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बैकुण्ठपुर,@जो व्यक्ति गांव ही नहीं अन्य जिले के भी निवासी नहीं उनका नाम वोटर लिस्ट में कैसे?

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बैकुण्ठपुर,05 दिसम्बर 2024 (घटती-घटना)। ग्राम पंचायत डकईपारा इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है। विगत कुछ दिनों पूर्व कलेक्टर जनदर्शन में इस ग्राम के कई वार्ड के ग्रामवासियों ने अपनी शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके बिना जानकारी में आए पंचायत में पदस्थ सचिव ने व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के नियत से वार्डबार मतदाता सूची में अनाधिकृत रूप से हेर फेर किया है। जिस खबर का प्रकाशन भी घटती घटना ने किया था। फलस्वरुप हुआ यह की प्रशासन ने उच्च स्तरीय जांच टीम के माध्यम से ग्रामीणों के लगाए गए आरोप पर जांच पड़ताल की और पंचायत सचिव को फटकार भी लगाई तथा सही तरीके से पुनः वार्ड बार मतदाता सूची को सुधारने का निर्देश दिया। अब लगातार ग्राम पंचायत डकई पारा में नए मामले सुर्खियों में आते जा रहे हैं। विगत दिनों मंगलवार को कलेक्टर जनदर्शन का कार्यक्रम स्थगित था,अतः ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय के आवक जावक में आवेदन देकर मतदाता सूची से संबंधित एक नई शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार पूर्व में पंचायत के जिस वार्ड क्रमांक 11 से संबंधित मतदाता सूची के मामले की जांच हुई, इस वार्ड क्रमांक 11 में 5-7 ऐसे मतदाताओं के नाम दर्ज किए गए हैं, जो ग्राम पंचायत ही नहीं अपितु पूरे जिले के निवासी ना होकर सरगुजा जिले के निवासी हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इन मतदाताओं का नाम सरगुजा जिले के अपने मूल निवास स्थान में पहले से दर्ज है। परंतु पंच का चुनाव जीतने की खातिर इन मतदाताओं के रिश्तेदार ने अवैध रूप से इनका नाम पंचायत के वार्ड क्रमांक 11 में जुड़वा रखा है। जबकि यह ना तो इस ग्राम पंचायत के निवासी हैं, नहीं उनके नाम पर कोई मकान या जमीन इस ग्राम पंचायत में स्थित है।
शासन के उद्देश्य पर पलीता लगाना क्यों चाहते है जिम्मेदार?
एक तरफ प्रशासन जहां निर्विवाद निर्वाचन करने की मंशा रखती है,और पारदर्शिता के साथ पूरी प्रक्रिया को जनता के समक्ष रखकर कार्य करती है। वहीं दूसरी ओर ऐसे जिम्मेदार कर्मचारि जिनके कंधों पर निर्वाचन संबंधी जवाबदेही होती है,उनके गलत कृत्य और पक्षपात पूर्ण मानसिकता के कारण शासन के उद्देश्य पर पलीता लगता नजर आता है। अब देखने वाली बात यह है कि आचार संहिता लगने के लिए कुछ ही दिन बचे हैं। ग्रामीणों के शिकायत पर तात्कालिक कार्यवाही हो पाती है या नहीं। शिकायतकर्ता ग्रामीणों के अनुसार जब जांच टीम ने ग्राम पंचायत में ग्रामीणों से शिकायत के संबंध में बात की तो सचिव को स्पष्ट निर्देश दिया की निर्विवाद मतदाता सूची का निर्माण किया जावे। जिस पर सचिव ने भी पूर्व में हुए परिसीमन का हवाला देते हुए मतदाता सूची को फिर से पुनरीक्षित करने की बात की। परंतु यह जानते हुए की कुछ ऐसे मतदाता वार्ड क्रमांक 11 की सूची में दर्ज हैं जो यहां के निवासी नहीं है, उनका नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए सचिव द्वारा कोई पहल नहीं की गई।
ग्राम पंचायत डकईपारा में पिछले 5 वर्ष हुए मनरेगा कार्यों का आरटीआई से मांगा गया लेखा-जोखा
ग्राम पंचायत डकई पारा के भूतपूर्व सरपंच एवं कुछ ग्रामीणों ने मिलकर संबंधित विभाग को सूचना के अधिकार का आवेदन प्रस्तुत किया है, जिसमें उन्होंने ग्राम पंचायत में विगत 5 वर्षों में हुए मनरेगा के तहत सभी कार्यों की पूरी जानकारी मांगी है। कौन-कौन से कार्य स्वीकृत हुए, कितना भुगतान हुआ और किन को किन को भुगतान किया गया,इन सब बातों को उल्लेख करते हुए ग्रामीणों ने सूचना के अधिकार के तहत आवेदन प्रस्तुत किया है। पूर्व सरपंच और ग्रामीणों ने घटती घटना के प्रतिनिधि से बातचीत में बताया कि विगत 5 वर्षों में ग्राम पंचायत में मनरेगा के नाम पर भारी भ्रष्टाचार किया गया है। और ऐसे लोगों का जॉब कार्ड बनवाकर मस्टर रोल में हाजिरी लगाकर राशि का आहरण किया गया है, जिनका मनरेगा के कार्यों से दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं है, और जो अध्ययन अध्यापन करने के लिए नियमित छात्र-छात्रा के रूप में पंजीकृत हैं। यह कैसे संभव है कि जो छात्र निर्धारित तिथि को ग्राम पंचायत से सैकड़ो किलोमीटर दूर अपने संस्था में अध्ययन के लिए उपस्थित हो और उसी दिन मनरेगा के तहत रोजगार के लिए मास्टर रोल में उसका नाम हो। निश्चित है कि पंचायत के सचिव, रोजगार सहायक और कुछ तथाकथित पंचायती ठेकेदार के आपसी समन्वय से इस प्रकार के भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है। जो वृहद जांच का विषय वस्तु है। और जैसे ही सूचना के अधिकार के तहत इसकी पुष्टि होती है, ग्रामीण नामज़द शिकायत दर्ज कराते हुए इसके पूर्ण जांच करने को लामबंद हैं।
ग्रामीणों का आरोप,मनरेगा के तहत एक ही तालाब का कई बार गहरीकरण के नाम से निकाला गया राशि
ग्रामीणों ने पंचायत में हुए मनरेगा कार्यो में भ्रष्टाचार का उल्लेख करते हुए बताया कि पंचायत में एक तालाब ऐसा भी है जिसका विगत के वर्षों में कई बार गहरीकरण के नाम से राशि स्वीकृत कराकर बंदर बांट किया गया है। उक्त तालाब के गहरीकरण के नाम से कई बार लाखों का आवंटन प्राप्त किया गया और आपसी मिली भगत करके पूरी राशि डकार ली गई है। ग्रामीणों ने व्यंग्यात्मक रूप से बताया कि जितनी बार उक्त तालाब के गहरीकरण के नाम से राशि आहरण की है, यदि उतनी बार तालाब का गहरीकरण हुआ होता तो आज तालाब की गहराई पाताल तक पहुंच गई होती। तालाब के गहरीकरण में भी फर्जी मस्टर रोल का सहारा लिया गया है, और ऐसे व्यक्तियों की हाजिरी दर्ज कर रूपयों का आहरण किया गया जो वास्तव में दर्ज किए गए तिथि को अन्यत्र नियमित रूप से और पंजीकृत रूप से उपस्थित रहे।


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