
- जिस दल ने विधायक बनाया,राज्यमंत्री का दर्जा दिया उसी दल से बगावत कहां तक सही, उठने लगे सवाल?
- मनेंद्रगढ़ विधायक डॉक्टर विनय जायसवाल ने टिकट नहीं मिलने पर की बगावत,पुनः विधायक बनने थामा दूसरे पार्टी का दामन।
- गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से चुनाव लड़ने की है मनेंद्रगढ़ विधायक की तैयारी।
- सम्मान देने वाली पार्टी पद देने वाली पार्टी को देंगे दगा,प्रत्याशी बदले जाने पर लिया निर्णय।
- डॉक्टर विनय जायसवाल समर्थक भी सोशल मीडिया पर मांग रहे माफी,विनय जायसवाल को चुनाव में जिताने की कर रहे अपील।
- यह वही समर्थक हैं जिन्होंने विनय जायसवाल के विधायक रहते नहीं किया किसी का सम्मान,महिलाओं के लिए भी की थी अभद्र टिप्पणी मांगनी पड़ी थी माफी।
- विधायक का टिकट कटते अन्य दल से लड़ने की बात सामने आते ही समर्थक होने लगे सोशल मिडिया में नतमस्तक,पिछली गलतियों को लेकर माफीनामा दे रहे विधायक समर्थक।
- मनेंद्रगढ़ विधायक की लुटिया डुबाने में यही समर्थक रहे मुख्य भूमिका में,अब सोशल मिडिया में देखी जा रही उनकी गिड़गिड़ाहट।
- विधायक की बगावत से यह भी साबित हुआ वह भी कुर्सी प्रेमी मात्र,बिना कुर्सी जनसेवा का भाव उनके अंदर भी जागृत नहीं होगा उन्होंने जाहिर किया।
-रवि सिंह-
एमसीबी 22 अक्टूबर 2023 (घटती-घटना)। राजनीति भी बड़ी अजीब चीज है, राजनीति में सिद्धांत, आदर्श और अनुशासन का कोई मतलब नहीं होता यह आज राजनीति से जुड़े लोग साबित करते जा रहे हैं वहीं सत्ता के साथ निर्वाचित होकर जुड़े लोग अपने ही उस राजनीतिक दल को आंख भी दिखा रहे हैं जिसने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया निर्वाचित होने उन्हे अपने दल से मौका दिया और सत्ता का स्वाद चखाया, निर्वाचित होकर सत्ता का स्वाद चखने वाले जब एक कार्यकाल समाप्त होने उपरांत राजनीतिक दलों द्वारा उपयुक्त नहीं माने जाते वह दल से हिसाब से सही नजर नहीं आते या दल को लगता है की अन्य को भी मौका दिया जाए उसकी दल के प्रति आस्था और निष्ठा का प्रतिफल उसे दिया जाए एकबार मौका पाए वर्तमान में निर्वाचित यह बर्दास्त नहीं कर पाते और बगावत करने की ठान लेते हैं और वह उसी दल को आंख दिखाने लगते हैं जिसने उन्हें आंख मिलाने के काबिल बनाया था उन्हे फर्श से अर्श तक पहुंचाया था।
ऐसा ही कुछ नवीन जिले की मनेंद्रगढ़ विधानसभा में देखने को मिल रहा है जहां वर्तमान विधायक जिन्हे कांग्रेस पार्टी ने पिछले चुनाव में मौका दिया था और वह जीतकर भी पार्टी के टिकट से निर्वाचित हुए थे उन्हे पार्टी ने राज्यमंत्री तक बनाया था पत्नी को उनकी महापौर भी बनाया था वह पार्टी से बगावत को तैयार हैं दुसरे दल की गोद में बैठकर वह चुनाव लड़ने को आतुर हैं। विधायक का यह निर्णय केवल इसलिए है क्योंकि वह वर्तमान में कुर्सी पर बैठे हुए हैं और उन्हे लगता है की उनके अलावा कुर्सी का हकदार और कोई नहीं है जबकि कांग्रेस पार्टी ने सभी समीक्षाएं करके यह पाया है की विधानसभा में उनकी जीत सुनिश्चित नहीं है लोग उनसे नाराज हैं खासकर पार्टी के ही कार्यकर्ता पदाधिकारी उनसे दुखी हैं, जिसके कारण पार्टी ने अन्य पार्टी