- पैसा जिला पंचायत का एजेंसी ग्राम पंचायत निर्माण किया बिलासपुर के ठेकेदार ने:सूत्र
- जिला पंचायत के ऊपर नीचे अगल-बगल अंदर बाहर के काम बिलासपुर के ठेकेदार के नाम
- जिला पंचायत में एसीपी,दोनों तरफ से शेड निर्माण सभाकक्ष का सौंदरीकरण जिला पंचायत सीईओ के ऑफिस का सौंदर्यीकरण का जिम्मा हा बिलासपुर ठेकेदार के पास
- सिर्फ ग्राम पंचायत एजेंसी बनने के लिए थी और गांव का विकास का जिम्मा किसका है?
- गांव बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा और उस पंचायत से जिला पंचायत कार्यालय चमक रहा।
- क्या जिला पंचायत सीईओ ने केवल अपने लाभ अपने रिश्तेदार के लाभ के लिए चेरवापारा ग्राम पंचायत को बनाया ढाल,किया वहां की राशि का इस्तेमाल?
- जिला पंचायत कोरिया में अब आने वाले लोगों की संख्या भी हुई कम,नहीं होती भीड़भाड़ फिर भी चारों तरफ करा डाला शेड निर्माण
- पैसा पंचायत का विकास जिला पंचायत का और सीईओ सहित उनके रिश्तेदार का क्या यह सूचना सूत्रों की सही?

-रवि सिंह-
कोरिया,08 मई 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिला पंचायत कार्यालय इस समय सुर्खियों में है, सुर्खियों में रहने की वजह यह है कि जिला पंचायत मत के पैसे को खर्च करने के लिए ग्राम पंचायत को निर्माण एजेंसी बनाया गया,वह भी उस कार्य के लिए जिस कार्य का शायद ग्राम पंचायत के पास अनुभव नहीं है,जब टेंडर के माध्यम से निर्माण कार्य कराया जाता है तो उसमें उस व्यक्ति को ही टेंडर मिलता है जो उसे काम का अनुभवी ठेकेदार होता है,उसके पास उस काम का अनुभव होता है,पर यहां पर जिस पंचायत पर है जिला पंचायत कार्यालय स्थित है उसी पंचायत को अपने कार्यालय के निर्माण कार्यों को दायित्व सौंप दिया गया,और ऐसे ऐसे काम करवाए गए शायद जिसका अनुभव ग्राम पंचायत के पास नहीं होगा? क्योंकि ग्राम पंचायत ऐसे काम नहीं करवा पाती ग्राम पंचायत निर्माण जैसे काम कर लेती है पर जिस तरह के काम जिला पंचायत कार्यालय में हुए हैं और ग्राम पंचायत को मोहरा बनाकर किया गया है, उसमें कई सारी अनियमितताएं हैं खामियां हैं पर शायद इसकी जांच ना हो? क्योंकि जिला पंचायत के मुखिया ही इसमें संदिग्ध की भूमिका में दिख रहे हैं, सूत्रों का दावा है कि सिर्फ कमीशन अधिक मिल जाए जिसके लिए ग्राम पंचायत को एजेंसी बनाया गया और अपने चाहते ठेकेदार को बिलासपुर से खोज कर उसे यह काम दिया गया, ताकि किसी को भनक भी ना लगे और ग्राम पंचायत के माध्यम से उसका भुगतान हो जाए और भुगतान भी उसे दर पर हो जो दर शायद टेंडर में होता तो उससे कम कीमत पर वह काम हो सकता था, पर सरकारी पैसे को उड़ाना और उसे अर्जित लाभ को अपने लिए रखना ही शायद उसका उद्देश्य था? अब यह मामला धीरे-धीरे तूल पकड़ता जा रहा है और अब इस मामले में जांच की मांग उठने लगी है पर सवाल यह उठता है कि आखिर क्या इतने लंबे समय का कार्यकाल किसी एक व्यक्ति को सौप देना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसा नहीं है? क्योंकि कोरिया जिले के जिला पंचायत सीईओ का कार्यकाल लगभग 3 साल का हो चुका है और अब वह अंतिम चरण में फसते नजर आ रहे हैं क्योंकि ग्राम पंचायत को एजेंसी तो बना लिया है पर नाम उस ग्राम पंचायत से इनका भी जुड़ा हुआ है, जांच भले से होगी तो ग्राम पंचायत फंसेगा पर ग्राम पंचायत को पैसा देने वाले तो जिला पंचायत कार्यालय के मुखिया ही हैं वह टेंडर कर सकते थे पर टेंडर ना करवा के ग्राम पंचायत को एजेंसी बनाना ही उनकी गड़बड़ी की प्रथम सीढ़ी मानी जा रही है?
