बीएड योग्यताधारी सहायक शिक्षकों की सेवा सुरक्षा पर संकट
कोरिया,05 दिसम्बर 2024 (घटती-घटना)। प्रदेश की पूर्ववर्ती काँग्रेस सरकार ने आदिवासी संभाग में डीएड बीएड योग्यताधारी सहायक शिक्षकों के पदों पर नियुक्ति की थी। अब नियुक्ति के बाद उन शिक्षकों की सेवा संकट में पड़ गई है, इसकी जिम्मेदार पुरानी सरकार ही है, पर झेलना शिक्षकों को पढ़ रहा है। अब उनकी सेवा पर संकट गहरा गया है। अब राज्य सरकार को ही उस पर निर्णय लेना है, अब वह सभी शिक्षक राज्य सरकार की ओर मदद और उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे।
अब क्या प्रदेश की वर्तमान सरकार बीएड अहर्ता धारी उन सहायक शिक्षकों के लिए कुछ नियम बनाती है, जो फिलहाल प्राथमिक शालाओं में पदस्थ हैं। और जिन्हें गलत नियुक्ति मिली है। इस आशय की सभी प्रकरण न्यायालयों की स्वीकृति निराकृत हो चुकी है, जो उनके विरुद्ध स्वीकृत निराकृत हुई है, और कहीं न कहीं न्यायालय से वह उम्मीद छोड़ चुके हैं। न्यायालय जिसमे उच्च न्यायालय सहित सर्वोच्च न्यायालय सभी ने प्राथमिक शालाओं के लिए बीएड अहर्ता धारी शिक्षकों को अयोग्य करार दिया है, डीएड अहर्ता धारियों की तरफ से दायर याचिकाओं में उन्हें ही योग्य माना है और उसी आधार पर अब बीएड अहर्ता धारियों की नौकरी पर तलवार लटकी हुई है। जब से उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय का फैसला बीएड योग्यता धारी शिक्षकों के विरुद्ध में आया है, याचिका करता डीएड योग्यता धारी अभ्यर्थियों ने भी आंदोलन का मूड तैयार कर लिया है, और उनकी मांगे और प्रदर्शन लगातार जारी हैं। शासन फिलहाल मौन है, वहीं न्यायालय लगातार यह निर्देश जारी कर रहे हैं कि डीएड अहर्ता वालों को तत्काल नौकरी दी जाए। अब सरकार क्या निर्णय लेती है, यह तो भविष्य में पता चलेगा। लेकिन जैसा पूरा मामला समझ में आ रहा है उससे बीएड अहर्ता धारी अब सहमे हैं, डरे हैं, नौकरी जाने का उन्हें भय है। और वह अब लगातार कलेक्टर सहित जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर अपनी सेवा सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। इसी क्रम में कोरिया जिले में कार्यरत सहायक शिक्षकों ने जो बीएड अहर्ता धारी हैं, हाल ही में चयनित हुए हैं, उन्होंने अपनी सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर जिला कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इसी क्रम में कोरिया जिले के बैकुंठपुर एवम सोनहत विकासखंड से लगभग 300 सहायक शिक्षक शामिल हुए।
बीएड अहर्ता धारी सहायक शिक्षकों की मांग
- हमारे पदों और सेवाओं को सुरक्षित किया जाए।
- हमारे भविष्य को सुनिश्चित करते हुए इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकाला जाए।
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