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बैकुण्ठपुर@क्या भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के कोरिया जिलाध्यक्ष की तानाशाह की तरह कर रहे हैं काम?

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  • पहले दिन एक को दी नियुक्ति दूसरे ही दिन कारण बताओ नोटिस किया जारी,क्या तीसरे दिन उसे थी संगठन से बाहर निकालने की तैयारी?
  • कारण बताओ सूचना का जवाब देने की बजाए नव मनोनित पदाधिकारी ने दिया तीसरे दिन इस्तीफा
  • क्या नियुक्ति के दूसरे ही दिन कारण बताओ पत्र जारी करना उचित,क्या एक दो पत्र और भेजना जरूरी नहीं था जिलाध्यक्ष के लिए यदि अनुशासनहीनता हुई थी?

रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर,11 सितम्बर 2023 (घटती-घटना)।
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन जिला कोरिया के जिला अध्यक्ष आशुतोष कुजूर के द्वारा संगठनात्मक नियुक्ति 8 सितंबर 2023 को जारी करते हुए पांच लोगों को कार्यकारणी में जगह दिया गया था यह विस्तार था संगठन का, जिसमें पटना क्षेत्र से किशन तिवारी व राकेश कुमार साहू को जिला उपाध्यक्ष बनाया गया था, विशाल कुशवाहा व मो. तौहीद खान को जिला महासचिव, विकास साहू को जिला महासचिव एवं सोशल मीडिया प्रभारी बनाया गया था, एक दिन बीता नहीं की जिलाध्यक्ष द्वारा नव मनोनित जिला उपाध्यक्ष किशन तिवारी को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया, जिसमें संगठन में अनुशासनहीनता की बात कही गई और कहा गया की संकल्प शिविर कार्यक्रम आयोजित था सभी पदाधिकारी को एक दिवस पूर्व ही सूचना दे दी गई थी, इसके बावजूद संगठनात्मक आदेश का पालन नहीं किया जाना और बार-बार जिलाध्यक्ष के फोन किए जाने पर भी उपस्थित न होना अनुशासनहीनता को दर्शाता है, जिसे लेकर 10 सितंबर 2023 को 12.00 बजे जिलाध्यक्ष के समक्ष जवाब प्रस्तुत करने की बात कही गई थी पर वहीं जिला उपाध्यक्ष किशन तिवारी ने कहा कि मैं कार्यक्रम में उपस्थित था इसके बावजूद मुझे कारण बताओं नोटिस जारी करना न्याय संगत नहीं है जिसे लेकर मैं अपने पद से ही इस्तीफा सौंप देता हूं।
किशन तिवारी ने अपना त्यागपत्र या पद त्याग की घोषणा सोशल मिडिया पर भी जारी की और उन्होंने लिखा की वह कांग्रेसी हैं और रहेंगे साथ ही वह कांग्रेस पार्टी की विचारधारा जन जन तक पहुंचाएंगे भी लेकिन वह किसी के बंधुआ मजदूर नहीं हैं यह उनका बयान है। अब मामले में यह सवाल उठता है की एक दिन पूर्व ही यदि किसी को किसी संगठन में जिम्मेदारी दी गई है, अभी उसका संघीय शपथ ग्रहण भी नहीं हुआ है और उसे संकल्पित भी नहीं कराया गया है तो फिर मात्र एक दिन के अंतराल में उसके किसी फोन कॉल में बात होने उपरांत कहीं नहीं पहुंचने जबकि किशन तिवारी सोशल मिडिया में लाइव भी थे जो सार्वजनिक है को कारण बताकर कारण बताओ जारी करना अनुशासनहीनता बताना क्या जायज है। वैसे बताया जा रहा है की किशन तिवारी का मनोनयन ही गलती से जिलाध्यक्ष एनएसयूआई ने कर दी थी और जिसके बाद किशन तिवारी को पद से हटाने का जिलाध्यक्ष के ऊपर दबाव था और इसी वजह से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया जो करवाया गया जैसा बताया जा रहा है और उसके पहले ही किशन तिवारी को आभास हो गया उन्होंने पद त्याग करने की सार्वजनिक घोषणा कर दी।
मनोनयन पश्चात शपथ ग्रहण होना किसी संगठन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए,उसके बाद अनुशासन की बात मायने रखती है
कोई संघ संगठन हो यदि वह खुद को एक समूह मानता है नियमों कायदों की वह बात करता है तो उसे भी अपने नियम कायदों का पालन करना चाहिए,यदि संघ संगठन में नई नियुक्ति या मनोनयन किया जाता है तो यह भी नियम है की बकायदा पहले पद एवम संघीय जिम्मेदारी निभाने की नव मनोनित सदस्य को शपथ दिलाई जाए,शपथ में उसे उसकी जिम्मेदारी बताई जाए,इसके बाद कोई नियम कायदा तोड़ता है तब कार्यवाही या कारण बताओ जारी करना उचित माना जायेगा एक दिन भी मनोनयन को नहीं हुआ शपथ नहीं हुआ और कारण बताओ जारी करना तानाशाही ही कहा जा सकता है किसी संघ संगठन का।
संकल्प शिविर में मौजूद थे किशन तिवारी फिर भी अनुपस्थित बताकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया
किशन तिवारी कांग्रेस पार्टी के जिला स्तरीय संकल्प शिविर में मौजूद थे,उनका सोशल मीडिया पोस्ट जो लाइव पोस्ट है वह बताता है की किशन कार्यक्रम में मौजूद थे,अब उसके बाद कार्यक्रम में अनुपस्थित बताकर अनुशासनहीनता साबित कर कारण बताओ नोटिस जारी करना कहां तक उचित यह भी एन एस यू आई जिलाध्यक्ष पर सवाल खड़ा होता है। संघ लोगों को जोड़ने उन्हे विचारधारा से प्रेरित करने बनाए जाते हैं,कुछ थोपने और अपनी जिद पूरी करवाने संघ संगठन काम नहीं करते
संघ सगठन का काम है की वह एक विचारधारा को लोगों के बीच पहुंचाने का काम करे साथ ही वह अपने आप में लोगों को जोड़कर विस्तार करे ऐसे विचारधारा से प्रभावित लोगों के साथ जिन्हे उसने जोड़ा और आगे और लोग जुड़े यह सभी मिलकर प्रयास करें। संघ संगठन में यह नहीं होना चाहिए की कोई बात जबरन मनवाई जाए और उसे न मानने पर जबकि न मानने वाले को समय भी न दिया गया हो कोई कार्यवाही करे।



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