पहली बार भारतीय रिसर्च को मिली एसीसी की अनुमति,
टीम में शहर के डॉ. स्मित श्रीवास्तव भी हैं शामिल
रायपुर,24 दिसम्बर 2022 (ए)। सबकुछ ठीक रहा तो एक रिस्ट बैंड के जरिए हार्ट अटैक से करीब 4 घंटे पहले हार्ट अटैक के खतरे के संबंध में जानकारी मिल सकेगी। जिससे मरीज की जिंदगी सहीं समय पर बचाई जा सकती है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी ने देश के चार प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञों द्वारा किए गए इस रिसर्च को स्वीकार कर लिया है।
बता दें कि रिसर्च करने वाली टीम में शहर के प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. स्मिथ श्रीवास्तव भी शामिल है। सभी डॉक्टर अब मार्च 2023 में न्यू ऑरलियन्स, यूएसए में एसीसी वैज्ञानिक सत्र में ‘लेट-ब्रेकिंग ट्रायल’ के रूप में अपना पेपर पेश करेंगे। यह काम यूएसए के डॉ. पार्थो सेनगुप्ता के सहयोग से किया गया है।
कैसे काम करेगी ये घड़ी
यह घड़ी सेंसर्स के जरिए ट्रोपोनिन स्तर का विश्लेषण करेगी। ट्रोपोनçन असल में हार्ट मसल्स में मौजूद एक तरह का प्रोटीन है। अगर आपके रक्त में इसकी बहुत अधिक मात्रा है तो यह इस बात का संकेत है कि आपको दिल का दौरा पड़ने वाला है। बता दें कि वर्तमान में ट्रोपोनिन की मात्रा का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है।
रिसर्च टीम में शामिल हैं ये डॉक्टर्स
छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. स्मित श्रीवास्तव, डॉ. शांतनु सेनगुप्ता स््र, डॉ. महेश फुलवानी, डॉ. अज़ीज़ खान और नागपुर के डॉ. हर्षवर्धन मर्डीकर रिसर्च करने वाली टीम में शामिल हैं। बता दें कि इस रिसर्च के दौरान डॉ. स्मित श्रीवास्तव द्वारा सैकड़ों रोगियों पर इसका परीक्षण किया जा चुका है। हालांकि डॉक्टरों को मार्च 2023 से पहले अपने निष्कर्ष साझा करने की अनुमति नहीं है।
इस शोध के प्रमुख लेखक डॉ. शांतनु सेनगुप्ता ने कहा आज तकनीकी के युग में पहले से ही हमारी स्मार्ट वॉच के जरिए ब्लड प्रेशर, एसपीओ2 और बीपीएम प्राप्त कर रहे हैं। आजकल, कलाई में पहने जाने वाले उपकरण से भी ईसीजी प्राप्त करना बहुत सामान्य बात है। मगर सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही, ऐसी रिस्ट वॉच उपलब्ध होगी जो आपके जीवन की रक्षा कर सकेगी। मगर इस डिवाइस के जरिए बगैर ब्लड टेस्ट के ही ट्रोपोनिन- के स्तर को माप सकेगी।
डॉक्टरों का दावा पहली किसी भारतीय रिसर्च को एसीसी ने किया स्वीकार
साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया है कि ऐसा पहली बार है जब एसीसी ने किसी भारतीय रिसर्च को स्वीकार किया है। दुनिया भर से प्राप्त 15,000 रिसर्च पत्रों में से चुनी गई 6 प्रविष्टियों में यह रिसर्च शामिल हुआ है। मध्य भारत के लिए यह बेहद ही गर्व और सम्मान की बात है और कार्डियोलॉजी में नोबेल पुरस्कार जीतने जैसा है।
सही समय पर मिल सकेगा मरीजों को उपचार
अपने रिसर्च वर्क के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने कहा कि कलाई में पहने जाने वाले उपकरण से ट्रोपोनिन स्तर का विश्लेषण किया जा सकेगा। इससे रक्त परीक्षण के लिए लगने वाले समय बचेगा बल्कि इससे मरीज के जीवन को भी बचाया जा सकेगा। उन्होंने आगे कहा कि कई लोग हार्ट बर्न और सीने में दर्द को एसिडिटी या गैस मानकर चलते हैं। प्रारंभिक अवस्था में हृदय रोग विशेषज्ञ के पास जाने से हिचकिचाते हैं। कलाई पर पहने जाने वाले इस बैंड से ट्रोपोनिन की सही रिडिंग मिलने लगेगी तो तो डॉक्टर भी जल्दी से पता लगा सकते हैं कि यह दिल का दौरा पड़ने का मामला है या सिर्फ एसिडिटी का।
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