जिन्हें अधिकारी से व्यथित कहकर? प्रसारित किया गया, वही नहीं दिखे तालाबंदी आंदोलन में।
-रवि सिंह –
बैकुण्ठपुर 11 जनवरी 2023 (घटती-घटना)। वर्तमान में ईमानदार होना ही सबसे बड़ा गुनाह है? यदि कोई जिम्मेदार व्यक्ति कार्यों का निर्वहन नियमानुसार और ईमानदारीपूर्वक करने की ठान ले तो जाने वह कितने ही आंखों में खटकने लगता है। जिसका ताजा उदाहरण बैकुंठपुर जनपद पंचायत में देखने को मिल रहा है।
सूत्रों के अनुसार और जिले में बैकुंठपुर जनपद पंचायत अंतर्गत कार्यरत कुछ पंचायत सचिवों ने नाम न लेने की शर्त पर बताया कि वर्तमान मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जबसे पदभार संभाला है, पूरे कार्यालय में और विभिन्न पंचायतों के निर्माण कार्यों में कमीशन खोरी बंद हो गई है। दलालों और ठेकेदारों की दाल नहीं कर रही है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा निर्माण कार्यों के वित्त की स्वीकृति स्वयं के गुणवत्ता अवलोकन के बाद की जा रही है। यदि निर्माण कार्य घटिया और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है, तो उस कार्य की वित्तीय स्वीकृति अधिकारी द्वारा रोक दी जा रही है। यही कारण है कि वर्तमान मुख्य कार्यपालन अधिकारी का पंचायत के ठेकेदार और दलालों द्वारा पुरजोर विरोध किया जा रहा है और सुनियोजित तरीके से यह धरना प्रदर्शन और तालाबंदी आयोजित की गई। आंदोलन की अगुवाई करने वाले लोगों के अनुसार जनपद पंचायत बैकुंठपुर अंतर्गत आने वाले समस्त ग्राम के सरपंच सचिव एवं निर्वाचित जनप्रतिनिधि मुख्य कार्यपालन अधिकारी के कार्य व्यवहार से दुखी हैं, परंतु आंदोलन में ऐसा कुछ नहीं दिखाई दिया। क्योंकि अगर यह जनप्रतिनिधि वास्तव में व्यथित होते तो उनकी उपस्थिति अवश्य ही आंदोलन में नजर आती। परंतु जनपद के अंतर्गत 25 बीडीसी और लगभग 90 सरपंचों में से चंद बीडीसी और कुछ सरपंच ही आंदोलन में दिखाई दिए, बाकी भीड़ सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं द्वारा गाड़ियां भेज भेज कर एकत्रित की गई थी। सवाल यह भी खड़ा होता है कि जिन लोगों को अधिकारी के व्यवहार से और कार्य विधि से व्यथित और ग्रसित बताया गया, उनकी तो उपस्थिति आंदोलन में नगण्य रहि, परंतु वे लोग बहुतेरे दिखाई दिए जो पंचायतों में निर्माण सामग्री सप्लाई का कार्य एवं ठेकेदारी करते हैं। यदि मामला निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से दुर्व्यवहार एवं अपमान से जुड़ा था तो आंदोलन की अगुवाई करने वालों के अनुसार जिनके साथ ऐसा व्यवहार हुआ उन्होंने आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा क्यों नहीं लिया?
यदि आंदोलन के दबाव में होती है कार्यवाही,तो गलत परंपरा की होगी शुरुआत
जनपद पंचायत बैकुंठपुर का प्रतिनिधित्व करने वाले ऐसे निर्वाचित जनप्रतिनिधि जिन्होंने कई कार्यकाल में अनेक अधिकारियों के साथ कार्य किया है, उनका कहना है कि वर्तमान में पदस्थ मुख्य कार्यपालन अधिकारी बेहद ईमानदारी पूर्वक अपने कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं। जिससे जनता की गाढ़ी कमाई जो विकास कार्यों के सौगात के रूप में उन्हें पंचायतों के माध्यम से वापस मिलती है, उनमें भ्रष्टाचार, लूट खसोट और कमीशन खोरी बिल्कुल बंद हो गया है। यदि स्वीकृत निर्माण कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है तो ऐसे कार्यों का मूल्यांकन स्वयं मुख्य कार्यपालन अधिकारी अपने समक्ष कर रहे हैं। जिससे भ्रष्टाचारियों और कमीशनखोरों की दुकानें बंद हो गई हैं। और यही कारण है कि मूल मुद्दे को व्यपवर्तित कर इसे जनप्रतिनिधियों का अपमान बताकर आंदोलन किया जा रहा है एवं लोगों को बरगलाया जा रहा है। यदि ऐसे आंदोलनों के पीछे की सत्यता और उसमें निहित स्वार्थ को जाने बगैर ईमानदारी पूर्वक कार्य निर्वहन करने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही होती है तो अधिकारियों का तो मनोबल टूटेगा ही, साथ ही जनता को भी भारी नुकसान होगा। क्योंकि ऐसे अधिकारियों के कारण निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से समझौता नहीं हो पा रहा। यदि अधिकारी भ्रष्ट हो जाए तो सीधा नुकसान जनता को होगा। साथ ही आंदोलन की परिणीति यदि स्थानांतरण होती है, तो एक गलत परंपरा की शुरुआत होगी और मनमाना कार्य ना होने पर कोई भी कभी भी फाइनेंस के माध्यम से आंदोलन प्रायोजित कर सकता है।
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