सदस्य को मौका देने का मन बनाया है,पार्टी का निर्णय सामने आते ही विधायक जी काफी परेशान हैं वह अब क्षेत्र की जनता के बीच जाकर खुद का विकास बता रहे हैं उजाले में ही टॉर्च जलवा रहे हैं और पार्टी को आंख दिखा रहे हैं वहीं पार्टी ने तय कर दिया है की अब नया चेहरा मैदान में होगा जो पार्टी ने अधिकृत कर दिया है जिसे संगठन का भी साथ मिल चुका है। विधायक फिर भी अंतिम प्रयास कर रहे हैं पार्टी को क्षेत्र की जनता के नाम से झुकाने का प्रयास कर रहे हैं इसके लिए उन्हें उपयुक्त अवसर भी मिला हुआ है नवरात्रि पर्व का जहां पूजा पंडालों में गरबा मंडलियों में पर्याप्त लोग एक साथ इकट्ठे मिल जा रहे हैं जिन्हे वह खुद के लिए समर्थित बता रहे हैं जो पहुंचे धार्मिक कारणों से हैं लेकिन राजनीति का शिकार हो जा रहे हैं।
विधायक लगातार बैठके कर समर्थक संख्या जुटा रहे हैं
विधायक लगातार बैठके कर रहे हैं उनके समर्थक संख्या जुटा रहे हैं सोसल मीडिया पर समर्थक माफी भी मांग रहे हैं अपनी पिछली गलतियों को लेकर जो उन्होंने की है और विधायक का साथ देने की वह अपील कर रहे हैं। यहां कुल मिलाकर यह देखा जा रहा है की विधायक को खुद का ही विकास मॉडल पसंद है वही विकास कर सकते हैं वह जतलाने की कोशिश कर रहे हैं अन्य के बस का काम भी विकास यह भी वह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं वहीं पार्टी फिर भी नहीं मानी तो वह अन्य दल से चुनाव लडेंगे कुर्सी मोह नहीं छोड़ने वाले वह यह भी वह जतला रहे हैं। विधायक ने एक क्षेत्रीय दल से सबकुछ तय भी कर लिया है वह अब उसी दल से प्रत्याशी बनकर चुनाव लडेंगे और फिर कुर्सी तक जाने का प्रयास करेंगे जिसके लिए उन्हें जनता जनार्दन की जरूरत होगी इसलिए वह जनता जनार्दन के सामने हांथ पैर जोड़ रहे हैं उन्हे अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच विधायक मनेंद्रगढ़ यह भी साबित कर रहे हैं की कांग्रेस पार्टी से उनका नाता रिश्ता टिकट तक कुर्सी तक सीमित था पार्टी ने उन्हें कुर्सी तक जाने से रोकने का प्रयास किया इसलिए वह अब आगे उसके साथ नहीं हैं पिछला वह पार्टी का एहसान भूल चुके उन्हे स्व स्वार्थ के आगे पार्टी का हित मंजूर नहीं यही उनकी अंतिम नीति है।
विधायक के इस निर्णय के बाद अब मनेंद्रगढ़ विधानसभा में चुनाव टक्कर का होने वाला है
विधायक के इस निर्णय के बाद अब मनेंद्रगढ़ विधानसभा में चुनाव टक्कर का होने वाला है उनके अन्य दल से चुनाव लड़ने पर भाजपा कांग्रेस की टक्कर जबरदस्त होगी निर्णय कांग्रेस भाजपा से एक के पक्ष में ही आएगा वहीं वर्तमान विधायक चुनाव को रोचक बनाने का काम करेंगे। सूत्रों की माने तो वैसे विधायक को फटकार भी मिली है दल से जिसने उन्हें अर्श तक पहुंचाया है उससे और वह शायद ही दूसरे दल की तरफ जाकर चुनाव लड़ने की सोचें लेकिन वह दबाव बनाने में लगे हुए हैं और उनके समर्थक भी उन्हे उकसा रहे हैं क्योंकि उनकी करनी ही रही जो विधायक की टिकट पर बन आई और अब समर्थक हांथ पैर जोड़कर माफी मांग रहे हैं विधायक के लिए समर्थन मांग रहे हैं। वैसे राजनीति में जो सामने दिखता है परिणाम उसके विपरीत आता है कई बार ऐसा उदाहरण