- आग से वन एवं वन्य प्रांणीयों को हो रहा नुकसान
- गुणवत्ता विहीन निर्माण के कारण स्टाफ डेमों में नही ठहर रहा पानी…नए बनाये जा रहे स्टाफ डेमो में पानी ठहरेगा या नही बना बड़ा सवाल


-राजन पाण्डेय-
सोनहत,26 अप्रैल 2025 (घटती-घटना)। क्षेत्रफल की दृष्टि से प्रदेश के सबसे बडे राष्ट्रीय उद्यान गुरू घासीदास नेशनल पार्क में प्रबंधन के तमाम दावों के बावजूद पानी की फिलहाल बहुत बेहतर व्यवस्था नहीं है। पार्क के सोनहत रामगढ सहित जनकपुर कमर्जी रेहण्ड क्षेत्र में सूखे जैसी स्थिति है और यहां से जीव बसाहट की ओर पलायन कर रहे हैं। आलम है की जीवों सक्रियता जंगल के बाहर ज्यादा देखने को मिल रही है। पिछले दो महीनों से गुरूघासीदास नेशनल पार्क के चारो तरफ बसाहट के क्षेत्रों में जीवों की सक्रियता यूं ही नहीं है। पिछले कुछ सालों प्रबंधन का यही दावा था कि जीव बसाहट की तरफ नहीं बढ़ रहे हैं बल्कि बसाहट जंगल की तरफ बढ़ रही है। जबकि वर्तमान में सच्चाई यह है कि जिस तेजी से गर्मी बढ़ रही है उसी तेजी से जंगल के जलस्रोत सूख रहे हैं।
पार्क परिक्षेत्र में नहीं हैं बड़े टैंक
नेशनल पार्क के अंदर कोई बड़ा टैंक नहीं है। जो गड्ढे हैं उनमें पानी भरा जाता है लेकिन तेज गर्मी के कारण वास्पीकरण और जमीन द्वारा सोख लेने के कारण पानी जल्द खत्म हो जाता है। इससे जंगली जानवरों को पीने का पानी नहीं मिल पाता है। पानी की बेहतर व्यवस्था बनाने के लिए कोई खास प्रयास नहीं किए गए हैं। प्रबंधन कि माने तो पार्क के अंदर कई प्राकृतिक जल स्रोत है और पानी के लिए विभाग द्वारा व्यवस्था भी बनाई गई हैं लेकिन सच्चाई यह है कि सोनहत और रामगढ़ परिक्षेत्र में इन दिनों पानी की किल्लत है परिणामस्वरूप जंगल से पलायन करके जीव बसाहट की तरफ बढ़ जाते हैं।
औचित्य विहीन बनाए गए कई स्टाफ डेम
गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान सोनहत रामगढ़ रिहंद कमर्जी अंर्तगत पार्क परिक्षेत्र द्वारा पूर्व में लाखों की लागत से स्टाफ डेम का निर्माण कराया गया जो औचित्य विहीन नजर आने लगा है वही ऐसे निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने वन विभाग व पार्क परिक्षेत्र पर शासन की राशी का दुरउपयोग करने का भी आरोप लगाया है । उल्लेखनीय है कि लाखों रूपए की राशी खर्च करके वन विभाग द्वारा स्टाफ डेम तो बना दिया पर वर्तमान समय में कई स्टाफ डेम में रत्ती मात्र भी पानी नही है अब ऐसी स्थिती में यह कहना गलत नही होगा की विभाग द्वारा बनाए गए कई स्टाफ डेम सिर्फ शो पीस ही साबित हो रहे है। वही वर्तमान में जो स्टाफ डेम बनाये जा रहे हैं उनकी गुणवत्ता किसी से छुपी नही है, गुणवत्ता के साथ साथ स्टाफ डेमो के स्थल चयन पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या बरसात के अलावा अन्य दूसरे महीनो में भी इन स्टाफ़डेमो मे पानी ठहरेगा? ये सवाल अभी भविष्य के गर्भ में हैं लेकिन यदि पानी नही ठहरा तो ये करोड़ो के स्टाफ़डेम सफेद हाथी साबित होंगे।
जंगलों में लगी आग से वन संपदा हो रही खाक
विकासखंड सोनहत अंर्तगत स्थित प्रदेश के सबसे बडे राष्ट्रीय उद्यान गुरूघासीदास नेशनल पार्क में कई स्थानों पर आग लगने से राष्ट्रीय उद्यान को काफी नुकसान पहुचा है। वही आग का आलम सोनहत वनपरिक्षेत्र देवगढ़ एवं पार्क एरीया में जारी है हलाकी वन विभाग के द्वारा फायर वाचर नियुक्त किये गए है बावजूद इसके वनांचल क्षेत्रों में आग का आलम ज्यादा है। सूत्रों की माने तो विभाग को निर्माण कार्यो फुर्सत ही नही है इस कारण आग पर ध्यान नही दिया जा रहा है, स्टाफ डेम निर्माण कार्य अपने आरंभ से ही इतने सवालों और शिकायतों के घेरे में रहा कि शायद विभाग को आग से निपटने की फुर्सत नही मिली।
