- भाजपा के अंदर खाने की चर्चा,भाजपा जिलाध्यक्ष के सामने तो नहीं पर पीठ पीछे दुकान के कजे पर जता रहे एतराज
- अन्य दुकानदारों ने जमा की लाखो की राशि, जिलाध्यक्ष के लिए नियम दरकिनार
- भाजपाइयों को रास नहीं आ रहा के जिलाध्यक्ष के पुत्र का भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में चाय दुकान खोलना।

–रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 28 दिसम्बर 2022 (घटती-घटना)। कोरिया जिले में भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष को लेकर भाजपा के अंदर खाने में कुछ ठीक नहीं चल रहा जिलाध्यक्ष के सामने तो कुछ नहीं बोल पा रहा है पर पीठ के पीछे आपçा जरूर दर्ज कर रहे हैं इस बार जो जिलाध्यक्ष को लेकर भाजपाइयों में रोष है वह है भारतीय जनता पार्टी कार्यालय के सामने जिलाध्यक्ष के पुत्र का चाय दुकान खोलना, सामने तो भारतीय जनता पार्टी के लोग अच्छे बन जाते हैं और पीठ के पीछे उसकी बुराई करते नजर आते हैं यह हम नहीं कह रहे हैं यह शहर में चर्चा का विषय है चर्चाओं पर गौर करें तो कोरिया जिला भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष पार्टी का बेड़ागर्क करने में कोई कमी नही कर रहे हैं, पदाधिकारी कार्यकर्ताओ को अपशब्द, उटपटांग बोलना हो उन पर धौंस दिखाना हो या खुद को सबसे पावरफुल बताना हो इसमें वे हमेशा आगे दिखलाई देते हैं, जिलाध्यक्ष की करतूत के कारण पार्टी में जबरजस्त आक्रोश भी व्याप्त है, लेकिन संगठन से बंधे होने के कारण कोई भी कुछ बोलना नही चाहता। कोरिया जिला विभाजन के बाद वैसे भी अब यहां बड़े भाजपा के नेताओं की कमी हो गई है जो हैं वे कुछ बोलना भी नही चाहते यही वजह है कि भाजपा जिलाध्यक्ष अपने मनमुताबिक जो मन मे आ रहा है वह कर रहे हैं।
एक ताजा मामले पर यदि गौर किया जाए तो समझा जा सकता है कि जिलाध्यक्ष किस प्रकार अपने पद का दुरूपयोग कर रह हैं। जानकारी के तहत पूर्व में भाजपा कार्यालय के निर्माण के दौरान कुल 5 दुकानों का निर्माण कराया जा रहा था उस दौरान सभी खरीददारो से 5-7 लाख रूपये लेकर दुकानो को विक्रय किया गया था। इसके बाद वर्तमान जिलाध्यक्ष कृष्णबिहारी जायसवाल ने कार्यालय में अपनी मनमर्जी शुरू कर दी, बतलाया जाता है कि जिलाध्यक्ष ने कार्यालय में गैलरी के रूप में उपयोग हो रहे स्थल को दुकान का रूप दिया, और इसके लिए पार्टी फंड में कोई राशि जमा किये बगैर ही मनमर्जी करते हुए उस पर खुद कजा कर लिया। जिलाध्यक्ष द्वारा उक्त दुकान में अपने पुत्र को चाय की दुकान खुलवाई गई है जिसका शुभारंभ बीते दिनों भाजपा के वरिष्ठ नेताओ के द्वारा कराया गया है।
दुकान निर्माण के पूर्व व बनने के बाद आबंटित होने की जानकारी क्या जिलाध्यक्ष ने स्थानीय से लेकर प्रदेश स्तर के नेताओं को दी?
सूत्रो ने बतलाया कि दुकान निर्माण के पूर्व व बनने के बाद भी किसे आबंटित किया जाएगा इस बारे में जिलाध्यक्ष ने स्थानीय से लेकर प्रदेश स्तर के नेताओं को भी जानकारी देना उचित नही समझा, पार्टी की समन्वय समिति के सदस्यो से भी जानबूझकर कोई चर्चा नही की गई, इतना जरूर बतलाया जा रहा है कि जिलाध्यक्ष के द्वारा किए जा रहे उक्त कृत्य की जानकारी जब प्रदेष नेतृत्व तक शिकायत के रूप में पहुंची तब जिलाध्यक्ष ने संगठन महामंत्री पवन साय को भी बरगला दिया और निःशुल्क दुकान पर कजा कर ही लिया। सूत्रों का कहना है कि अन्य दुकानदारों ने लाखो रूपये जमा भी किया है और महीने का किराया भी दिया जा रहा है लेकिन जिलाध्यक्ष ने कब्जा किये हुए दुकान के लिए न तो कोई राशि जमा की है और न ही किराया जमा किया जाएगा। जाहिर सी बात है जिलाध्यक्ष खुद को सर्वेसर्वा साबित करने में लगे है, उनका नियम पार्टी के लिए नियम है।
क्या जिलाध्यक्ष दुबार जिम्मेदारी के बाद बेलगाम हो गए हैं?
किसी पदाधिकारी व कार्यकर्ता में इतनी हिम्मत नही कि वह जिलाध्यक्ष के द्वारा किये जा रहे गलत कार्य को गलत बता सके इसलिए जिलाध्यक्ष हैं कि वह अपनी मनमर्जी पर ऊतारू हैं और अपने मन से संगठन चला रहे हैं। पार्टी के रूष्ट नेताओ का दबी जुबान से कहना भी है कि जब से दुबारा उन्हे जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी दे दी गई तबसे वे और बेलगाम हो गए हैं किसी भी कार्यकर्ता को उटपटांग बोलना अब उनके आदत में शुमार है। आगामी वर्ष चुनावी वर्ष है, चुनाव में प्रत्येक कार्यकर्ता की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी लेकिन यह समझ से परे है कि वर्तमान जिलाध्यक्ष अपनी कार्यषैली से आखिर किस प्रकार पार्टी को जीत दिला पाएंगे। पार्टी नेतृत्व को इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
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