
- पहली बार किसी विरोध प्रदर्शन में एक पत्रकार के विरुद्ध लगे नारे,की गई पत्रकार की फजीहत।
- क्या स्वेच्छानुदान राशि पा कर पत्रकारों ने अपनी कमी को उजागर कर दिया है,और क्या कुछ ने निष्पक्षता ताक पर रख दी है?
- प्रेस काउंसिल ऑफ कोरिया आक्रोशित, आम आदमी पार्टी के खिलाफ किया निंदा प्रस्ताव पारित।
- प्रेस काउंसिल ऑफ कोरिया का आरोप आम आदमी पार्टी के पदाधिकारियो ने वरिष्ठ पत्रकार के खिलाफ कहे थे अभद्र व अमर्यादित शब्द।
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर/मनेन्द्रगढ़,17 सितम्बर 2023 (घटती-घटना)। शहर के भगत सिंह तिराहे में बीते शनिवार से चल रहे पांच सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन में प्रशासन ने आम आदमी पार्टी की मांगों को लेकर उन्हे आश्वासन दे दिया, जिसके बाद आम आदमी पार्टी ने आंदोलन वापस ले लिया। लेकिन उसके बाद जो हुआ और आम आदमी पार्टी के नेताओं कार्यकर्ताओं ने जो उदाहरण पेश किया वह अविभाजित कोरिया जिला कहें या छत्तीसगढ़ प्रदेश कहें या देश को लेकर ही उसे उदाहरण मान लें एक अलग ही तरह का विरोध आम आदमी पार्टी ने प्रदर्शित किया, जो एक पत्रकार के विरुद्ध आक्रोश उजागर करता विरोध प्रदर्शन था और निष्पक्षता पर उसके सवाल भी उठाता विरोध प्रदर्शन था, देखा जाए तो आम आदमी का विरोध प्रदर्शन भले ही पांच सूत्रीय मांगो को लेकर था लेकिन जब उनकी मांगों पर प्रशासन से उनकी सहमति बन गई तो आंदोलन समाप्त हो गया, जिसके बाद आम आदमी पार्टी ने एक पत्रकार के विरुद्ध तत्काल मोर्चा खोल दिया और उसकी सरेआम फजीहत कर दी वह भी बीच शहर में माइक चोंगा लगाकर।
आम आदमी पार्टी विगत सफ्ताह भर से जिले सहित शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था सहित एक चिकित्सक के करतूतों के खिलाफ आंदोलनरत था और जब प्रशासन ने उनकी बात पर कार्यवाही का आश्वासन दे दिया वह आंदोलन से पीछे हट गए और उसके बाद उन्होंने एक नया अनोखा आंदोलन किया जो बीच शहर में किया गया ऐसा आंदोलन था जिससे एक बड़े क्षेत्रीय राज्यस्तरीय समाचार चैनल इलेक्ट्रोनिक मीडिया के प्रतिष्ठित समाचार चैनल के एक पत्रकार के प्रतिनिधि के विरुद्ध आम आदमी पार्टी ने मोर्चा खोल दिया और पत्रकार को जितना भला बुरा वह मंच से बोल सकते थे उन्होंने कहा, जिस तरह के आरोप आम आदमी पार्टी ने प्रतिष्ठित समाचार चैनल के पत्रकार प्रतिनिधि जिला पर लगाए, उससे यह भी सवाल खड़ा हो गया की क्या सच में जो कुछ आम आदमी पार्टी ने उक्त पत्रकार के विरुद्ध आरोप लगाए वह सही हैं? और यदि ऐसा है तो यह गंभीर मामला है और पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर ही सवालिया निशान है।

कोई राष्ट्रीय दल या उसके पदाधिकारी निष्पक्षता के हनन का आरोप खुले मंच से लगाते हैं,मामला गंभीर कहा जा सकता है
