- क्याप्रशासनिक अधिकारियों की पैरवी में सत्ता पक्ष के लोग इस कदर मशगुल हो गएहैं कि उन्हें अपने ही क्षेत्र की जनता की चिंता नहीं?
- भाजपा ने प्रशासनिक अधिकारियों पर उतारा गुस्सा,गुस्से में कुछ अमर्यादित शब्द भी आए बाहर
- अविभाजित कोरिया में प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली से रोश की स्थिति तो निर्मित नहीं
- भाजपा शासन काल में भी प्रशासन निरंकुश हुआ था तो कांग्रेसी भी मंच से प्रशासनिक अधिकारियों का घमंड चूर किया करते थे
–रवि सिंह-
कोरिया एमसीबी ,14 जून 2023 (घटती-घटना)। अविभाजित कोरिया जिले में लगातार देखा जा रहा है प्रशासन निरंकुश होकर काम कर रहा है और आए दिन जिसके कारण अजीब सी स्थित निर्मित हो रही है, जिसमे विपक्ष प्रशासनिक अधिकारियों के लिए अमर्यादित शब्दों का भी प्रयोग कर रहा है और उन्हे चेता रहा है की आने वाले समय में हो सकता है सत्ता परिवर्तन हो और ऐसे में उन्हें फिर उन्ही से मुखातिब होना होगा और उन्ही से उनका आमना सामना होगा तब उनके लिए दिक्कत होगी।
अविभाजित कोरिया जिले में विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता चला आ रहा है की अधिकारी कर्मचारी अपनी सीमाएं लांघ चुके हैं और वह बेलगाम हो चुके हैं,विपक्ष का आरोप कितना सही और किन विषयों को लेकर है यह तो वही स्पष्ट रूप से बता सकेंगे लेकिन जो कुछ विपक्ष के मंचों से सामने आ रहा है उसको देखकर सुनकर यही लग रहा है की विपक्ष भी मजबूर होकर अब शब्द सीमाएं लांघ रहा है और वह अमर्यादित शब्दों का भी प्रयोग मंच से कर रहा है। भाजपा शासनकाल में भी जब ऐसी स्थिति निर्मित हुई थी तब उस समय विपक्ष में बैठी पार्टी और उनके नेता भी निरंकुश प्रशासन के विरोध में नजर आते थे और उन्हे भी मंचो से आक्रोश जाहिर करते सुना जाता था। अब जब सत्ता परिवर्तन हो चुका है वैसी ही स्थितियां फिर सामने हैं और विपक्ष प्रशासन के खिलाफ मुखर नजर आ रहा है। ऐसी घटनाओं के बीच यह भी सवाल उठता है की क्या सत्ता में बैठे लोग और जनता द्वारा निर्वाचित किए गए लोग अपनी जिम्मेदारी भूल बैठे हैं? और वह भी प्रशासनिक अधिकारियों के सामने नतमस्तक हैं, यदि ऐसा नहीं है तो ऐसी स्थिति निर्मित ही क्यों हो रही है? जबकि सत्ता के अधीन प्रशासन का होना अनिवार्य होता है जिससे अराजक स्थितियां निर्मित न हों। जिस तरह किसी देश या प्रदेश के लिए चुनी हुई सरकार आवश्यक है उसी तरह विपक्ष का भी होना उतना ही आवश्यक है सरकार को सचेत करने का काम विपक्ष का ही है और यदि विपक्ष का ही सम्मान नहीं होगा और वह प्रशासन से उपेक्षित होगा ऐसी स्थितियां समाने आयेंगी ही। हाल की ही कुछ घटनाओं का जिक्र यदि करें तो यह देखने को मिल की सत्ता में बैठे लोग प्रशासन के गिरफ्त में नजर आए और प्रशासनिक अधिकारियों की वह पैरवी करते देखे गए जबकि जनता ने उन्हें खुद के लिए चुना है न की प्रशासनिक अधिकारियों की चापलूसी के लिए।
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