कोरबा,09 जनवरी 2024 (घटती-घटना)। स्व. बिसाहू दास महंत स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय संबद्व चिकित्सालय पूर्व में 100 बिस्तर का अस्पताल था जिसे समय समय पर मरीजो की आवश्यकता अनुरूप बढ़ाया गया,अभी वर्तमान में जिला अस्पताल में बिस्तर की संख्या 357 हैं और मरीज की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है रोज एक्सरे 120 और सोनोग्राफी 40 से 45 मरीजो का किया जा रहा है ओपीडी में प्रतिदिन 600 से 700 मरीजो का सफल उपचार किया जा रहा है । मरीजो की संख्या में इजाफा होने से ट्रामा सेंटर को भी उपयोग में लिया गया है जिसमे अभी भूतल में 2 कमरों को और पहले फ्लोर में बच्चो के लिए वार्ड तैयार किये गए है।
महिला मरीजो की संख्या में इजाफा होने और सीमित संसाधन होने से लेबर रूम में भी भीड़ देखने को मिल रही है गर्भवती महिलाओं के लिए अलग से रूम की व्यवस्था करने के लिए अस्पताल प्रबंधन को जूझना पड़ रहा है रूम नही होने की वजह से गैलरी में बिस्तर लगा कर उपचार करने की मजबूरी बन गयी है, समय समय पर एक बिस्तर में दो मरीज को रख कर इलाज किया जाता है ।
कोरबा जिला जहाँ लगभग लाखो लोग निवासरत है। वही स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर जगह जगह में बनाये गए उप स्वास्थ्य केंद्र महज हांथी का दांत साबित हो रहा है। जिले में उप स्वास्थ्य केंद्र है किंतु गिनती के ही अस्पतालों में ओपीडी का खाता खुलता है। या यूं कहे की उप स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों का इलाज नही हो रहा है, जिससे मरीज जिला अस्पताल का रुख करने लगे है। जिला अस्पताल में बिस्तर और मरीजो की संख्या में इजाफा होने की वजह से व्हीलचेयर और स्ट्रेचर की कमी से भी जिला अस्पताल जूझ रहा है संसाधन सीमित है, जिस वजह से मरीजो को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है । भीड़ कम करने के लिए अस्पताल प्रबंधन को 2 एक्सरे मशीन डिजिटल के संचालन (वर्तमान में 1 डिजिटल और एक मैनुअली मशीन है) और 2 सोनोग्राफी मशीन का संचालन की आवश्यकता है जिससे मशीनों पर दबाव कम हो सके और मरीजो को लंबी कतार से मुक्ति मिल सके, अभी वर्तमान में जिला अस्पताल में मरीजो को सिटी-स्कैन की सुविधा नही मिल पा रही है इसके लिए अभी जिला अस्पताल प्रबंधक ने दो जगहों से मरीजो को निःशुल्क आने जाने की सुविधा के साथ सीटी-स्कैन की सुविधाएं उपलध कराई है जिससे मरीजो का सफल उपचार किया जा रहा हैं । वर्तमान में जिला अस्पताल स्टॉफ की कमी से जूझ रहा है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में स्टॉफ नर्स, वार्ड बॉय,तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी के पद सालों से रिक्त है । इन पदों की भर्ती जल्द हो जाती तो मरीजो को असुविधा का सामना नही करना पड़ता । स्टॉफ की कमी से मरीजो का इलाज कही न कही प्रभावित हो रहा है । अधिकरी भी इस बात को दबी जुबान स्वीकार कर रहे।
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