- गजब का न्याय है साहब, टैक्स लेंगे भवन बनाने का अनुमति भी देंगे पर नहीं देंगे तो बिजली पानी की सुविधा?
- विधानसभा,लोकसभा और नगर पालिका चुनाव में 200 घर वालों के परिजनों से वोट लेंगे अपनी सरकार बनाएंगे पर उनकी समस्या नहीं सुनेंगे?
- भूस्वामी ने जमीन बेची और 200 लोगों ने जमीन खरीदकर घर बनाया…नगर पालिका ने घर बनाने की अनुमति दी…पर बिजली की सुविधा नहीं मिल रही।
- नगर पालिका टैक्स ले रही पर नहीं दिला रही 200 घर वालों को बिजली की समस्या से निजात।
- लोगों ने जमीन खरीदा और घर बनाया और धीरे से बन गई कॉलोनी, भूस्वामी ने तैयार हुई कॉलोनी को नाम दे दिया अग्रवाल सिटी जहां से शुरू हुई समस्या।
कोरिया 11 अप्रैल 2024 (घटती-घटना)। एक अजीबोगरीब मामला कोरिया जिले के बैकुंठपुर नगर पालिका के अंतर्गत का है यह मामला है महलपारा रोड में स्थित अग्रवाल सिटी का जहां पर भू स्वामि द्वारा छोटे-छोटे टुकड़ों में 200 लोगों को जमीन बेची गई थी, जिनकी रजिस्ट्री नामांतरण सब हो गया है कई लोगों को तो वहां पर घर बनाने के लिए नगर पालिका से अनुमति भी मिल गई है लेकिन वहीं वहां आज घर बनते बनते वह क्षेत्र पूरा कॉलोनी में तदील हो गया है, वहां पर रहने वाले विधानसभा में लोकसभा में और नगर पालिका चुनाव में अपना मत देकर अपनी अहम भूमिका भी निभाते हैं और नगर पालिका की सरकार केंद्र की सरकार और राज्य की सरकार भी तय करते हैं यहां तक की नगर पालिका को उसका निर्धारित कर भी दे रहे हैं पर इन सब की एवज में उनकी एक बिजली की समस्या से निजात तक नहीं मिल रहा है, वहां पर खंभा तक नगरपालिका नहीं लगा पा रही है इसकी वजह सिर्फ यह बताई जाती है कि जिससे लोगों ने जमीन खरीदी थी उसकी दुश्मनी प्रशासन से लेकर नेताओं तक से है, जिस वजह से वहां पर रहने वाले लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, वहां पर खंभा लगवाने तक में दिलचस्पी नगर पालिका नहीं दिखाता पर वहां के लोगों से विधायक सांसद व नगर पालिका अध्यक्ष बनने के लिए मत जरूर मांगा जाता है उस जगह पर रहने वालों की गलती यह है कि उन्होंने जमीन जिस व्यक्ति से खरीदी वह व्यक्ति इस समय काफी विवादों में है जिसका खामियाजा भी वहां पर रहने वाले भुगत रहे हैं उसकी वजह भी सिर्फ वह व्यक्ति माना जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार बैकुंठपुर नगर पालिका के अंतर्गत महलपारा रोड से लगा हुआ एक भूखंड था जिसके भूस्वामी ने छोटे-छोटे टुकड़ों को प्लाटिंग कर 200 लोगों को बेच दिया वह 200 लोग उसे जमीन के खुद के मालिक हो गए और वहां पर उन्होंने अपना घर बना लिया घर बनाने के लिए नियम के अनुसार उन्होंने डायवर्सन से लेकर नगर पालिका से घर निर्माण के लिए अनुमति भी ली इसके लिए उन्होंने निगम का कर भी चुकाया अचानक वहां पर कॉलोनी तैयार हो गई और उस कॉलोनी का नाम भू-स्वामी ने अपना सरनेम लगाकर लोगों की समस्या बना दी, वहां पर ना तो पूर्व के भू स्वामी जिन्होंने उस जगह का नाम अग्रवाल सिटी रखा है वह भी वहां पर बिजली की व्यवस्था नहीं कर पा रहे और वही जब वहां के लोग नगर पालिका व जिला प्रशासन से अपने कॉलोनी के लिए बिजली की मांग कर रहे हैं तो भी उन्हें बिजली की सुविधा नहीं मिल रही क्योंकि वहां पर खंभे नहीं लगे हैं काफी दूर से वहां पर बिजली तार लाया जा रहा है जिस वजह से उन्हें परमानेंट नहीं टेंपरेरी बिजली कनेक्शन दिया जा रहा है जिस वजह से वह काफी परेशान है वहां पर बिजली आने-जाने पर भी विभाग के लोग उधर ध्यान नहीं देते।
क्या प्रशासन की बिल्डर से दुश्मनी 200 लोगों पर भारी?
पूरे मामले में बताया जाता है की पूर्व भूस्वामी जिसने उक्त जमीन लोगों को बेची है वह बिल्डर भी है की प्रशासन से तनातनी चल रही है और इस कारण उन 200 लोगों को दिक्कत हो रही है जो उक्त बिल्डर से जमीन क्रय किए हैं। अग्रवाल सिटी में रहने वाले 200 लोगों की अपनी कोई गलती नहीं है गलती है तो पूर्व भूस्वामी की जिससे प्रशासन की तनातनी है और जिसके वजह से 200 लोगों का परिवार परेशान है।
बिल्डर ने घर नहीं जमीन बेचा पर बिल्डर के आपसी रंजिश 200 लोगों पर पड़ रही भारी
पूर्व भूस्वामी जो एक बिल्डर भी है ने लोगों को जमीन बेचा है अग्रवाल सिटी परिसर में उसने घर बनाकर नहीं बेचा है। घर लोगों ने स्वयं बनाया है जिसके लिए उन्होंने सभी नियम कायदों का पालन भी किया है। अब जब उन्हे अनिवार्य सुविधाओं के लिए कोई जरूरत पड़ती है उन्हे वह सुविधा जिसमे बिजली की सुविधा प्रमुख है इसलिए नहीं मिल रही है क्योंकि वह बिल्डर से जमीन क्रय किए हैं। कुल मिलाकर बिल्डर से रंजिश है कुछ लोगों की जो बिल्डर से रंजिश भजाने के लिए 200 लोगों को परेशान करना भी एक तरह से बिल्डर को परेशान करना मान रहे हैं समझ रहे हैं।
बिल्डर ने जमीन बेचकर अग्रवाल सिटी का दे दिया नाम आज वही बनी लोगों के लिए फजीहत
बिल्डर ने शहर में रहने के ईक्षुक लोगों के लिए एक जमीन के टुकड़े की प्लाटिंग की और फिर उसने लोगों को उनकी जरूरत के हिसाब से जमीन के टुकड़ों को बेच दिया। बिल्डर ने बस जमीन के पूरे टुकड़े जिसकी उसने प्लाटिंग की और जिसे उसके द्वारा लोगों बेचा गया उसका नाम बस अग्रवाल सिटी रख दिया जो लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया जिन्होंने जमीन लिया।
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