मनेंद्रगढ़ विधानसभा में भी देखने को मिल चुका है जब खुद को जनाधारी मानकर लड़ने वालों को अंतिम समय में जनता ने वोट काटने वाले का खिताब देकर विदा कर दिया जिनके सपने में भी अब उन्हे चुनाव लड़ने का सपना नहीं आता। अब देखना है विधायक चुनाव लड़ते हैं या पार्टी प्रत्याशी का प्रचार करते हैं क्योंकि उन्होंने कदम आगे बढ़ाया है उसे पीछे लेंगे तो उनकी साख यह मानकर चली जायेगी की एक डांट मात्र से वह सहम गए नेतृत्व जनता का क्या करेगे वहीं यदि वह लड़ गए उन्हे वोट काटने वाला ही जनता न बना दे जिसकी संभावना ज्यादा है।
विधायक उसी दल को दिखा रहे आंख जिसने उन्हें अवसर दिया विधायक बनने का राज्यमंत्री का दर्जा भी दिया,कद बढ़ाया
मनेंद्रगढ़ विधायक उसी दल को आंख दिखा रहे हैं जिसने उन्हें पिछले चुनाव में मौका दिया उन्हे विधायक बनने टिकट दिया उन्हे राज्यमंत्री बनाया उनकी पत्नी को उनकी ईक्षा अनुसार महापौर बनाया,इतना कुछ एक साथ एक ही बार में देने वाले दल को विधायक का आंख दिखाना समझ से परे है। पार्टी इस चुनाव में नए को मौका दे रही है कई दावेदार और हैं जिनकी सहमति के बाद एक नाम पर सहमति बनाकर यह पार्टी निर्णय ले सकी है ऐसे में विधायक का आक्रोश टिकट नहीं मिलने पर समझ से परे भी है क्योंकि उनके साथ संगठन सहित कार्यकर्ताओं की सहमति भी कम है उनके खास समर्थकों के अलावा कोई उनके पक्ष में पार्टी से नहीं है।
विधायक मनेंद्रगढ़ की बगावत से उठ रहा सवाल,क्या दल से किसी अन्य को मौका देना दल का गलत निर्णय,क्या अजीवन खुद को प्रत्याशी चाहते हैं विनय?
मनेंद्रगढ़ विधायक टिकट कटने से दुखी हैं वह बगावत की मंशा बना रहे हैं ऐसे में यह सवाल उठता है की क्या वह विधायक की कुर्सी पर खुद को अजीवन मानकर चल रहे हैं पार्टी से भी वह अजीवन टिकट की मंशा के साथ जुड़े हैं।पार्टी किसी और सदस्य को टिकट देगी तो क्या विधायक उसका समर्थन नहीं करेंगे जबकि उनकी बारी में सभी ने उन्हे समर्थन दिया था। ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं और विधायक सवालों से घिर चुके हैं, विधायक यह क्यों सोच रहें हैं की विकास वही कर सकते हैं अन्य के बस की बात विकास नहीं जबकि पार्टी जिसे प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतार रही है वह भी विकास के नाम पर ही जनता के बीच जायेगा और जीतकर विकास करेगा यह विधायक क्यों नहीं मान पा रहे हैं यह भी सवाल उठ रहा है।
अपनी ही करनी का फल मिला विधायक मनेंद्रगढ़ को,टिकट कटना करनी का फल,पार्टी में यही है प्रमुख चर्चा
मनेंद्रगढ़ विधायक का टिकट क्यों कटा यह पार्टी के अंदर का विषय है लेकिन पार्टी में ही जारी एक चर्चा के अनुसार यह उनकी ही करनी का फल है।वरिष्ठ पार्टी सदस्य कार्यकर्ता की उपेक्षा लगातार उपेक्षा ही उनके टिकट के बीच रोड़ा बनकर खड़ी हो गई और एक स्वर में अन्य के नाम पर सभी पार्टी सदस्य सहमत हो गए और विधायक जी का टिकट कट गया यह बताया जा रहा है। वहीं उनके खास कुछ समर्थक भी उनके लिए टिकट मामले में काल बन गए उनके खास समर्थकों की भी करनी उन्हे ले डूबी यह भी चर्चा है।
