- नगरपालिका में दिखता है अफसरशाही, बैकुंठपुर की जनता ने नही देखा कौन हैं मुख्य नगरपालिका अधिकारी
- निर्माण कार्यो का भी निरीक्षण नही करते सीएमओ,इंजीनियर,ठेकेदार मनमुताबिक करते हैं कार्य
- जगह-जगह अवैध निर्माण व बेजा कब्जा बना नगरपालिका क्षेत्र की पहचान,राजस्व निरीक्षण सिर्फ ड्यूटी का कोरम कर रहे पूरा
- नगरपालिका से कोई भी काम कराना नही है आसान,नही सुनते अधिकारी कर्मचारी और इंजीनियर
- चंद ठेकेदारों का है यहां बोलबाला,6 महीने से नही हुई परिषद की बैठक
- शासन ने जारी किया है निर्देश,एसी कमरो से निकलकर फिल्ड में जांए अधिकारी लेकिन नपा सीएमओ अभी तक नही दिखे फिल्ड में
- आउट ऑफ़ कंट्रोल हुआ नगरपालिका का अमला,लगाम की जरूरत

-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 23 फरवरी 2024(घटती-घटना)। कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर क्षेत्र जिसे कि नगरपालिका का दर्जा मिला हुआ है, यहां पदस्थ मुख्य नगरपालिका अधिकारी से आम जन का मिलना मुश्किल ही नही बल्कि नामुनकिन है,कार्यालय के बंद दरवाजे के कमरे में बैठने वाले मुख्य नगरपालिका अधिकारी को आम जन से कोई मतलब नही है वे चंद ठेकेदारो से घिरे दिखलाई देते हैं बाकि समय वे कार्यालय से नदारद भी रहते हैं पूछने पर हमेशा एक ही जवाब दिया जाता है कि साहब अभी कलेक्टोरेट गए हैं,ना जाने साहब को आखिर हर रोज कलेक्टोरेट जाने की क्या जरूरत पड़ती है या फिर यह सिर्फ एक बहाना ही है। लोग यह करने लगे हैं कि जिले में कलेक्टर से मिलना आसान है लेकिन मुख्य नगर पालिका अधिकारी से मिलना काफी कठिन। नपाधिकारी की कार्यशैली से हर वर्ग त्रस्त है,कार्यालयीन कार्य के साथ साथ निर्माण कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं नपा क्षेत्र में निर्माण कार्य की गुणवत्ता भगवान भरोसे है ठेकेदार खुद ही इंजीनियर बन गए हैं नपा के इंजीनियर सिर्फ कार्यालय में बैठकर बिल बनाने का काम करते हैं, ठेकेदारों से सांठगांठ है इसलिए वे फिल्ड में जाना भी नही चाहते। आलम यह है कि उक्त कार्यालय से कोई भी जायज काम करा पाना भी काफी कठिन है,यहां पदस्थ अधिकारी कर्मचारी किसी की नही सुनते,पूरे नपा क्षेत्र में बेजा कजा और बेतरतीब निर्माण कार्य चल रहा है,कोई देखने सुनने वाला नही है,राजस्व निरीक्षण लंबे समय से अंगद के पैर की तरह पांव जमाकर बैठे हैं वसूली बुरी तरह से प्रभावित है जिस वजह से महीनो महीनो तक निकाय के कर्मियों को भुगतान नही हो पा रहा है,नपा में दुर्दशा दिखलाई दे रही है, आउट ऑफ़ कंट्रोल हो चुके नपा बैकुंठपुर को पटरी पर लाने की सख्त जरूरत है। सीएमओ ऐसे हैं कि उन्हे निकाय क्षेत्र की अधिकांश जनता न जानती न पहचानती। सरकार ने अफसरशाही को देखते हुए फरमान जारी किया है कि अफसर फिल्ड में जांए और निर्माण कार्यो की गुणवत्ता पर ध्यान दें। लेकिन पत्र जारी होने के बाद भी नगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारी अभी तक फिल्ड में नही देखे गए हैं।
मनीष वारे हैं मुख्य नगरपालिका अधिकारी
