- क्या स्वास्थ्य विभाग में संविदा कर्मचारियों की मनमानी हावी,राज्य कार्यालय के आदेश की भी अवहेलना कर रहे संविदा कर्मचारी?
- मामला कोरिया सहित सूरजपुर जिले के प्रभारी डीपीएम के तबादले से जुड़ा हुआ,दोनों नहीं कर रहे स्थानांतरित जगह पर कार्यभार ग्रहण
- स्थानांतरण के बाद भी दोनों जिले के प्रभारी डीपीएम को क्यों नहीं कर पा रहे अधिकारी भारमुक्त,षड्यंत्र या फिर सोची समझी साजिश?
- स्थानांतरण के 15 दिन बाद भी दोनों प्रभारी डीपीएम अपने-अपने पदस्थापना स्थल पर नहीं पहुंचे
-रवि सिंह-
सूरजपुर/कोरिया,10 मार्च 2024 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में इस समय पूरे प्रदेश में कोई सबसे चर्चा में है तो वह है कोरिया के प्रभारी डीपीएम जिनकी चर्चाएं पूरे प्रदेश में है, उनकी कार्यप्रणाली पूरी राजनीति से जुड़ी हुई है सरकार किसी की भी रहे और सरकार का आदेश कोई भी जारी करें पर आदेशों को ठेंगा दिखाना प्रभारी डीपीएम डॉक्टर प्रिंस जायसवाल को खूब आता है, कांग्रेस सरकार में उन्हें प्रभारी डीपीएम पद से मुक्त करते हुए उनके मूल पद पर भेज दिया गया था पर उन्होंने उस सरकार के आदेश को भी ठेंगा दिखाया और अपने पद पर बने रहे, अब जब भाजपा की सरकार आई तो स्वास्थ्य मंत्री ही उनके रिश्तेदार निकल गए, काफी फजीहत होने के बाद इनका स्थानांतरण सूरजपुर जिले के लिए 15 दिन पहले किया गया पर 15 दिन बाद भी वह वहां पर नहीं गए ना जाने किस बात का इंतजार हो रहा है? वहीं सूत्रों का मानना है कि यह भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए आदेश को भी ठेंगा दिखाने की जुगत में है वही सूरजपूर कोरिया जिले के सीएमएचओ भी अजीबोगरीब खेल खेल रहे हैं अब इसे खेल कहें या षड्यंत्र या फिर साजिश सूरजपुर के सीएमएचओ से इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि कोरिया से आने वाले जब आएंगे तब हम इन्हें भारमुक्त करेंगे, वहीं कोरिया जिले के सीएमएचओ का कहना है कि सूरजपुर से आने वाले आएंगे तब हम इसे भेज पाएंगे, क्योंकि सूरजपुर वाले डीपीएम अपना स्थानांतरण रुकवाने के लिए सीएम हाउस का चक्कर लगा रहे हैं ऐसा खुद कोरिया जिले के सीएमएचओ का कहना है, ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब दोनों प्रभारी डीपीएम को सीएमएचओ भारमुक्त नहीं करेंगे तो वह अपने-अपने स्थान पर कैसे जाकर पदस्थापना पाएंगे यहां तो पहले तुम भेजो पहले तुम भेजो वाली स्थिति चल रही है।
कोरिया के प्रभारी डीपीएम पैसा शासन का ले रहे हैं और नौकरी अपने नर्सिंग कॉलेज की कर रहे हैं ?
