कोरबा,22 अक्टूबर 2024 (घटती-घटना)। खदानों से कोयला लेकर निकली गाडि़यों का प्लांट, कोल साइडिंग या कोल वाशरी तक जाने का रास्ता तय किया जाता है। वहीं ट्रांसपोर्ट कंपनियों की गाडि़यों के माध्यम से कोयले में मिलावट कर हेराफेरी व चोरी के मामले अक्सर सामने आते रहे हैं। इन्हें पकड़ने के लिए कई तरीके अपनाने के बाद भी शत-प्रतिशत सफलता नहीं मिल रही थी। जिसे देखते हुए अब कोयला चोरी और मिलावट रोकने के लिए बीटीएस सिस्टम को कारगर माना जा रहा हैं। कोल इंडिया की एसईसीएल कंपनी इस सिस्टम पर काम करना शुरू कर दिया है। कंपनी ने 13 एरिया में अब तक 1200 से अधिक ट्रांसपोर्टिंग में लगे वाहनों को ट्रेकिंग सिस्टम से लैस किया जा है। वाहनों में कंपनी से लग कर आने वाली जीपीएस के साथ साथ एसईसीेएल अब अपनी अलग बीटीएस लगा रही है । जिससे वास्तविक समय पर वाहनों की निगरानी की जा रही है। अब किसी भी वाहन को ट्रैकिंग सिस्टम से लैस किए बिना खदान में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। अभी हाल ही में दीपका कोयला खदान से कोयला लेकर रवाना हुए चार ट्रेलर से अच्छा कोयला रास्ते में अवैध डिपो में उतार लिए गए और उसकी जगह चूरा व पत्थर मिला दिया गया। संबंधित कंपनी में परीक्षण के दौरान इसका पता चला और थाने में शिकायत भी की गई। जिसपर कार्यवाही करते हुए कोयले की अफरा-तफरी का अपराध पंजीबद्ध कर चालक की गिरफ्तारी की गई है ।
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