राज्य नगरपालिका सेवा के अधिकारी मनीष वारे को गत वर्ष बैकुंठपुर नगरपालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी बनाया गया है,उनकी पदस्थापना के बाद से लगा था कि शायद नपा की स्थिति सुधरे लेकिन स्थिति और बदतर हो गई है,साहब ना तो फिल्ड में जाते और ना ही उन्हे फिल्ड मे चल रहे निर्माण कार्यो से कोई मतलब क्योंकि अपना काम तो बैठे बैठे हो ही रहा है तो फिर जबरन फिल्ड जाने की क्या जरूरत। नगरपालिका अधिकारी कार्यालय के अपने कक्ष में बंद कमरे में बैठते हैं उन पर कुर्सी का नशा भी सर चढकर बोलता है,वे आम जन से खुद को दूर ही रखने में विश्वास रखते हैं। निकाय क्षेत्र की अधिकांश जनता उन्हे ना तो जानती और ना ही पहचानती। नपाधिकारी से यदि कोई जनता मिलना भी चाहे तो यह बहुत ही कठिन है,ज्यादातर समय साहब कार्यालय से गायब ही रहते हैं,पता करने पर बतलाया जाता है कि साहब तो कलेक्टोरेट गए हैं लेकिन यह सिर्फ बहाना ही होता है। इतने समय में लोग कलेक्टर से मिलकर आ जाते हैं लेकिन सीएमओं साहब के दर्शन नही होते।
10 महीने से नही हुई परिषद की बैठक
नगरपालिका परिषद बैकुंठपुर बेपटरी पर है इस बात का प्रमाण इस बात से मिलता है कि यहां पिछले 10 महीने से परिषद की बैठक तक नही हुई। नपा की नेता प्रतिपक्ष ने मुख्य नपाधिकारी को पत्र लिखकर परिषद की सामान्य सभ की बैठक बुलाने की मांग की है,बैठक नही होने से निकाय क्षेत्र में निर्माण एवं अन्य कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। बतलाया जाता है कि अपै्रल 2023 के बाद से सामान्य सभा की बैठक नही हुई है,पहली बार ऐसा हो रहा है कि बैठक बुलाने पत्र सौंपा जा रहा है।
जनता होती है परेशान,नही सुनते अधिकारी कर्मचारी
नगरपालिका बैकुंठपुर कार्यालय में व्याप्त भर्राशाही का आलम है कि यहां यदि आम नागरिक अपने वाजिब काम के लिए जाता है तो उसे कई बार घुमाया जाता है,वाजिब काम के लिए भी जनता भटकते रहती है। पदस्थ अधिकारी कर्मचारी सिर्फ उनका ही काम करते हंै जिनका कोई एप्रोच है।
निकाय क्षेत्र में जारी है अवैध कब्जा,राजस्व अमला मौन
बैकुंठपुर नगरपालिका में 20 वार्ड है,सभी वार्डो में सड़को और नालियों पर अवैध रूप से कजा किया हुआ नजर आता है,मुख्य सड़क भी अतिक्रमण का शिकार है,जिससे जाम की स्थिति निर्मित होती है। दुकानदार मन मुताबिक अपने हद से बाहर सड़क पर दुकान लगाते हैं,लेकिन राजस्व अमला मौन है। जगह-जगह और खासकर नपा कार्यालय के आसपास ही बेजा कजा देखा जा रहा है किंतु सेटिंग के कारण राजस्व अमला कार्यवाही नही करता। लंबे समय से अंगद के पैर की तरह जमे राजस्व निरीक्षण से जब कभी भी कोई इस बात की शिकायत करता है तो उल्टे शिकायत कर्ता को ही राजस्व निरीक्षक द्वारा सुना दिया जाता है जिससे समझा जा सकता है कि उनकी सेटिंग किस प्रकार की है। कई ऐसी सड़के हैं जो कि नक्शे में तो 15 से 20 फिट की चैड़ी हैं लेकिन अतिक्रमण के कारण 10 फिट ही शेष बचा है। गौ सेवक अनुराग दुबे द्वारा समय समय पर साफ सफाई को लेकर उंगली उठाई जाती है लेकिन इसका असर भी नगरपालिका पर नही पड़ता।
ठेकेदारों से घिरे रहते है अधिकारी
एक तो नपा के अधिकारी कार्यालय में नही बैठते और बैठते भी हैं तो ऐसे समय जब जनता का आना जाना नही होता मतलब कि कार्यालयीन समय के बाद यह सब सोची समझी चाल होती है। इस दौरान नपाधिकारी और इंजीनियर सिर्फ ठेकेदारों का ही काम करते हैं और बिल पर पूरा ध्यान देते हैं,जैसा ठेकेदार ने मेजरमेंट बुक में बनाकर ला दिया उसी हिसाब से बिल बना दिया जाता है इंजीनियर तो ऐसे हैं कि कुछ चहेते ठेकेदारों के साथ मिलकर साझा तौर पर काम कर रहे हैं ऐसा महसूस होता है। ठेकेदार अपने मन मुताबिक कार्य कर अधिकारी से भी अपने हिसाब से काम कराते हैं जिससे कि निर्माण कार्य एकदम घटिया स्तर का हो रहा है और कम समय में ही दम घुट जा रहा है। ठेकेदारों से कमीशन तले दबे इंजीनियर गुणवाा विहीन काम होने पर शिकायत के बाद भी कुछ बोलना नही चाहते। आलम यह है कि ठेकेदार काम खत्म करने के बाद उसे ठीक ढंग से सफाई आदि भी नही कराता लेकिन उसका भुगतान कर दिया जाता है।