जिला पंचायत भवन में लाखो राशि खर्च कर दी और जिसकी एजेंसी पंचायत थी केवल चेक काटने के लिए?
कोरिया जिले के जिला पंचायत और जिला पंचायत सीईओ की मनमानी उनका अपने रिश्तेदार को लाभ पहुंचाने की चाहत खुद को भी लाभ पहुंचाने की चाहत इस हद तक जा पहुंची कि उन्होंने एक ग्राम पंचायत को ही मोहरा बना दिया और वहां की राशि का बंदरबांट कर ली गई है? सूत्रों की माने तो यह बात सही है और जिला पंचायत कोरिया के वर्तमान सीईओ ने जिला पंचायत में बेवजह के निर्माण कार्य और सौंदर्यीकरण के कार्य कराए और करोड़ों से ज्यादा की राशि उन्होंने बंदरबाट कर दी। जिला पंचायत में और उसके बाहर ऐसे ऐसे निर्माण कार्य और सौंदर्यीकरण के कार्य इन साहब के कार्यकाल में संपन्न हुए जिनका न तो औचित्य नजर आता है और न ही जरूरत ही नजर आती है, बताया जाता है कि जहां अब लोगों की आमद ही कम हो चुकी है और छोटा जिला होने का कारण जहां सन्नाटा ही पसरा रहता है उस जिला पंचायत परिसर में और भवन के उपर इतने शेड बना दिए गए कि अब भवन से बड़ा शेड नजर आता है। वैसे मजेदार बात यह है की सभी निर्माण कार्य जिला पंचायत में हुए और एजेंसी ग्राम पंचायत रही और वह भी चेरवापारा ग्राम पंचायत और सबसे मजेदार यह भी बात रही कि ग्राम पंचायत ने केवल चेक काटने का काम किया और निर्माण और सौंदर्यीकरण का काम किया बिलासपुर के एक ठेकेदार ने जो बताया जाता है सीईओ साहब के रिश्तेदार हैं, वैसे इसकी पुष्टि दैनिक घटती घटना नहीं करता कि ठेकेदार सीईओ साहब के रिश्तेदार हैं यह जांच का विषय है जिसकी जांच होनी चाहिए। इस पूरे मामले में यह भी समझ में आया कि पैसा ग्राम पंचायत के विकास की जगह अधिकारी के विकास उसके रिश्तेदार के विकास पर खर्च की गई यदि सूत्रों की जानकारी सही है,वहीं करोड़ों से अधिक के बंदरबाट के बाद भी जिला पंचायत का पिछला हिस्सा भवन का न पुताई से चमकाया गया और न वहां कोई मरम्मत हुई। कुलमिलाकर सीईओ साहब ने जैसा बताया है सूत्रों ने जिला पंचायत भवन में ही करोड़ों से अधिक राशि खर्च कर दी और जिसकी एजेंसी पंचायत थी लेकिन केवल चेक काटने के लिए।
एपीसी कार्य और सीईओ साहब के चेंबर में भी हुआ जमकर खर्च:सूत्र
बताया जा रहा है कि सीईओ साहब के चेंबर को भी चमकाया गया है और एपीसी के लिए भी बड़ी राशि खर्च की गई है,क्या इसमें भी ग्राम पंचायत एजेंसी बनाई गई यह भी एक सवाल है। वैसे जिला पंचायत दिन ब दिन काफी निर्माण कार्य से चमकाया जा रहा है और ऐसा क्या कोई उपलçध के कारण किया जा रहा है यह जनता का सवाल है। जिला पंचायत कोरिया का बदला स्वरूप काफी कुछ खुद बयान करता है।
यदि ऐसे ही अपने लाभ के लिए अधिकारी करने लगेंगे काम अपनों को करते रहेंगे उपकृत तो क्या ठेकदारों के लिए बेरोजगारी की स्थिति नहीं खड़ी कर रहे वह?
