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कोरबा,@राहाडीह तौल नाका में बेखौफ चल रहा वसूली का खेल

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  • राजा मुखर्जी –
    कोरबा, 16 फरवरी 2023 (घटती-घटना)। कोल स्कैम की चल रही जांच में ईडी की टीम जहा एक बार फिर कोरबा रिटर्न हुई है वहीँ माइनिंग से जुड़े राहाडीह तौल नाका में खनिज लदे वाहन चालकों से बेखौफ वसूली का खेल महीनों से चल रहा है ढ्ढ बता दें कि जिले में संचालित विभिन्न खदानों से कोयला लेकर बिलासपुर की ओर जाने वाले भारी वाहनों का वजन तौल के लिए पाली के समीप राहाडीह में खनिज विभाग द्वारा तौल नाका स्थापित किया गया है, किंतु तौल कांटा खराब रहने की वजह से बैरियर पर तैनात कर्मचारियों द्वारा परमिट की जांच के नाम पर खनिज परिवहन करने वाले प्रति वाहन चालकों से 50- 50 रुपए की वसूली की जा रही है। इसके अलावा दूसरी वाहनों में लोड रेत, मिट्टी- मुरुम सहित अन्य खनिज का अलग से रकम उगाही किया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि इस बात की भनक विभागीय अधिकारियों को नहीं है, लेकिन उनकी चुप्पी बहुत से सवाल खड़ा करने के लिए काफी है। ऐसा भी नहीं है कि सभी वाहन चालक आसानी से पैसा देते हैं, लेकिन वहां पर तैनात कर्मचारियों द्वारा चालकों का उत्पीड़न करके जबरन पैसा लिया जा रहा है। आलम यह है कि जिन चालकों द्वारा पैसा देने में हीला- हवाला किया जाता है। उनके साथ तमाम तकनीकी बात करके परेशान किया जाने के अलावा उनकी गाड़ी तक खड़ा करा लिया जाता है। एक तरह से देखा जाए तो ईडी के दबिश के बाद भी जिले के खनिज विभाग में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और इनके अधीन बैरियर पर वसूली का आलम यह है कि वहां पर तैनात कर्मचारी परमिट को देखकर उसका रेट तय करते हैं। सूत्रों ने बताया कि बिलासपुर से लेकर राजधानी तक की परमिट पर 50 रुपए तथा बाहरी के लिए कीमत दुगुनी हो जाती है। गौरतलब है कि जिले की खदानों से प्रतिदिन करीब 1 हजार ट्रेलर कोयला लेकर गंतव्य की ओर निकलती है, उनमे से लगभग 6 सौ वाहन राहाडी बैरियर से होकर गुजरती हैं, इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पर प्रतिदिन की वसूली कितनी होती होगी। शायद यही वजह होगी कि जिले के संबंधित जिम्मेदार अधिकारी सब जानते- समझते हुए भी चुप्पी साधे बैठे है, और यदि वसूली का मामला उनकी संज्ञान में आ भी जाए तो उनका रटा- रटाया जवाब रहता है कि इसकी जांच कराई जाएगी।

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