खास विधायक समर्थक अब सोशल मीडिया में कर रहे निवेदन,विधायक के लिए मांग रहे समर्थन,अपना माफीनामा भी हांथ पैर जोड़कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे
मनेद्रगढ़ विधायक के खास समर्थक अब विधायक की टिकट कटने के बाद सोशल मिडिया पर सक्रिय हुए हैं और उनकी पोस्ट से जाहिर हो रहा है की वह किस कदर किस स्तर तक जाकर विधायक के साथ हैं। उनके एक समर्थक ने तो यह तक लिख दिया की यदि उसने कोई गलती की है तो वह पैर छूकर माफी मांगने तैयार है लेकिन किसी तरह जनता विधायक को चुनाव जितवा दे। समर्थक विधायक के अन्य दल से या निर्दलीय चुनाव लड़ने की संभावनाओं के साथ ऐसा लिख रहा है।वैसे यह वही समर्थक हैं जिन्होंने विधायक जी के कार्यकाल में उनकी कम छवि खराब नहीं की है,यही वह समर्थक हैं जिन्होंने महिलाओं को लेकर अभद्र टिप्पणी की थी और बाद में माफी की नौबत आई थी एक महिला अधिकारी को देर रात फोन करने के कारण महिला अधिकारी के पति से इसी समर्थक को फटकार मिली थी कुल मिलाकर यह समर्थक विधायक जी के टिकट कटने में कारण बना यह वह खुद स्वीकार कर रहा है और सार्वजनिक माफी मांगकर अब विधायक जी के लिए समर्थन जुटा रहा है। ऐसे अधिकांश समर्थक हैं विधायक के जो अपनी पुरानी गलतियों की माफी मांगना चाहते हैं और विधायक को पुनः विधायक बनाने वह कहीं भी पैर पूजने तैयार हैं।
पांच वर्ष अच्छा किया काम तो क्यों कटा टिकट यह भी सोचने वाली बात,विधायक के लिए चिंतन का विषय
वैसे विधायक खुद को विकास पुरुष बता रहे हैं और क्षेत्र की जनता को भी समझा रहे हैं की उनके बिना विकास संभव नहीं है। वहीं टिकट ऐसे ही उनका नहीं कटा समीक्षा उपरांत उनका टिकट कटा और जिसमे उनका रिपोर्ट कार्ड भी पार्टी ने बनवाया जो कमजोर था,अब विधायक के लिए यह भी चिंतन का विषय की यदि वह विकास के पर्याय हैं तो उनका टिकट कटा ही क्यों,वह पार्टी के ही लोगों को संगठित नहीं कर सके और उन्हे ही विकास नहीं बता सके जो उनकी सबसे बड़ी असफलता रही,उन्हे खुद विचार करना चाहिए की उनका विकास पांच सालों में उनके ही दल के लोगों तक क्यों नहीं पहुंच सका जो उनका टिकट काटना पड़ा। वैसे विधायक को अपने पांच साल के विकास को लेकर सोचने की जरूरत जरूर है जो उनके लिए टिकट में ही बाधक बन गया।
मनेंद्रगढ़ विधायक अन्य दल से भी लड़ सकते हैं चुनाव,कर रहे तैयारी
मनेद्रगढ़ विधायक अन्य दल से भी चुनाव लड़ सकते हैं उन्होंने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से संपर्क बना लिया है ऐसी भी संभावना है। अन्य दल से उनके चुनाव लड़ने की बात अभी हवा हवाई भी है और कुछ लोग इसकी पुष्टि भी कर रहे हैं,वैसे गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से उनका सीधा संपर्क बना हुआ है बताया जा रहा है।
कांग्रेस पार्टी पर बना रहे दबाव,पार्टी टिकट बदलने का ले फैसला इसलिए कर रहे लगातार बैठक,कांग्रेस मातृ पार्टी यह भी विधायक दे रहे बयान