जिला पंचायत कोरिया के सीईओ को लेकर जो बातें सामने आ रही हैं उसके अनुसार उन्होंने अपने रिश्तेदार को उपकृत करने अपने लिए भी लाभ तय करने ग्राम पंचायत को एजेंसी बनाकर करोड़ो से अधिक का निर्माण कार्य संपन्न करा दिया जिला पंचायत में,अब क्या ऐसा उनका करना ठेकदारों के लिए बेरोजगारी की स्थिति खड़ी करने जैसा काम नहीं,वैसे यदि आरोप लगे हैं तो कहीं न कहीं कुछ सही है और इस मामले में जिलाधीश को जांच करना चाहिए।
अपने खास इंजीनियर रविंद्र सोनी को क्या अपने लिए ही नियुक्त कर रखे हैं जिला पंचायत सीईओ,क्या जिला पंचायत में हुए कार्यों के मूल्यांकन का जिम्मा सम्हाल रहे थे रविन्द्र सोनी?
कोरिया जिला पंचायत सीईओ के साथ एक नाम और है जो आज काफी सुर्खियां बटोर रहा है वह नाम है इंजीनियर रविंद्र सोनी का,संविदा कर्मचारी का जलवा देखते ही बनता है आजकल जो बड़े बड़े अधिकारियों जैसे व्यवहार का आदि हो चुका है और जिसे पूरा संरक्षण जिला पंचायत सीईओ का मिल रहा है,अब सवाल यह भी है कि क्या रविन्द्र सोनी इसलिए हैं खास क्योंकि वही करते हैं जिला पंचायत कोरिया के सीईओ के कई उनसे जुड़े कार्यों का मूल्यांकन। वैसे रविंद्र सोनी उनके नौ रत्नों में से पहले रत्न जाने जाते हैं यह बताया जाता है।
रिश्तेदार सहित खुद को लाभ पहुंचाने के लिए तो नहीं हुए करोड़ों के काम,क्या इसीलिए तो नहीं ग्राम पंचायत को बनाया गया एक तरह से मोहरा?
सूत्रों के अनुसार जिला पंचायत सीईओ साहब कोरिया ने ग्राम पंचायत को एजेंसी बनाया और करोड़ों का खेल खेल डाला,इस खेल में उन्होंने अपने ठेकेदार रिश्तेदार को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया खुद भी वह लाभ प्राप्त कर सके। अब क्या यह लग रहे आरोप सही हैं, वहीं क्या यह भी आरोप सही हैं कि सीईओ साहब के द्वारा पूरे मामले में ग्राम पंचायत को मोहरा बनाया गया।बात यदि सच है तो मामला गंभीर है और इस मामले में विस्तृत जांच की जरूरत है।
जांच हो जाए तो सीईओ साहब के कार्यकाल के कई भ्रष्टाचार उजागर हो जायेंगे…जो नजर आने लगेंगे…जैसा सूत्रों का दावा है…
जिला पंचायत कोरिया में और भी कई मामले हैं जिनकी जांच हुई तो करोड़ों का भ्रष्टाचार उजागर होगा यह भी सूत्रों का दावा है वहीं सूत्रों का यह भी कहना है कि यदि जिला खनिज न्यास मद की ही जांच हुई तो भी बड़ी गड़बडि़यां उजागर होंगी जिसमें भी करोड़ों का भ्रष्टाचार उजागर होगा और कई बाहरी और भीतरी लोग जिले के लाभान्वित मिलेंगे जो कहीं न कहीं सीईओ साहब के नजदीकी हैं। बताया जाता है कि सीईओ साहब की मंडली भी है जिला पंचायत में जो उनके भ्रष्टाचार को सह देते हैं और उन पर पर्दा डालते हैं जिससे बहुत कुछ चीजें बाहर नहीं निकल पाती लेकिन जितनी भी बातें निकलकर सामने आई हैं उतने में ही सीईओ साहब के कार्यकाल के कई भ्रष्टाचार उजागर हो जायेंगे जो नजर आने लगेंगे जैसा सूत्रों का दावा है।
क्या ग्राम पंचायत को एजेंसी बनाकर भ्रष्टाचार का बड़ा खेल खेला गया है?