एक प्रतिष्ठित समाचार चैनल जो भले ही क्षेत्रीय चैनल है आज उसकी ख्याति देशभर में है कई जगह विदेशों में भी लोग उसके दर्शक हैं और यदि उसके ही किसी प्रतिनिधि पर कोई राष्ट्रीय दल या उसके पदाधिकारी निष्पक्षता के हनन का आरोप खुले मंच से लगाते हैं, सत्ताधारी दल के विधायकों के साथ जुगलबंदी का और उनसे मिलीभगत का आरोप लगाते हैं, वहीं सत्ताधारी दल के विधायकों से स्वेक्षानुदान की राशि अपने पुत्र के नाम से लेने का आरोप लगाते हैं जो गरीबों के लिए जरूरतमंदों के लिए शासन की महत्वाकांक्षी योजना है जिसका लाभ गरीबों को मिलना चाहिए वंचितों को मिलना चाहिए जरूरतमंदों को मिलना चाहिए तो यह बड़ा गंभीर मामला हो जाता है और यह कहा जा सकता है की मामले में पत्रकार की निष्पक्षता को ही एक तरह से चुनौती है। वैसे आम आदमी पार्टी ने यह भी मंच से कहा पत्रकार को स्वेक्षानुदान राशि उन विधायकों से भी मिली जो उनके पुत्र के नाम से मिली जो पत्रकार के निवास वाले विधानसभा क्षेत्र से अलग क्षेत्र के विधायक हैं और पत्रकार ने यह स्वेक्षानुदान अन्य विधानसभा के विधायक से लेने के लिए अपने पुत्र का पता भी स्वेक्षानुदान सूची में गलत दर्शाया है और जो भी नियम विरुद्ध है।
आम आदमी पार्टी के नेता ने कहा की पत्रकार कहते फिर रहें हैं की उन्होंने विज्ञापन का पैसा विधायकों से प्राप्त किया आम आदमी पार्टी के नेता यहीं नहीं रुके उन्होंने पत्रकार को लेकर यह भी कहा की पत्रकार कहते फिर रहें हैं की उन्होंने विज्ञापन का पैसा विधायकों से प्राप्त किया है और इसमें कोई गलत बात नहीं है और इसको लेकर आम आदमी पार्टी ने पत्रकार को लेकर यह कहा की पत्रकार ने जो स्वेक्षानुदान राशि ली वह गरीबों, वंचितों,जरूरतमंदों का हक था जिसपर डाका डाला गया जिसके लिए पत्रकार को गरीब ,वंचितों ,जरूरतमंदों से माफी मांगनी चाहिए और उनसे कहना चाहिए की हे भगवान, हे जनता मैने आपके हक की आपके अधिकार की राशि को गबन कर लिया उसमे भ्रष्टाचार किया जिसके लिए मुझे आप माफ करें। वहीं आम आदमी पार्टी के नेताओं ने पत्रकार को एक तरह से चेतावनी भी दी की आपकी नौकरी लंबी है परिवार आपको जीवन भर पालना है और जिन नेताओं का गुणगान कर रहें हैं बखान कर रहें हैं वह पांच साल के लिए हैं उसके बाद कौन आएगा यह तय नहीं है की वही आएं इसलिए आप सचेत रहें। कुल मिलाकर आम आदमी पार्टी ने अपने सफल आंदोलन को जब समाप्त किया तब उन्होंने एक नया नए तरह का समापन घोषणा कार्यक्रम आयोजित किया जिसमे शहर के लोगों को उन्होंने एक पत्रकार वह भी प्रतिष्ठित निजी टीवी न्यूज चैनल के पत्रकार की अपनी तरफ से सच्चाई से अवगत कराया जो शहर की जनता ने भी सुना।
स्वेक्षानुदान मामले में पत्रकार पर जो आरोप आम आदमी पार्टी ने लगाए यदि वह सही हैं तो यह पत्रकारिता जगत के लिए यह विचारणीय बात
आम आदमी पार्टी ने मनेंद्रगढ़ में बीच शहर में जिस तरह मंच सजाकर एक प्रतिष्ठित टीवी न्यूज चैनल के जिला प्रतिनिधि पत्रकार के विरुद्ध नारे बाजी की जिस तरह के उन पर आरोप लगाए, विधायकों से खासकर उन विधायकों से जो उनके निवास क्षेत्र के विधानसभाओं से अलग विधानसभाओं के विधायक हैं उन्हे या उनके पास गलत जानकारी पता अपने पुत्र का बताकर स्वेक्षानुदान राशि प्राप्त की जो गरीब वंचितों सहित जरूरतमंदों को मिलने वाला अधिकार है राशि है तो यह निश्चित रूप से गंभीर मामला है और पूरे पत्रकारिता जगत के लिए