- हाईप्रोफाइल सीट में आशा महेश साहू को टक्कर देने वाले बिपिन जायसवाल 53 वोट से हारे,वर्तमान विधायक की शक्तियों से क्या आशा महेश साहू को मिली जीत?
- आशा महेश साहू के पति को मिला था इस चुनाव में अभय वरदान,जो चाहे कर लो वाली मिली थी छूट
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर,24 फरवरी 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले में जिले से लेकर जनपद पंचायत का चुनाव काफी रोमांचक था, कोरिया जिले के जिला पंचायत के 10 सीटों पर जहां प्रत्याशियों का आमना सामना रोमांच से भरा रहा तो वही जनपद पंचायत के भी 25 सीटों पर चुनाव काफी दिलचस्प रहा, कई सीट हाई प्रोफाइल रही कई दिग्गजों को हारना पड़ा। बचरा पोड़ी से जहां जनपद उपाध्यक्ष के दावेदार माने जा रहे अशोक जायसवाल हारे तो वहीं पटना क्षेत्र के जनपद क्षेत्र क्रमांक 11 जो काफी हाई प्रोफाइलथी यहां पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी तो मैदान में थे ही पर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी कोई नहीं था निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली ना भाजपा समर्थित प्रत्याशी न कांग्रेस समर्थित के बीच टक्कर हुई टक्कर तो दो निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच हुआ, जहां पर दो पूर्व जनपद उपाध्यक्ष आमने-सामने थे जिनके बीच काफी कांटे की टक्कर थी, आशा महेश साहू ने अंतत चुनाव जीत लिया वहीं बिपिन जायसवाल को दूसरी बार हराकर जनपद सदस्य बनी, दोनों बार विपिन जायसवाल के ही साथ आशा महेश साहू की टक्कर थी, इस बार 53 वोट से ही आशा महेश साहू ने जीत दर्ज की, पर यह जीत भी कहीं ना कहीं सत्तापक्ष के विधायक की मेहरबानी से मिली है ऐसा सूत्रों का कहना है क्योंकि आचार संहिता के उल्लंघन से लेकर तमाम तरीकों की शिकायतों के बाद भी आशा महेश साहू के पति पर अंकुश नहीं लगाया गया, उनके पति कि यह जीत मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने पूरे चुनाव की कैंपेनिंग खुद की थी और खुद प्रचार कर रहे थे उन्हें इस बात का भी भय नहीं था कि वह एक शासकीय शिक्षक है। चुनाव से ड्यूटी भी उन्होंने कटवा लिया था ताकि अपनी पत्नी के लिए खुलकर प्रचार कर सकें।
सत्यम साहू,रमेश राजवाड़े ऐसे युवा नेतृत्व उभरते हुए भाजपा के थे जिनका चुनाव हारना कहीं न कहीं उनके राजनीतिक भविष्य के लिए घातक हो गया
जनपद पंचायत सदस्यों के चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन बेहतर नहीं माना जाएगा कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड में। अधिकांश जनपद सदस्य प्रत्याशी चुनाव हार गए वह भी ऐसे चेहरे चुनाव हार गए जो युवा नेतृत्व माने जाते थे जिनका भविष्य उज्ज्वल माना जा रहा था कोरिया जिला भाजपा में। सत्यम साहू, रमेश राजवाड़े ऐसे युवा नेतृत्व उभरते हुए भाजपा के थे जिनका चुनाव हारना कहीं न कहीं उनके राजनीतिक भविष्य के लिए घातक हो गया। प्रतिष्ठापूर्ण मानी जा रही रनई डुमरिया तेंदुआ की जनपद सीट से भाजपा ने सत्यम साहू को समर्थन दिया था वहीं बैकुंठपुर की खरवत क्षेत्र की एक जनपद सीट से युवा नेता रमेश राजवाड़े को मौका मिला था। रमेश राजवाड़े के खिलाफ तो पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष के पुत्र ने ही बगावत करके चुनाव लड़ने का मन बना लिया था और वह लड़े भी वहीं सत्यम साहू की बात करें तो वह अपने गृह ग्राम से ही चुनाव हार गए और वहीं की हार को वह दो अन्य ग्राम से जीत में नहीं तदील कर पाए।
राजू साहू को जीताकर योगेश शुक्ला ने अपनी बादशाहत कायम रखी
सत्यम साहू की हार रनई जमींदार योगेश शुक्ला की जीत मानी जा रही है क्योंकि यह उनकी प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला था चुनाव था जहां उनका ही एक सहायक चुनाव कांग्रेस समर्थन से लड़ रहा था। योगेश शुक्ला ने एक तरह से रनई ग्राम से जुड़ने वाली जनपद सीट से अपना प्रत्यासी जिताकर यह साबित कर दिया कि जिस जनपद सीट से रनई जुड़ेगा वहां से उनका ही आदमी चुनाव जीतेगा। राजू साहू की जीत योगेश शुक्ला की बादशाहत कायम रखने वाली जीत है। योगेश शुक्ला ने जहां अपनी बादशाहत कायम रख ली वहीं सत्यम साहू जैसे युवा भाजपा नेता के राजनीतिक भविष्य पर एक प्रश्न चिन्ह लगता नजर आ रहा है। सत्यम साहू का एक छोटे चुनाव में अपने ही ग्राम से बड़े अंतर से पिछड़ जाना उनके लिए शुभ उनके राजनीतिक भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। वैसे राजू साहू की जीत का जश्न रनई में आतिशबाजी के साथ मनाया गया और कम से कम योगेश शुक्ला के लिए यह जीत कई हार के सामने भी बड़ी जीत रही हार का गम भुलाने वाली रही यह देखने को मिला। जनपद सदस्य वाली सीटों में बैकुंठपुर जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली कई प्रतिष्ठापूर्ण सीटों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी हार गए। छिंदिया क्षेत्र, खरवत क्षेत्र , कटकोना क्षेत्र,इसमें शामिल हैं।
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