- किसी पूर्व निर्वाचित जनप्रतिनिधि को मिल सकता है जिलाध्यक्ष का दायित्व:सूत्र,
- यदि कोरिया कांग्रेस कमेटी जिलाध्यक्ष बदलने का निर्णय लेती है तो सबसे कम कार्यकाल वाले जिलाध्यक्ष कहलाएंगे प्रदीप गुप्ता
-रवि सिंह-
कोरिया,02 जनवरी 2024 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ में संपन्न हुए विधानसभा निर्वाचन 2023 के संपन्न होने उपरांत जब परिणाम चुनाव के सामने आए तब सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को सत्ता से बाहर होना पड़ा वह भी कांग्रेस में सबसे ज्यादा संख्या में हारने वाले प्रत्याशी वह साबित हुए जो या तो मंत्री थे राज्यमंत्री थे या फिर विधायक वहीं सभी ने हारने के बाद हार का ठीकरा कार्यकर्ताओं पर फोड़ा और सभी ने संगठन में बदलाव की मांग कर डाली,इसी क्रम में कोरिया जिला कांग्रेस कमेटी में भी बदलाव देखने को मिला जो कांग्रेस की चुनाव में पराजित प्रत्याशी पूर्व विधायक की मंशानुरूप परिवर्तन किया गया और उनकी मंशा अनुरूप नए लोगों को संगठन में जहां पदाधिकारी बनाया गया वहीं कई वरिष्ठ साथ ही कर्मठ कार्यकर्ताओं को कोई पद नहीं दिया गया। अब सूत्रों की माने तो जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष को भी हटाया जा सकता है वहीं किसी पूर्व निर्वाचित जनप्रतिनिधि को यह पद दिया जा सकता है।
बताया जा रहा है की जिलाध्यक्ष को हटाने के लिए लगभग तैयारी हो चुकी है केवल घोषणा बाकी है वैसे बताया यह भी जा रहा है की पूर्व निर्वाचित एक जनप्रतिनिधि जिलाध्यक्ष बनने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा चुके हैं और जल्द ही वह अपनी मंशा में सफल होते नजर आएंगे। जिलाध्यक्ष को चुनाव में मिली हार का कारण बताकर ऐसा किया जाएगा। वैसे कोरिया जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष हाल ही में जिलाध्यक्ष बनाए गए हैं वहीं उनके जिलाध्यक्ष नियुक्त होते ही विधानसभा निर्वाचन 2023 की तिथियां घोषित हो चुकी थीं ऐसे में वह कितनी मेहनत करते और कितनी हार में उनकी जिम्मेदारी मानी जायेगी यह समझा जा सकता है। वैसे कोरिया जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष को यदि अभी हटाया जाता है तो वह सबसे कम कार्यकाल वाले जिलाध्यक्ष होंगे जिनका कुल कार्यकाल कुछ महीनों का ही कुल रहा ऐसा माना जायेगा। पूर्व जनप्रतिनिधि जिनकी मंशा है जिलाध्यक्ष बनने के पीछे वह लोकसभा चुनाव के पूर्व खुद को जिलाध्यक्ष बनता देखना चाहते हैं।
क्या किसी दल का जिलाध्यक्ष दो विधानसभा में पार्टी के लिए काम करेगे
कोरिया जिले में वैसे तो एक ही विधानसभा पूरी तरह से शामिल है लेकिन जिले का कुछ क्षेत्र या एक विकासखंड दूसरे विधानसभा में शामिल है ऐसे में जिले में किसी दल के लिए दो विधानसभा शामिल हैं ऐसा माना जाता है और किसी दल का जिलाध्यक्ष दो विधानसभा में पार्टी के लिए काम करता है जो देखा जाता है। वैसे कांग्रेस पार्टी को दोनो ही विधानसभाओं में हार का मुंह देखना पड़ा है और यही वर्तमान जिलाध्यक्ष की सबसे बड़ी नाकामी बताकर उन्हे हटाया जा सकता है। पूर्व जनप्रतिनिधि के समर्थन में उनके समर्थक हैं वहीं अन्य कार्यकर्ता फिलहाल यह जानते भी नहीं की अंदर ही अंदर पार्टी में क्या चल रहा है।
पूर्व जनप्रतिनिधि जिलाध्यक्ष बनते है तो पार्टी में बड़ा विस्फोट हो सकता है…
वैसे माना जा रहा है की पूर्व जनप्रतिनिधि के जिलाध्यक्ष बनते ही पार्टी में बड़ा विस्फोट हो जायेगा कई बड़े नेता कार्यकर्ता पार्टी को अलविदा कह सकते हैं। पार्टी में जो खुद को जिलाध्यक्ष देखना चाह रहे हैं वह लोकसभा चुनाव के मद्देनजर खुद को जिलाध्यक्ष देखने के प्रयास में हैं जिससे लोकसभा चुनाव में वह सर्वे सर्वा हो जाएं। वैसे जिलाध्यक्ष बनने के पीछे एक और मंशा काम कर रही है वह यह की पहले निर्वाचित होकर पार्टी में अपनी चलाने की आदत को बदलना न पड़े इसलिए वह अब संगठन में खुद को आगे रखने के प्रयास में हैं। वैसे जिस तरह नई कार्यकारणी बनी है लगता है की जिलाध्यक्ष भी बदले जा सकते हैं इसमें ज्यादा दिक्कत नहीं आने वाली।
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