विचारणीय स्थिति उत्पन्न करने वाला विषय है। यदि आरोप सही हैं और स्वेक्षानुदान लेने मात्र के लिए कोई प्रतिष्ठित न्यूज चैनल खासकर टीवी चैनल का पत्रकार या प्रतिनिधि अपने परिवार के पुत्र के नाम को आगे करता है गलत पता बताकर अलग अलग क्षेत्र के विधायकों से स्वेक्षानुदान राशि लेता है तो यह मामला छोटा मामला नहीं है। पहली बार इस तरह के आरोपों से जिले सहित प्रदेश में पत्रकारिता को लेकर यह संदेश गया की आज पत्रकारिता सामंजस्य से चल रही है सत्ताधारी दल के निर्वाचित नेताओं के इशारे पर चल रही है, आरोपों से पत्रकारिता पर सवालिया निशान लगा और एक संदेश भी आम जनता के बीच गया की अब जनता के हक पर पत्रकार डाका डाल रहें हैं जो आम जनता की आवाज बनने का दावा करते हैं। यह छोटी मोटी क्षति नहीं है,यह उस टी वी न्यूज चैनल के लिए भी विचारणीय होना चाहिए जिसके प्रतिनिधि पर यह आरोप लगे हैं।
क्या पत्रकार स्वेक्षानुदान राशि लेकर करते हैं सत्ताधारी दल के नेताओं का महिमामंडन,क्या नहीं करते वह निष्पक्ष होकर पत्रकारिता?
आम आदमी पार्टी ने मनेद्रगढ़ शहर में मंच सजाकर एक निजी टीवी चैनल प्रतिष्ठित चैनल के जिला प्रतिनिधि पर गंभीर आरोप लगाए स्वेक्षानुदान राशि गलत तरीके से लेने फर्जी पता पुत्र का बताकर लेनें का आरोप भी खुलेआम आम आदमी पार्टी के नेताओं ने पत्रकार पर लगाया विधायकों से,उन्होंने यह भी आरोप लगाया की स्वेक्षानुदान राशि लेकर महिमामंडन किया जा रहा है सत्ताधारी दल के नेताओं का और पत्रकारिता की निष्पक्षता को ताक पर रखा जा चुका है। आम आदमी पार्टी के आरोपों से निष्पक्ष पत्रकारिता होती भी है यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है,सबकुछ तालमेल बनाकर सत्ताधारी दल से प्रकाशित किया जाता है स्वेक्षानुदान लेकर ऐसा किया जाता है जो यह भी सवाल उठा गया की क्या यही पत्रकारिता है। वैसे आम आदमी पार्टी ने एक पत्रकार का नाम लेकर जमकर अपनी भड़ास निकाली लेकिन इससे पूरा पत्रकारिता जगत साथ ही जिस पत्रकार पर आरोप लगाए गए उनका प्रतिष्ठित टीवी न्यूज चैनल भी आरोपों से अछूता नहीं रहा जो इन आरोपों की गंभीरता दर्शाता है। पत्रकारों ने निष्पक्षता को ताक पर रखा हुआ है स्वेक्षानुदान लेकर विधायकों से वह महिमा मंडन में उनके लगे हुए है यह भी आम आदमी पार्टी के आरोपों से साबित होता हुआ लोगों को लगा।
पत्रकार पर विधायकों का तेल मालिश करने की भी बात की कह गए आम आदमी पार्टी नेता
आम आदमी पार्टी के नेता कितने अक्रोशित थे एक पत्रकार से इस बात का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है की उन्होंने जब आरोप लगाना पत्रकार पर शुरू किया तो उन्होंने पत्रकार पर विधायकों का तेल मालिश करने का भी आरोप लगा दिया। पत्रकार तेल मालिश करते हैं विधायकों का आम आदमी पार्टी ने खुलेआम यह बात मंच से कह डाली,पूरे मामले से पत्रकार की शहर में काफी फजीहत भी हुई है जो बताया जा रहा है।
स्वेक्षानुदान क्या पत्रकारों को अपनी महिमा प्रकाशित करने देते हैं निर्वाचित विधायक?..क्या उसके असली हकदार गरीब वंचित साथ ही जरूरतमंद नहीं हैं पत्रकार हैं?