जंगल और हरियाली के बीच हुआ फासला
सोनहत विकासखंड के वन परिक्षेत्र सोनहत देवगढ़ एवं गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान के अलग अलग क्षेत्रों में आग का कहर बरपा, वर्तमान समय में मिली जानकारी अनुसार पार्क परीक्षेत्र के धनपुर कुर्थी और आनंदपुर दसेर से लगे हुए इलाकों के अलावा रामगढ़ के आस पास के क्षेत्र कुछ मात्रा में सोनहत के कछाड़ी मेण्ड्रा तुर्रीपानी एवं बंशीपुर चंदहा क्षेत्र के जंगलों में आग से जंगलों को कही कम कही ज्यादा नुकसान होने की जानकारी मिली है जबकी राष्ट्रीय उद्यान के अलावा देवगढ़ क्षेत्र और मनेन्द्रगढ़ वनमण्डल से लगे क्षेत्र अकलासरई भैंसवार के अलावा अकलासरई से बनिया नदी के बीच के क्षेत्र में आग लगने की जानकारी मिली है ग्रामीणों के मुताबिक रेवला आमापानी के जंगलों में भी कुछ दिवस पुर्व आग लगी थी हालकि इन स्थानों में से कई स्थानों पर लगी आग पर काबू पा लिया गया है और कुछ स्थानों पर आग स्वतः बुझ गई है लेकिन आग से छोटे झाड़ जल कर नष्ट हो गए हे।
गुरुघासीदास तमोर पिंगला टाईगर प्रोजेक्ट पर सवाल के घेरे में…
उल्लेखनीय है की गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान में टाईगर प्रोजेक्ट शुरू होने वाला है लेकिन प्रतिवर्ष उद्यान क्षेत्र में लगने वाली आग से जंगलों को काफी नुकसान होता है जिससे जानवर बसाहट की ओर पलायन करने लगते है। प्रति वर्ष आग की घटनाओं एवं लगातार गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्यो से टईगर प्रोजेक्ट की सफलताओं पर अभी से सवाल उठने लगे है।
क्या कहते हैं लोग
राष्ट्रीय उद्यान में हर साल आग लगती है और आग से वनों के साथ साथ वन्यप्राणी को नुकसान होता है लेकिन विभाग के अधिकारियों को कोई फर्क नही पड़ता, राष्ट्रीय उद्यान में निर्माण कार्यो में अनियमितता के साथ आग से हुए नुकसान की भी जांच होनी चाहिए और सबंधितो पर कार्यवाही भी होनी चाहिए
ज्योत्स्ना राजवाड़े,पूर्व जिला पंचायत सदस्य
वन और वन्य प्राणियों के लिए राष्ट्रीय उद्यानों की परिकल्पना की जाती है,विभागीय कार्यप्रणाली से टाइगर प्रोजेक्ट की सफलता पर अभी से सवाल उठने लगे हैं
मोहन प्रसाद यादव,सोनहत
राष्ट्रीय उद्यान में अनियमितताओं की जांच हेतु संचालक को ज्ञापन दिया गया है जांच एवं कार्यवाही नही होने पर पार्क कार्यालय सोनहत का घेराव किया जावेगा
अविनाश पाठक,कांग्रेस नेता
राष्ट्रीय उद्यान में लगातार हो रही अनियमितताओं को नेता प्रतिपक्ष छाीसगढ़ विधानसभा डॉ चरणदास महंत जी से मिल कर अवगत कराऊंगा और उनसे उक्त मामले को विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा पटल पर उठाने का निवेदन करूँगा
अनित दुबे,केशगवां
गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान में निर्माण कार्यो में अनियमितता बरतने की जानकारी मिली है जिसकी जांच होनी चाहिए,जांच उपरांत कड़ी कार्यवाही भी होनी चाहिए,गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के तरफ से बहुत जल्द ज्ञापन सौंपा जावेगा और कार्यवाही नही होने पर आंदोलन भी किया जावेगा
संजय कमरो
प्रदेश अध्यक्ष गोंडवाना गणतंत्र पार्टी
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