जीवित व्यक्ति को मृत बताकर बेची नौकरी,
वास्तविक हितग्राही दर-दर भटक रहे..
बिलासपुर,07 मार्च 2025 (ए)। एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड) में भू-अर्जन के बदले नौकरी देने की योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। जिन लोगों को इसका लाभ मिलना था, वे आज भी अपने अधिकार के लिए भटक रहे हैं, जबकि अपात्र लोगों को पैसे लेकर नौकरी दे दी गई। अब तक की सबसे शर्मनाक घटना में एक जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर किसी और को उसकी नौकरी बेच दी गई।
मृत दिखाकर नौकरी दूसरे को दी,महाप्रबंधक ने छिपाई जानकारी
पीड़ित ग्राम जुनाडीह (गेवरा क्षेत्र) के निवासी हैं। उनके पास खसरा नंबर 440/4 और 441/1 की 5 डिसमिल जमीन है, जिसके बदले उनके बेटों को
नौकरी मिलनी थी। लेकिन भ्रष्टाचारियों ने एक ऐसा खेल खेला कि उन्हें जिंदा होते हुए भी मृत घोषित कर दिया गया और नौकरी किसी और को दे दी गई।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
एसईसीएल के कर्मचारी प्रमोद कुमार शर्मा और अरुण पांडे ने नौकरी दिलाने के नाम पर मुकरदम से ₹20,000 लिए। फिर बहाने से उनकी ऋण पुस्तिका ले ली, यह कहकर कि नौकरी के लिए जरूरी है।
बाद में उन्हें बताया गया कि प्रार्थी की मौत हो चुकी है, इसलिए प्रदीप कुमार शर्मा (पिता- कांशी प्रसाद शर्मा) को नौकरी दे दी गई।
प्रार्थी आज भी जीवित हैं और पेंशन भी पा रहे हैं, फिर भी फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बना दिया गया।
इस मामले की शिकायत एसईसीएल के डीपी,सीएमडी और पुलिस अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सरोज बाई की जमीन पर खेल,अपात्र को दी नौकरी…
एक और पीडि़त ईश्वर दत्त कश्यप (नेहरू नगर, बालकों) ने बताया कि उनकी सगी बहन सरोज बाई की जमीन (खसरा नंबर 378/12, ग्राम मनगांव, तहसील दीपिका,जिला कोरबा) को कंपनी ने अर्जित किया था। इसके बदले उनके पति रामचरण को नौकरी दी गई थी।
लेकिन भ्रष्टाचारियों ने इस जमीन पर फर्जीवाड़ा कर दूसरा अपात्र व्यक्ति विजय कुमार (पिता- जगदीश प्रसाद) को भी नौकरी दे दी।
सबसे चौंकाने वाली बात
विजय कुमार की मां सरोज बाई की उम्र उससे कम है!
विजय कुमार का असली भाई कोरबा के मुख्य चिकित्सालय में कार्यरत है, और उसकी मां का नाम उसके सेवा पुस्तिका में दर्ज है।
विजय कुमार के पिता शासकीय शिक्षक रहे हैं, उनकी सेवा पुस्तिका में पत्नी का नाम सावित्री कौशिक दर्ज है।
कैसे हुआ यह घोटाला?
सरोज बाई के नाम पर अर्जित भूमि के आधार पर पहले से उनके पति को नौकरी मिल चुकी थी।
लेकिन अधिकारियों ने विजय कुमार को सरोज बाई का पुत्र बताते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार किए। नियुक्ति पत्र में गलत खसरा नंबर 387/12 दर्ज कर दिया गया, जबकि एसईसीएल ने यह खसरा नंबर अधिग्रहित ही नहीं किया था।
भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत,लेकिन कोई कार्रवाई नहीं…
पीडि़तों ने प्रधानमंत्री, पुलिस विभाग और एसईसीएल के आला अधिकारियों तक इस घोटाले की शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। महाप्रबंधक के पत्र क्रमांक 3326 (दिनांक 20.12.2024) में भी इस घोटाले की पुष्टि हुई है, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।
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