आम आदमी पार्टी ने एक पत्रकार पर शहर में जो आक्रोश जाहिर किया वह एक पत्रकार तक ही जिले के सीमित नहीं रह गया,आम आदमी पार्टी का आरोप उन सभी पत्रकारों पर सवाल खड़ा कर गया जो स्वेक्षानुदान प्राप्त कर चुके हैं लगातार प्राप्त करते रहें हैं जिसकी भी सत्ता प्रदेश में रही हो जो भी उनका क्षेत्रीय विधायक रहा हो, पत्रकार किस तरह अपने परिवार के सदस्यों के नाम से विधायकों से स्वेक्षानुदान प्राप्त कर रहें हैं यह देखा भी जाता रहा है और आम आदमी पार्टी ने उसे नामजद उजागर कर उसे जग जाहिर भी कर दिया। वहीं विधायक भी मामले में सवालों के घेरे में आ गए जिन्होंने भी स्वेक्षानुदान पत्रकारों के बीच उनके परिवार जनों को वितरण किया है। सवाल यह भी है की क्या स्वेक्षानुदान राशि विधायकों को अपना चेहरा चमकाने के लिए मिलता है क्या वह उस राशि से उस शासन की महत्वाकांक्षी योजना जो गरीबों वंचितों और जरूरतमंदों के लिए है से अपना प्रचार प्रसार करवा रहे हैं पत्रकारों को बांटकर वह खुद की प्रसंशा के आकांक्षी होते हैं। वैसे क्या स्वेक्षानुदान गरीबों वंचितों और जरूरतमंदों के लिए न होकर पत्रकारों के लिए है यह भी अब विधायकों को बताना चाहिए।
पिछले चुनाव में स्वेक्षानुदान बंदरबांट बना था प्रमुख चुनावी मुद्दा,कई जगह हुई थी विधायक मंत्रियों की हार
स्वेक्षानुदान का भुगतान विधायक का वह अधिकार है जो उन्हे इसलिए सरकार ने प्रदान कर रखा है जिससे उनके क्षेत्र में यदि कोई गरीब ,वंचित,जरूरतमंद है जिसे इलाज,बेहतर शिक्षा या अन्य किसी तात्कालिक सहायता की जरूरत है तो उसकी पूर्ति विधायक कर सकें और उनकी मदद हो सके। लेकिन लगातार देखा जा रहा है की स्वेक्षानुदान राशि का बंदरबांट विधायक करते चले आ रहे हैं, स्वेक्षानुदान राशि का वितरण विधायक अधिकांश अपना चेहरा चमकाने के लिए करते चले आ रहे हैं और उसमे भी पत्रकारों के परिजनों सहित उनका स्वयं को भुगतान सबसे ज्यादा होता देखा जा रहा है जो बताता है की किस तरह गरीबों के हक पर विधायक सहित पत्रकार भी डांका डाल रहे हैं। पिछले चुनाव में स्वेक्षानुदान प्रमुख चुनावी मुद्दा था और कई विधायक यहां तक ही मंत्रियों की हार इसी वजह से हुई थी क्योंकि जब आम जनता को पता चला की उनके हक पर कैसे डाका डाल रहे हैं विधायक मंत्री वह अक्रोशित हुए और विपक्ष में मतदान किया। वैसे इस बार भी स्वेक्षानुदान ही मुद्दा होगा और इस बार बड़ी मात्रा में पत्रकार और उनके परिजन लाभान्वित हुए हैं जो मुद्दा बनेगा जिसकी शुरुआत हो गई है। आम आदमी पार्टी ने इसको लेकर बिगुल फूंक दिया है।
पत्रकारों के लिए अब स्व आंकलन सहित खुद की निष्पक्षता जनता के समाने रख पाना बड़ी जिम्मेदारी,बड़ी चुनौती