जिला प्रशासन ने कभी नही ली नपा क्षेत्र की सुध
नगरपालिका बैकुंठपुर क्षेत्र मंे भर्राशाही व्याप्त है,आम जन परेशान है,छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए मरामारी मची हुई है,वाजिब काम नही हो रहे हैं,शासन की मंशा पूरी नही हो रही है, बिना प्लानिंग के जहां मन हो रहा है निर्माण कार्य कराये जा रहे हैं फिर कुछ दिन बाद उसी निर्माण कार्य को तोड़कर दूसरा कार्य कराया जा रहा है जिससे आर्थिक नुकसान हो रहा है, अव्यवस्थित निर्माण कार्य,गुणवत्ताविहीन निर्माण कार्य, जगह जगह बेजा कजा, अतिक्रमण इस शहर की पहचान बन चुकी है, पूर्व में जिला प्रशासन के मुखिया भी जिला मुख्यालय का जायजा लेने समय समय पर निकला करते थे लेकिन यह परंपरा कोरिया जिले में अब ठप्प पड़ गई है,कोरिया कलेक्टर सिर्फ समय सीमा की बैठक के माध्यम से जानकारी लेकर खानापूर्ति कर ले रहे हैं उन्हे भी निकाय क्षेत्र से कोई लेना देना नही है। जिससे कि अधिकारी कर्मचारी बेपरवाह हो चुके हैं। प्रशासनिक कसावट की कमी के कारण आमजन परेशान हैं। जिस पर रोक लगाया जाना अति आवश्यक है।
निर्माण कार्य भगवान भरोसे,इंजीनियर भी फिल्ड से गायब
बैकुंठपुर नगरपालिका क्षेत्र में छोटे-छोटे निर्माण कार्यो की भरमार है,सड़क, नाली, नाला एवं अन्य जनहितैषी कार्य भी हो रहे हैं लेकिन निर्माण कार्य पूरी तरह से भर्राशाही से युक्त हैं। ठेकेदार अपने मन मुताबिक कार्य करते हैं,कार्य मंे गुणवाा है या नही कार्य इस्टीमेट अनुसार हो रहा है या नही,निर्माण कार्य में पानी तराई हो रहा है या नही,या अन्य भी तकनीकि चीजों को ध्यान दिया जा रहा है या नही इन सबको देखने सुनने वाला कोई नही है। ठेकेदार निर्माण कार्य की नपाई जोखाई भी खुद करके बिल बनवा रहे हैं एक वर्ष के भीतर नवनिर्मित सड़को में गिट्टी उखड़ते दिख रहे हैं,इंजीनियरों की ठेकेदारों से सेटिंग के कारण जनता के पैसे का बंदरबाट हो रहा है लेकिन इस पर लगाम नही लग रहा है। कई पार्षद खुद ठेकेदार बन कर पार्टनरशीप में निर्माण कार्य को अंजाम दे रहे हैं।
शासन ने जारी किया पत्र
छाीसगढ से सरकार बदलते ही अब अफसरशाही पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है,इसे लेकर पिछले दिनों एक पत्र सभी निकायों को जारी किया गया है, पिछले दिनों प्रदेश के नगरीय निकाय मंत्री अरूण साव ने नगरीय निकाय के अधिकारियों की समीक्षा बैठक ले कर नागरिक सुविधाओं की जानकारी ली थी जिसके बाद पत्र जारी कर अधिकारियों को तीन दिन फिल्ड में रहने का निर्देश दिया गया है। पत्र का क्या असर पड़ता है यह तो नही कहा जा सकता लेकिन नपा सीएमओ की कार्यप्रणाली और सुस्त रवैया शहर विकास में भी बाधक बन रही है यह कहा जा सकता है।
वसूली में रूचि नही,महीनों नही मिलता तनख्वाह
नगरपालिका क्षेत्र में कर्मचारियों को तनख्वाह वसूली से प्राप्त पैसो से ही दिया जाता है,नगरपालिका बैकुंठपुर निकाय क्षेत्र में कई दुकानें और आय का स्त्रोत हैं जिससे कि यदि नियमित वसूली हो तो हर माह कर्मचारियों को तनख्वाह दिया जा सकता है लेकिन यहां का अमला इस कार्य में एकदम सूस्त है और वसूली पर ध्यान नही देता जिससे कि यहां के कर्मचारियों को महीनों तक तनख्वाह नही मिलता।
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