जनसंपर्क अधिकारी की मौत बनी चर्चा का विषय,आखिर क्या है जनसंपर्क अधिकारी कोरिया के निधन की वजह?
कोरिया,11 अक्टूबर 2024 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के जिला जनसम्पर्क अधिकारी का निधन गांधी जयंती के एक दिन बाद हो गया था जिनके निधन के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है,सूत्रों का कहना है कि जनसंपर्क अधिकारी मुक्ति प्रकाश बेक काफी अनुभवी व काम के प्रति कर्मठ अधिकारी थे,अपने काम को हमेशा ही समय पर और सही तरीके से करने के लिए वह जाने जाते थे,पहले भी कोरिया में जनसंपर्क अधिकारी वह रह चुके थे वहीं वह बलरामपुर में भी जनसंपर्क अधिकारी रहे और कई जिलों में उन्होंने जनसंपर्क का कार्य किया, उनके कार्य से प्रशासन की योजनाएं लोगों तक बहुत अच्छी तरीके से पहुंचती थी और पत्रकारों के बीच भी प्रशासनिक सामंजस्य बैठाने में वह काफी सफल थे,यही वजह थी कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान पत्रकारों के बीच भी काफी मधुर संबंध स्थापित किया था,पर वर्तमान में जब उनका निधन रक्त गति रुकने से हुआ तो कई सवाल सामने आए और चर्चा में यह भी है कि उनके ऊपर काम का तनाव था और अधिकारियों की डांट फटकार से वह अशांत थे, 59 वर्ष की उम्र में उनसे उस गति से काम करवाने की जिद अधिकारी बनाए रखे थे जैसा वह कभी पहले किया करते थे,जो सही नहीं था जिस वजह से उनका शरीर और उनका तन मन दोनों ही कार्यों के प्रति जवाबदारी को करने में तनाव ले रहा था और वह तनाव ही उनके निधन का कारण बना ऐसी बात सामने आ रही है पर सवाल यह है कि आखिर यह तनाव अधिकारी क्यों दे रहे थे क्या शासन की योजना व जिले के उच्च अधिकारी इनके निधन का कारण बने?
यदि सूत्रों की माने तो उन्हें 2 अक्टूबर के दिन छुट्टी की जरूरत थी और वह दिन भी छुट्टी का था लेकिन कई शासकीय आयोजन होने के कारण उन्हें छुट्टी नहीं दिया गया वहीं उन्हे किसी ने काफी डांट डपट भी लगाया ऐसा सूत्रों का कहना है। यह घटना ऐसे जगह कुछ लोगों ने देखा था जहां वह उस दिन मौजूद थे और कार्यक्रम को खबर के लिए वह वाच कर रहे थे। सूत्रों की ही माने तो जनसंपर्क अधिकारी मुक्ति प्रकाश बेक की मौत भले ही 3 अक्टूबर को हुई लेकिन उन्हें हार्ट अटैक एक दिन पूर्व 24 घंटे पूर्व आ चुका था ऐसा डॉक्टरों ने बताया था। जांच कहां हुई डॉक्टरों ने जो बताया वह सही है या नहीं इसकी पुष्टि घटती-घटना नहीं करता लेकिन जैसा हल्ला है और अफवाह है उसके अनुसार उन्हे किसी अधिकारी के जिद्दी होने का खामियाजा भुगतना पड़ा और वह उसी का शिकार हो गए ऐसा चर्चा आम है। वैसे बातें काफी हैं और कोई सामने भी नहीं आना चाहता है कुछ कहने लेकिन यह भी अब सुनने में आ रहा है की जल्द ही आक्रोश फूट सकता है और कहीं न कहीं ऐसा संभव होता दिख रहा है। खैर जनसंपर्क अधिकारी की मौत क्यों कैसे हुई यह तो अब शायद ही पता चल सके और उन्हे मानसिक कोई तनाव था किसी अधिकारी से था और वह कौन अधिकारी था यह तो वही बताते यदि वह होते अब वह हैं नहीं तो केवल चर्चाओं से कुछ संभव नही और न ही यदि उनकी मौत की वजह कोई अधिकारी है तो उसे ही कोई सजा या दंड मिल सकता है क्योंकि सबूत कुछ है नहीं।
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