विधायक लगातार कांग्रेस पार्टी पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं,वह लगातार जन संपर्क कर जन समर्थन भी जाहिर कर रहे हैं वहीं वह पार्टी पर हर संभव दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं,सोशल मिडिया पर वह जिस दिन से टिकट अन्य को मिला है अपना शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं। वह अन्य दल से चुनाव लड़ सकते हैं वह संपर्क में हैं अन्य दल के वह यह भी संदेश पार्टी को दे रहे हैं और पार्टी को आंख दिखा रहे हैं,कांग्रेस मातृ पार्टी है यह भी वह कहकर अभी खुद को पार्टी से अलग नहीं बता रहे हैं। विधायक पार्टी पर हर संभव दबाव कायम करना चाहते हैं। पार्टी निर्णय बदल सकती है यह संभावना उनके जेहन में है इसलिए वह खुद को जनाधार वाला साबित कर रहे हैं।
पार्टी ने निर्णय बदला प्रत्याशी बदला पार्टी को झेलनी पड़ेगी और भी बगावत,वरिष्ठ सभी कांग्रेसी होंगे नाराज,मनेंद्रगढ़ में भी पार्टी का बिगड़ेगा समीकरण
कांग्रेस के लिए एक तरफ वर्तमान विधायक का लगातार बगवाती रुख सरदर्द बना हुआ है वहीं यदि वह दबाव में आती है टिकट बदलती है वर्तमान को ही मौका फिर से देती है तो वरिष्ठ कांग्रेसी सहित मनेद्रगढ़ शहर का बगावत पार्टी को झेलना पड़ेगा जो एकतरफा हमेशा कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने वाला शहर रहा है। वरिष्ठ भी वर्तमान विधायक से नाखुश हैं और ऐसे में यदि टिकट बदली गई सभी मौन हो जायेंगे और पार्टी के लिए सीट निकालनी मुस्कील हो जायेगी।
विधायक क्या गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को भी दे सकते हैं धोखा,कांग्रेस पार्टी से टिकट मिलने की स्थिति में वह कांग्रेस से ही लड़ेंगे चुनाव यही बन रही संभावना
विधायक मनेंद्रगढ़ का टिकट भले ही पार्टी के आंतरिक सर्वे अनुसार काट दिया गया है लेकिन वह राजनीति के माहिर खिलाड़ी बनकर अभी भी पार्टी को परेशान कर रखे हैं वहीं वह जैसा की बताया जा रहा है एक अन्य दल को भी अभी खुद के बहकावे में लेकर चल रहे हैं जो गोंडवाना गणतंत्र पार्टी है जिसे भी उनके निर्णय का इंतजार है। अभी विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नाम पर कांग्रेस पार्टी पर दबाव मात्र बना रहे हैं और दबाव सफल रहा और टिकट पार्टी बदलकर यदि उन्हे देती है तो वह खुद पार्टी से ही चुनाव लडेंगे काग्रेस पार्टी से यह भी तय बताया जा रहा है उनका एक बयान भी कांग्रेस को मातृ पार्टी बताते हुए आया जो साबित करता है की वह अभी कांग्रेस से खेल खेल रहे हैं और वह यदि सफल हुए कांग्रेस से ही चुनाव लडेंगे,वहीं यदि कांग्रेस फिर भी नहीं दबाव में आती है उनकी तैयारी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से चुनाव लड़ने की है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी जैसी सिद्धांतो पर चलने वाली पार्टी को भी विधायक मनेंद्रगढ़ भुलावे में बहकावे में लेकर चल रहे हैं यही उनकी राजनीतिक कुशलता है। वह कांग्रेस पार्टी से टिकट मिलने पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को निश्चित धोखा देंगे यह भी तय माना जा रहा है फिर भी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी उनके भुलावे बहकावे में है उनके इंतजार में है बताया जा रहा है।
कांग्रेस मनेंद्रगढ़ में फिर से यदि टिकट को लेकर करती है विचार बदलती है प्रत्याशी,वर्तमान प्रत्याशी फिर हो जाएंगे एक बार पुनः राजनीति का शिकार
