- स्थानांतरण उपरांत भारमुक्त होने के बाद भी नहीं जा रही हैं नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने:सूत्र
- मामले में क्या चुनाव आयोग लेगा संज्ञान,क्या उन्हे कराएगा भारमुक्त?
- स्थानांतरण होने के बाद नेता मंत्रियों के पीछे लगा रही हैं लगातार चक्कर
- कांग्रेस शासनकाल में मनमानी करना आम आदत थी इनकी
- क्या भाजपा शासनकाल में भी चलेगी इनकी मनमानी?
- कटघोरा विधायक, कोरबा विधायक सह मंत्री सहित वित्तमंत्री के पास अपना स्थानांतरण रुकवाने लगा चुकी हैं चक्कर:सूत्र

-राजा मुखर्जी-
कोरबा,20 मार्च 2024 (घटती-घटना)। तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर बनी ऋचा सिंह का कोरबा से कोंडागांव स्थानांतरण प्रशासनिक आधार पर हुआ परन्तु आज दिनांक तक वो अपने स्थानांतरित कार्यस्थल पर कार्यभार ग्रहण करने नहीं पहुंची हैं वहीं अभी भी वह अपने वर्तमान निवास स्थान एनटीपीसी मे ही निवासरत हैं, चूंकि आदर्श आचार संहिता लग चुकी है और फिर भी कोरबा जो उनका स्थानांतरण पूर्व का पदस्थापना जिला या स्थल है से वह स्थांतरित जगह नहीं जाना चाहती हैं और उनके नहीं जाने से चुनाव वह चुनाव प्रभावित कर सकती हैं क्योंकि वह आरंभ से ही कांग्रेस की विचारधारा से प्रेरित रही हैं, वहीं कोरबा लोकसभा के हिसाब से उनकी कांग्रेस नेताओं से नजदीकी भी ज्यादा रही है और वर्तमान में कोरबा लोकसभा से कांग्रेस प्रत्याशी से भी इनका गहरा संबंध इसलिए रहा है क्योंकि कोरिया जिले में तहसीलदार के पद पर रहते हुए यह कांग्रेस शासनकाल में बैकुंठपुर विधायक रही साथ ही छत्तीसगढ़ शासन में संसदीय सचिव रही कांग्रेस नेत्री की खास थीं करीबी थीं जहां इनका प्रतिदिन आना जाना होता था और जिनके ही कारण वर्तमान में कांग्रेस प्रत्याशी जो वर्तमान सांसद भी हैं से भी इनकी प्रगाढ़ता कायम हुई और अब यह अंदेशा लगाया जा रहा है की यदि वह कोरबा में ही रह जाती हैं निश्चित रूप से चुनाव प्रभावित करने का वह प्रयास करेंगी और वह कोरिया तक अपने संपर्क स्थापित कर ऐसा करेंगी क्योंकि कांग्रेस शासनकाल में इन्हे नेताओं ने काफी सहयोग प्रदान किया था खासकर कोरबा लोकसभा के कांग्रेस नेताओं के द्वारा और यही वजह भी रही की इन्हें पदोन्नति के बाद पदस्थापना कोरबा जिले में ही मिला। तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर बनी कई मामलों में जबकि जांच भी जारी थी इनकी यह इसलिए ही संभव हुआ क्योंकि कांग्रेस नेताओं ने इनकी मदद की और जांच को कहीं न कहीं इनके पक्ष में कराया या फिर जांच होने ही नहीं दिया।
कांग्रेस शासनकाल में संरक्षण पाने के बाद अब भाजपा शासनकाल में भी संरक्षण चाह रही हैं डिप्टी कलेक्टर ऋचा सिंह?
कांग्रेस शासनकाल में तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर तक के पद पर कार्य करते हुए कांग्रेस नेताओं से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से बेहतर संबंध स्थापित कर बराबर मनचाही पदस्थापना पाने वाली वर्तमान में डिप्टी कलेक्टर ऋ चा सिंह का जबसे कोरबा से कोंडागांव तबादला किया गया है तब से ही वह अपना तबादला रुकवाने भाजपा नेताओं के आगे पीछे दौड़ लगा रही हैं,वर्तमान में पूरे देश में आदर्श आचार संहिता लगी हुई है और इस बीच उन्हे कोंडागांव के लिए कोरबा जिले से भारमुक्त भी कर दिया गया है और अब नया कोई आदेश या आदेश संशोधन भी जबकि होना मुश्किल है डिप्टी कलेक्टर ऋचा सिंह लगातार भाजपा नेताओं से संरक्षण की उम्मीद लगाए हुए हैं, डिप्टी कलेक्टर ऋचा सिंह कांग्रेस शासनकाल में केवल कांग्रेस नेताओं के लिए उनके हिसाब से काम करने के लिए प्रसिद्ध थीं और जिसको लेकर कई बार शिकायत भी हुई और उनके द्वारा कई मामलों में गड़बड़ी भी की गई जिसकी शिकायत भी हुई जिसकी जांच भी होनी थी लेकिन वहीं तहसीलार से डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नति भी बाधित होनी थी लेकिन कांग्रेस नेताओं से अच्छे संबंध के कारण वह सभी मामलों को कांग्रेस शासनकाल में दबा ले जाने में कामयाब हुई वहीं दबी में उन्हे पदोन्नति भी मिली, कांग्रेस शासनकाल में भरपूर संरक्षण के साथ काम करने के कारण ही उन्हे मनमानी की आदत पड़ी हुई है और अब वही मनमानी वह भाजपा शासनकाल में करने की फिराक में लगी हुई हैं जिससे भाजपा नेता अनभिज्ञ हैं और शायद जब वह जान जायेंगे संरक्षण देना बंद कर देंगे।
स्थानांतरण के बाद नवीन पदस्थापना स्थल पर ना जाकर क्या आदेशों की अवहेलना कर रही डिप्टी कलेक्टर?