अब पूरे मामले में सवाल यह है कि यदि ग्राम पंचायतों के विकास की राशि इस तरह बड़े अधिकारी जिला पंचायत सीईओ स्तर के अधिकारी जिला पंचायत के विकास के नाम पर ही खर्च कर देंगे और विकास भी ऐसा जिसकी न जरूरत थी और न औचित्य तो ग्राम पंचायत का विकास कैसे होगा,वैसे पूरे मामले में ग्राम पंचायत चेरवापारा ही अभागा है जहां के विकास को सीईओ साहब ने प्रभावित करने का काम किया जानकारी सही है। वैसे बताया यह भी जा रहा है कि ग्राम पंचायत को एजेंसी बनाकर इसलिए यह बड़ा खेल खेला गया क्योंकि ग्राम पंचायत के मामले में निविदा प्रकिया से बचना आसान था और अपने व्यक्ति या रिश्तेदार को उपकृत करना सरल था। अब पूरे मामले में जिले की मुखिया क्या जांच तय करती हैं क्या वह मामले में ध्यान देकर इन विषयों की सत्यता की स्थिति से अवगत होने का काम करती हैं दोषी के लिए कार्यवाही का प्रावधान करती हैं कि नहीं।
रिश्तेदार ने किया पूरा काम,ग्राम पंचायत चेरवापारा ने एजेंसी बतौर किया भुगतान:सूत्र
बताया जा रहा है कि चेरवापारा ग्राम पंचायत के द्वारा जिला पंचायत के विभिन्न कार्यों के व्यय का भुगतान किया गया,सूत्रों की दी गई जानकारी कितनी सही है यह तो जांच यदि हुई तभी पता चल सकेगा लेकिन सूत्रों की बात माने तो सीईओ जिला पंचायत के रिश्तेदार ने पूरा काम जिला पंचायत का किया जो बिलासपुर के हैं। अब कौन हैं रिश्तेदार कितने का हुआ भुगतान एक ही ग्राम पंचायत बनी एजेंसी या कई अन्य ग्राम पंचायतों को भी इन कामों के लिए एजेंसी बनाया गया यह भी जांच का विषय है।
ग्राम पंचायत के पैसे से जिला पंचायत सजाना कैसा विकास,ऐसे में कैसे होगा ग्राम पंचायत का विकास?
पूरे मामले में जो सूत्रों की जानकारी से सामने आई है और जिसकी सत्यता की पुष्टि होनी बाकी है यह सवाल खड़ा होता है कि ग्राम पंचायत के विकास की राशि से जिला पंचायत सजाना कैसे और किस तरह का विकास है। यदि ऐसा हुआ है तो ऐसे में ग्राम पंचायत का विकास कैसे होगा यह भी बड़ा सवाल है। वैसे सीईओ साहब को खुद पूरे मामले में अपना पक्ष अब प्रेस कोफ्रेंस व विज्ञप्ति जारी कर रखना चाहिए जिससे सूत्रों द्वारा दी गई जानकारी की असलियत सामने आ सके। वैसे जिला पंचायत कोरिया फिलहाल सीईओ साहब के कारण सुर्खियों में है वहीं उनका लंबे समय से जिले में जमे रहने से भी इसको जोड़कर देखा जा रहा है और यह माना जा रहा है कि कहीं न कहीं इन्हीं कारणों से उनका यहां से जाने का मन नहीं है।
जिला पंचायत भवन से बड़ा दिखने लगा शेड निर्माण का कार्य,शेड निर्माण भी ऐसा की जिसकी जरूरत भी सवालों के घेरे में…
जिला पंचायत में हुआ शेड निर्माण कार्य ऐसा है कि आज देखने पर जिला पंचायत के भवन से बड़ा शेड निर्माण का कार्य नजर आने लगा है ,कोरिया जब एमसीबी के साथ संयुक्त था तब जिला पंचायत में भीड़ भाड़ भी हुआ करती थी और जबसे जिला विभाजन हुआ तबसे जिला पंचायत कोरिया में आने वाले लोगों की संख्या भी कम हुई है और एक तरह से जिला पंचायत वीरान ही रहा करता है। अब वीरान जिला पंचायत जहां दिन में वीरानी छाई रहती है वहां के लिए भवन के दो तरफ और छत पर जगह जगह शेड निर्माण की जरूरत क्यों पड़ी यह बड़ा सवाल है। जिला पंचायत कोरिया में हुआ शेड निर्माण अब खुद ही सवाल खड़े करता है कि क्यों भवन के अगल बगल बड़े बड़े और भवन के उपर बड़े बड़े शेड बनाए गए।
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