आम आदमी पार्टी ने मनेद्रगढ़ में जिस तरह एक बड़ेएस पत्रकार की फजीहत स्वेक्षानुदान मामले में की है जिस तरह उसकी निष्पक्षता पर विधायक स्वेक्षानुदान राशि परिजन के माध्यम से प्राप्त करने का सबूत सहित सवाल उठाए हैं उसके बाद अब सभी पत्रकारों को स्व आंकलन की जरूरत है साथ ही अपनी निष्पक्षता जनता के समक्ष साबित करने की जिम्मेदारी है।जनता को अब पत्रकारों को बताना होगा की वह निष्पक्ष हैं यदि आम आदमी पार्टी के आरोपों में सच्चाई है,तभी जनता मानेगी की कोई पत्रकार किस तरह का पत्रकार है निष्पक्ष है या वह प्रायोजित है किसी नेता के महिमा मंडन के लिए वह पत्रकारिता कर रहा है और उसके बदले गरीबों के हक स्वेक्षानुदान राशि में डांका डाल रहा है। पत्रकार जगत इस मामले में पूरी तरह प्रभावित हुआ है बदनाम हुआ है जिसका आंकलन जरूरी है।
अनगिनत पत्रकारों ने लिया है विधायकों से स्वेक्षानुदान अब उनका भी नाम हो सकता है उजागर,कई बड़े नामी पत्रकारों ने भी लिया है अपने परिवार के सदस्यों के नाम से स्वेक्षानुदान
जिले में साथ ही बगल के जिले में अनगिनत पत्रकार ऐसे हैं जिन्होंने खुद के नाम से या अपने परिजनों के नाम से विधायकों से स्वेक्षानुदान राशि प्राप्त किया है। अब उनके नाम उजागर करने की भी तैयारी है,कई पत्रकार उजागर होने जा रही सूची में ऐसे हैं जिन्होंने खुद के या अपने परिजनों के नाम से स्वेक्षानुदान लिया है और वह भी अलग अलग विधानसभा के विधायकों से ,इसमें कई बड़े पत्रकार अब घबराए हुए हैं और जिन्हे भी अब भय है की आम आदमी पार्टी ने जिस तरह एक पत्रकार को लेकर प्रदर्शन उसकी फजीहत उसे चंदा लेने वाला भरे बाजार कह दिया कहीं अगला नंबर उनका न हो।
स्वेक्षानुदान प्राप्त पत्रकारों को यह साबित करना चाहिए की उन्हे या उनके परिजनों को मिला अनुदान उनके द्वारा प्रकाशित विज्ञापन का शुल्क है?वरना आरोप सही साबित होंगे और पत्रकारिता बदनाम पेशा साबित होगी?
अब आरोपों के बाद यह जरूरी हो गया है की जो आरोप पत्रकार पर आम आदमी पार्टी ने लगाए हैं जिसमे स्वेक्षानुदान राशि विधायक से प्राप्त करने का जिक्र किया गया है उस मामले में यदि स्वेक्षानुदान विज्ञापन के पैसे के एवज में मिला है तो पत्रकार इसे साबित करें जनता के सामने रखें। विज्ञापन का पैसा लेकर यदि पत्रकार बदनाम हो रहा है तो यह बिलकुल गलत है वहीं विज्ञापन के पैसे का भुगतना यदि विधायक स्वेक्षानुदान मद से कर रहें तो वह भी गलत है, जो भी सच है वह सामने आना चाहिए जिससे पत्रकारिता जगत को बदनामी और जिस तरह आम आदमी पार्टी ने सरेआम बदनाम किया उससे बचाया जा सके।
इंडिया गठबंधन पहले ही देश के नामी पत्रकारों पर आरोप लगा कर चुका है उनसे परहेज का ऐलान,अब छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी ने एक पत्रकार के विरुद्ध खोला मोर्चा
वैसे देश में एमसीबी जिले का मामला पत्रकार विरोध का कोई पहला मामला है ऐसा भी नहीं है,अंतर विरोध का केवल इतना है की देश का नया बना इंडिया गठबंधन जहां कुछ नामी पत्रकारों का सार्वजनिक रूप से बहिस्कार करने का निर्णय ले चुका है उनसे किसी तरह का वह संपर्क या उनके किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं होने का संकल्प लिया गया है वहीं छत्तीसगढ़ में एमसिबी जिले में एक टीवी न्यूज चैनल के