लोकसभा चुनाव के पूर्व चुनाव आयोग के निर्देश पर प्रदेश में प्रशासनिक स्थानांतरण बड़े स्तर पर किए गए जिससे निष्पक्ष चुनाव संपन्न हो सके,इसी क्रम में कोरबा में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर ऋचा सिंह का तबादला कोंडागांव किया गया। अब वह कोंडागांव न जाना पड़े इस प्रयास में लगी हुई हैं और भारमुक्त किए जाने के बाद भी वह नेताओं के पीछे मंत्रियो के पीछे दौड़ लगा रही हैं,वैसे कांग्रेस की सरकार होती वह तबादला रुकवा ले जाती यह भी माना जा रहा है लेकिन अब भाजपा सरकार में उन्हे काफी मिन्नते करनी पड़ रही है जो देखने को मिल रहा है। अब क्या वह कोंडागांव न जाकर चुनाव आयोग के निर्देशों की अवहेलना कर रही हैं क्या ऐसा चुनाव आयोग मानकर उनके ऊपर कार्यवाही करेगा यह देखने वाली बात होगी,वैसे प्रदेश में केवल उन्हीं का तबादला किया गया ऐसा भी नहीं है,बात केवल इतनी है की वह केवल वहीं रहना चाहती हैं जहां वह राजस्व मामलों में गड़बड़ी कर अपने लोगों को परिजनों को लाभ पहुंचा सकें जो कोंडागांव जैसे जिले में संभव नही हो सकता। वैसे उन्होंने अपने कई परिवारजनों को अनुचित लाभ राजस्व मामलों में पहुंचाया है।
क्या चुनाव आयोग ध्यान देगा?
तहसीलदार रहते हुए कांग्रेस नेताओं खासकर कोरबा सहित सरगुजा लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेस नेताओं के काफी करीबी मानी जाने वाली वहीं कांग्रेस शासनकाल में ही कई आरोपों जिनमे जांच भी होनी तय थी और सही जांच होने पर आरोप भी तय होना तय था के बावजूद पदोन्नति पाने वाली वर्तमान में डिप्टी कलेक्टर के पद पर कार्यरत ऋचा सिंह जिनका कोरबा जिले से स्थानांतरण कोंडागांव जिले के लिए किया गया है का नई पदस्थापना जिले के लिए रवाना न होना जबकि उन्हे वर्तमान में कोरबा जिले से भी भारमुक्त कर दिया गया है एक तरह से शासन के आदेशों की अवहेलना है। अब यदि वह कोंडागांव नहीं जाती हैं तो उन्हे वर्तमान में अवकाश की भी पात्रता नहीं होगी क्योंकि उन्हे भारमुक्त कर दिया गया है कोरबा से वहीं कोंडागांव में उनका तबादला किया गया है और लोकसभा चुनाव भी होने हैं ऐसे में चुनाव कार्य में भी अधिकारियों की उपलब्धता को लेकर समस्या उत्पन्न होगी संख्या कम होगी,ऐसे में क्या चुनाव आयोग इस मामले में ध्यान देगा क्या वह कांग्रेस नेताओं खासकर कोरबा लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेस नेताओं की करीबी मानी जाने वाली डिप्टी कलेक्टर ऋचा सिंह को उनके तबादला स्थल के लिए रवाना होने का कड़ा निर्देश जारी करेगा। वैसे चुनाव आयोग को इस मामले में ध्यान देना चाहिए क्योंकि डिप्टी कलेक्टर ऋचा सिंह भाजपा नेताओं के आगे पीछे घूमकर अपना तबादला रुकवाने में लगी हुई हैं ।
कोरिया व सूरजपुर में इनका कार्यकाल विवादों से घिरा रहा
तहसीलदार रहते हुए वर्तमान की डिप्टी कलेक्टर ऋ चा सिंह कोरिया सहित सूरजपुर जिले में कार्यरत रहीं। यह कार्यकाल उनका कांग्रेस शासनकाल का कार्यकाल था। दोनो जिलों में इनका कार्यकाल काफी विवादों से घिरा रहा,इस दौरान इनकी काफी शिकायतें हुई और कई आरोप लगे इनके ऊपर, इन्होंने इस दौरान आम लोगों के हित में काम करने की बजाए या तो नेताओं के हित में काम किया कांग्रेस नेताओ के या फिर अपना हित इन्होंने साधा। कुल मिलाकर इस दौरान इन्होने राजस्व मामलों में जमकर मनमानी की भ्रष्टाचार किया जो इनकी शिकायत के रूप में भी समाने आया।
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