9 महिने से ना कार्यवाही ना रिकवरी,मामला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय का
-रवि सिंह-
कोरिया,24 मई 2024 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के स्वास्थ्य विभाग ने एक दंत चिकित्सक को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत छत्तीसगढ रूरल मेडिकल कोर योजना (सीआरएमसी) की प्रोत्साहन राशि को नियमविरूद्ध दे डाली, चार साल तक राशि दिए जाने के बाद मामले में आरटीआई के तहत जानकारी मांगी गई, उसके बाद नियमविरूद्ध राशि आबंटन पर ब्रेक लग गया,मामले में शिकायत की गई और जांच स्वास्थ्य विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर अंबिकापुर को सौपी गयी,9 महिने पहले जेडी ने जांच कर सीएमएचओ कोरिया को कार्यवाही के लिए पत्र भेजा,परन्तु ना तो राशि की रिकवरी हुई और ना ही दंत चिकित्सक पर आज तक किसी भी तरह की कार्यवाही की गई।
जानकारी के अनुसार कोरिया जिले के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला अस्पताल मे पदस्थ दंत चिकित्सक डॉ रामकृष्ण यादव को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत छत्तीसगढ रूरल मेडिकल कोर योजना (सीआरएमसी) की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है। जबकि जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में कई दंत चिकित्सक पदस्थ है, सिर्फ एक ही दंत चिकित्सक को अभी तक 4 वर्षो में 7 लाख 58 हजार 401 रू प्रोत्साहन राशि के रूप में दिया जा चुका है। इस राशि की मांग को लेकर राज्य भर के दंत चिकित्सकों ने तत्कालिन स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात की थी, तब ही उन्हों स्पष्ट रूप से नियमों का हवाला देकर राशि नहीं दिए जाना बताया गया था। स्वास्थ्य विभाग में और कार्यरत दंत चिकित्सकों के साथ भेदभाव कर रहा है, यदि दंत चिकित्सक दायरे में आते है तो सभी को राशि दी जानी चाहिए। ऐसे में सिर्फ कोरिया जिले के एकमात्र दंत चिकित्सक को प्रोत्साहन राशि दिया जाना सवाल खडे कर रहा है। आरटीआई के तहत मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में 1 लाख 20 हजार 241, वर्ष 2018 में 73 हजार 242 ओर 128829 वर्ष 2019 में 1 लाख 15 हजार 745 और 74 हजार 17 वर्ष 2020 में 1 लाख 50 हजार 543 और 95 हजार 784 रूपए का भुगतान किया गया है, आरटीआई की मांग के बाद राशि के आबंटन पर विभाग ने ब्रेक लग गया।
बिना समीक्षा जारी होता रहा राशि
छाीसगढ रूरल मेडिकल कोर योजना (सीआरएमसी) के नियमों पर नजर डाला जाए तो नियमों में स्पष्ट उल्लेख है कि राशि के भुगतान में बीएमओ और सिविल सर्जन द्वारा अनुमोदित किया जाना है और राशि के भुगतान की हर तीन माह में समीक्षा की जानी है यदि प्रगति संतोषजनक नहीं मिलती है तो भुगतान पर रोक लगाया जाना है। राशि के भुगतान के लिए दो घटकों को देखना होगा पहला निर्धारित स्वास्थ्य केन्द्र में निवास और दूसरा परफॉर्मेस,इस मामले में बिना समीक्षा किए ही लगातार राशि दी जाती रही,परन्तु जब मामले में आरटीआई के तहत जानकारी मांगी गई उसके बाद से राशि के भुगतान पर ब्रेक तो लगा दिया गया,परन्तु राशि की रिकवरी के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए।
जांच प्रतिवेदन में बड़ी वित्तीय अनियमितता आई सामने
8 सितंबर 2023 को स्वास्थ्य विभाग के ज्वाईंट डायरेक्टर द्वारा बनाई गई जांच टीम ने अपना जांच प्रतिवेदन सीएमएचओ सहित डायरेक्टर एनएचएम और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को सौपा। बाद में षिकायतकर्ता ने जेडी कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत जांच प्रतिवेदन की मांग की,जिसमें चौकाने वाला खुलासा सामने आया। जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि सीआरएमसी की राषि देने से पहले सीएमएचओ/डीपीएम/अधिकारी/कर्मचारी के मध्य अनुबंध किया जाना होता है। जानते हुए कि दंत चिकित्सक को यह राषि प्रदान नहीं की जाती है, एक अनुबंध भी बनाया गया,परन्तु उक्त अनुबंध में तत्कालिन सीएमएचओ और तत्कालिन डीपीएम के हस्ताक्षर नहीं पाए गए,दोनों ने डॉ रामकृष्ण यादव से अनुबंध नहीं किया, बावजूद इसके सीआरएमसी की राषि प्रदाय की जाती रही। जो एक बड़ी वित्तीय अनियमितता मानी गयी है।
सीएस पर ठिकरा और गलती सीएमएचओ कार्यालय की
सीएमएचओ कोरिया द्वारा इसे लिपिकीय त्रुटि बताते हुए भुगतान करना बताया है, जांच प्रतिवेदन में उल्लेख है कि जिला चिकित्सालय के सीएस द्वारा दंत चिकित्सक को चिकित्सा अधिकारी बताया गया और अनुबंध के साथ सीएमएचओ कार्यालय भेज दिया गया था। अब यहां सवाल यह खड़ा होता है कि चिकित्सक का अनुबंध जिला अस्पताल के सीएस के साथ तो होता नहीं है अनुबंध सीएमएचओ और डीपीएम के साथ होता है, तो ऐसे में गलती सीएस की कैसे हुई, जबकि फर्जी अनुबंध सीएमएचओ कार्यालय से ही जांच अधिकारियों को प्राप्त हुआ। ऐसे में पूरी गलती सीएमएचओ कार्यालय से ही हुई और राशि 7 लाख रूपए से ज्यादा के भुगतान भी सीएमएचओ कार्यालय से की किया गया और अब गलती का ठीकरा सीएस पर फोड़ा जा रहा है।
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