- पक्षियों के इस वर्ष नहीं आने की वजह तापमान में बदलाव को मान रहे विशेषज्ञ
- पक्षी मौसम एवं तापमान में होने वाले बदलाव को भांप लेते है और फिर उस स्थान पर न जाते हुए अपना रास्ता बदल लेते हैं।

-राजन पाण्डेय-
कोरिया,12 मई 2025 (घटती-घटना)। पर्यावरण के साथ खिलवाड़ की आंच अब परिंदों तक जा पहुँची है। पारिस्थितिकी तंत्र के बिगड़ने की वजह से पक्षियों के जीवनचक्र पर विपरीत असर पड़ रहा है। यही वजह है राज्य के सबंसे बड़े राष्ट्रीय उद्यान के अलावा वनांचल क्षेत्र के बांधों में जो परिंदे हर साल सैकडों की संख्या में डेरा डाला करते थे, वे इस साल नदारद हैं। मेहमान पक्षी तो सैकड़ो किलोमीटर की यात्रा कर राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में चार महीने बसेरा किया करते थे। उनकी संख्या में काफी कमी आई है। बदलती आबोहवा की वजह से कई परंपरागत आवास स्थलों पर इन प्रवासी पक्षियों ने शगुन के लिए भी पड़ाव नहीं डाला। यह स्थिति पर्यावरणविदों के लिए तो चिंताजनक है ही,पर्यटन व्यवसाय की नजर से भी गंभीर चेतावनी है। विकासखण्ड अंर्तगत स्थित गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान सहित आस – पास के क्षेत्रों के बडे-छोटे तालाब, बांध, पोखर एवं एनीकटों में प्रवासी देशी विदेशी पक्षियों की आमद तो साल में दो बार होती थी। परन्तु इस साल दिसम्बर तक गुरूघासीदास उद्यान में इन प्रवासी पक्षियों का आगमन नहीं हुआ हैं। गुरूघासी दास राष्ट्रीय उद्यान में हमेशा ठंड एवं गर्मी दोनो के समय पक्षियों का जमावडा लगा रहता था। जो लोगों के लिए आकर्षक का केन्द्र बना रहता था। लेकिन इस वर्ष इन पक्षियों का गुरूघासी दास राष्ट्रीय उद्यान में आना न के बराबर हो गया हैं। ऐसा लग रहा हैं कि इन पक्षियों का इस वर्ष यहां की आबोहवा नहीं भा रही हैं। वन्य जानकारों की माने तो यहां तापमान में आए बदलाव के कारण हो रहा हैं। परिंदों की विशेषता है की अनुकूल तापमान नही होने के कारण वो अपना रास्ता बदल दिया करते हैं। सोनहत पार्क परिक्षेत्र के टेडिया जलाशय एवं गांगी रानी सिंघोर डेम क्षेत्र के इलाकों में ये प्रवासी परिंदों का झुंड देखा जाता था। परन्तु इस वर्ष इनकी आमद नहीं होने से ये इलाके सूने हैं।
बड़ा वन क्षेत्र हैं राष्ट्रीय उद्यान
गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान प्रदेश के अन्य राष्ट्रीय उद्यानों से क्षेत्रफल के आधार पर तुलना की जाए तो यह सबसे बडे 1440 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ हैं। जबकी टाईगत रिर्जव घोषित होने के बाद इसका क्षेत्रफल और बढ़ गया है। उल्लेखनीय है की मध्यप्रदेश के बांधवगढ से होते हुए प्रति वर्ष प्रवासी और कभी कभी कुछ मात्रा में विदेशी पक्षियों का अवागमन गुरूघासीदास में हुआ करता था।
इनका कहना है…
प्रवासी पक्षीयों का प्रवास संबंधित क्षेत्र के तापमान पर निर्भर करता है। साथ ही पक्षीं आस पास के तापमान को भांप लेते है यदि तापमन उनके अनुकूल नही हुआ तो वो अपना रूख बदल लेते है।
अविनाश परीडा
वन्य प्राणी विशेषज्ञ
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