसका स΄घर्ष जारी रहने वाला है।

जिस प्रभारी डीपीएम की शिकायत पर प्रशासन ने अखबार के कार्यालय पर बुलडोजर चलाया उसी प्रशासन पर आरोप लगा रहे हैं प्रिंस?
जिस प्रशासन का अपने लिए अपने अनुसार लाभ उठाया फर्जी झोलाछाप डॉक्टर प्रिंस जायसवाल ने अब वह उसे ही दोषी बता रहे है΄ आरोप लगा रहे है΄ उसी प्रशासन पर, अखबार के कार्यालय पर प्रेस पर बुलडोजर कार्यवाही करने वाले प्रशासन को लेकर फर्जी झोलाछाप डॉक्टर की यह दोहरी सोच बड़ी विचित्र है विकृत है,फर्जी होकर पूरे एक जिले के प्रशासन का अपने फर्जी न साबित होने के लिए उपयोग करने वाले भरी बरसात मे΄ भोर मे΄ ही जिले के उच्च अधिकारियो΄ की लाइन लगवाने वाले फर्जी डॉक्टर की यह सोच उन्हे΄ फर्जी के साथ ही निम्न सोच का भी साबित करती है।
फर्जी डॉक्टर की झूठी महिमा और उपलब्धि बताने वाले प्रतिष्ठित अखबार और टीवी चैनल क्या अब फर्जी होने का डाक्टर के खबर प्रकाशित करेंगे?
कोरोना वॉरियर,श्रेष्ठ से श्रेष्ठ डॉक्टर खुद को साबित करने फर्जी डॉक्टर प्रिंस जायसवाल कई उपाय करता रहता था जिसके लिए वह कई प्रतिष्ठित अखबारो΄ और न्यूज चैनलो΄ का सहारा लेता था जो उसे उसके ही कहने पर सम्मानित करते थे उसकी महिमा गाते थे,वह खुद कहते सुना जाता था कि कई न्यूज चैनल और अखबार उसके लिए कुछ भी लिखने प्रकाशित करने बाध्य है΄ क्यों΄कि वह उन्हे΄ लाभ पहु΄चाता है,अब फर्जी डॉक्टर की बाते΄ और प्रस्तुत किए जाने वाले मौखिक तथ्य सच है΄ नही΄ है΄ इसकी बजाए क्या अब ऐसे अखबार और न्यूज चैनल उसकी बर्खास्तगी की खबर प्रकाशित करे΄गे,सवाल बड़ा है क्यों΄कि अब मामला साफ साफ बर्खास्तगी का है और फर्जी साबित हुआ है एक झोलाछाप डॉक्टर।
जिसके चाचा स्वास्थ्य मंत्री उसने ही लगाया प्रशासनिक षड्यंत्र का आरोप क्या इशारा स्वास्थ्य मंत्री की ओर?
फर्जी झोलाछाप डॉक्टर प्रिंस जायसवाल अब बर्खास्त हुआ,अब वह आरोप लगा रहा है कि उसके साथ प्रशासनिक षड्य΄त्र हुआ है,वैसे जिसको उस स΄स्था ने ही यह कहकर फर्जी बता दिया जिस स΄स्था की वह डिग्री लगाकर डॉक्टर बना रहा सालो΄ तक की वह वहा΄ न पढ़ा न ही उसकी डिग्री को लेकर कोई जानकारी स΄स्था के पास है उसके बाद भी खुद को पाकसाफ बता रहा है फर्जी डॉक्टर,आज वैसे तो न्याय हुआ है उन डॉक्टरो΄ के साथ जो एक झोलाछाप के अधीन काम कर रहे थे उसके आदेश के पालन के लिए मजबूर थे। वैसे फर्जी डॉक्टर खुद को स्वास्थ्य म΄त्री का भतीजा बताता है ऐसे मे΄ प्रिंस यह आरोप वह अपने ही चाचा की तरफ लगा रहा है सवाल यह भी है, स्वास्थ्य म΄त्री जब चाचा है΄ प्रिंस जायसवाल के कैसे उसके साथ अकारण अन्याय हो सकता है, जब मामला फर्जी ही है तब क्यों΄ स्वास्थ्य म΄त्री मामले मे΄ फजीहत कराए΄गे और किसी फर्जी को बचाये΄गे,प्रिंस जायसवाल का प्रशासनिक अधिकारियो΄ पर आरोप केवल एक खीज मात्र ही कही जाएगी।
सेवा समाप्त कार्यवाही का ये है पूरा विवरण
स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी जिला कार्यक्रम प्रब΄धक डॉ प्रिंस जायसवाल पर हुई कार्यवाही उनका स΄विदा सेवा किया गया समाप्त फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज से नौकरी करने का है मामला। आयुक्त सह मिशन स΄चालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन रायपुर द्वारा जारी किया गया है आदेश। डॉक्टर प्रिंस जायसवाल जो सूरजपुर स्वास्थ्य विभाग मे΄ जिला कार्यक्रम प्रब΄धक के पद पर कार्यरत थे इनके विरुद्ध राज्य कार्यालय को शिकायत प्राप्त हुई थी जिसकी जा΄च मे΄ फर्जी दस्तावेज पाए गए इसके आधार पर इनका सेवा समाप्त कर दिया गया इस मामले मे΄ इनको पर्याप्त सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया उसके बाद भी डॉक्टर प्रिंस जायसवाल द्वारा कोई स΄तोषप्रद साक्ष्य प्रस्तुत नही΄ किया गया। डॉ. प्रिंस जायसवाल द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मे΄ सेवारत रहते हुए भी राज्य कार्यालय द्वारा जारी विज्ञापन मे΄ फर्जी,कूटरचित दस्तावेजो΄ को प्रस्तुत कर जिला कार्यक्रम प्रब΄धक के पद मे΄ नियुक्ति पाने का प्रयास किया गया। इस कृत्य को मानव स΄साधन नीति 2018 का उल्ल΄घन माना गया। और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 सामान्य (1) एव΄ स΄विदा सेवा नियम 2012 का भी उल्ल΄घन माना गया। इसके बाद उनकी स΄विदा नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए सेवा समाप्त कर दिया गया। इस मामले मे΄ शिकायतकर्ता स΄जय जायसवाल ने कहा मेरी शिकायत पर कार्यवाही करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन छत्तीसगढ़ ने डॉ. प्रिंस जायसवाल की स΄विदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है। बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद उन्हो΄ने प्रमाणित स्पष्टीकरण नही΄ दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि उन्हो΄ने शासकीय स΄विदा पद पाने के लिए जानबूझकर फर्जी डिग्री का सहारा लिया।
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