मनेंद्रगढ़ में यदि कांग्रेस टिकट को लेकर पुनः विचार करती है वर्तमान विधायक का दबाव महसूस करती है वहीं वर्तमान घोषित प्रत्याशी का टिकट काटती है तो वर्तमान प्रत्याशी जिन्हे बनाया गया है ऐसा उनके साथ दोबारा होगा जब उनका टिकट तय करने के बाद काट दिया जायेगा। एक बार रमेश सिंह को पहले भी टिकट पार्टी ने दी थी और लगभग उन्हे प्रत्याशी बना दिया गया था लेकिन उस समय राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से कांग्रेस का गठबंधन कांग्रेस पार्टी के टिकट घोषणा के बाद हो गया था और मनेंद्रगढ़ विधानसभा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के खाते में चली गई थी और अंत में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने अपना प्रत्याशी रामानुज अग्रवाल को घोषित किया था और रमेश सिंह ठगे गए थे तब वह निर्दलीय मैदान में उतर गए थे जिसमे वह असफल भी साबित हुए थे,यदि इस बार भी ऐसा हुआ रमेश सिंह के लिए दुर्भाग्य से कम नही होगा यह मामला क्योंकि दो दो बार उन्हे प्रत्याशी बनाने के बाद अंत में बैठा दिया जायेगा इसे बड़ी बेइज्जती से कम भी नहीं माना जायेगा
टिकट कटने के बाद भी वर्तमान विधायक को मिल रहा अपार जनसमर्थन
विधायक के पीआरओ द्वारा जारी खबर के मुताविक विधानसभा चुनाव 2023 के मद्देनजर भाजपा कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। भाजपा ने जहां श्यामबिहारी जायसवाल को अपने अधिकृत प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतारा है तो वहीं कांग्रेस ने वर्तमान विधायक डॉ. विनय जायसवाल का टिकट काटकर नये चेहरे के रूप में अधिवक्ता रमेश सिंह पर भरोसा जताया है। मनेन्द्रगढ़ विधानसभा से टिकट कटने के बाद वर्तमान विधायक विनय जायसवाल के समर्थकों में काफी मायूसी देखने को मिल रही है। चिरमिरी में आयोजित गरबा कार्यक्रम में भी जब डॉ विनय जायसवाल ने अपने समर्थन की बात की तो हजारों लोगों ने मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर सांकेतिक समर्थन दिया। नवरात्रि की सप्तमी तिथि दिन शनिवार को भी मनेन्द्रगढ़ आगमन पर विनय जायसवाल का उनके समर्थकों और मित्रों ने गर्मजोशी से स्वागत किया और “विनय भैया ज़िंदाबाद”। “विनय भैया संघर्ष करो हम आपके साथ हैं” के नारे लगाये। आपको बता दें की पूर्व विधायक डॉ विनय जायसवाल नवरात्रि के अवसर पर विभिन्न पूजा पंडालों में दर्शन करने मनेन्द्रगढ़ पहुंचे हुए थे। जैसे ही इस बात की जानकारी उनके समर्थकों को लगी तो सैकड़ों की संख्या में लोग सरोवर मार्ग स्थित दुर्गा पंडाल पहुंच गये और उनके समर्थन में जिन्दाबाद के नारे लगाने लगे। डॉ जायसवाल और उनके समर्थकों का काफिला स्टेशन रोड होते हुए मनेन्द्रगढ़ मुख्य बाजार पहुंचा। यहां भी उनका जोरदार स्वागत किया गया। आम लोगों और व्यापारियों द्वारा मिल रहे अपार जनसमर्थन से पूर्व विधायक भावुक भी हो गये। कार्यकर्ताओं और समर्थकों को समझाते हुए पूर्व विधायक विनय जायसवाल ने कहा की कांग्रेस पार्टी ने जो भी निर्णय लिया है काफी सोच समझकर लिया है। हम सभी को उनके फैसले का सम्मान करना चाहिये।
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