निलंबन अवधि को माना जाएगा ड्यूटी का हिस्सा
बिलासपुर,24 मार्च 2025(ए)। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ वन मंडल में कार्यरत फॉरेस्टर दिनेश सिंह राजपूत की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने राज्य शासन के उस आदेश को खारिज कर दिया था जिसमें कर्मचारी के निलंबन अवधि को ड्यूटी का हिस्सा ना मानते हुए शत-प्रतिशत रिकवरी का आदेश जारी कर दिया था। मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस बीडी गुरु ने रिट याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य शासन के आदेश को खारिज कर दिया है। जस्टिस गुरु ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए निलंबन अवधि को ड्यूटी का हिस्सा मानने की व्यवस्था दी है। जस्टिस गुरु ने अपने फैसले में लिखा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि अनुशासनात्मक प्राधिकारी के साथ-साथ समीक्षा प्राधिकारी सहित अपीलीय प्राधिकारी ने निलंबन अवधि को कर्तव्य न मानने की सजा में हस्तक्षेप नहीं किया है, जबकि इसी तरह की स्थिति वाले कर्मचारियों के मामले में उन्होंने निलंबन अवधि को कर्तव्य के रूप में माना है जो प्रकृति में भेदभावपूर्ण प्रतीत होता है। याचिकाकर्ता दिनेश सिंह राजपूत ने अधिवक्ता संदीप दुबे व आलोक चंद्रा के माध्यम से वन विभाग के फैसल को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता दिनेश सिंह राजपूत वर्तमान में वन मंडल रायगढ़ में वनपाल के पद पर कार्यरत है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन एवं जलवायु परिवर्तन वन विभाग द्वारा 05.09.2022 के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि बड़े दंड को छोटे दंड में बदल दिया गया है और निलंबन की अवधि को कर्तव्य नहीं माना गया है। याचिकाकर्ता ने छत्तीसगढ़ राज्य प्रमुख सचिव, छ.ग. वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के उस आदेश पर सवाल उठाया है जिसमें याचिकाकर्ता के आवेदन को खारिज करते हुए अपीलीय अधिकारी के आदेश को बरकरार रखा है।
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