कोरिया जिले के स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी डीपीएम कोरिया जिला क्यों नहीं छोड़ना चाहते तबादले के बाद भी इसके पीछे की एक बड़ी वजह यह भी है की उनका खुद का नर्सिंग कॉलेज जिला मुख्यालय में स्थित है जहां वह अधिकांश व्यवस्था कर पाते हैं वहां समय दे पाते हैं कोरिया जिले में कार्य करते हुए। प्रभारी डीपीएम एक तरह से देखा जाए तो वेतन शासन से ले रहे हैं और नौकरी अपने निजी नर्सिंग होम में कर रहे हैं। कोरिया जिले के स्वास्थ्य व्यवस्था को खोखला करने कैसे यह सब कुछ कर रहे हैं और कैसे उन्हे संरक्षण मिल रहा है यह देखा जा सकता है। कांग्रेस शासनकाल में भी उनके एक निकट रिश्तेदार विधायक थे स्वास्थ्य विभाग में पद पर थे वहीं भाजपा शासनकाल में भी उनके चाचा मंत्री हैं वह भी स्वास्थ्य मंत्री इसलिए वह अपनी मनमानी कर रहे हैं और जिले के स्वास्थ्य व्यवस्था को धीरे धीरे हाशिए पर डालने का काम कर रहे हैं।
डॉ. प्रिंस जायसवाल अपना मूल काम छोड़ राजनीतिक से लेकर खरीदी में मस्त…बाकी सब त्रस्त…
सूत्रों की माने तो कोरिया जिले के प्रभारी डीपीएम अपना मूल काम छोड़कर केवल खरीदी में व्यस्त हैं या फिर राजनीति में व्यस्त हैं। उन्हे जिले में कोई रोकने टोकने वाला नहीं है क्योंकि उनके चाचा स्वास्थ्य मंत्री हैं जिनका नाम वह हर जगह लेकर यह जताते भी रहते हैं और अधिकारियों पर दबाव भी बनाते हैं। वैसे डीपीएम खरीदी और राजनीति के बाद जो समय बचा पाते हैं उसे वह अपने नर्सिंग कॉलेज में व्यतीत कर वहां की व्यवस्था सुदृढ़ करने में लगे रहते हैं। जिले में जैसे स्वास्थ्य विभाग के डीपीएम की नियुक्ति खरीदी राजनीति और भर्ती के लिए ही की गई हो ऐसा लगता है। वैसे स्वास्थ्य विभाग में इनसे सभी त्रस्त हैं यह बताया जाता है।
स्वास्थ्य मंत्री भी अपनी फजीहत को तैयार पर अपने भतीजे पर कार्यवाही करने को तैयार नहीं?
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री कोरिया जिले के प्रभारी डीपीएम के चाचा हैं ऐसा प्रभारी डीपीएम ही बताते फिरते हैं। स्वास्थ्य विभाग में खासकर कोरिया जिले में कैसे प्रभारी डीपीएम ने भर्राशाही मचा रखी है और किस तरह का भ्रष्टाचार उन्होंने किया है यह किसी से छिपा नहीं है फिर भी प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री प्रभारी डीपीएम के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि वह उनके भतीजे हैं। वैसे इस तरह देखा जाए तो स्वास्थ्य मंत्री स्वास्थ्य विभाग की छवि खराब होना बर्दाश्त कर सकते हैं अपनी भी फजीहत के लिए वह तैयार हैं बस वह डीपीएम के साथ हैं क्योंकि वह उनके रिश्तेदार हैं। वैसे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का क्या हाल होगा यह भी समझा जा सकता है जब कोरिया जिले में स्वास्थ्य मंत्री के एक तरह से गृह जिले में ही उनके भतीजे के द्वारा विभाग और व्यवस्था को बर्बाद किया जा रहा है।
क्या कोरिया के कलेक्टर व सीएमएचओ दोनों डीपीएम की गिरफ्त में हैं?
कोरिया जिले के स्वास्थ्य विभाग के डीपीएम की मनमानी और उनकी विभाग में जारी भर्राशाही को देखते हुए यह भी कहना गलत नहीं होगा की कहीं कलेक्टर और सीएमएचओ उनकी गिरफ्त में तो नहीं। कलेक्टर सहित सीएमएचओ बिना डीपीएम एक निर्णय लेने में सक्षम नहीं ऐसा खुद डीपीएम की जबानी सुनी जाने वाली बातें हैं ऐसा लोगों का कहना है। ऐसे में यह कहना भी गलत नहीं होगा की जब डीपीएम ही स्वयं सभी निर्णय ले रहे हैं जिले में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियो के आगमन तक में जब उन्ही का निर्णय हावी है तो फिर उन्हे समूचे जिले के समूचे विभाग की ही जिम्मेदारी दे देनी चाहिए जिससे बेवजह अन्य अधिकारियों की न जरूरत ही आन पड़ेगी न ही खर्च बढ़ेगा।
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