पत्रकार का आम आदमी पार्टी ने सार्वजनिक मंच से विरोध किया है और उसके खिलाफ गरीबों के हक में डाका डालने का आरोप लगाया है। आम आदमी पार्टी भी इंडिया गठबंधन का ही हिस्सा है और यदि उस हिसाब से देखा जाए तो इंडिया गठबंधन की तर्ज पर ही सबकुछ हुआ है। आगे और भी ऐसे मामले सामने आएंगे अब इससे इंकार भी नहीं किया जा सकता क्योंकि यदि आरोप लगाना ही है तो लगाने वाले लगाएंगे ही,अब पत्रकारों को सोचना है की वह किस तरह आगे अपनी रणनीति बनाएं यदि वह स्वेक्षानुदान मद से ही विज्ञापन का पैसा लेते रहेंगे आरोप लगाते रहेंगे।
कोरिया प्रेस कौंसिल व एमसीबी प्रेस क्लब की हुई बैठक,आम आदमी पार्टी नेताओं के बयानों को लेकर किया गया निंदा प्रस्ताव
मामले में प्रेस कौंसिल कोरिया व एमसीबी प्रेस क्लब की बैठक में आहूत की गई और आम आदमी पार्टी के नेताओं द्वारा जिस तरह एमसिबी जिले के एक पत्रकार प्रतिष्ठित टीवी न्यूज चैनल पत्रकार के विरुद्ध स्वेक्षानुदान लेने साथ ही निष्पक्ष न होकर पत्रकारिता करने का खुलेआम आरोप लगाया गया उस मामले में आम आदमी पार्टी के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। गत दिवस एमसीबी जिले के मनेद्रगढ़ में राजनीतिक दल आम आदमी पार्टी के द्वारा आयोजित आमसभा में पार्टी के पदाधिकारी के द्वारा सार्वजनिक रूप से प्रेस काउंसिल ऑफ कोरिया के संरक्षक व वरिष्ठ पत्रकार के प्रति अभद्र व अमर्यादित शब्द कहे गए जिसकी वजह से जिले के समस्त पत्रकारों की भावनाएं आहत हुई बैकुंठपुर के रेस्ट हाउस में पत्रकारों के द्वारा बैठक कर आम आदमी पार्टी के पदाधिकारी के प्रति निंदा प्रस्ताव पारित किया गया बैठक में उपस्थित समस्त पत्रकारों ने कहा कि आम आदमी पार्टी के पदाधिकारी के द्वारा सार्वजनिक मंच से व्यक्तिगत रूप से चिह्नित करते हुए निम्नतम भाषा का प्रयोग किया गया जो की बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है जिस पार्टी के अध्यक्ष के ऊपर गंभीर आरोप लगे हैं अधिकांश मंत्री जेल में है उनके बारे में भी कोरिया की जनता को अवगत कराना चाहिए, जिससे कोरिया सहित छत्तीसगढ़ की जनता भी समझ सके कि इनका चाल चरित्र चेहरा क्या है बेबुनियाद आरोप लगाने वालों को पहले जांच करनी चाहिए हमारे देश में कानून व्यवस्था भी है वहां अवगत कराना चाहिए किंतु लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मनमाने तरीके से अपशब्द कहे गए इससे यह स्पष्ट है कि इन्हें देश के कानून की कोई परवाह नहीं है बैठक में उपस्थित पत्रकारों ने एक स्वर में पुलिस प्रशासन से तत्काल कार्यवाही की मांग की विदित हो की आगामी दो माह में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं इसके पूर्व विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के द्वारा पत्रकारों के बारे में अनर्गल बयान बाजी की जा रही है जो की उचित नहीं है भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।
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