- क्या हारे हुए पार्षद प्रत्याशी बनाए जाएंगे एल्डरमैन,क्या हारे हुए लोगों को ही मिलेगा दोहरा लाभ?
- हारे प्रत्याशियों ने चुनाव में खुद के लिए ही की थी मेहनत,अध्यक्ष की जीत में उनका नहीं योगदान
- क्या बावजूद इसके उन्हें मिलेगा एल्डरमैन बनने जैसा एक अभयदान?
- हारे हुए पार्षद प्रत्याशियों सहित ऐसे समाज के लोगों को जिन्हें मिला है प्रत्याशी बनने का मौका न मिले एल्डरमैन का पद,भाजपा की अंदर की सुगबुगाहट
-रवि सिंह-
कोरिया/पटना,17 फरवरी 2025 (घटती-घटना)। नए नए नगर पंचायत पटना के चुनाव में अध्यक्ष सहित पांच पार्षदों की जीत के बाद अब उपाध्यक्ष के लिए जहां कांग्रेस खेमे में तैयारी और आमराय पार्षदों में बनाने की तैयारी चल रही है वहीं भाजपा के कार्यकर्ताओं सहित भाजपा को समर्थन करने वाले पटना वासियों के मन में भी काफी कुछ चल रहा है और जो कुछ चल रहा है वह नगर पंचायत में एल्डरमैन की नियुक्ति को लेकर चल रहा है जिसके लिए ऐसी सुगबुगाहट सुनाई दे रही है कि हारे हुए पार्षद प्रत्याशियों साथ उन समाज के लोगों को एल्डरमैन न बनाया जाए जिनके समाज से कोई पार्षद प्रत्याशी रह चुका है। जैसी सुगबुगाहट है उसके अनुसार भाजपा समर्थित लोगों की मंशा है कि अब एल्डरमैन की नियुक्ति में जिलाध्यक्ष इस बात का ध्यान रखें कि किसी को भी टी वी शो की तरह नगर पंचायत में वाइल्ड कार्ड एंट्री न मिल सके और हारे हुए लोगों को पुनः अगली बार के चुनाव के लिए तैयारी करने के लिए कहते हुए ऐसे लोगों को एल्डरमैन बनाया जाए जो पार्टी में समर्पित भाव से काम करते आए हैं। बताया जा रहा है कि एल्डरमैन की नियुक्ति पर पटना के भाजपा समर्थित लोगों की टकटकी लगी हुई है। कई ऐसे भाजपा समर्थित लोग हैं जिनका निस्वार्थ भाजपा प्रेम पटना में जाना माना जाता है और ऐसे लोगों को अब नगर पंचायत में स्थान मिले यह अधिकांश भाजपाइयों की मंशा है।
बता दें कि कई बड़े चेहरे भाजपा के पटना के पहले चुनाव में पार्षद का चुनाव हार गए और वह ऐसे चेहरे थे जो अध्यक्ष पद के दावेदार थे वहीं अब उनकी हार के बाद उनकी मंशा नगर पंचायत में पिछले दरवाजे से प्रवेश की है वह एल्डरमैन बनकर नगर पंचायत में जाना चाहते हैं और अब ऐसी मंशा का विरोध शुरू है। वैसे जिलाध्यक्ष भाजपा शायद ही ऐसे लोगों को प्रवेश दिलाए और भाजपा के अन्य समर्पित लोगों को पटना में नाराज होने का मौका दें ऐसा माना जा रहा है। वैसे भाजपा से जिन्हें एल्डरमैन बनाया जाना चाहिए उनमें से कुछ नाम नगर के लोगों के अंदरखाने की चर्चा से सामने आ रहे हैं और उन नामों में बलराम अग्रवाल, रितेश सिंह, अवधेश श्रीवास्तव, संजय गुप्ता के नाम प्रमुख हैं। इन नामों के अलावा एक दो नाम की चर्चा और है और सोनी समाज से भी नाम सामने आ रहे हैं लेकिन सोनी समाज के एक पार्षद प्रत्याशी की हार ऐसे वार्ड से हुई जहां सोनी समाज का मत यदि पूरा प्रत्याशी को मिलता जो समाज से ही था भी वह भाजपा प्रत्याशी जीत जाता और ऐसा नहीं हुआ इसलिए सोनी समाज की दावेदारी को इस आधार पर खारिज करने की बात सुनी जा रही है। वैसे कई वार्डो से प्राप्त नतीजे यह साबित करते हैं ऐसा कार्यकर्ताओं का मानना है कि सोनी समाज का साथ मिला होता भाजपा प्रत्याशी की जीत का अंतर और अधिक होता और कई पार्षदों के भी भाजपा के जीत होती। वैसे इसमें सोनी समाज के पदाधिकारी जिन्होंने बीजेपी के लिए काम किया था उनका भी नाम इसमें शामिल है जो अध्यक्ष पद के दावेदार भी थे और टिकट न मिलने के बाद भी उन्होंने विरोध नहीं किया भाजपा के साथ ही जाना जरूरी समझा और अंततः आज उनकी वजह से सोनी समाज का 70 प्रतिशत वोट भी भाजपा को गया। वह भी एल्डरमैन के दावेदार हैं।
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