एक देश,एक चुनाव,पार लगेगी भाजपा की नाव?
रायपुर,03 सितम्बर 2023 (ए)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने वह ब्रम्हास्त्र निकाल लिया है और उसे चलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसका संकेत हम तीन माह पहले 28 मई को दे चुके हैं। हाल के दिनों में दो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने समय पूर्व लोकसभा चुनाव की आशंका जताई तो देश भर में इस पर चर्चा चल पड़ी। अब एक देश एक चुनाव के लिए एक कमेटी गठित कर दी गई है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इसके मुखिया होंगे। कमेटी में लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीररंजन चौधरी को भी स्थान दिया गया है। कमेटी गठन पर कांग्रेस पूछ रही है कि इसकी अचानक क्यों जरूरत पड़ गई? दरअसल, यह अचानक नहीं है। भाजपा में यह खिचड़ी पहले से ही पक रही थी। इसीलिए वह विधानसभा चुनाव के साथ साथ लोकसभा चुनाव की तैयारी कर रही है। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व विधानसभा चुनाव से ज्यादा फोकस 2024 के चुनाव पर क्यों कर रहा है, यह अब खुलकर सामने आ गया है। पहले से ही सम्भावना बनी हुई है कि हिमाचल और कर्नाटक की हार के बाद छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में दुर्दशा से बचने भाजपा कोई ऐसा ब्रम्हास्त्र चला सकती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आभामंडल का सीधा असर राज्यों के चुनाव पर पड़े। पहले देखा जा चुका है कि आम चुनाव में देश की जनता ने मोदी की खातिर भाजपा को समर्थन दिया लेकिन राज्यों के चुनावों में स्थानीय मुद्दे प्रभावी रहे। वहां मोदी का जादू नहीं चल पाया। मोदी मैजिक राज्यों में भी चले, इसका एक उपाय है कि देश में एक साथ चुनाव की वह व्यवस्था बहाल हो जाये, जो 60 के दशक में बंद हो गई। ऐसा हुआ तो देश में एक साथ चुनाव हो सकते हैं, इसके लिए आम सहमति की जरूरत है। इस बाबत प्रधानमंत्री मोदी वर्ष 2019 में ही पहल कर चुके हैं। अब इसके लिए कमेटी भी बन गई है। इस दिशा में तेजी से कदम उठाने का समय आ गया है। भारत निर्वाचन आयोग इस विषय पर सकारात्मक रुख अपना सकता है। मोदी के अचानक फैसलों को देखते हुए चर्चा जोर पकड़ रही है कि मोदी हैं तो कुछ भी मुमकिन है। पर, क्या वह विपक्ष इस पर सहमत हो सकता है, जो मोदी के हर फैसले का घनघोर विरोध करता है। वैसे केंद्र सरकार के सिटीजन एंगेजमेंट प्लेटफॉर्म रू4त्रश1 ने लोकसभा और राज्य विधानसभा दोनों के लिए एक साथ चुनाव कराने पर चर्चा पहले से ही शुरू की है। यह राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री दोनों द्वारा एक साथ चुनाव कराने के पक्ष में बोलने के बाद सामने आया है। कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय पर संसदीय स्थायी समिति की 79वीं रिपोर्ट पिछले साल संसद के दोनों सदनों में पेश की गई थी । यह रिपोर्ट ‘लोक सभा और राज्य विधान सभाओं के एक साथ चुनाव कराने की व्यवहार्यता’ के मुद्दे पर है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में अनुभव किया कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर बहस शुरू की जानी चाहिए और बार-बार चुनाव से बचने के लिए राष्ट्रीय आम सहमति बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
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